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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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वेद-पुराणों से इतर जनजातीय भाषाओं में भी स्पंदित है भारतीय ज्ञान परंपरा, जेन-जी की 'स्लैंग' शब्दावली पर चिंता के बीच विभावि में राष्ट्रीय समागम संपन्न

वेद-पुराणों से इतर जनजातीय भाषाओं में भी स्पंदित है भारतीय ज्ञान परंपरा, जेन-जी की 'स्लैंग' शब्दावली पर चिंता के बीच विभावि में राष्ट्रीय समागम संपन्न

हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के स्वा



मी विवेकानंद सभागार में विगत तीन दिनों से चल रहे वैचारिक मंथन का समापन शनिवार को एक वृहद संकल्प और भाषाई चेतना के साथ हुआ। तीन-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक भाषाओं के संरक्षण और आधुनिक युवा पीढ़ी द्वारा प्रयोग की जा रही भाषा शैली पर गंभीर विमर्श किया गया। समापन सत्र में यह स्वर प्रमुखता से उभरा कि भारतीय प्रज्ञा केवल प्राचीन संस्कृत ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वनवासियों और जनजातियों की मौखिक परंपराओं में भी उतनी ही तीव्रता से धड़क रही है।

​समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) की पूर्व अध्यक्ष प्रो. सरोज शर्मा ने भाषा के दार्शनिक और वैज्ञानिक पक्ष को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाषा में शब्द, दर्शन और वैज्ञानिकता का प्रवाह एक साथ चलता है। उन्होंने भारतीय मनीषा में 'शब्द-ब्रह्म' की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि शब्दों में नाद होता है और नाद में ही ब्रह्म का वास है, यहाँ तक कि मौन की भी अपनी एक सशक्त भाषा होती है। वर्तमान दौर में 'जेन-जी' पीढ़ी द्वारा प्रयुक्त की जा रही 'स्लैंग' भाषा पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की और इसे भाषाई अवमूल्यन का संकेत माना। प्रो. शर्मा ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी अभिव्यक्ति को परिष्कृत करें, क्योंकि भाषा की शुचिता ही संस्कृति का आधार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाषा को लेकर होने वाले विवादों के मूल में अक्सर राजनीति होती है, जबकि भारत में संस्कृतनिष्ठ भाषा, दक्षिण की द्रविड़ भाषाएं और जनजातीय बोलियां सह-अस्तित्व के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करती रही हैं।

​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षितिज को विस्तारित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का ज्ञान केवल वेद और पुराणों के पृष्ठों में ही नहीं सिमटा है, अपितु यह देश की समृद्ध जनजातीय भाषाओं में भी अंतर्निहित है। कुलपति ने केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) के प्रति आभार जताते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में विभावि और संस्थान मिलकर लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम उठाएंगे।

​इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) के निदेशक प्रो. शैलेंद्र मोहन ने भाषाई तकनीक और संरक्षण के प्रयासों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने घोषणा की कि देश की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं और उनके संरक्षण के लिए संस्थान कटिबद्ध है। प्रो. मोहन ने जानकारी दी कि भारत की 88 जनजातीय भाषाओं पर 'प्रवेशिका' तैयार कर ली गई है और 70 लुप्तप्राय भाषाओं के लिए 'भाषा संचिका' का निर्माण किया गया है। उन्होंने 'भाषा सागर' ऐप और 'भारत वाणी' जैसे डिजिटल उद्यमों का उल्लेख करते हुए बताया कि तकनीक के माध्यम से अब किसी भी भारतीय भाषा को सीखा जा सकता है। वर्तमान में 75 भारतीय भाषाओं में शब्दकोश उपलब्ध हैं और बहुभाषी शब्दकोश निर्माण की प्रक्रिया युद्धस्तर पर जारी है।

​इससे पूर्व, भारतीय भाषा समिति (भारत सरकार) के शैक्षणिक समन्वयक चंदन श्रीवास्तव ने लोक भाषा और मातृभाषा के संवर्धन पर चल रहे सरकारी प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की। संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. विनोद रंजन ने तीन दिनों के बौद्धिक विमर्श का सार प्रस्तुत करते हुए प्रतिवेदन पढ़ा। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी में कुल 152 शोध आलेख समर्पित किए गए, जिनका मूल निष्कर्ष यही था कि 'विजन 2047' की संकल्पना तभी साकार होगी जब हम अपनी भाषाई जड़ों को सिंचित करेंगे।

​समारोह के सांस्कृतिक पक्ष में शिक्षाशास्त्र विभाग की डॉ. विनीता बांकीरा एवं डॉ. भारती सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत झूमर नृत्य ने अतिथियों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंतिम दिन आर्यभट्ट सभागार में एक विशेष तकनीकी सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें मुंडा जनजाति पर केंद्रित एक लघु शोध फिल्म का प्रदर्शन किया गया। जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा निर्मित और डॉ. गंगानाथ झा के शोध पर आधारित इस फिल्म में पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा द्वारा संस्कृति की विशद व्याख्या और मुंडा जनजाति के ऐतिहासिक एवं सूक्ष्म पहलुओं को दर्शाया गया, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

​समारोह का स्वागत संबोधन कुलसचिव डॉ. प्रणिता ने दिया, जबकि मंच पर समाज विज्ञान के पूर्व संकायाध्यक्ष डॉ. सादिक रज्जाक भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलानुशासक और संगोष्ठी संयोजक प्रो. मिथिलेश कुमार सिंह ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए घोषणा की कि संगोष्ठी में आए सभी आलेखों को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित कर उन्हें अकादमिक जगत को समर्पित किया जाएगा। मंच संचालन का दायित्व यूसेट के डॉ. अरुण कुमार मिश्रा एवं हिंदी विभाग के डॉ. सुनील कुमार दुबे ने गरिमामय ढंग से निभाया। इस बौद्धिक महाकुंभ में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि अपनी भाषाओं के प्रति अनुराग अभी भी जनमानस में जीवित है।

हजारीबाग ने साधा स्वस्थ समाज का लक्ष्य: टीबी मुक्त भारत अभियान में तेजी और स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान के माध्यम से मिटेगा बीमारी का दंश

हजारीबाग ने साधा स्वस्थ समाज का लक्ष्य,


टीबी मुक्त भारत अभियान में तेजी और स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान के माध्यम से मिटेगा बीमारी का दंश

हजारीबाग: जिले को रोगों के अभिशाप से मुक्त कर एक स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में जिला प्रशासन ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह के मार्गदर्शन में समाहरणालय सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान उपविकास आयुक्त श्रीमती रिया सिंह ने जिला टीबी फोरम की गतिविधियों की व्यापक समीक्षा की। इस विमर्श का मुख्य केंद्र वर्ष 2026 तक 'टीबी मुक्त भारत' के संकल्प को जिले में शत-प्रतिशत धरातल पर उतारना रहा। बैठक में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. आर.के. जायसवाल ने वर्ष 2025 के दौरान यक्ष्मा उन्मूलन की दिशा में हुई प्रगति का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर उपविकास आयुक्त ने संतोष व्यक्त करते हुए आगामी रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया।

स्वास्थ्य सेवाओं के इसी सुदृढ़ीकरण की कड़ी में प्रशासन ने 'स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान 2026' की घोषणा की है, जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी से प्रारंभ होकर 13 फरवरी तक जिले के प्रत्येक ग्राम में संचालित होगा। इसके पश्चात 9 मार्च से 23 मार्च 2026 तक द्वितीय चक्र के तहत सघन 'कुष्ठ रोगी खोज अभियान' चलाया जाएगा। इस अभियान की विशेषता यह है कि स्वास्थ्य कर्मी उन सुदूर गांवों में भी घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे जहाँ पिछले सात वर्षों से कोई कुष्ठ रोगी चिन्हित नहीं हुआ है। उपविकास आयुक्त ने स्पष्ट संदेश दिया कि कुष्ठ रोग कोई छुआछूत की व्याधि नहीं है, बल्कि नियमित चिकित्सकीय परामर्श और निःशुल्क सरकारी दवाओं के सेवन से यह पूर्णतः साध्य है।

रोग उन्मूलन के इस महाभियान में जनभागीदारी को अनिवार्य बताते हुए जिला प्रशासन ने ग्राम गोष्ठियों, विद्यालयों और आंगनबाड़ियों के माध्यम से शपथ ग्रहण एवं जागरूकता कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य न केवल रोगियों की शीघ्र पहचान कर उन्हें उपचार उपलब्ध कराना है, बल्कि समाज में कुष्ठ रोगियों के प्रति व्याप्त भेदभाव और भ्रांतियों को जड़ से समाप्त करना भी है। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क जांच और औषधि की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है, ताकि जिले का कोई भी नागरिक उचित उपचार से वंचित न रहे और हजारीबाग स्वास्थ्य के मानचित्र पर एक आदर्श जिले के रूप में उभर सके।


जन-सरोकार की कसौटी पर खरा उतरने की कवायद,विधायक जनसेवा कार्यालय में प्रदीप प्रसाद ने सुनीं फरियाद, त्वरित निष्पादन का दिया 'भरोसा'

जन-सरोकार की कसौटी पर खरा उतरने की कवायद

,विधायक जनसेवा कार्यालय में प्रदीप प्रसाद ने सुनीं फरियाद, त्वरित निष्पादन का दिया 'भरोसा'

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड| हजारीबाग

हजारीबाग के राजनीतिक पटल पर जनसेवा को सर्वोपरि मानते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने बुधवार को अपने जनसेवा कार्यालय को जनता की अदालत में तब्दील कर दिया। लोकतंत्र की मूल आत्मा 'संवाद' को जीवंत करते हुए उन्होंने सुदूर ग्रामीण अंचलों और शहरी क्षेत्रों से आए आम नागरिकों, सामाजिक प्रतिनिधियों और फरियादियों से आत्मीय मुलाकात की। यह केवल एक रस्मी मुलाकात नहीं थी, बल्कि जन-आकांक्षाओं और जमीनी हकीकतों से रूबरू होने का एक संजीदा प्रयास था, जहां विधायक ने प्रत्येक आगंतुक की पीड़ा को पूरी संवेदनशीलता के साथ आत्मसात किया।

इस वृहद जन-संवाद कार्यक्रम के दौरान समस्याओं का दायरा अत्यंत व्यापक रहा। शिक्षा के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं की लचर स्थिति और जर्जर सड़कों से लेकर पेयजल संकट, बिजली की आंख-मिचौली, रोजगार की विकटता और पेंशन की विसंगतियों तक—हर तरह की अर्जियां विधायक के समक्ष रखी गईं। विधायक की कार्यशैली में गजब की तत्परता देखने को मिली; कई गंभीर और तात्कालिक प्रकृति के मामलों में उन्होंने मौके पर ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को दूरभाष के माध्यम से कड़े निर्देश जारी किए, जबकि नीतिगत और जटिल समस्याओं के लिए समयबद्ध निराकरण का ठोस आश्वासन दिया। प्रशासनिक शिथिलता के प्रति उनका रुख अत्यंत सख्त नजर आया।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने उपस्थित जनसमूह को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट शब्दों में दोहराया कि जनविश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है और जनता के हितों के साथ किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने हजारीबाग विधानसभा क्षेत्र के संतुलित और समग्र विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करते हुए कहा कि वे अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सुविधा पहुँचाने के लिए कृतसंकल्पित हैं। वहां उपस्थित नागरिकों ने अपने जनप्रतिनिधि की इस सहजता, सुलभता और संवेदनशीलता की मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यालय से निकलते वक्त फरियादियों के चेहरों पर यह संतोष स्पष्ट था कि उनकी आवाज न केवल सुनी गई है, बल्कि अब उस पर अमल भी होगा।

हजारीबाग जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्वाचन कार्यों की समीक्षा को लेकर किया बैठक


हजारीबाग जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्वाचन कार्यों की समीक्षा को लेकर किया बैठक

नरेश सोनी विशेष संवाददाता 

हजारीबाग: जिला निर्वाचन पदाधिकारी  शशि प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को समाहरणालय सभागार में सभी ईआरओ एवं एईआरओ के साथ निर्वाचन कार्यों की समीक्षा हेतु बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप निर्वाचन पदाधिकारी  मां देव प्रिया सहित बरही एवं बरकट्ठा के निर्वाचन पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्सुधता निश्चित करना एवं आगामी निर्वाचन कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था।

बैठक के दौरान जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा मतदाता सूची में चिह्नित धुंधली एवं अमानवीय (अस्पष्ट) फोटोग्राफ के सुधार पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे सभी मामलों में शत-प्रतिशत प्रपत्र-8 भरवाने की कार्रवाई दो दिनों के भीतर पूर्ण की जाए, ताकि मतदाता सूची त्रुटिरहित एवं अद्यतन बनी रहे।

इसके अतिरिक्त वर्ष 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान मतदाता सूची में भौतिक रूप से मिलान किए गए डेटा को अद्यतन करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि पुराने एवं वर्तमान अभिलेखों के मिलान से मतदाता विवरण की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी, जो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन के लिए आवश्यक है।

बैठक में नए मतदान केंद्रों के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। इस संबंध में निर्देश दिया गया कि यदि कोई मतदान केंद्र निजी भवन या निजी संस्थान में प्रस्तावित है, तो संबंधित संस्थान से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अनिवार्य रूप से प्राप्त किया जाए।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्वाचन आयोग के दिशा-नि



र्देशों के अनुरूप समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य संपादित करने का निर्देश देते हुए मतदाता सूची की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया।

अमृतसर से आए रागी जत्थे के शबद-कीर्तन से निहाल हुई संगत, बोले सो निहाल के जयकारों से गूंजा हजारीबाग

अमृतसर से आए रागी जत्थे के शबद-कीर्तन से निहाल हुई संगत, बोले सो निहाल के जयकारों से गूंजा हजारीबाग

हजारीबाग। सिखों के दसवें गुरु, सरबंस दानी धन-धन साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज का प्रकाश पर्व सोमवार को हजारीबाग में अपार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा परिसर में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि हर तरफ भक्ति का माहौल छा गया। सुबह 11 बजे से सजे दीवान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगत ने हाजिरी लगाई और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस पावन अवसर पर पूरा वातावरण 'वाहेगुरु' के सिमरन और जयकारों से गुंजायमान रहा।

​विशेष दीवान की शुरुआत भाई परमजीत सिंह के मधुर शबद-कीर्तन से हुई, जिसने संगत को भावविभोर कर दिया। इसके उपरांत कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सचखंड हरमंदिर साहिब, दरबार साहिब (अमृतसर) से विशेष रूप से पधारे पंथ-प्रसिद्ध रागी भाई साहिब भाई बलदेव सिंह जी भूलपुर का कीर्तन रहा। उन्होंने अपनी रूहानी आवाज में गुरुवाणी का शबद-कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। अमृतसर से आए रागी जत्थे की वाणी सुनकर उपस्थित श्रद्धालु निहाल हो उठे और पूरा हॉल जो बोले सो निहाल, सत  अकाल के उद्घोष से गूंज उठा।

​दीवान की समाप्ति के बाद दोपहर दो बजे से गुरु का अटूट लंगर श्रद्धापूर्वक बरताया गया। लंगर में सामाजिक समरसता और भाईचारे की अद्भुत मिसाल देखने को मिली, जहां सदर विधायक प्रदीप प्रसाद सहित सभी धर्मों के लोगों और गणमान्य नागरिकों ने एक साथ पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान सेवा और समर्पण की भावना ने सभी का मन मोह लिया। विधायक प्रदीप प्रसाद ने भी मत्था टेका और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

​इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में  गुरु सिंह सभा के सदस्यों का अहम योगदान रहा। सभा के अध्यक्ष स. परमवीर सिंह कालरा, उपाध्यक्ष गुरप्रीत सिंह व नितिन बावा, सचिव आनंद राज सिंह कालरा, कोषाध्यक्ष कुलतार सिंह और जसमीत सिंह ने दीवान में शामिल होने के लिए समस्त संगत का तहे दिल से धन्यवाद किया। कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रभारी रोहित बजाज ने बताया कि गुरु का अटूट लंगर सामूहिक साध संगत की ओर से निरंतर बरताया गया। प्रकाश पर्व के इस आयोजन ने शहर में आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द को और मजबूत किया है।

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