लंदन की धरती से गूँजी झारखंड की गौरवगाथा,मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रखा समावेशी और हरित भविष्य का रोडमैप
देश-विदेश: झारखंड की स्थापना के गौरवशाली रजत जयंती वर्ष के पावन अवसर पर सात समंदर पार लंदन की धरती एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 'Jharkhand@25' के वैश्विक मंच से राज्य की अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत, समृद्ध लोक परंपराओं और अदम्य जनजातीय अस्मिता का उद्घोष किया। यह आयोजन मात्र एक उत्सव की औपचारिकता नहीं था, बल्कि दुनिया के सामने एक सशक्त और आत्मनिर्भर झारखंड की संकल्पना को प्रस्तुत करने का एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हुआ। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि झारखंड का विकास उसकी जड़ों को संरक्षित रखते हुए ही संभव है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को यह संदेश दिया कि झारखंड की शक्ति उसके प्राकृतिक संसाधनों और जुझारू मानव श्रम में निहित है, जिसे अब आधुनिक तकनीक और सतत विकास के नए आयामों से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्पष्ट किया कि झारखंड आगामी वर्षों में न केवल आर्थिक उन्नति के पथ पर अग्रसर होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समावेश के क्षेत्र में भी विश्व के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य का भविष्य प्रकृति और प्रगति के बीच एक सुंदर संतुलन स्थापित करने की दिशा में बढ़ रहा है, जहाँ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। लंदन में उमड़े इस जनसैलाब और मुख्यमंत्री के ओजस्वी विचारों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि झारखंड अब केवल खनिज संपदा का केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक निवेश और नवाचार का एक नया केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। अतीत के प्रति कृतज्ञता और भविष्य के प्रति अडिग विश्वास के साथ शुरू हुई यह यात्रा राज्य के सर्वांगीण उत्थान का नया अध्याय लिखने को आतुर है।




