जंगल और जमीन की सुरक्षा में विफल वन विभाग को बंद करे सरकार- खतियानी परिवार
हजारीबाग: खतियानी परिवार की साप्ताहिक समीक्षा बैठक शनिवार को अशोक राम की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें राज्य के गिरते पर्यावरण और वन प्रबंधन की विफलता पर गहरा रोष प्रकट किया गया। बैठक में मुख्य रूप से उपस्थित केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने वर्तमान स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड की पहचान उसके जल, जंगल और जमीन से है, लेकिन आज ये तीनों ही भू-माफियाओं और अफीम तस्करों के निशाने पर हैं।
वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल:
मोहम्मद हकीम ने विभाग की निष्क्रियता पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वन विभाग आज मूकदर्शक बना हुआ है। जंगलों को बेरहमी से उजाड़कर वहां अवैध अफीम की खेती की जा रही है और सरकारी जमीन पर अवैध बस्तियां बसाई जा रही हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि यदि विभाग वनों की रक्षा करने में असमर्थ है, तो इसे बंद कर जंगलों के रखरखाव की जिम्मेदारी सीधे ग्रामीणों को सौंप दी जानी चाहिए। ग्रामीणों की सहभागिता से ही जल-जंगल-जमीन को सुरक्षित रखा जा सकता है।
हाथियों का आतंक और जनहानि:
बैठक में वनों के अतिक्रमण को जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में प्रवेश का मुख्य कारण बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि हाथियों के आतंक से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भय का माहौल है। जंगली हाथियों के हमले में कई ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं, घर उजाड़ दिए गए हैं और साल भर की जमा पूंजी व अनाज नष्ट हो चुका है, लेकिन वन विभाग के पदाधिकारी संवेदनहीन बने हुए हैं।
ग्रामीण समितियों को पुनर्जीवित करने की मांग:
खतियानी परिवार ने सरकार से मांग की है कि पूर्व की सरकारों की तर्ज पर ग्रामीणों के साथ मिलकर बनाई गई वन रक्षा समितियों को पुनः सुचारू रूप से सक्रिय किया जाए। साथ ही, जंगलों का अतिक्रमण करने वाले माफियाओं के विरुद्ध कठोर कानून बनाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजने की अपील की गई। संगठन का मानना है कि जब तक स्थानीय लोगों को वनों के संरक्षण से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक न जंगल सुरक्षित रहेंगे और न ही वन्य जीव।
बैठक में इनकी रही मौजूदगी:
इस अवसर पर महेश विश्वकर्मा, मोहम्मद आशिक, प्रदीप कुमार मेहता, मोहम्मद फखरुद्दीन, शंभू ठाकुर, अशरफ अली, मेगन महतो, शोएब अंसारी, बोधी साव, सुरेश महतो, अमर कुमार और आशा देवी सहित दर्जनों सदस्य उपस्थित थे।
No comments
Post a Comment