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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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हजारीबाग के इचाक में 'शहीद मेला' की गूँज! देशभक्ति और मनोरंजन का अनूठा संगम

हजारीबाग के इचाक में 'शहीद मेला' की गूँज! देशभक्ति और मनोरंजन का अनूठा संगम

इचाक (हजारीबाग)


:
झारखंड की माटी हमेशा से वीरों और शहीदों की जननी रही है। इसी गौरवशाली परंपरा को जीवंत रखने और नई पीढ़ी में देशभक्ति का संचार करने के लिए हजारीबाग के इचाक में तीसरे भव्य 'शहीद मेले' का आयोजन किया जा रहा है।

​मेला समिति के मुख्य संरक्षक बटेश्वर प्रसाद मेहता ने स्थानीय निवासियों और मीडिया को संबोधित करते हुए इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारे उन अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

खबर के मुख्य बिंदु:

  • शहीदों को नमन: मेले के माध्यम से जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों सहित स्थानीय वीरों जैसे मोतीराम ठाकुर, रामाधीन गिरी, रामाधीन कसेरा, रुद्रनारायण महतो, नूनू महतो और बॉर्डर पर शहीद हुए राजेश मिंज व रघुवीर प्रसाद मेहता को याद किया जाएगा।
  • विकास का सफर: बटेश्वर प्रसाद मेहता ने मेले की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा, "शुरुआत में यह एक शिशु की तरह था, लेकिन आज तीसरे वर्ष में यह एक विशाल और ऐतिहासिक स्वरूप ले चुका है।"
  • सांस्कृतिक महाकुंभ: 10 दिनों तक चलने वाले इस मेले के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्थानीय और बाहरी कलाकारों को 'प्रशस्ति पत्र' देकर सम्मानित किया जाएगा।
  • जन-जन की भागीदारी: इस मेले की सफलता के लिए समाज के हर वर्ग—छात्र, नौजवान, किसान और मजदूरों—से सहयोग की अपील की गई है। आयोजकों का मानना है कि सामूहिक प्रयास से ही इसे राज्य का सबसे बड़ा शहीद मेला बनाया जा सकता है।

क्यों है यह मेला खास?

​झारखंड में यह अपनी तरह का पहला ऐसा आयोजन है जो पूरी तरह से शहीदों की स्मृति को समर्पित है। मेले में बड़े-बड़े झूले, व्यापारिक स्टॉल और देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

"यह वीरों की धरती है और हमारा प्रयास है कि मेले के माध्यम से हम युवाओं को देश सेवा के प्रति प्रेरित कर सकें।"

बटेश्वर प्रसाद मेहता, मुख्य संरक्षक


इबादत की रौशनी में सराबोर होगी झारखंड की फिजा, शब-ए-बारात के मुकद्दस मौके पर सरकार ने किया 4 फरवरी को अवकाश का ऐलान

इबादत की रौशनी में सराबोर होगी झारखंड की फिजा, शब-ए-बारात के मुकद्दस मौके पर सरकार ने किया 4 फरवरी को अवकाश का ऐलान

रांची: झारखंड की आबोहवा में इबादत और अकीदत का रंग घुलने वाला है क्योंकि राज्य सरकार ने मुस्लिम समुदाय के पवित्र त्योहार शब-ए-बारात की महत्ता को देखते हुए प्रदेश में आधिकारिक अवकाश की घोषणा कर दी है। गुनाहों से तौबा और पूर्वजों के लिए मगफिरत की दुआ मांगने वाली इस पाक रात के मद्देनजर झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए 4 फरवरी 2026, दिन बुधवार को कार्यपालक आदेश के तहत अवकाश घोषित किया है।

​सरकार के अवर सचिव दिलीप कुमार साह के हस्ताक्षरित इस आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि इबादत की इस रात के अगले दिन सरकारी दफ्तरों में कामकाज नहीं होगा, जिससे रोजेदारों और अकीदतमंदों को अपनी धार्मिक रस्मों को सुकून और इत्मीनान से पूरा करने का अवसर मिलेगा। अधिसूचना संख्या 613 के माध्यम से जारी इस फरमान की प्रतिलिपि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को भी प्रेषित कर दी गई है ताकि इस सुखद समाचार का प्रसार राज्य के कोने-कोने तक हो सके और सरकारी मुलाजिमों से लेकर आम जनता तक यह सूचना समय रहते पहुँच जाए।

​शब-ए-बारात की रात को इस्लाम धर्म में इबादत की विशेष रात माना जाता है, जब मस्जिदों में सजदे किए जाते हैं और कब्रिस्तानों में चिराग रोशन कर पूर्वजों को याद किया जाता है। सरकार के इस संवेदनशील निर्णय से न केवल प्रशासनिक गलियारों में बल्कि आम जनमानस में भी खुशी की लहर है, क्योंकि अब वे पूरी रात जागकर की जाने वाली इबादत के बाद अगले दिन के दायित्वों से मुक्त रहकर त्योहार की रूहानियत को महसूस कर सकेंगे। यह निर्णय राज्य की गंगा-जमुनी तहजीब और सर्वधर्म समभाव की भावना को भी पुख्ता करता है, जहाँ हर आस्था के सम्मान में प्रशासन सजग दिखाई देता है।

संत शिरोमणि रविदास ने सिखाया मानवीय गरिमा का पाठ, उनके आदर्शों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि : मुन्ना सिंह

संत शिरोमणि रविदास ने सिखाया मानवीय गरिमा का पाठ, उनके आदर्शों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि : मुन्ना सिंह



हजारीबाग। पूर्व सदर विधानसभा प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने रविवार को जिले के विभिन्न अंचलों का सघन दौरा कर संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती समारोहों में शिरकत की। श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में उन्होंने हुरहुरु, कटकमदाग प्रखंड के खपरियांवां, सदर प्रखंड के ओरिया, चंदवार के पौंता गांव और भेलवारा पंचायत के अंबेडकर मोहल्ला में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया। श्री सिंह ने संत रविदास की आदमकद प्रतिमा और तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जनसमूह को संबोधित करते हुए मुन्ना सिंह ने ओजस्वी स्वरों में कहा कि संत रविदास केवल एक पंथ के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता और सामाजिक सुधार के दैदीप्यमान नक्षत्र थे। उन्होंने कहा कि गुरु जी ने उस दौर में सामाजिक कुरीतियों और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध आवाज बुलंद की जब समाज रूढ़ियों में जकड़ा हुआ था।

​मुन्ना सिंह ने अपने संबोधन में प्रतिपादित किया कि समतामूलक समाज की स्थापना और शोषित-वंचित वर्ग को आत्मसम्मान दिलाने में संत रविदास का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से संविधान के मूल्यों और आपसी भाईचारे को सुदृढ़ करने का आह्वान करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सदैव उनके दिखाए मार्ग पर चलकर अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए कृतसंकल्पित है। समारोहों में 'जय गुरु रविदास' के गगनभेदी नारों के साथ वातावरण गुंजायमान रहा और उपस्थित लोगों ने सामाजिक समरसता की शपथ ली।

​इस पुनीत अवसर पर वार्ड 35 के सुबोध कुमार पासवान, राजेश कुमार दास, गोविंद राम मुंशी, पंचायत मुखिया सुरेश कुमार दास, प्रताप दास, दिलिप दास, प्रेम दास, जगदेव दास सहित अमित, राहुल, गोपाल, वाकिल, संतु, गोपी, विकास कुमार रविदास, आदित्य, सोनल, विक्रम, विक्की, द्वारिका, नन्द किशोर, रतन, सुरज, मिथलेश, बाबूलाल, सत्येन्द्र, कोलेश्वर, तामेश्वर, गुड्डू, दयानन्द, राम कुमार, रवि, दिलिप पसवान, मनोज, पप्पू, मधुसूदन, राजेश, फिरोज़, रामसहाय, राजु, धनेश्वर, संजय, विशाल, राहुल, विश्वनाथ, सुखदेव, रामवृक्ष, सुरत, गणपति रविदास, अशोक, अनिल, अरुण, राजेश एवं पिंटू जैसे सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता व स्थानीय प्रबुद्धजन उपस्थित रहे जिन्होंने सामाजिक न्याय के संकल्प को दोहराया।

वेद-पुराणों से इतर जनजातीय भाषाओं में भी स्पंदित है भारतीय ज्ञान परंपरा, जेन-जी की 'स्लैंग' शब्दावली पर चिंता के बीच विभावि में राष्ट्रीय समागम संपन्न

वेद-पुराणों से इतर जनजातीय भाषाओं में भी स्पंदित है भारतीय ज्ञान परंपरा, जेन-जी की 'स्लैंग' शब्दावली पर चिंता के बीच विभावि में राष्ट्रीय समागम संपन्न

हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के स्वा



मी विवेकानंद सभागार में विगत तीन दिनों से चल रहे वैचारिक मंथन का समापन शनिवार को एक वृहद संकल्प और भाषाई चेतना के साथ हुआ। तीन-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक भाषाओं के संरक्षण और आधुनिक युवा पीढ़ी द्वारा प्रयोग की जा रही भाषा शैली पर गंभीर विमर्श किया गया। समापन सत्र में यह स्वर प्रमुखता से उभरा कि भारतीय प्रज्ञा केवल प्राचीन संस्कृत ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वनवासियों और जनजातियों की मौखिक परंपराओं में भी उतनी ही तीव्रता से धड़क रही है।

​समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) की पूर्व अध्यक्ष प्रो. सरोज शर्मा ने भाषा के दार्शनिक और वैज्ञानिक पक्ष को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाषा में शब्द, दर्शन और वैज्ञानिकता का प्रवाह एक साथ चलता है। उन्होंने भारतीय मनीषा में 'शब्द-ब्रह्म' की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि शब्दों में नाद होता है और नाद में ही ब्रह्म का वास है, यहाँ तक कि मौन की भी अपनी एक सशक्त भाषा होती है। वर्तमान दौर में 'जेन-जी' पीढ़ी द्वारा प्रयुक्त की जा रही 'स्लैंग' भाषा पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की और इसे भाषाई अवमूल्यन का संकेत माना। प्रो. शर्मा ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी अभिव्यक्ति को परिष्कृत करें, क्योंकि भाषा की शुचिता ही संस्कृति का आधार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाषा को लेकर होने वाले विवादों के मूल में अक्सर राजनीति होती है, जबकि भारत में संस्कृतनिष्ठ भाषा, दक्षिण की द्रविड़ भाषाएं और जनजातीय बोलियां सह-अस्तित्व के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करती रही हैं।

​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षितिज को विस्तारित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का ज्ञान केवल वेद और पुराणों के पृष्ठों में ही नहीं सिमटा है, अपितु यह देश की समृद्ध जनजातीय भाषाओं में भी अंतर्निहित है। कुलपति ने केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) के प्रति आभार जताते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में विभावि और संस्थान मिलकर लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम उठाएंगे।

​इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) के निदेशक प्रो. शैलेंद्र मोहन ने भाषाई तकनीक और संरक्षण के प्रयासों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने घोषणा की कि देश की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं और उनके संरक्षण के लिए संस्थान कटिबद्ध है। प्रो. मोहन ने जानकारी दी कि भारत की 88 जनजातीय भाषाओं पर 'प्रवेशिका' तैयार कर ली गई है और 70 लुप्तप्राय भाषाओं के लिए 'भाषा संचिका' का निर्माण किया गया है। उन्होंने 'भाषा सागर' ऐप और 'भारत वाणी' जैसे डिजिटल उद्यमों का उल्लेख करते हुए बताया कि तकनीक के माध्यम से अब किसी भी भारतीय भाषा को सीखा जा सकता है। वर्तमान में 75 भारतीय भाषाओं में शब्दकोश उपलब्ध हैं और बहुभाषी शब्दकोश निर्माण की प्रक्रिया युद्धस्तर पर जारी है।

​इससे पूर्व, भारतीय भाषा समिति (भारत सरकार) के शैक्षणिक समन्वयक चंदन श्रीवास्तव ने लोक भाषा और मातृभाषा के संवर्धन पर चल रहे सरकारी प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की। संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. विनोद रंजन ने तीन दिनों के बौद्धिक विमर्श का सार प्रस्तुत करते हुए प्रतिवेदन पढ़ा। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी में कुल 152 शोध आलेख समर्पित किए गए, जिनका मूल निष्कर्ष यही था कि 'विजन 2047' की संकल्पना तभी साकार होगी जब हम अपनी भाषाई जड़ों को सिंचित करेंगे।

​समारोह के सांस्कृतिक पक्ष में शिक्षाशास्त्र विभाग की डॉ. विनीता बांकीरा एवं डॉ. भारती सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत झूमर नृत्य ने अतिथियों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंतिम दिन आर्यभट्ट सभागार में एक विशेष तकनीकी सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें मुंडा जनजाति पर केंद्रित एक लघु शोध फिल्म का प्रदर्शन किया गया। जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा निर्मित और डॉ. गंगानाथ झा के शोध पर आधारित इस फिल्म में पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा द्वारा संस्कृति की विशद व्याख्या और मुंडा जनजाति के ऐतिहासिक एवं सूक्ष्म पहलुओं को दर्शाया गया, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

​समारोह का स्वागत संबोधन कुलसचिव डॉ. प्रणिता ने दिया, जबकि मंच पर समाज विज्ञान के पूर्व संकायाध्यक्ष डॉ. सादिक रज्जाक भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलानुशासक और संगोष्ठी संयोजक प्रो. मिथिलेश कुमार सिंह ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए घोषणा की कि संगोष्ठी में आए सभी आलेखों को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित कर उन्हें अकादमिक जगत को समर्पित किया जाएगा। मंच संचालन का दायित्व यूसेट के डॉ. अरुण कुमार मिश्रा एवं हिंदी विभाग के डॉ. सुनील कुमार दुबे ने गरिमामय ढंग से निभाया। इस बौद्धिक महाकुंभ में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि अपनी भाषाओं के प्रति अनुराग अभी भी जनमानस में जीवित है।

सत्य और अहिंसा के अमर साधक को नमन: उपायुक्त ने कहा- राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला हैं बापू के सिद्धांत

सत्य और अहिंसा के अमर साधक को नमन: उपायुक्त ने कहा- राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला हैं बापू के सिद्धांत


हजारीबाग। अहिंसा के पुजारी और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को हजारीबाग समाहरणालय परिसर श्रद्धा और कृतज्ञता के भाव से सराबोर रहा। शहीद दिवस के इस गंभीर और पावन अवसर पर जिले के उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने सत्य के अन्वेषक महात्मा गांधी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में उपायुक्त ने बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें शत-शत नमन किया। इस दौरान वातावरण में बापू के त्याग, तपस्या और बलिदान के प्रति गहरा सम्मान परिलक्षित हुआ। उपायुक्त ने राष्ट्रपिता के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके युगांतकारी व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण किया।

इस अवसर पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए उपायुक्त श्री सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी केवल एक नाम नहीं, बल्कि मानवता और नैतिकता की एक ऐसी विचारधारा हैं जो पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने सत्य और अहिंसा को महज एक अस्त्र नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला बताया। उपायुक्त ने उपस्थित जनसमूह और प्रशासनिक अधिकारियों का आह्वान किया कि वे बापू के आदर्शों को केवल रस्मी तौर पर याद न करें, बल्कि उन्हें अपनी कार्यशैली और आचरण में पूरी निष्ठा के साथ आत्मसात करें।

उपायुक्त ने जोर देते हुए कहा कि आज के परिवेश में गांधीवादी दर्शन की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। एक सशक्त और समृद्ध भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए बापू के सिद्धांतों के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता अनिवार्य है। यह दिवस हमें पुन: स्मरण कराता है कि राष्ट्रनिर्माण के महायज्ञ में सत्य, संयम और सेवा ही सर्वोपरि है। 

अजीत दादा का आकस्मिक निधन, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा शोक, कहा- जनसेवा को समर्पित एक और अध्याय का अंत

अजीत दादा का आकस्मिक निधन,


प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा शोक, कहा- जनसेवा को समर्पित एक और अध्याय का अंत

नरेश सोनी विशेष संवाददाता | नई दिल्ली/मुंबई

महाराष्ट्र की राजनीति को आज एक गहरा आघात लगा है। जननेता और कुशल प्रशासक अजीत पवार का आकस्मिक निधन हो गया है। इस दुखद समाचार ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के गलियारों को भी स्तब्ध कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे देश के लिए, विशेषकर महाराष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए अजीत पवार के साथ अपने पुराने संस्मरणों को साझा किया और उन्हें एक सच्चे जननायक के रूप में याद किया।

प्रधानमंत्री ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि अजीत पवार जनता से सीधे जुड़े हुए नेता थे जिनका नाता समाज के अंतिम व्यक्ति तक था। वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जो सदैव जनसेवा के कार्यों में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहते थे, जिसके कारण उन्हें व्यापक जनसमर्थन और आदर प्राप्त था। प्रधानमंत्री ने उनकी कार्यशैली की सराहना करते हुए बताया कि अजीत पवार को प्रशासनिक मामलों की अद्भुत और सूक्ष्म समझ थी। शासन चलाने की उनकी दक्षता और गरीब तथा वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए उनकी तड़प विशेष रूप से उल्लेखनीय थी। उनका पूरा जीवन आम जनमानस की समस्याओं को सुलझाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में समर्पित रहा।

उनके इस तरह अचानक चले जाने को प्रधानमंत्री ने अत्यंत धक्कादायक और पीड़ादायी बताया है। उन्होंने कहा कि एक मेहनती और समर्पित व्यक्तित्व का यूं असमय जाना अत्यंत दुखद है। इस कठिन समय में प्रधानमंत्री ने अजीत पवार के परिजनों और उनके असंख्य समर्थकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की है। अजीत पवार के जाने से भारतीय राजनीति ने एक ऐसा नेता खो दिया है जिसकी पकड़ जमीन पर जितनी मजबूत थी, प्रशासनिक गलियारों में उतनी ही प्रभावशाली थी।

इचाक की धरती पर गूंजा 'जननायक' का जयघोष: पूंजीवाद के शोर में समाजवाद की मशाल जलाने का आह्वान, कहा- वंचितों की आवाज थे कर्पूरी

इचाक की धरती पर गूंजा 'जननायक' का जयघोष: पूंजीवाद के शोर में समाजवाद की मशाल जलाने का आह्वान, कहा- वंचितों की आवाज थे कर्पूरी


नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड 

इचाक/हजारीबाग| 28 जनवरी 2026

इचाक प्रखंड मुख्यालय स्थित परियोजना बालिका उच्च विद्यालय का समीपवर्ती प्रांगण बीते 27 जनवरी को सामाजिक न्याय के पुरोधा और गुदड़ी के लाल कहे जाने वाले जननायक कर्पूरी ठाकुर के विचारों से गुंजायमान हो उठा। उनकी पावन जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस भव्य समारोह में आदर्श युवा संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष गौतम कुमार की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक नई वैचारिक ऊँचाई प्रदान की। हजारों की संख्या में उमड़े जनसैलाब और प्रबुद्ध नागरिकों की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि दशकों बाद भी कर्पूरी ठाकुर के आदर्श जनमानस के पटल पर अमिट हैं।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता गौतम कुमार ने इतिहास और वर्तमान के धागों को पिरोते हुए एक अत्यंत ओजस्वी और विचारोत्तेजक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। एक बेहद सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद, विषम परिस्थितियों को मात देकर और केवल अपने दृढ़ विचारों के बलबूते बिहार के दो-दो बार मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने लोकतंत्र की असली ताकत का एहसास कराया। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में सर्वप्रथम शराबबंदी जैसा साहसिक और ऐतिहासिक कानून लागू करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। शोषितों, वंचितों और दबे-कुचले वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था कर उन्होंने जो सामाजिक क्रांति की मशाल जलाई, उसी रोशनी में आज समाज का बड़ा तबका मुख्यधारा में कदमताल कर रहा है।

अपने संबोधन को विस्तार देते हुए कुमार ने भारतीय समाज की गौरवशाली परंपरा का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि यह देश त्याग और बलिदान के स्तंभों पर टिका है। जहाँ राजपूत समाज ने महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और राणा सांगा जैसे वीर सपूत देकर राष्ट्र की रक्षा की, वहीं कुशवाहा समाज ने महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले और भगवान गौतम बुद्ध जैसे युगद्रष्टा दिए जिन्होंने समाज को ज्ञान और समता का मार्ग दिखाया। उन्होंने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को नमन करते हुए कहा कि हरिजन समाज में जन्मे इस महामानव ने देश को विधि के विधान से जोड़कर एक सूत्र में पिरोया। समाज इन विभूतियों का सदैव ऋणी रहेगा क्योंकि इन्होंने अपना सर्वस्व समाज को समर्पित कर दिया।

वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए गौतम कुमार ने कहा कि यह विडंबना है कि जिस दौर में समाजवाद जिंदा था, वहां संवेदनाएं थीं, किंतु आज के दौर में पूंजीवाद हावी होता जा रहा है, जो मानवीय मूल्यों को निगल रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में समाजवाद के मूल तत्वों का निर्वहन करें। कार्यक्रम के दौरान हजारों की संख्या में मौजूद समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने बारी-बारी से अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए और जननायक के बताए मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प दोहराया। इस वैचारिक महाकुंभ ने इचाक के वातावरण में सामाजिक समरसता की एक नई सुगंध बिखेर दी।


श्रद्धापूर्वक मनाई गई राष्ट्रनायक नेताजी की जयंती

यूनियन क्लब के ऐतिहासिक केशव हॉल में गूंजा कदम-कदम बढ़ाए जा

श्रद्धापूर्वक मनाई गई राष्ट्रनायक नेताजी की जयंती

हजारीबाग: भारतीय स्वाधीनता संग्राम के देदीप्यमान नक्षत्र और अदम्य साहस के प्रतीक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती शुक्रवार को हजारीबाग के ऐतिहासिक यूनियन क्लब एंड लाइब्रेरी के केशव हॉल में अत्यंत गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाई गई। बंगाली एसोसिएशन हजारीबाग और यूनियन क्लब एंड लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गौरवमयी समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों ने शिरकत कर नेताजी के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा निवेदित की। कार्यक्रम का शुभारंभ बंगाली एसोसिएशन के सचिव सोमनाथ कुनार, पूजा समिति के सचिव रजत नाग और हिमांशु भट्टाचार्य द्वारा नेताजी के चित्र पर संयुक्त रूप से माल्यार्पण कर किया गया। इसके उपरांत उपस्थित विशिष्ट जनों और गणमान्य नागरिकों ने बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर देश की आजादी के लिए उनके सर्वस्व त्याग को स्मरण किया।


समारोह की महत्ता उस समय और बढ़ गई जब संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव के तकनीकी सलाहकार अमिताभ मुखर्जी, अन्नदा उच्च विद्यालय के प्रधानाचार्य दशरथ महतो और पूर्व पार्षद निवेदिता राय ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सुशोभित किया। श्रद्धांजलि सभा के दौरान पूरा हॉल राष्ट्रभक्ति के गीतों और गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा। मधुच्छंदा मुखर्जी के नेतृत्व में उपस्थित जनसमूह ने जब नेताजी का प्रिय गीत 'कदम-कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा' सामूहिक स्वर में गाया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का हृदय देशभक्ति की हिलोरों से भर उठा। 'जय हिंद', 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारों ने न केवल वातावरण को ऊर्जामय बना दिया, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के उस गौरवशाली कालखंड की स्मृतियों को भी जीवंत कर दिया।

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में बंगाली एसोसिएशन और यूनियन क्लब के वरिष्ठ पदाधिकारी विकास चौधरी, रूपा चटर्जी, सुतानु राय, चिन्मय सरकार सहित ध्रुव चक्रवर्ती, उज्जवल आयकत, आशीष चक्रवर्ती और सुजीत भट्टाचार्य जैसे कई गणमान्य सदस्य शामिल थे। कार्यक्रम में महिला शक्ति की भी व्यापक सहभागिता रही, जिसमें बर्षा दे, दोला गुहा, सुपर्णा सरकार और अन्य महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वक्ताओं ने नेताजी के विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए कहा कि उनका शौर्य और अनुशासन आज भी युवाओं के लिए पथ-प्रदर्शक है। इस आयोजन ने शहर में एक बार फिर राष्ट्रीय चेतना का संचार किया और नई पीढ़ी को देश के महानायकों के संघर्ष से परिचित कराया।


आजाद हिंद फौज के प्रणेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कांग्रेसियों ने अर्पित की भावांजलि, उनके अदम्य साहस को किया नमन

आजाद हिंद फौज के प्रणेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कांग्रेसियों ने अर्पित की भावांजलि, उनके अदम्य साहस को किया नमन

हजारीबाग: स्वाधीनता संग्राम के महानायक और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' जैसे ओजस्वी नारों से भारतीय जनमानस में राष्ट्रभक्ति का ज्वार भाटा पैदा करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 128वीं जयंती गुरुवार को हजारीबाग जिला कांग्रेस कार्यालय, कृष्ण बल्लभ आश्रम में 'पराक्रम दिवस' के रूप में अत्यंत गरिमामय ढंग से मनाई गई। इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने नेताजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और माल्यार्पण कर उनके प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता प्रकट की।


समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मंत्री सह जिला अध्यक्ष जय प्रकाश भाई पटेल ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि नेताजी का व्यक्तित्व और कृतित्व भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जो युगों-युगों तक आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि नेताजी ने अपनी प्रखर मेधा और अदम्य साहस के बल पर अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दी थीं। उनके द्वारा गठित 'आजाद हिंद फौज' ने न केवल सैन्य मोर्चे पर अंग्रेजों को चुनौती दी, बल्कि भारत की एकता और अखंडता का एक अनुपम उदाहरण पेश किया। पटेल ने कहा कि नेताजी द्वारा दिया गया 'चलो दिल्ली' का नारा और 'जय हिंद' का उद्घोष आज भी प्रत्येक भारतीय की नसों में देशभक्ति का संचार करता है।


वरिष्ठ नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश की पूर्ण स्वाधीनता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। वे एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी विदेशी धरती से भारत की आजादी का शंखनाद किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दौर में उनके उच्च आदर्शों और सिद्धांतों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश और जिले के प्रमुख पदाधिकारियों समेत भारी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित थे, जिन्होंने एक स्वर में राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराया

विरासत और अनुशासन का नया अध्याय 'टास्क मास्टर' डॉ. प्रणिता ने संभाली विनोबा भावे विश्वविद्यालय की कमान

विरासत और अनुशासन का नया अध्याय  'टास्क मास्टर' डॉ. प्रणिता ने संभाली विनोबा भावे विश्वविद्यालय की कमान

हजारीबाग/रांची। विनोबा भावे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। रांची स्थित लोकभवन सचिवालय के आदेशानुसार रसायनशास्त्र विभाग की विदुषी प्राध्यापिका डॉ. प्रणिता को विश्वविद्यालय का नया कुलसचिव (रजिस्ट्रार) नियुक्त किया गया है। इस अहम जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए डॉ. प्रणिता ने गुरुवार को तत्काल प्रभाव से अपना पदभार ग्रहण कर लिया, जिसके बाद कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने उन्हें बधाई देते हुए सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

डॉ. प्रणिता का यह चयन न केवल उनकी वरिष्ठता बल्कि उनकी कार्यशैली का भी सम्मान है। वर्ष 2008 में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की अनुशंसा पर विश्वविद्यालय सेवा में आईं डॉ. प्रणिता की छवि एक बेहद अनुशासित और सख्त प्रशासक की रही है। अकादमिक गलियारों में उन्हें एक 'टास्क मास्टर' के रूप में जाना जाता है, जो समयबद्धता और नियमों के अनुपालन में कोई समझौता नहीं करतीं। उनकी नियुक्ति से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अब अपनी कार्यप्रणाली में कसावट और पारदर्शिता लाने के प्रति गंभीर है।

नव-नियुक्त कुलसचिव को शैक्षणिक और प्रशासनिक दक्षता विरासत में मिली है। वे रसायन शास्त्र के मूर्धन्य विद्वान और लब्धप्रतिष्ठित प्राध्यापक स्वर्गीय प्रो. राम यतन प्रसाद की सुपुत्री हैं। उनके पिता ने उस दौर में छात्रों के लिए रसायन शास्त्र की सुलभ पुस्तकें लिखी थीं, जब अध्ययन सामग्री का घोर अभाव था। बाद में उन्होंने कुलपति और प्रतिकुलपति के रूप में विभिन्न विश्वविद्यालयों को अपनी सेवाएं दीं। आज डॉ. प्रणिता अपने पिता की उसी समृद्ध शैक्षणिक विरासत और प्रशासनिक मूल्यों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं। पदभार ग्रहण करने के साथ ही विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने उन्हें बधाइयां दीं और उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय नए कीर्तिमान स्थापित करे

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स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन- हजारीबाग में झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच का द्वितीय स्थापना दिवस समारोह संपन्न

स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन- हजारीबाग में झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच का द्वितीय स्थापना दिवस समारोह संपन्न

हजारीबाग। शहर के आर्ष कन्या गुरुकुल परिसर में झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच का द्वितीय स्थापना दिवस समारोह गौरवशाली परंपरा और भव्यता के साथ मनाया गया। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चंद्रभूषण शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया, जबकि मंच के केंद्रीय अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता ने अध्यक्षता और केंद्रीय प्रधान महासचिव ओमप्रकाश मेहता ने संचालन की जिम्मेदारी निभाई।

उद्घाटनकर्ता डॉ. चंद्रभूषण शर्मा ने अपने संबोधन में मंच के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि देश की आजादी के नायकों और उनके परिजनों को सम्मानित करना एक अत्यंत पुनीत कार्य है। उन्होंने उन तमाम वीर सपूतों को याद किया जिन्होंने अपनी कुर्बानी देकर राष्ट्र को स्वतंत्र कराया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने सरकार से जोरदार मांग की कि देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले उन गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को अविलंब चिन्हित किया जाए, जिन्हें अभी तक उचित सम्मान और पहचान नहीं मिल सकी है।


समारोह के विशिष्ट अतिथि कोडरमा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सुभाष यादव ने मंच के कार्यों की प्रशंसा करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम के दौरान मंच के केंद्रीय अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता ने संकल्प दोहराया कि यदि सरकार गुमनाम सेनानियों को चिन्हित करने में देरी करती है, तो संगठन स्वयं राज्य और केंद्र सरकार को उनके बारे में अवगत कराएगा।


इस अवसर पर देश की वेदी पर प्राण न्योछावर करने वाले बलिदानियों के परिजनों को अंग वस्त्र और मोमेंटो देकर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। समारोह में पूर्व सांसद सहित कई गणमान्य अतिथियों, शिक्षाविदों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के अंत में आर्ष कन्या गुरुकुल के छात्र-छात्राओं और सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों ने स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

ज्ञान के साथ संस्कारों की नींव पर खड़ा होगा विकसित भारत, रावण और दुर्योधन के पास कौशल था पर मूल्य नहीं- स्वामी भावेशानंद

ज्ञान के साथ संस्कारों की नींव पर खड़ा होगा विकसित भारत, रावण और दुर्योधन के पास कौशल था पर मूल्य नहीं: स्वामी भावेशानंद


हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में सोमवार को विवेकानंद जयंती पखवाड़ा के तहत एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जहां शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण पर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम में विवि का माहौल तब और भी आध्यात्मिक हो गया जब मुख्य वक्ता रामकृष्ण मिशन रांची के सचिव स्वामी भावेशानंद जी महाराज ने तीन बार ओमकार के उद्घोष के साथ अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने सभागार में मौजूद सैकड़ों विद्यार्थियों और शिक्षाविदों को स्पष्ट संदेश दिया कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं में केवल ज्ञान और कौशल का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मूल्यों का विकास अनिवार्य है। उन्होंने रावण और दुर्योधन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन पौराणिक पात्रों में ज्ञान और कौशल की कोई कमी नहीं थी, लेकिन मूल्यों के अभाव ने उनका पतन किया, इसलिए आज के युवाओं को चरित्र निर्माण पर जोर देना होगा।

​स्वामी भावेशानंद ने भारत के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय का जिक्र किया, जहां कभी 82 राष्ट्रों के 9000 से अधिक विद्यार्थी एक ही परिसर में ज्ञान अर्जित करते थे और वहां इतना विशाल पुस्तक भंडार था कि उसे जलने में नौ महीने लग गए। उन्होंने कहा कि एक हजार वर्षों के विदेशी शासन ने हमारी स्थिति बदल दी, लेकिन अब भारत दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र है। स्वामी विवेकानंद ने कन्याकुमारी में जिस दिव्य दृष्टि से भारत के पुनरुत्थान को देखा था, उसे आज की युवा पीढ़ी को ही साकार करना है। उनके अनुसार, सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति में आत्मविश्वास भरे, उसे स्वावलंबी बनाए और मस्तिष्क की शक्ति में वृद्धि करे। सही और गलत का भेद समझने वाली विवेकपूर्ण बुद्धि ही भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन करेगी।

​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने विद्यार्थियों में साहस भरने का काम किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में जब 'सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका' कहा, तो वहां बजी तालियों की गूंज आज भी सुनाई देती है। कुलपति ने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे विवेकानंद की तरह हवा के विपरीत खड़े होने का साहस विकसित करें। उन्होंने कहा कि दुनिया ने भारत से ही चरित्र और नीति का पाठ पढ़ा है, लेकिन आज विडंबना है कि हम अपनी ही शक्तियों को भूलकर पश्चिम की ओर देख रहे हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे उठें, जागें और तब तक न रुकें जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। कुलपति ने विद्यार्थियों को अर्थपूर्ण सवाल पूछने और सही के लिए खड़े होने की सलाह दी, साथ ही आश्वस्त किया कि जब छात्र जागृत हो जाएंगे तो शिक्षक अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार मिलेंगे।

​इस वैचारिक महाकुंभ में स्वामी विवेकानंद युवा महामंडल के गजानन पाठक, धर्मेंद्र सिंह, डॉ. राजकुमार चौबे और डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में एक रोचक प्रश्नोत्तरी सत्र का भी आयोजन हुआ, जिसने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को नया आयाम दिया। इसके पूर्व, भाषण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को कुलपति ने प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया। मां संगीतायन संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भक्ति गीतों से पूरे वातावरण को रसमय बना दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मृत्युंजय प्रसाद ने और स्वागत भाषण डॉ. सुबोध कुमार सिंह ने किया।

हिंद महासागर में भारत की वैज्ञानिक कूटनीति का नया अध्याय, आठ देशों के ऐतिहासिक सफर पर निकला आईएनएस सागरध्वनि


हिंद महासागर में भारत की वैज्ञानिक कूटनीति का नया अध्याय, आठ देशों के ऐतिहासिक सफर पर निकला आईएनएस सागरध्वनि

देश : रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर हिंद महासागर में वैज्ञानिक सहयोग और कूटनीतिक रिश्तों को नई धार देने के लिए 'सागर मैत्री-5' मिशन का आगाज कर दिया है। कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान से भारत के प्रतिष्ठित समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि को रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मिशन केवल एक समुद्री यात्रा नहीं, बल्कि भारत सरकार के 'महासागर' (MAHASAGAR) विजन के तहत पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा और विकास के साझा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम है।

​इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत आईएनएस सागरध्वनि 1962-65 के दौरान आईएनएस कृष्णा द्वारा तय किए गए ऐतिहासिक समुद्री रास्तों पर दोबारा सफर करेगा। यह पोत हिंद महासागर रिम के आठ प्रमुख देशों—ओमान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और म्यांमार—के साथ वैज्ञानिक संबंधों को मजबूत करेगा। इस मिशन की शुरुआत मालदीव के साथ सहयोगी समुद्र विज्ञान अध्ययनों से हो रही है, जिससे इन देशों के वैज्ञानिकों के बीच संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का नया रास्ता खुलेगा। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह सफर भारत की 'मैत्री' पहल (मरीन एंड एलाइड इंटरडिसिप्लिनरी ट्रेनिंग एंड रिसर्च इनिशिएटिव) का एक अहम हिस्सा है।

​डीआरडीओ की नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (एनपीओएल) द्वारा डिजाइन किया गया और जीआरएसई द्वारा निर्मित यह जहाज समुद्री ध्वनिक अनुसंधान में भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। मिशन के दौरान यह पोत समुद्र के भीतर की गतिविधियों और महत्वपूर्ण ध्वनिक डेटा को इकट्ठा करेगा, जो भारतीय नौसेना के लिए 'अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस' (यूडीए) हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगा। 1994 में कमीशन किया गया आईएनएस सागरध्वनि पिछले तीन दशकों से भारत की समुद्री वैज्ञानिक क्षमताओं की रीढ़ बना हुआ है और अब यह सागर मैत्री मिशन के जरिए पड़ोसी मुल्कों के साथ तकनीक, विश्वास और सहयोग का एक मजबूत पुल तैयार करने निकल पड़ा है।

विनोबा भावे विश्वविद्यालय में गूंजेगा स्वामी विवेकानंद के विचारों का शंखनाद

विनोबा भावे विश्वविद्यालय में गूंजेगा स्वामी विवेकानंद के विचारों का शंखनाद


19 जनवरी को रांची रामकृष्ण मिशन के सचिव देंगे चरित्र निर्माण का मंत्र

हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय का स्वामी विवेकानंद सभागार आगामी 19 जनवरी को आध्यात्म, राष्ट्रभक्ति और युवा चेतना के ओजस्वी विचारों से गुंजायमान होने वाला है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वामी विवेकानंद जयंती समारोह को भव्य और प्रेरणादायक बनाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है, जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर रांची मोराबादी स्थित रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी भवेशानंद जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर चंद्र भूषण शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न होगा, जिनकी विशेष पहल पर हजारीबाग के विद्यार्थियों को रामकृष्ण मिशन के सानिध्य में जीवन दर्शन सीखने का यह दुर्लभ अवसर मिल रहा है।

​राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने आयोजन की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए बताया कि यद्यपि स्वामी जी की जयंती 12 जनवरी को मनाई जाती है, लेकिन उस दिन रामकृष्ण मिशन में व्यस्तता के चलते संन्यासियों का आगमन संभव नहीं हो पाता। कुलपति की यह प्रबल इच्छा थी कि विश्वविद्यालय के छात्र सीधे किसी विद्वान संन्यासी के मुख से स्वामी जी के आदर्शों को सुनें और आत्मसात करें, इसी उद्देश्य से यह विशेष आयोजन 19 जनवरी को पूर्वाहन 11 बजे निर्धारित किया गया है। इस गरिमामयी समारोह में 'विकसित भारत' की संकल्पना और भारतीय दृष्टिकोण में स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता पर गहन मंथन किया जाएगा।

​समारोह का एक और प्रमुख आकर्षण हजारीबाग विवेकानंद युवा महामंडल के सहयोग से आयोजित होने वाला चरित्र निर्माण विषयक प्रशिक्षण और प्रश्नोत्तरी सत्र होगा, जो युवाओं को अनुशासित जीवन जीने की कला सिखाएगा। कार्यक्रम के समापन बेला में युवा सप्ताह के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में आयोजित भाषण प्रतियोगिताओं के प्रतिभाशाली विजेताओं को मंच पर पुरस्कृत कर उनका मान बढ़ाया जाएगा। आयोजन समिति के संयोजक डॉ. सुबोध कुमार सिंह 'शिवगीत' और यूसेट के प्राध्यापक डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने विश्वविद्यालय परिवार समेत सभी शिक्षण प्रेमियों को इस ज्ञानयज्ञ में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया है।

कोलियरी राष्ट्रीयकरण के नायक थे पूर्व सीएम बिन्देश्वरी दुबे-जय प्रकाश भाई पटेल, कांग्रेस कार्यालय में मनाई गई 102वीं जयंती

 

कोलियरी राष्ट्रीयकरण के नायक थे पूर्व सीएम बिन्देश्वरी दुबे-


जय प्रकाश भाई पटेल, कांग्रेस कार्यालय में मनाई गई 102वीं जयंती

हजारीबाग: जिला कांग्रेस कार्यालय कृष्ण बल्लभ आश्रम में स्वतंत्रता सेनानी और संयुक्त बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बिन्देश्वरी दुबे की 102वीं जयंती पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कांग्रेस जनों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर और माल्यार्पण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मंत्री सह जिला अध्यक्ष जय प्रकाश भाई पटेल ने बिन्देश्वरी दुबे के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिन्देश्वरी दुबे न केवल एक कुशल भारतीय राजनेता और प्रशासक थे, बल्कि एक जुझारू स्वतंत्रता सेनानी और मजदूरों की आवाज बुलंद करने वाले सशक्त श्रमिक नेता भी थे।

​जय प्रकाश भाई पटेल ने अपने संबोधन में विशेष रूप से रेखांकित किया कि देश की कोलियरीयों के राष्ट्रीयकरण में बिन्देश्वरी दुबे का योगदान ऐतिहासिक और अविस्मरणीय रहा है। उन्होंने बताया कि दुबे संयुक्त बिहार के मुख्यमंत्री रहने के साथ-साथ केंद्र सरकार में कानून, न्याय, श्रम एवं रोजगार विभाग के मंत्री भी रहे। उनकी राजनीतिक सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष पद पर भी आसीन रहे। सातवीं लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रहने के अलावा वे छह बार विधानसभा के सदस्य चुने गए और कई बार संयुक्त बिहार तथा झारखंड सरकार के महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।

​इस जयंती समारोह में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिरकत की और अपने नेता को याद किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला कांग्रेस के मीडिया अध्यक्ष निसार खान, वरिष्ठ कांग्रेसी विरेन्द्र कुमार सिंह, प्रदेश सचिव बिनोद सिंह, युवा कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद जाविर, सेवादल अध्यक्ष गुड्डू सिंह और नगर अध्यक्ष परवेज अहमद शामिल थे। इसके अलावा जिला उपाध्यक्ष कृष्णदेव प्रसाद सिंह, सलीम रजा, मिथिलेश दुबे, जिला महासचिव दिलीप कुमार रवि, बाबर अंसारी, रघु जायसवाल, सदरूल होदा, विजय कुमार सिंह, एनए चौधरी, निसार अहमद भोला, सैयद अशरफ अली, अनिल कुमार भुईंया, मुस्ताक अंसारी, चन्द्र शेखर आजाद, उदय पाण्डेय, अर्जुन नायक, गिरजा शंकर, बालेश्वर सिंह, विवेक कुमार, मनोज पासवान, संतोष रजवार, छोटी राम, रंजीत यादव, अजित कुमार गुप्ता, अर्जुन सिंह और मुगेश्वर प्रसाद चौधरी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस जनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

विभावि में गूंजा स्वामी विवेकानंद का संदेश, दीक्षारम्भ में विशेषज्ञों ने कहा- अध्यात्म और आत्म-समीक्षा से ही गढ़ी जाएगी विकसित भारत की नींव

 

विभावि में गूंजा स्वामी विवेकानंद का संदेश, दीक्षारम्भ में विशेषज्ञों ने कहा- अध्यात्म और आत्म-समीक्षा से ही गढ़ी जाएगी विकसित भारत की नींव


हजारीबाग:​विनोबा भावे विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग में स्वामी विवेकानंद की जयंती और नव-नामांकित छात्रों के लिए आयोजित दीक्षारम्भ कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर अकादमिक सत्र और आध्यात्मिक चिंतन का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. किशोर कुमार गुप्ता और विभागीय शिक्षकों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं पुष्पार्चन कर किया, जिसके बाद नए सत्र के छात्रों और अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया।

​समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पधारे अभिषेक कुमार ने स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान और एमसीए के छात्रों को जीवन प्रबंधन के सूत्र दिए। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में विकसित भारत की इबारत यही युवा पीढ़ी लिखेगी, लेकिन इसके लिए उन्हें अध्यात्म से जुड़ना होगा। उन्होंने छात्रों को 'आत्मबोध' और 'तत्वबोध' का मंत्र देते हुए समझाया कि प्रत्येक सुबह को नया जन्म मानकर दिनचर्या की योजना बनानी चाहिए और रात को सोने से पहले उसे मृत्यु मानकर दिनभर के कर्मों की निष्पक्ष आत्म-समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यही साधना युवाओं को आत्मसंयमी और आत्मविश्वास से परिपूर्ण बनाएगी।

​इस मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. किशोर कुमार गुप्ता ने दीक्षारम्भ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यूजीसी द्वारा निर्धारित यह एक नियोजित कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें उन क्रियाकलापों के प्रति जागरूक करना है जो उनके समग्र व्यक्तित्व निर्माण में सहायक हों, साथ ही उन्हें विषय से संबंधित संस्थानों का भ्रमण भी कराया जाता है। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन सहायक शिक्षिका मोहसिना और कपिल ने किया, जबकि डॉ. राजेंद्र मिस्त्री ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। आयोजन को सफल बनाने में संजू, प्रभात, ईशा, अर्पिता, राज और दिलीप की भूमिका सराहनीय रही।

रोजगार की दिशा में हजारीबाग के युवाओं की ऊंची उड़ान, अमीन ट्रेनिंग में महादेव सर संस्थान के सभी 23 विद्यार्थियों ने लहराया सफलता का परचम


 

रोजगार की दिशा में हजारीबाग के युवाओं की ऊंची उड़ान, अमीन ट्रेनिंग में महादेव सर संस्थान के सभी 23 विद्यार्थियों ने लहराया सफलता का परचम

हजारीबाग: शहर के कोरा रोड स्थित महादेव सर अमीन ट्रेनिंग सेंटर ने एक बार फिर कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। संस्थान के संस्थापक महादेव कुमार साव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बताया कि 10 जनवरी 2026 को घोषित हुए परीक्षा परिणामों में संस्थान के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस परीक्षा में कुल 23 विद्यार्थी शामिल हुए थे और सभी ने अपनी मेहनत और उचित मार्गदर्शन के दम पर सफलता हासिल की है। महादेव डिग्री कॉलेज चतरा और झारखंड राज्य खुला विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त इस संस्थान ने हजारीबाग में अमीन और लैंड सर्वेयर की ट्रेनिंग में एक नया मानक स्थापित किया है। संस्थापक ने उत्तीर्ण सभी छात्रों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि यह परिणाम संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रमाण है।

​प्रेस वार्ता के दौरान संस्थान की विश्वसनीयता और रोजगार के अवसरों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह केंद्र भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और इसका पंजीकरण संख्या SCPR068 है। यहाँ शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों और किसानों को भू-मापक, सर्वे नियम और भूमि चकबंदी का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। संस्थान में दो महीने, तीन महीने और एक साल के डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध हैं, जो छात्रों को अमीन बनने का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं। यहाँ से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवा न केवल अपना स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं, बल्कि सरकारी और गैर-सरकारी विभागों जैसे राजस्व विभाग, वन विभाग, अंचल अमीन, और सीसीएल, बीसीसीएल, एनटीपीसी जैसी बड़ी परियोजनाओं में भी सेवा दे सकते हैं। संस्थान का दावा है कि उनके यहाँ से प्रशिक्षित सैकड़ों छात्र आज हजारीबाग, रांची और दुमका समेत कई जिलों में बंदोबस्त कार्यालयों में अमीन के पद पर कार्यरत हैं।

​विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने हजारीबाग में बड़कागांव रोड और कोरा पोस्ट ऑफिस के पास अपनी शाखाओं का विस्तार किया है। यहाँ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाई की व्यवस्था है, साथ ही मेधावी और जरूरतमंद छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। संस्थान आधुनिक तरीके से जमीन बंटवारा और मापी का प्रशिक्षण देता है और प्लेसमेंट की गारंटी के साथ सीमित सीटों पर नामांकन लेता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जो युवा हुनरमंद बनकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं, उनके लिए अमीन ट्रेनिंग एक बेहतरीन विकल्प है, जहाँ रविवार को विशेष कक्षाओं की भी व्यवस्था है ताकि कामकाजी लोग भी इसका लाभ उठा सकें।

दिशोम गुरु की 82वीं जयंती पर भावुक हुए सीएम हेमंत: 'चेशायर होम' के बच्चों संग साझा की खुशियां, कहा- पिता के संघर्ष ने ही हमें राह दिखाई

 दिशोम गुरु की 82वीं जयंती पर भावुक हुए सीएम हेमंत: 'चेशायर होम' के बच्चों संग साझा की खुशियां, कहा- पिता के संघर्ष ने ही हमें राह दिखाई





रांची | झारखण्ड के निर्माता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने एक अनुकरणीय पहल करते हुए अपना समय 'चेशायर होम' के विशेष बच्चों के साथ बिताया। सियासी शोर-शराबे से दूर, मुख्यमंत्री ने दिव्यांग बच्चों के बीच पहुंचकर न केवल खुशियां बांटीं, बल्कि इस पल को अपने जीवन का एक भावुक क्षण बताया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि यह उनके लिए पहला ऐसा अवसर है जब वे बाबा दिशोम गुरु की जयंती उनके बिना मना रहे हैं, लेकिन गुरुजी के आदर्श और उनके द्वारा दिखाया गया संघर्ष का रास्ता ही आज भी उनका और पूरे राज्य का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन कमजोर, पिछड़े और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया, और उन्ही के त्याग की बदौलत आज झारखण्ड एक अलग राज्य के रूप में खड़ा है।

चेशायर होम के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में आत्मीयता और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने दिव्यांग बच्चों से न केवल मुलाकात की, बल्कि उनके साथ बैठकर काफी देर तक बातें भी कीं। इस दौरान उन्होंने बच्चों के बीच कंबल और अन्य आवश्यक सामग्रियों का वितरण किया। मुख्यमंत्री ने चेशायर होम के साथ अपने पुराने और भावनात्मक जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि वे अक्सर यहाँ आते रहते हैं और यहाँ के बच्चों की प्रतिभा देखकर उन्हें नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों में गजब का आत्मविश्वास है और इनकी शक्ति किसी भी मायने में दूसरों से कम नहीं है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने चेशायर होम के संचालकों और सेवा में लगे सदस्यों के समर्पण की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यहाँ के लोग जिस त्याग और सेवा भाव से काम कर रहे हैं, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। मुख्यमंत्री ने संस्था को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने दिव्यांगजन कल्याण के क्षेत्र में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को और गति देने की बात कही। विधायक कल्पना सोरेन ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन किया और संस्था के सेवा कार्यों को समाज का दर्पण बताया। अंत में मुख्यमंत्री ने सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

दारू पुलिस का शिकंजा, अलग-अलग मामलों में कविलासी के दो आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

 

दारू पुलिस का शिकंजा, अलग-अलग मामलों में कविलासी के दो आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल


हजारीबाग/दारू। जिले में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से दारू पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए दो अलग-अलग मामलों में नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। दारू थाना प्रभारी इकबाल हुसैन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कविलासी गांव में दबिश दी और कानून के शिकंजे से बच रहे दो आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्तों में कविलासी निवासी मोहम्मद हकीम का पुत्र ताज मोहम्मद और रकीब मियां का पुत्र मोहम्मद साजिद शामिल है।

​ताज मोहम्मद को दारू थाना कांड संख्या 02/26 में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है, जबकि मोहम्मद साजिद की गिरफ्तारी कांड संख्या 03/26 के तहत की गई है। दोनों ही मामलों में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कागजी प्रक्रिया पूरी की और गिरफ्तार अभियुक्तों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में असामाजिक तत्वों के बीच हड़कंप है और प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून तोड़ने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

दिशोम गुरु के जन्मदिन पर छात्रों को मिलेगी बड़ी सौगात, 11 जनवरी को खेलगांव में 'गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड' पर सीएम हेमंत सोरेन करेंगे सीधा संवाद

दिशोम गुरु के जन्मदिन पर छात्रों को मिलेगी बड़ी सौगात, 11 जनवरी को खेलगांव में 'गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड' पर सीएम हेमंत सोरेन करेंगे सीधा संवाद


रांची। झारखंड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जन्म दिवस को इस वर्ष बेहद खास और यादगार तरीके से मनाने की तैयारी की जा रही है। आगामी 11 जनवरी 2026 को रांची के खेलगांव स्थित टाना भगत स्टेडियम में एक भव्य 'गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे और 10वीं से 12वीं कक्षा में अध्ययनरत हजारों छात्र-छात्राओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करेंगे। यह कार्यक्रम राज्य के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम के सफल और सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर रांची के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री ने प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कलेक्ट्रेट में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले छात्रों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, पार्किंग और मंच संचालन से लेकर छात्रों के बैठने, पेयजल, शौचालय और सफाई तक की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया।

उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने की हिदायत दी है ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। विशेष रूप से विद्यार्थियों के सुरक्षित आगमन और निकासी, पंजीकरण प्रक्रिया और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर अधिकारियों को अलर्ट किया गया है। बैठक में उप विकास आयुक्त, पुलिस अधीक्षक (नगर व यातायात), जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित जिले के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे जिन्होंने समय रहते सभी तैयारियां पूर्ण करने का आश्वासन दिया।


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