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Editor: Naresh Prasad Soni
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हजारीबाग को नशामुक्त बनाने के लिए सड़कों पर उतरे जज और वकील, 'जीवन को हां और नशे को ना' के उद्घोष से गूंजा शहर

हजारीबाग को नशामुक्त बनाने के लिए सड़कों पर उतरे जज और वकील, 'जीवन को हां और नशे को ना' के उद्घोष से गूंजा शहर

हजारीबाग। नशा एक सामाजिक अभिशाप है और इसे जड़ से मिटाने के लिए अब कानून के रखवालों ने ही मोर्चा संभाल लिया है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकारण के निर्देश पर पूरे देश में चल रहे नशामुक्ति अभियान की गूंज सोमवार को हजारीबाग की सड़कों पर भी सुनाई दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के बैनर तले सोमवार की सुबह एक भव्य प्रभातफेरी निकाली गई, जिसमें न्यायिक पदाधिकारियों, वकीलों और कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर शहरवासियों को नशे के खिलाफ जागरूक किया।

​सुबह सात बजे सिविल कोर्ट परिसर से निकली यह प्रभातफेरी झील रोड होते हुए वापस न्याय सदन भवन पहुंचकर संपन्न हुई। इस जागरूकता यात्रा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना, सिविल कोर्ट निबंधक दिव्यम चौधरी, विक्रांत रंजन और सुमंत दीक्षित समेत कई न्यायिक पदाधिकारी सड़क पर पैदल चलते नजर आए। उनके साथ पैनल अधिवक्ता, एलएडीसी के सदस्य, पारा लीगल वालेंटियर और कोर्ट कर्मचारी भी कदमताल करते हुए चल रहे थे। सभी के हाथों में नशामुक्ति के स्लोगन वाले बैनर थे, जो समाज को यह संदेश दे रहे थे कि नशा विनाश का कारण है और इससे दूर रहने में ही भलाई है।

​इस अभियान को और गति देने के लिए सोमवार को ही प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष रंजीत कुमार ने अपने कार्यालय में पत्रकार सम्मेलन कर आगामी रूपरेखा साझा की। उन्होंने घोषणा की कि यह विशेष जागरूकता अभियान 5 जनवरी से 12 जनवरी तक पूरे जिले में युद्धस्तर पर चलाया जाएगा। शहर की सीमाओं से निकलकर यह मुहीम अब जिले के सभी प्रखंडों और सुदूर पंचायतों तक पहुंचेगी। अभियान के तहत स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों, बैनरों और जनसंपर्क के माध्यम से युवाओं को नशे के जाल से बचाने का प्रयास किया जाएगा।

​प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जिले को नशामुक्त क्षेत्र बनाना ही विधिक सेवा प्राधिकार का मुख्य लक्ष्य है। इस कार्य में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नशा रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं और पुलिस व न्यायालय के समन्वय से आरोपियों को दंडित भी किया जा रहा है, लेकिन सिर्फ कानून काफी नहीं है। समाज को खुद आगे आकर 'जीवन को समझना और नशे को ना कहना' होगा। डालसा सचिव गौरव खुराना की मौजूदगी में उन्होंने बताया कि आने वाली युवा पीढ़ी को बचाने के लिए न्यायिक पदाधिकारी, मिडिएटर और पारा वालंटियर पूरी निष्ठा के साथ इस अभियान में अपना योगदान दे रहे हैं।

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