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Editor: Naresh Prasad Soni
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बालू तस्करों पर पुलिस का बड़ा प्रहार, कटकमसांडी के जंगल से 7 ट्रैक्टर जब्त, तीन तस्कर गिरफ्तार

 

बालू तस्करों पर पुलिस का बड़ा प्रहार, कटकमसांडी के जंगल से 7 ट्रैक्टर जब्त, तीन तस्कर गिरफ्तार


हजारीबाग/कटकमसांडी। अवैध बालू खनन और परिवहन के खिलाफ हजारीबाग जिला प्रशासन और पुलिस ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। चतरा-कटकमसांडी मुख्य मार्ग पर पुलिस ने छापेमारी अभियान चलाते हुए बालू से लदे सात ट्रैक्टरों को एक साथ जब्त किया है, जिससे बालू माफियाओं में हड़कंप मच गया है। घटनाक्रम के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि चतरा रोड के रास्ते अवैध रूप से बालू की बड़ी खेप ले जाई जा रही है। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कटकमसांडी अंचलाधिकारी अनिल कुमार गुप्ता और थाना प्रभारी शिवम गुप्ता के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने हट कौना जंगल के पास घेराबंदी कर वाहनों की जांच शुरू की।

​जांच के दौरान कतारबद्ध तरीके से आ रहे सात ट्रैक्टरों को रोका गया, जिनकी तलाशी लेने पर सभी में अवैध रूप से बालू लदा पाया गया। प्रत्येक ट्रैक्टर पर करीब 100 सीएफटी बालू लोड था। मौके से पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया है, जिनकी पहचान चतरा जिले के गिद्धौर थाना क्षेत्र निवासी संतोष कुमार, करण भुइयां और मो. साफिक के रूप में हुई है। प्रशासन की इस सख्ती से अवैध कारोबारियों के मंसूबों पर पानी फिर गया है। छापेमारी दल में अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी के साथ एसआई मनोज कुजूर और सशस्त्र बल के जवान शामिल थे। पुलिस ने सभी जब्त वाहनों और गिरफ्तार व्यक्तियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर उपायुक्त ने जिला स्तरीय बैठक आयोजित की

हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर उपायुक्त ने जिला स्तरीय बैठक आयोजित की

हजारीबाग: उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिले में हाथियों की आवाजाही से उत्पन्न समस्याओं एवं उससे होने वाली घटनाओं की समीक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य हाथी प्रभावित क्षेत्रों में आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा जान-माल की क्षति को न्यूनतम करना था।

बैठक में पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी  मौन प्रकाश ने बताया कि हाथियों से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए आम लोगों में जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जानकारी दी कि हाथियों से हुई मृत्यु, फसलों की क्षति, अनाज भंडारण एवं मकानों के नुकसान की स्थिति में सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा का भुगतान किया जाता है।

उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों से मुआवजा भुगतान से संबंधित अंचल स्तर पर लंबित आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने पर बल दिया। साथ ही, मृत्यु के मामलों में संबंधित थाना प्रभारी द्वारा एफआईआर की प्रति शीघ्र वन विभाग को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया, ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर मुआवजा मिल सके।

स्थानीय स्तर पर हाथियों की आवाजाही की सूचना आमजन तक शीघ्र पहुँचाने के लिए माइकिंग आदि माध्यमों के उपयोग पर जोर दिया गया। इस क्रम में डीएफओ द्वारा जानकारी दी गई कि सरकार द्वारा विकसित *“Hamar Haathi 2.0”* नामक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से हाथियों की लोकेशन की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों एवं विशेष रूप से हाथी प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों से इस एप्लिकेशन https://play.google.com/store/apps/details?id=com.kalpvaig.jktracker&pcampaignid=web_share को प्ले-स्टोर से डाउनलोड कर उपयोग करने की अपील की।

उपायुक्त  शशि प्रकाश सिंह ने बैठक में बताया कि हाथियों के प्रकोप से लोगों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रशिक्षु आईएफएस को जिला नियंत्रण कक्ष का नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला नियंत्रण कक्ष 24×7 संचालित रहेगी। हाथियों के आगमन से संबंधित सूचना सभी पदाधिकारी एवं प्रभावित क्षेत्र के लोग सीधे जिला नियंत्रण कक्ष को देंगे। नियंत्रण कक्ष से संबंधित क्षेत्र के मुखिया एवं ग्रामीणों को तत्काल सूचित किया जाएगा, जिससे समय रहते आवश्यक सावधानियाँ बरती जा सकें एवं प्रशासनिक कदम उठाए जा सकें।


उपायुक्त ने सभी संबंधित अंचलाधिकारियों को हाथी से संबंधित मामलों को गंभीरता से लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हाथियों द्वारा हुए नुकसान के लिए मुआवजा भुगतान जिम्मेदारी के साथ समय पर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया गया कि हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को सुरक्षित एवं निर्बाध रखा जाए। इसके अतिरिक्त हाथी कॉरिडोर क्षेत्रों को अतिक्रमण-मुक्त एवं साफ-सुथरा रखने का भी निर्देश दिया गया।

हाथियों से बचने के लिए क्या करें?

1. हाथी आने की सूचना तत्काल निकटवर्ती वन विभाग के कर्मचारियों को दें।

2. यदि हाथी से सामना हो जाए तो तुरंत उसके लिए रास्ता छोड़ें। पहाड़ी स्थानों में सामना होने पर ढलान की ओर दौड़ें, ऊपर की ओर नहीं। सीधे न दौड़कर आड़े-तिरछे दौड़ें, कुछ दूर दौड़ने पर गमछा, पगड़ी, टोपी अथवा कोई वस्त्र फेंक दें ताकि कुछ समय तक हाथी उसमें उलझा रहे और आपको सुरक्षित स्थान पर पहुँचने का मौका मिल जा

3. अगर हाथी गांव में आ ही जाता है तो मशाल के साथ कम से कम आठ-दस लोग मिलकर एक साथ ढोल या टीना पीटकर उसे भगाने का प्रयास करें। इस प्रक्रिया में भी हाथी के बहुत नजदीक न जाएं। हाथी प्रभावित क्षेत्रों के गांवों में रात्रि में दल बनाकर मशाल के साथ पहरा दें।

4. अगर मचान बनाकर खेत की रखवाली करनी हो, तो मचान ऊँचा बनाएं, विशेषकर उसे ऊँचे मजबूत पेड़ के ऊपर बनाएं और उसे नीचे जमीन पर लकड़ी से आग जलाये रखें।

5. हाथी जिस जंगल में दिखे उस क्षेत्र में चारा, जलावन एकत्र करने नहीं जाएं। हाथी जिन क्षेत्रों में हो उसके आस-पास के गांवों में संध्या से प्रातः काल तक आवागमन से बचें।

6. हाथी द्वारा कान खड़े कर, सुंढ़ ऊपर कर आवाज देना, इस बात का संकेत है कि वह आप पर हमला करने आ रहा है। अतः तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जाए।

7. हाथियों की सूंघने की शक्ति अत्यधिक प्रबल होती है। अतः हाथी को भगाने के क्रम में हवा की दिशा का ध्यान रखें।

8. वैज्ञानिक प्रयोग के आधार पर पाया गया है कि मधुमक्खियों के गुनगुनाने की आवाज हाथियों को भगाने में सहायक साबित होती है।

हाथियों से बचने के लिए क्या न करें?

1. हाथी के चारों ओर कौतुहलवश भीड़ न लगाएं। हाथियों के चलने दौड़ने की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। अतः हाथी से कम से कम 200 मीटर की दूरी बनाएं रखें। बच्चों, स्त्रियों एवं वृद्धों को कभी भी हाथी के समक्ष नहीं जाने दें।

2. हाथियों को छेड़े नहीं, विशेषकर उन पर पत्थर, तीर, जलता हुआ टायर या मशाल आदि फेंककर प्रहार न करें। पटाखें आदि का प्रयोग से हाथियों को गुस्सा आ सकता है एवं इससे क्षति की संभावना बढ़ सकती है, अतः इसके प्रयोग से बचें।

3. हाथियों को अनाज अथवा अन्य खाद्य सामग्री न दें, क्योंकि इससे उनकी खाद्य सामग्री के प्रति रूचि बढ़ेगी एवं इस कारण वे मकानों को तोड़कर खाद्य सामग्री प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं। हाथी प्रभावित क्षेत्र में जिस कमरे में अनाज का भंडारण हो उसमें न सोएं एवं कुछ दिनों के लिए किसी सुरक्षित जगह पर अनाज को रख दें।

4. क्षेत्र में जबतक हाथी रहे, तबतक हड़िया या देशी शराब (महुआ) नहीं बनाएं। इसका भंडारण भी न करें। हाथी शराब की ओर आकर्षित होते हैं और प्राप्त करने के उद्देश्य से ये घरों को क्षति पहुँचाते हैं।

5. गर्भवती हथिनी अथवा नवजात शिशु के साथ होने पर हथिनी या उसके झुण्ड को भगाने का प्रयास न करें, उसे थोड़ा समय दें।

6. हाथियों को भगाने के क्रम में श्वेत वस्त्र या लाल वस्त्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह रंग उन्हें चिड़चिड़ा बनाता है।

7. हाथी को देखकर पूजा या प्रणाम करने के उद्देश्य से उनके नजदीक न जाएं।

बैठक में पुलिस अधीक्षक 


अंजनी अंजन, उप विकास आयुक्त  रिया सिंह, नगर आयुक्त  ओमप्रकाश गुप्ता, अपर समाहर्ता  संतोष सिंह, प्रशिक्षु आईएएस  आनंद शर्मा, प्रशिक्षु आईएफएस, बरही एसडीओ  जोहन टुडू सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, थाना प्रभारी एवं अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित थे।

हाथी-मानव संघर्ष थामने को सड़क पर उतरा जागरूकता रथ, विधायक प्रदीप प्रसाद ने दिखाई हरी झंडी

हाथी-मानव संघर्ष थामने को सड़क पर उतरा जागरूकता रथ, विधायक प्रदीप प्रसाद ने दिखाई हरी झंडी


नरेश सोनी विशेष संवाददाता 

हजारीबाग। जिले में हाथी और इंसान के बीच बढ़ते संघर्ष पर विराम लगाने और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में शनिवार को एक ठोस पहल की गई। कार्मल चौक स्थित वन विभाग के प्रमंडल कार्यालय से सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने जन-जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह विशेष रथ केवल एक वाहन नहीं बल्कि सुरक्षा का संदेश है जो जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों में घूम-घूमकर लोगों को सतर्क करेगा। इसका मुख्य काम ग्रामीणों को यह बताना है कि हाथियों की आहट मिलने पर उन्हें क्या करना चाहिए, किस तरह का सुरक्षित व्यवहार अपनाना चाहिए और आपातकालीन स्थिति में वन विभाग से कैसे संपर्क साधा जाए। प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है कि सही समय पर सही जानकारी देकर किसी भी संभावित अनहोनी को टाला जा सके ताकि जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोका जा सके।

​इस मौके पर विधायक प्रदीप प्रसाद ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा केवल एक वन्यजीव समस्या नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर जन-सुरक्षा और सामाजिक चेतना से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है और जब ग्रामीण सशक्त होंगे तभी वे आपात स्थिति में सही निर्णय लेकर अपने परिवार की सुरक्षा कर पाएंगे। विधायक ने वन विभाग और आम जनता के बीच तालमेल पर जोर देते हुए कहा कि संयुक्त प्रयासों से ही सह-अस्तित्व का वातावरण बन सकता है। साथ ही उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे केवल जागरूकता तक सीमित न रहें बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखें और किसी भी सूचना पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराएं। कार्यक्रम के दौरान पूर्वी डीएफओ समेत वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी, भाजपा नेता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे जिन्होंने इस पहल को जिले में पर्यावरणीय संतुलन के लिए एक मील का पत्थर बताया।

हजारीबाग में मौत बनकर घूम रहे जंगली हाथी: बनहा में शौच के लिए निकले किसान को कुचलकर मारा, वन विभाग की सुस्त कार्यशैली पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा


 हजारीबाग में मौत बनकर घूम रहे जंगली हाथी- बनहा में शौच के लिए निकले किसान को कुचलकर मारा, वन विभाग की सुस्त कार्यशैली पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

हजारीबाग: जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों का खूनी तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके चलते शुक्रवार की सुबह एक और परिवार हमेशा के लिए उजड़ गया। बनहा गांव के नवादा टोला में अहले सुबह करीब पांच बजे प्रकृति की गोद में बसा यह गांव उस वक्त चीत्कार से गूंज उठा जब शौच के लिए घर से निकले किसान गणेश गोप का सामना मौत बनकर खड़े जंगली हाथी से हो गया। हाथी ने गणेश गोप पर अचानक हमला कर उन्हें बेरहमी से पटककर कुचल दिया जिससे घटनास्थल पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

मृतक गणेश गोप अपने पीछे पत्नी रोहनी देवी, चार बेटियों और एक बेटे का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठने से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और वन विभाग की टीम आनन-फानन में मौके पर पहुंची। विभाग ने पीड़ित परिवार को तत्काल राहत देते हुए अंतिम संस्कार के लिए पचास हजार रुपये नकद सौंपे और कुल चार लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की, जिसकी शेष राशि कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद दी जाएगी। हालांकि, ग्रामीण मुआवजे से ज्यादा अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखे क्योंकि क्षेत्र में हाथियों की निरंतर आवाजाही ने उनकी नींद उड़ा रखी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर विधायक प्रदीप प्रसाद भी तत्काल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की व्यवस्था कराई और वन विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि मानव-हाथी संघर्ष का कोई ठोस और स्थायी समाधान निकाला जाए। विधायक ने उपायुक्त से भी दूरभाष पर वार्ता कर प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की बात कही। यह घटना एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलती है कि तमाम दावों के बावजूद ग्रामीण इलाकों में लोग भय के साए में जीने को मजबूर हैं और जंगली जानवरों के हमले में अपनी जान गंवा रहे हैं

हजारीबाग में हाथियों के तांडव ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, खेत बचाने गए किसान को कुचलकर मार डाला

 

हजारीबाग में हाथियों के तांडव ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, खेत बचाने गए किसान को कुचलकर मार डाला



हजारीबाग। हजारीबाग में इंसान और वन्यजीवों के बीच वर्चस्व की जंग अब खौफनाक रूप ले चुकी है और इस द्वंद्व का अंत होता नहीं दिख रहा। इसी खूनी संघर्ष का एक और काला अध्याय बीती रात सदर प्रखंड के चुटियारो गांव में लिखा गया, जहां अपनी मेहनत की फसल बचाने गए एक दम्पत्ति पर हाथियों के झुंड ने कहर बरपा दिया। इस हृदयविदारक घटना में एक किसान को अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ी, जबकि उनकी पत्नी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद अब खतरे से बाहर हैं। यह घटना बताती है कि कैसे जंगलों के अतिक्रमण का खामियाजा अब निर्दोष ग्रामीणों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

​दिल दहला देने वाली यह घटना मुफ्फसिल थाना क्षेत्र की है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, चुटियारो निवासी 50 वर्षीय आदित्य राणा अपनी पत्नी शांति देवी के साथ कुम्भियाटांड़ स्थित अपने टमाटर के खेत की रखवाली करने गए थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि मौत वहां पहले से घात लगाए बैठी है। अचानक हाथियों के एक उग्र झुंड ने उन पर धावा बोल दिया। इस हमले में आदित्य राणा को संभलने का मौका तक नहीं मिला और हाथियों ने उन्हें बेरहमी से पटककर मार डाला। मृतक अपने पीछे तीन बेटियों और एक बेटे का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। गनीमत रही कि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जीवित बच गईं।

​घटना की जानकारी मिलते ही हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को सूचित किया और प्रशासन को सक्रिय किया। सांसद के निर्देश पर घायलों का हालचाल जाना गया और चिकित्सकों से बेहतर इलाज सुनिश्चित करवाया गया। डॉ. अभिषेक कुमार के अनुसार घायल शांति देवी अब खतरे से बाहर हैं। इधर, वन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए अंत्येष्टि के लिए परिजनों को तत्काल पच्चीस हजार रुपये की मुआवजा राशि सौंपी और शेष भुगतान सरकारी प्रक्रिया के तहत जल्द करने का आश्वासन दिया। शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है।

​यह दुखद घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उस बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन की गवाही है जहां जंगलों के सिमटने से वन्यजीव रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों से बलपूर्वक नहीं जीता जा सकता, बल्कि सतर्कता और जागरूकता ही बचाव का एकमात्र उपाय है। हम उनके आशियाने उजाड़ रहे हैं, इसलिए वे हमारे आंगन तक आ पहुंचे हैं। प्रशासन और वन विभाग को हाथियों के मार्गों पर निगरानी बढ़ाने और 'हाथी भगाओ दस्ता' को और अधिक सक्रिय करने की सख्त जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार का चिराग इस तरह न बुझे।

जंगल और जमीन की सुरक्षा में विफल वन विभाग को बंद करे सरकार- खतियानी परिवार

जंगल और जमीन की सुरक्षा में विफल वन विभाग को बंद करे सरकार- खतियानी परिवार

हजारीबाग: खतियानी परिवार की साप्ताहिक समीक्षा बैठक शनिवार को अशोक राम की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें राज्य के गिरते पर्यावरण और वन प्रबंधन की विफलता पर गहरा रोष प्रकट किया गया। बैठक में मुख्य रूप से उपस्थित केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने वर्तमान स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड की पहचान उसके जल, जंगल और जमीन से है, लेकिन आज ये तीनों ही भू-माफियाओं और अफीम तस्करों के निशाने पर हैं।

वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल:

मोहम्मद हकीम ने विभाग की निष्क्रियता पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वन विभाग आज मूकदर्शक बना हुआ है। जंगलों को बेरहमी से उजाड़कर वहां अवैध अफीम की खेती की जा रही है और सरकारी जमीन पर अवैध बस्तियां बसाई जा रही हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि यदि विभाग वनों की रक्षा करने में असमर्थ है, तो इसे बंद कर जंगलों के रखरखाव की जिम्मेदारी सीधे ग्रामीणों को सौंप दी जानी चाहिए। ग्रामीणों की सहभागिता से ही जल-जंगल-जमीन को सुरक्षित रखा जा सकता है।

हाथियों का आतंक और जनहानि:

बैठक में वनों के अतिक्रमण को जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में प्रवेश का मुख्य कारण बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि हाथियों के आतंक से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भय का माहौल है। जंगली हाथियों के हमले में कई ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं, घर उजाड़ दिए गए हैं और साल भर की जमा पूंजी व अनाज नष्ट हो चुका है, लेकिन वन विभाग के पदाधिकारी संवेदनहीन बने हुए हैं।

ग्रामीण समितियों को पुनर्जीवित करने की मांग:

खतियानी परिवार ने सरकार से मांग की है कि पूर्व की सरकारों की तर्ज पर ग्रामीणों के साथ मिलकर बनाई गई वन रक्षा समितियों को पुनः सुचारू रूप से सक्रिय किया जाए। साथ ही, जंगलों का अतिक्रमण करने वाले माफियाओं के विरुद्ध कठोर कानून बनाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजने की अपील की गई। संगठन का मानना है कि जब तक स्थानीय लोगों को वनों के संरक्षण से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक न जंगल सुरक्षित रहेंगे और न ही वन्य जीव।

बैठक में इनकी रही मौजूदगी:

इस अवसर पर महेश विश्वकर्मा, मोहम्मद आशिक, प्रदीप कुमार मेहता, मोहम्मद फखरुद्दीन, शंभू ठाकुर, अशरफ अली, मेगन महतो, शोएब अंसारी, बोधी साव, सुरेश महतो, अमर कुमार और आशा देवी सहित दर्जनों सदस्य उपस्थित थे।

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