हजारीबाग में 'ममता' के नाटक का तीन घंटे में पटाक्षेप, गरीबी से हारकर मां ने ही सौंपा था जिगर का टुकड़ा, पुलिस की तत्परता ने खोला 'चोरी' का गहरा राज
हजारीबाग। जिले के लोहसिंघना थाना क्षेत्र अंतर्गत लक्ष्मी पेट्रोल पंप के समीप से एक नवजात शिशु की चोरी की जिस सनसनीखेज घटना ने पूरे शहर को उद्वेलित कर दिया था, हजारीबाग पुलिस ने महज तीन घंटे के भीतर उस रहस्य पर से पर्दा उठाते हुए न केवल बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया, बल्कि इस पूरे प्रकरण के पीछे छिपी एक मां की विवशता और 'मनगढ़ंत' कहानी का भी अंततः पटाक्षेप कर दिया। गणतंत्र दिवस की संध्या बेला में पुलिस की इस त्वरित और संवेदनशील कार्यप्रणाली ने एक ओर जहां खाकी की साख बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने समाज के सामने गरीबी और लाचारी की एक मर्मस्पर्शी तस्वीर भी पेश की है।
घटनाक्रम के अनुसार, 26 जनवरी की शाम लगभग साढ़े चार बजे पुलिस को सूचना मिली थी कि एक मां की गोद से उसका तीन दिन का नवजात शिशु चोरी हो गया है। मामले की गंभीरता और जनभावनाओं के ज्वार को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। पुलिस की यह टीम बिजली की गति से सक्रिय हुई और तकनीकी अनुसंधान तथा खुफिया तंत्र के सहारे महज तीन घंटों के भीतर जिले के चौपारण थाना क्षेत्र स्थित ग्राम करमा तक जा पहुंची, जहां से नवजात को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। किंतु, जैसे ही पुलिस ने जांच की परतें उधेड़नी शुरू कीं, सामने आया सच किसी फिल्मी पटकथा से कम चौंकाने वाला नहीं था।
अनुसंधान में यह तथ्य प्रकाश में आया कि नवजात की चोरी का शोर मचाने वाली मां बेबी देवी ने स्वयं ही गरीबी और अभावों से हारकर अपने जिगर के टुकड़े का सौदा किया था। दरअसल, बेबी देवी के पूर्व से पांच बच्चे हैं और उनके पति मुंबई में मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ऐसी विषम आर्थिक परिस्थितियों में छठे बच्चे का लालन-पालन करना उनके लिए संभव नहीं था। इसी विवशता के चलते पति की सहमति से उन्होंने अपने नवजात शिशु को अपनी सहेली की मौसेरी बहन मालती देवी को स्वेच्छा से सौंप दिया था। किंतु, ससुराल वालों के प्रश्नों और समाज के 'लोक-लाज' के भय ने उन्हें झूठ का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया, जिसके बाद उन्होंने बच्चा चोरी की यह मनगढ़ंत कहानी रच डाली। अंततः पुलिस ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बरामद नवजात को परिजनों की उपस्थिति में पुनः उसकी मां बेबी देवी को सुपुर्द कर दिया, जिसके साथ ही इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे का सुखद किंतु विचारणीय अंत हो गया।
