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Editor: Naresh Prasad Soni
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श्रद्धापूर्वक मनाई गई राष्ट्रनायक नेताजी की जयंती

यूनियन क्लब के ऐतिहासिक केशव हॉल में गूंजा कदम-कदम बढ़ाए जा

श्रद्धापूर्वक मनाई गई राष्ट्रनायक नेताजी की जयंती

हजारीबाग: भारतीय स्वाधीनता संग्राम के देदीप्यमान नक्षत्र और अदम्य साहस के प्रतीक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती शुक्रवार को हजारीबाग के ऐतिहासिक यूनियन क्लब एंड लाइब्रेरी के केशव हॉल में अत्यंत गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाई गई। बंगाली एसोसिएशन हजारीबाग और यूनियन क्लब एंड लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गौरवमयी समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों ने शिरकत कर नेताजी के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा निवेदित की। कार्यक्रम का शुभारंभ बंगाली एसोसिएशन के सचिव सोमनाथ कुनार, पूजा समिति के सचिव रजत नाग और हिमांशु भट्टाचार्य द्वारा नेताजी के चित्र पर संयुक्त रूप से माल्यार्पण कर किया गया। इसके उपरांत उपस्थित विशिष्ट जनों और गणमान्य नागरिकों ने बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर देश की आजादी के लिए उनके सर्वस्व त्याग को स्मरण किया।


समारोह की महत्ता उस समय और बढ़ गई जब संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव के तकनीकी सलाहकार अमिताभ मुखर्जी, अन्नदा उच्च विद्यालय के प्रधानाचार्य दशरथ महतो और पूर्व पार्षद निवेदिता राय ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सुशोभित किया। श्रद्धांजलि सभा के दौरान पूरा हॉल राष्ट्रभक्ति के गीतों और गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा। मधुच्छंदा मुखर्जी के नेतृत्व में उपस्थित जनसमूह ने जब नेताजी का प्रिय गीत 'कदम-कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा' सामूहिक स्वर में गाया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का हृदय देशभक्ति की हिलोरों से भर उठा। 'जय हिंद', 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारों ने न केवल वातावरण को ऊर्जामय बना दिया, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के उस गौरवशाली कालखंड की स्मृतियों को भी जीवंत कर दिया।

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में बंगाली एसोसिएशन और यूनियन क्लब के वरिष्ठ पदाधिकारी विकास चौधरी, रूपा चटर्जी, सुतानु राय, चिन्मय सरकार सहित ध्रुव चक्रवर्ती, उज्जवल आयकत, आशीष चक्रवर्ती और सुजीत भट्टाचार्य जैसे कई गणमान्य सदस्य शामिल थे। कार्यक्रम में महिला शक्ति की भी व्यापक सहभागिता रही, जिसमें बर्षा दे, दोला गुहा, सुपर्णा सरकार और अन्य महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वक्ताओं ने नेताजी के विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए कहा कि उनका शौर्य और अनुशासन आज भी युवाओं के लिए पथ-प्रदर्शक है। इस आयोजन ने शहर में एक बार फिर राष्ट्रीय चेतना का संचार किया और नई पीढ़ी को देश के महानायकों के संघर्ष से परिचित कराया।


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