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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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विनोबा भावे विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विद्यार्थियों का रांची में शैक्षणिक परिभ्रमण: सुधा डेयरी और गुरु नानक होम का किया दौरा

 

व्यावहारिक ज्ञान और सेवा भाव का अनुभव: गृह विज्ञान के विद्यार्थियों ने डेयरी उत्पादन और सामाजिक कार्यों को करीब से समझा

संवाददाता, हजारीबाग:

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गृह विज्ञान विभाग द्वारा विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय शैक्षणिक परिभ्रमण का आयोजन किया गया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से परे व्यावहारिक और औद्योगिक प्रक्रियाओं से रूबरू कराना था। विभागाध्यक्ष सह समाज विज्ञान संकायाध्यक्ष डॉ. रेणु बोस ने बताया कि यह परिभ्रमण विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास और भविष्य की कार्य-कुशलता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

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सेवा और मानवीय मूल्यों का अनुभव

​परिभ्रमण के प्रथम चरण में विद्यार्थियों ने रांची स्थित 'गुरु नानक होम फॉर हैंडिकैप्ड एंड अदर डिसेबल्ड चिल्ड्रन' का दौरा किया। वहां के अधिकारियों और कर्मियों ने विद्यार्थियों को संस्था की कार्यप्रणाली, आवासीय व्यवस्थाओं और दिव्यांगजनों के प्रति की जा रही सेवा संबंधी गतिविधियों से परिचित कराया। विद्यार्थियों ने देखा कि किस प्रकार संस्थागत सहयोग के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर को सुधारा जा रहा है। इस अनुभव ने विद्यार्थियों में सेवा भाव और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति गहरी संवेदना जागृत की।

​दुग्ध उत्पादन की औद्योगिक प्रक्रिया को समझा

​भ्रमण के दूसरे भाग में विद्यार्थियों ने रांची स्थित सुधा डेयरी प्लांट का अवलोकन किया। इस तकनीकी दौरे में विद्यार्थियों को दुग्ध उत्पादन, प्रसंस्करण (Processing), गुणवत्ता परीक्षण और पैकेजिंग की संपूर्ण आधुनिक व्यवस्थाओं की बारीकियों को समझने का अवसर मिला। डेयरी के अधिकारियों ने प्लांट का भ्रमण कराते हुए उत्पादन चक्र के हर चरण की तकनीकी जानकारी दी, जिससे विद्यार्थियों को खाद्य प्रसंस्करण और पोषण विज्ञान के औद्योगिक पहलुओं को समझने में सहायता मिली।

​यह शैक्षणिक परिभ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक साबित हुआ। इस दौरान विभाग के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। शैक्षणिक संस्थानों द्वारा आयोजित ऐसे परिभ्रमण न केवल पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं, बल्कि छात्रों के भविष्य के करियर निर्माण में भी मील का पत्थर सिद्ध होते हैं।

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Hazaribagh News:​ सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर बनेगा झारखंड: हजारीबाग में 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' कार्यालय का उद्घाटन, ₹78 हजार तक की सब्सिडी

घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने से बिजली बिल होगा शून्य, अतिरिक्त बिजली बेचकर नागरिक कमा सकेंगे आर्थिक लाभ

संवाददाता, हजारीबाग:

ऊर्जा संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) को बढ़ावा देने की दिशा में हजारीबाग जिले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शहर के बंशीलाल चौक, मंगल बाजार के समीप गुरुवार को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के क्षेत्रीय कार्यालय का आधिकारिक शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल उपस्थित थे, जिन्होंने फीता काटकर कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सौर ऊर्जा के तकनीकी व आर्थिक लाभों को लेकर एक विस्तृत कार्यशाला भी आयोजित की गई।

Hazaribag-MP-Manish-Jaiswal-inaugurating-PM-Surya-Ghar-Yojana-office-at-Banshilal-Chowk

बिहार और झारखंड के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल तैयार

​इस जनहितकारी योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए हेमंत कुमार ने फ्रेंचाइजी ली है, जिनके पास बिहार और झारखंड दोनों राज्यों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कार्यक्रम की शुरुआत में सांसद मनीष जायसवाल का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया गया। इसके उपरांत, सांसद ने इस योजना के क्षेत्र के प्रथम लाभार्थी सुनील केशरी को सम्मानित करते हुए उनकी पर्यावरण-अनुकूल पहल की सराहना की। इस दौरान कार्यालय में उपस्थित अनेक स्थानीय नागरिकों ने अपने आवासीय परिसरों में सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित करने के प्रति गहरी रुचि दिखाई।

​राष्ट्रीय स्तर पर सौर ऊर्जा के आंकड़ों का उल्लेख

​अपने संबोधन में सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक युगांतकारी कदम है। उन्होंने वैश्विक और राष्ट्रीय उदाहरण देते हुए बताया कि गुजरात के अहमदाबाद में लगभग 90 प्रतिशत घरों की छतों पर सोलर पैनल कार्य कर रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में भी करीब 45 प्रतिशत परिवार सौर ऊर्जा का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं। झारखंड में भी इस योजना का तेजी से प्रसार आवश्यक है ताकि यहाँ के नागरिक पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के साथ-साथ सस्ती व निर्बाध बिजली का लाभ उठा सकें।

​₹78 हजार की सब्सिडी और वित्तीय लाभ

​सांसद ने योजना के वित्तीय पहलुओं की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि:

  • आर्थिक बचत: घरों में सोलर सिस्टम लगाने से पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी, जिससे मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो जाएगा।
  • अतिरिक्त आय: उपभोक्ता अपनी आवश्यकता से अधिक उत्पादित बिजली को सीधे विद्युत विभाग (ग्रिड) को वापस बेच सकते हैं, जिससे उन्हें नियमित आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।
  • सरकारी अनुदान: केंद्र सरकार इस योजना के तहत सुपात्र लाभार्थियों को ₹78 हजार तक की वित्तीय सब्सिडी प्रदान कर रही है, जिससे सौर उपकरणों की स्थापना लागत बेहद कम हो गई है।

​सीमित समय के लिए सब्सिडी का लाभ उठाने की अपील

​कार्यक्रम के दौरान नीलेंदु जयपुरियार ने तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण बिंदु साझा किया। उन्होंने सचेत किया कि इस योजना के तहत मिलने वाली भारी सब्सिडी को आगामी समय में समाप्त या कम किया जा सकता है। इसलिए, हजारीबाग और आसपास के नागरिकों को समय रहते इस विधिक और आर्थिक छूट का लाभ उठाकर अपने घरों को सौर ऊर्जा से सुसज्जित कर लेना चाहिए।

​इस उद्घाटन समारोह में योजना का लाभ सुनिश्चित कराने वाले राहुल राणा, राजीव सिन्हा और प्रभात कुमार सहित कई प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम को सफल बनाने में बबलू सिंह, विजय श्री, हरीश श्रीवास्तव, के.पी.ओझा, किशोरी राणा, रंजन चौधरी, सिब्रोटी चेटरजी, सुनील सिन्हा, अमरेंद्र कुमार, पंचम, विशाल और सनी सहित सैकड़ों स्थानीय निवासियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

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Hazaribagh: अपनी सत्ता बचाने के लिए देश पर लादा गया था आपातकाल; प्रेस क्लब में विचार गोष्ठी में गूंजे जेपी आंदोलनकारियों के विचार, शहीदों को दी श्रद्धांजलि!

🏛️ हजारीबाग: आपातकाल लोकतंत्र के इतिहास पर सबसे बड़ा कलंक; प्रेस क्लब में विचार गोष्ठी का आयोजन, जेपी आंदोलनकारियों ने साझा किए संस्मरण

हजारीबाग: देश में 25 जून 1975 को लगाए गए 21 महीनों के आपातकाल की 51वीं बरसी के अवसर पर गुरुवार को पुराना समाहरणालय परिसर स्थित हजारीबाग प्रेस क्लब में एक विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिला लोक समिति और 'जागृति' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गोष्ठी का मुख्य विषय "आपातकाल 25 जून 1975: लोकतंत्र के लिए कलंक" था। कार्यक्रम की अध्यक्षता जेपी आंदोलनकारी रहे वरिष्ठ अधिवक्ता स्वरूपचंद जैन ने की। गोष्ठी की शुरुआत लोकनायक जयप्रकाश नारायण की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन करने के साथ हुई।

JP movement veteran advocate Swarupchand Jain along with other dignitaries paying tribute to Loknayak JP during a seminar on the 51st anniversary of Emergency at Hazaribagh Press Club.

🚫 लोकतंत्र में असहमति का स्वर जरूरी, नागरिक स्वतंत्रताओं का हुआ था हनन

विषय प्रवेश कराते हुए नव भारत जागृति केंद्र के कार्यक्रम प्रबंधक रीतेश कुमार गोप ने कहा कि लोकतंत्र की असली खूबसूरती असहमति के स्वरों में निहित होती है। आपातकाल के काले दौर में इसी असहमति और अभिव्यक्ति की आजादी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी, यही वजह है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में उस कालखंड को एक कलंक के तौर पर देखा जाता है।

आपातकाल के समय छात्र आंदोलनकारी की भूमिका निभा चुके हरीश श्रीवास्तव ने उस दौर के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि हजारीबाग के अनेकों परिवार और उनके बच्चों ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। उन्होंने रेखांकित किया कि इस आंदोलन की सफलता के पीछे प्रेस की आजादी, अभिभावकों की सहमति, प्रशासन की मदद और सबसे बढ़कर लोकनायक जयप्रकाश नारायण का कुशल व निस्वार्थ नेतृत्व था, जो सत्ता नहीं बल्कि संपूर्ण 'व्यवस्था परिवर्तन' के पक्षधर थे।

👥 वक्ताओं ने कहा: अपनी सत्ता और दल को बचाने के लिए देश पर लादा गया था आपातकाल

गोष्ठी को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने अपने-अपने विचार प्रखरता से रखे:

  • अरविंद सहाय ने उस समय की विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं में आपसी संघर्ष और सहयोग का उल्लेख करते हुए युवाओं पर पड़े इसके गहरे प्रभाव की चर्चा की।

  • अधीन महतो ने कहा कि आपातकाल ने नागरिकों के बुनियादी अधिकारों को छीन लिया था। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नागरिकों को अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से पालन करने की बात कही।

  • अमरदीप यादव ने जेपी को एक सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा कि अक्सर लोकतंत्र की असफलता के पीछे सरकारी पदाधिकारियों की उदासीनता का बड़ा हाथ रहता है।

  • श्यामकिशोर और अशोक यादव ने आंदोलन के जनभागीदारी के महत्व और अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि गलत नीतियों का विरोध हमेशा होना चाहिए।

  • बटेश्वर मेहता ने वर्तमान और भविष्य के शासकों को आपातकाल जैसी दमनकारी परिस्थितियों से बचने की सलाह दी।

  • प्रोफेसर प्रमोद कुमार ने आपातकाल को लोकतंत्र के लिए एक गहरा धब्बा बताते हुए कहा कि युवाओं ने इसके विरोध में अपनी जवानी तक कुर्बान कर दी, जबकि अपनी सत्ता और राजनीतिक दल को बचाने की फिक्र में देश पर इसे जबरन लादा गया था।

⚖️ नई पीढ़ी को लोकतंत्र का महत्व समझाना जरूरी: स्वरूपचंद जैन

अपने अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ अधिवक्ता स्वरूपचंद जैन ने कड़े शब्दों में कहा कि नागरिक अधिकारों का हनन करना एक बेहद गंभीर अपराध है, जिसे तत्कालीन सरकार ने आपातकाल लगाकर अंजाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को लोकतंत्र के वास्तविक महत्व और अधिकारों से परिचित कराना है, ताकि भविष्य में फिर कभी कोई शासक देश में ऐसी हिमाकत करने का साहस न कर सके।

इस वैचारिक गोष्ठी को संबोधित करने वाले अन्य मुख्य वक्ताओं में विनोद सिंह, मुअज्ज़म आलम, अरविंद झा, संजय कुमार और मेहर रहमान सहित कई प्रबुद्ध जीवी शामिल थे। कार्यक्रम के अंतिम चरण में आपातकाल विरोधी आंदोलन के दौरान अपनी जान न्योछावर करने वाले देश के वीर युवाओं के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

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हजारीबाग के श्रृंगार जगत में स्वर्णिम अध्याय का सूत्रपात - कल्याण ज्वेलर्स के भव्य शोरूम का करिश्मा कपूर ने किया उद्घाटन


हजारीबाग के श्रृंगार जगत में स्वर्णिम अध्याय का सूत्रपात - कल्याण ज्वेलर्स के भव्य शोरूम का करिश्मा कपूर ने किया उद्घाटन



हजारीबाग। भारतीय आभूषण शिल्प की अनन्य धरोहर और अटूट विश्वास का पर्याय बन चुके कल्याण ज्वेलर्स ने झारखंड के हृदय स्थल हजारीबाग में अपने भव्य शोरूम का पदार्पण कर राज्य के आभूषण बाज़ार में अपनी प्रभुसत्ता का विस्तार किया है। मटवारी स्थित पीटीसी चौक के समीप स्वदेशी एनएक्सटी मॉल के निकट उद्घाटित यह नूतन शोरूम पारंपरिक कला और आधुनिक शिल्प कौशल का एक ऐसा अनुपम संगम है जो क्षेत्र के सौंदर्य प्रेमियों को खरीदारी का एक अलौकिक और विलासितापूर्ण अनुभव प्रदान करेगा। इस प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान का शुभारंभ सुप्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ जिनकी उपस्थिति ने इस समारोह की आभा में चार चाँद लगा दिए।
उद्घाटन के उपलक्ष्य में जनसमूह को संबोधित करते हुए अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने ब्रांड के प्रति अपनी गहरी निष्ठा प्रकट की। उन्होंने रेखांकित किया कि कल्याण ज्वेलर्स जैसे मूल्यों पर आधारित ब्रांड के साथ जुड़ना उनके लिए गौरव का विषय है क्योंकि यह संस्थान पारदर्शिता और उपभोक्ता विश्वास को सर्वोपरि मानता है। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि हजारीबाग की जनता न केवल यहाँ की उत्कृष्ट सेवाओं से अभिभूत होगी बल्कि यहाँ प्रदर्शित अद्वितीय आभूषण संग्रह उनकी सौंदर्य चेतना को भी तृप्त करेंगे।
इस गौरवशाली विस्तार पर अपने विचार साझा करते हुए कल्याण ज्वेलर्स के अधिशासी निदेशक श्री रमेश कल्याणरमन ने कहा कि हजारीबाग में इस शोरूम का संचालन उनके उस दूरगामी संकल्प का हिस्सा है जिसके अंतर्गत वे ग्राहकों की सूक्ष्म आवश्यकताओं को समझते हुए एक उत्कृष्ट पारिस्थितिकी तंत्र निर्मित करना चाहते हैं। उन्होंने प्रतिबद्धता जताई कि ब्रांड विश्वस्तरीय परिवेश प्रदान करने के साथ-साथ शुद्धता और सत्यनिष्ठा के अपने मूल सिद्धांतों पर सदैव अडिग रहेगा।
हजारीबाग का यह नवीन शोरूम कल्याण के विख्यात इन-हाउस ब्रांड्स की पूरी शृंखला से सुसज्जित है। यहाँ वैवाहिक गौरव को दर्शाती 'मुहूर्त' शृंखला, हस्तशिल्प की सूक्ष्मता समेटे 'मुद्रा', मंदिर शिल्प से प्रेरित 'निमाह' और नृत्य करते हीरों की जादुई 'ग्लो' शृंखला उपलब्ध है। इसके साथ ही सोलिटेयर की 'ज़ियाह', अनगढ़ हीरों की 'अनोखी', विशेष अवसरों की 'अपूर्वा', वैवाहिक हीरों की 'अंतरा', नित्य उपयोग हेतु 'हेरा' और बहुमूल्य रत्नों की 'रंग' व हालिया प्रदर्शित 'लीला' शृंखला का वृहद संग्रह ग्राहकों के स्वागत हेतु तैयार है।
इस मंगल अवसर पर संस्थान ने विशेष उपभोक्ता लाभों की भी वर्षा की है। स्वर्ण आभूषणों, प्रीमियम स्टडेड ज्वेलरी और एंटीक गहनों के मेकिंग चार्ज व वैल्यू एडिशन पर अत्यंत आकर्षक रियायतें दी जा रही हैं। इसके अतिरिक्त कल्याण ज्वेलर्स का विशिष्ट 'गोल्ड बोर्ड रेट' जो संपूर्ण देश में समान और न्यूनतम है सीमित समय के लिए प्रभावी रहेगा। शुद्धता की कसौटी पर खरा उतरने हेतु यहाँ प्रत्येक आभूषण बीआईएस हॉलमार्क प्रमाणित है। साथ ही ग्राहकों को 'फोर-लेवल एश्योरेंस सर्टिफिकेट' प्रदान किया जा रहा है जो स्वर्ण की शुद्धता, आजीवन निःशुल्क रखरखाव और पारदर्शी विनिमय व बाय-बैक नीति की सशक्त गारंटी देता है जो ब्रांड की व्यावसायिक शुचिता का प्रमाण है।

वैश्विक क्षितिज पर झारखंड का उदय- दावोस और लंदन से लौटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भरी हुंकार, कहा- राज्य की नैसर्गिक संपदा और युवा शक्ति को अब मिलेंगे विकास के अंतहीन आकाश


वैश्विक क्षितिज पर झारखंड का उदय- दावोस और लंदन से लौटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भरी हुंकार, कहा- राज्य की नैसर्गिक संपदा और युवा शक्ति को अब मिलेंगे विकास के अंतहीन आकाश

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड 

रांची | 28 जनवरी 2026

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी विदेश यात्रा से लौटने के पश्चात रांची हवाई अड्डे पर एक अभूतपूर्व और उत्साहजनक वातावरण के बीच मीडिया से मुखातिब हुए। समर्थकों के गगनभेदी नारों और 'जय झारखंड' के उद्घोष के मध्य मुख्यमंत्री ने अपनी दावोस और लंदन यात्रा को राज्य के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड ने पहली बार वैश्विक पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है और दुनिया के सामने अपनी बात को पूरी प्रबलता के साथ रखा है।

मुख्यमंत्री ने अपनी यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद यह प्रथम अवसर है जब झारखंड ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान को इतनी गंभीरता से स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वे दावोस और लंदन से केवल यादें नहीं, बल्कि राज्य के विकास के लिए "बेहतर अनुभव" और "अपार संभावनाएं" लेकर स्वदेश लौटे हैं। श्री सोरेन ने विश्वास दिलाया कि इन वैश्विक अनुभवों के आधार पर झारखंड के 'जल, जंगल और जमीन' तथा यहाँ की नैसर्गिक संपदा को विकास का एक नया आयाम देने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी, जिससे राज्य की आर्थिक रीढ़ और मजबूत होगी।

विशेष रूप से शिक्षा और युवा सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रतिमान गढ़ने का प्रयास किया है, जो सीधे तौर पर राज्य की आने वाली पीढ़ी को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह और मीडिया को आश्वस्त किया कि इस विदेश यात्रा के दौरान तलाशी गई सभी संभावनाओं का सूक्ष्मता से आकलन कर उन्हें धरातल पर उतारा जाएगा, ताकि झारखंड के युवाओं के लिए एक उज्ज्वल और स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो सके। हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब और उनके वक्तव्य में झलकता आत्मविश्वास यह बताने के लिए पर्याप्त था कि झारखंड अब अपनी स्थानीय सीमाओं से निकलकर वैश्विक मानचित्र पर अपनी अमिट छाप छोड़ने को तत्पर है।





लंदन की धरती से गूँजी झारखंड की गौरवगाथा,मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रखा समावेशी और हरित भविष्य का रोडमैप

लंदन की धरती से गूँजी झारखंड की गौरवगाथा,मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रखा समावेशी और हरित भविष्य का रोडमैप

देश-विदेश: झारखंड की स्थापना के गौरवशाली रजत जयंती वर्ष के पावन अवसर पर सात समंदर पार लंदन की धरती एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी। मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन ने 'Jharkhand@25' के वैश्विक मंच से राज्य की अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत, समृद्ध लोक परंपराओं और अदम्य जनजातीय अस्मिता का उद्घोष किया। यह आयोजन मात्र एक उत्सव की औपचारिकता नहीं था, बल्कि दुनिया के सामने एक सशक्त और आत्मनिर्भर झारखंड की संकल्पना को प्रस्तुत करने का एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हुआ। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि झारखंड का विकास उसकी जड़ों को संरक्षित रखते हुए ही संभव है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को यह संदेश दिया कि झारखंड की शक्ति उसके प्राकृतिक संसाधनों और जुझारू मानव श्रम में निहित है, जिसे अब आधुनिक तकनीक और सतत विकास के नए आयामों से जोड़ा जा रहा है।





मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्पष्ट किया कि झारखंड आगामी वर्षों में न केवल आर्थिक उन्नति के पथ पर अग्रसर होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समावेश के क्षेत्र में भी विश्व के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य का भविष्य प्रकृति और प्रगति के बीच एक सुंदर संतुलन स्थापित करने की दिशा में बढ़ रहा है, जहाँ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। लंदन में उमड़े इस जनसैलाब और मुख्यमंत्री के ओजस्वी विचारों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि झारखंड अब केवल खनिज संपदा का केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक निवेश और नवाचार का एक नया केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। अतीत के प्रति कृतज्ञता और भविष्य के प्रति अडिग विश्वास के साथ शुरू हुई यह यात्रा राज्य के सर्वांगीण उत्थान का नया अध्याय लिखने को आतुर है।

दावोस में गूँजी झारखण्ड की गूँज, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वैश्विक मंच पर रखा 'समृद्ध झारखण्ड 2050' का विजन


दावोस में गूँजी झारखण्ड की गूँज, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वैश्विक मंच पर रखा 'समृद्ध झारखण्ड 2050' का विजन


देश/विदेश: स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक झारखण्ड के विकास इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इंडिया पेवेलियन के उद्घाटन समारोह में शिरकत कर राज्य की ओर से वैश्विक निवेश और विकास की नई इबारत लिखी। यह पहला अवसर है जब झारखण्ड ने इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जिसे मुख्यमंत्री ने पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया। भारत सरकार के प्रतिनिधियों और विभिन्न राज्यों के दिग्गजों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि झारखण्ड अब केवल खनिज संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि हरित ऊर्जा और आधुनिक निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।


मुख्यमंत्री ने वैश्विक नेताओं और दिग्गज कंपनियों के साथ संवाद करते हुए प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को दोहराया और इसके साथ ही 'समृद्ध झारखण्ड 2050' का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य दुनिया के सामने रखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखण्ड की प्राकृतिक संपदा और यहाँ की कार्यशील शक्ति औद्योगिक क्रांति के अगले चरण के लिए पूरी तरह तैयार है। दावोस में हुई इन सार्थक चर्चाओं से राज्य में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय रोजगार और बुनियादी ढांचे को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस वैश्विक समागम में शामिल सभी प्रतिभागियों का आभार जताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यहाँ से शुरू हुआ संवाद झारखण्ड को एक नई वैश्विक पहचान दिलाएगा और राज्य की प्रगति के पहिये को और भी तेज करेगा। 

केमिस्ट्री हब के होनहारों पर बरसे लैपटॉप और मेडल, युवा नेता गौतम बोले- बेरोजगारी का दर्द समझता हूं, इसलिए शिक्षा ही एकमात्र हथियार




केमिस्ट्री हब के होनहारों पर बरसे लैपटॉप और मेडल, युवा नेता गौतम बोले- बेरोजगारी का दर्द समझता हूं, इसलिए शिक्षा ही एकमात्र हथियार

हजारीबाग। शहर के पैराडाइज रिजॉर्ट में रविवार को प्रतिभा और परिश्रम का अनूठा संगम देखने को मिला, मौका था 'केमिस्ट्री हब' कोचिंग सेंटर द्वारा आयोजित भव्य विदाई सह सम्मान समारोह का। इस रंगारंग कार्यक्रम में संस्थान के 11वीं और 12वीं कक्षा के सैकड़ों विद्यार्थियों को न केवल विदाई दी गई, बल्कि उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। समारोह का मुख्य आकर्षण वे मेधावी छात्र रहे जिन्होंने केमिस्ट्री में 98 से 99 प्रतिशत अंक हासिल कर संस्थान का मान बढ़ाया है; इन होनहारों को मुख्य अतिथियों ने लैपटॉप, मेडल और शील्ड देकर पुरस्कृत किया।

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आदर्श युवा संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष और चर्चित युवा नेता गौतम कुमार ने विद्यार्थियों में जोश भरते हुए एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि वे खुद एक युवा हैं और बेरोजगारी के दंश को बखूबी समझते हैं, इसलिए उनका मानना है कि कड़ी शिक्षा ही वह एकमात्र हथियार है जिससे भविष्य की चुनौतियों को जीता जा सकता है। गौतम कुमार ने अपने संघर्षों को साझा करते हुए कहा कि यदि उन्होंने कम उम्र में समाज सेवा और आंदोलनों की राह न चुनी होती, तो आज उन्हें युवाओं के बीच खड़ा होने का यह सौभाग्य नहीं मिलता। डाढ़ा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि दयानand मेहता ने भी मंच साझा किया और संस्थान के निदेशक बसंत मेहता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में एक शिक्षक के रूप में हजारों बच्चों का भविष्य संवारना और गुरु का दर्जा प्राप्त करना किसी स्टारडम से कम नहीं है, यह पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

​संस्थान के निदेशक बसंत कुमार मेहता ने अपनी सफलता का श्रेय कड़े संघर्ष को देते हुए बताया कि वे स्वयं एक बेहद गरीब परिवार से आते हैं, लेकिन आज हजारों बच्चों को शिक्षित होते देख उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती है। समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरा माहौल उत्सवमय हो गया। अंत में अतिथियों ने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने का आह्वान किया।

हिंद महासागर में भारत की वैज्ञानिक कूटनीति का नया अध्याय, आठ देशों के ऐतिहासिक सफर पर निकला आईएनएस सागरध्वनि


हिंद महासागर में भारत की वैज्ञानिक कूटनीति का नया अध्याय, आठ देशों के ऐतिहासिक सफर पर निकला आईएनएस सागरध्वनि

देश : रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर हिंद महासागर में वैज्ञानिक सहयोग और कूटनीतिक रिश्तों को नई धार देने के लिए 'सागर मैत्री-5' मिशन का आगाज कर दिया है। कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान से भारत के प्रतिष्ठित समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि को रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मिशन केवल एक समुद्री यात्रा नहीं, बल्कि भारत सरकार के 'महासागर' (MAHASAGAR) विजन के तहत पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा और विकास के साझा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम है।

​इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत आईएनएस सागरध्वनि 1962-65 के दौरान आईएनएस कृष्णा द्वारा तय किए गए ऐतिहासिक समुद्री रास्तों पर दोबारा सफर करेगा। यह पोत हिंद महासागर रिम के आठ प्रमुख देशों—ओमान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और म्यांमार—के साथ वैज्ञानिक संबंधों को मजबूत करेगा। इस मिशन की शुरुआत मालदीव के साथ सहयोगी समुद्र विज्ञान अध्ययनों से हो रही है, जिससे इन देशों के वैज्ञानिकों के बीच संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का नया रास्ता खुलेगा। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह सफर भारत की 'मैत्री' पहल (मरीन एंड एलाइड इंटरडिसिप्लिनरी ट्रेनिंग एंड रिसर्च इनिशिएटिव) का एक अहम हिस्सा है।

​डीआरडीओ की नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (एनपीओएल) द्वारा डिजाइन किया गया और जीआरएसई द्वारा निर्मित यह जहाज समुद्री ध्वनिक अनुसंधान में भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। मिशन के दौरान यह पोत समुद्र के भीतर की गतिविधियों और महत्वपूर्ण ध्वनिक डेटा को इकट्ठा करेगा, जो भारतीय नौसेना के लिए 'अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस' (यूडीए) हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगा। 1994 में कमीशन किया गया आईएनएस सागरध्वनि पिछले तीन दशकों से भारत की समुद्री वैज्ञानिक क्षमताओं की रीढ़ बना हुआ है और अब यह सागर मैत्री मिशन के जरिए पड़ोसी मुल्कों के साथ तकनीक, विश्वास और सहयोग का एक मजबूत पुल तैयार करने निकल पड़ा है।

हजारीबाग के हुरहुरू में 'ब्रॉन्ज बेले' सैलून का भव्य शुभारंभ

हजारीबाग के हुरहुरू में 'ब्रॉन्ज बेले' सैलून का भव्य शुभारंभ

विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा- युवाओं की ऐसी पहल ही बनाएगी आत्मनिर्भर भारत

​हजारीबाग: शहर के हुरहुरू रोड पर आधु

निक सुविधाओं से सुसज्जित 'ब्रॉन्ज बेले' यूनिसेक्स सैलून का विधिवत उद्घाटन समारोह हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। सदर प्रखंड के ग्राम पंचायत पौता निवासी रामचंद्र ठाकुर के पुत्र और युवा उद्यमी दीपक कुमार शर्मा द्वारा स्थापित इस नए प्रतिष्ठान का उद्घाटन हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर स्थानीय गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों और शुभचिंतकों की गरिमामयी उपस्थिति रही जिन्होंने संचालक को इस नई शुरुआत के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

​समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि आज के दौर में युवाओं द्वारा स्वरोजगार की दिशा में बढ़ाया गया हर कदम सराहनीय है। उन्होंने दीपक शर्मा के प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि युवाओं की ऐसी उद्यमशील पहल ही प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के सपने को धरातल पर उतार रही है। विधायक ने जोर देकर कहा कि ऐसे व्यवसाय न केवल संचालक को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करते हैं। उन्होंने वहां मौजूद अन्य युवाओं को भी नौकरी के पीछे भागने के बजाय उद्यमिता अपनाकर स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया।

​कार्यक्रम के समापन पर सैलून संचालक दीपक शर्मा और उनके पूरे परिवार ने विधायक की उपस्थिति और उनके आशीर्वचन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विधायक प्रदीप प्रसाद का मार्गदर्शन उन्हें भविष्य में और बेहतर करने की प्रेरणा देता रहेगा। शहर के बीचों-बीच एक स्तरीय यूनिसेक्स सैलून खुलने से स्थानीय लोगों में भी काफी उत्साह देखा गया।

वैश्विक पटल पर अपनी नई पहचान गढ़ने को तैयार झारखण्ड, 25 वर्षों बाद दावोस में गूंजेगी हेमंत सरकार की विकास

वैश्विक पटल पर अपनी नई पहचान गढ़ने को तैयार झारखण्ड, 25 वर्षों बाद दावोस में गूंजेगी हेमंत सरकार की विकास


गाथा

दावोस/रांची। झारखण्ड राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे करने के बाद अब एक नए आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को तैयार है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहली बार वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में हिस्सा लेने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस पहुंच चुका है। शनिवार को इस प्रतिनिधिमंडल ने वहां पहुंचकर इंडिया पवेलियन परिसर में विशेष रूप से तैयार किए गए 'झारखण्ड पवेलियन' का भ्रमण और निरीक्षण किया, जहां से राज्य अपनी असीम संभावनाओं को दुनिया के सामने रखेगा।

​दावोस की बर्फीली वादियों में 19 से 23 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित आर्थिक महाकुंभ में झारखण्ड की भागीदारी ऐतिहासिक मानी जा रही है। मुख्यमंत्री और उनका दल इस वैश्विक मंच का उपयोग राज्य को एक निवेश गंतव्य और सतत विकास के मॉडल के रूप में पेश करने के लिए करेंगे। इस दौरान झारखण्ड सरकार का पूरा जोर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, वन एवं जैव-अर्थव्यवस्था तथा महिला सशक्तिकरण जैसे समसामयिक और गंभीर विषयों पर रहेगा।

​राज्य सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि झारखण्ड को केवल खनिज संसाधनों वाले राज्य के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे सतत विकास, न्यायसंगत परिवर्तन और समावेशी विकास के रास्ते पर चलने वाले एक अग्रणी राज्य के रूप में वैश्विक पहचान मिले। दावोस में दुनिया भर के दिग्गज नेताओं और उद्योगपतियों के बीच झारखण्ड की यह दस्तक राज्य में निवेश और रोजगार के नए द्वार खोलने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। शनिवार को पवेलियन के निरीक्षण के साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने यह संकेत दे दिया है कि झारखण्ड अब दुनिया के साथ कदमताल करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

विधायक ने फोड़ा नारियल, अधिकारियों ने जड़ा ताला

 विधायक ने फोड़ा नारियल, अधिकारियों ने जड़ा ताला


धान बेचने को दर-दर भटक रहे अन्नदाता, चूहों का निवाला बन रही गाढ़ी कमाई

हजारीबाग/दारू। सदर विधायक


प्रदीप प्रसाद द्वारा बीते 15 दिसंबर को जिस दारू खरिका पैक्स का भव्य उद्घाटन कर किसानों को बड़ी राहत देने का दावा किया गया था, वह आज विभागीय उदासीनता और अफसरशाही के चलते महज एक दिखावा बनकर रह गया है। उद्घाटन के चंद दिनों बाद ही इस पैक्स भवन पर लटका ताला प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल रहा है। हालात यह हैं कि अपनी ही उपज बेचने के लिए क्षेत्र के किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। शनिवार को किसानों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया और उन्होंने पैक्स भवन के समक्ष प्रशासन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।

​हरली पंचायत और आसपास के गांवों से आए किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वे भारी भरकम भाड़ा चुकाकर गाड़ियों में धान लादकर केंद्र तक पहुंचते हैं, लेकिन यहां ताला बंद देख उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ता है। इस प्रक्रिया में न केवल उनका आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि लाने-ले जाने के दौरान बोरियां फटने से अनाज सड़कों पर बिखर कर बर्बाद हो रहा है। किसानों का दर्द यह है कि घर में रखा अनाज चूहों का निवाला बन रहा है और उनकी लागत तक नहीं निकल पा रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं।

​प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने 'दारू प्रखंड के बीडीओ होश में आओ' और 'किसानों का शोषण बंद करो' के गगनभेदी नारे लगाए। किसानों का सीधा आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही के कारण जानबूझकर पैक्स को बंद रखा गया है। उन्होंने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द पैक्स को सुचारू रूप से नहीं खोला गया और धान की खरीदारी शुरू नहीं हुई, तो वे प्रखंड कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना देने को बाध्य होंगे जिसकी पूरी जवाबदेही शासन और प्रशासन की होगी।

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