गिरिडीह में स्वास्थ्य कर्मियों की ढाल बने टाइगर जयराम महतो
अधिकारियों को दो टूक कहा- नौकरी से निकालने की धमकी बर्दाश्त नहीं, लिखित समझौते के साथ जल्द करें समाधान
गिरिडीह: जिले में अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों के आंदोलन ने उस वक्त उग्र रूप ले लिया जब डुमरी विधायक और जेएलकेएम सुप्रीमो जयराम महतो ने खुद मोर्चा संभाल लिया। कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठीं सैकड़ों एएनएम और जीएनएम बहनों के बीच जमीन पर बैठकर जयराम महतो ने सीधे जिले के आला अधिकारियों को फोन मिलाया और प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने एसडीएम और सिविल सर्जन से स्पष्ट शब्दों में कहा कि हक की आवाज उठाने वाले गरीब कर्मियों को काम से हटाने की धमकी देना लोकतांत्रिक व्यवस्था में कतई स्वीकार्य नहीं है और अधिकारी लकीर का फकीर बनने के बजाय संवेदनशीलता दिखाएं। वार्ता के दौरान विधायक ने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि शिवा और बालाजी जैसी आउटसोर्सिंग कंपनियां कर्मियों का शोषण कर रही हैं और विभाग केवल मूकदर्शक बना हुआ है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
जयराम महतो ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि वे एयर कंडीशन कमरों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखें क्योंकि बिना वेतन के इन कर्मियों के घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा ईपीएफ और ईएसआई की राशि में की जा रही गड़बड़ी की तत्काल जांच हो और कर्मियों के बकाये वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। विधायक ने दो टूक कहा कि मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा बल्कि दो से चार दिनों के भीतर एक लिखित 'मिनट्स' तैयार कर हड़ताल को सम्मानजनक तरीके से समाप्त कराया जाए अन्यथा वे स्वयं इस आंदोलन को बड़ा रूप देने के लिए बाध्य होंगे। जयराम महतो के इस आक्रामक रुख और सीधे हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है और कर्मियों को जल्द न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।