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Editor: Naresh Prasad Soni
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जन-सरोकार की कसौटी पर खरा उतरने की कवायद,विधायक जनसेवा कार्यालय में प्रदीप प्रसाद ने सुनीं फरियाद, त्वरित निष्पादन का दिया 'भरोसा'

जन-सरोकार की कसौटी पर खरा उतरने की कवायद

,विधायक जनसेवा कार्यालय में प्रदीप प्रसाद ने सुनीं फरियाद, त्वरित निष्पादन का दिया 'भरोसा'

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड| हजारीबाग

हजारीबाग के राजनीतिक पटल पर जनसेवा को सर्वोपरि मानते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने बुधवार को अपने जनसेवा कार्यालय को जनता की अदालत में तब्दील कर दिया। लोकतंत्र की मूल आत्मा 'संवाद' को जीवंत करते हुए उन्होंने सुदूर ग्रामीण अंचलों और शहरी क्षेत्रों से आए आम नागरिकों, सामाजिक प्रतिनिधियों और फरियादियों से आत्मीय मुलाकात की। यह केवल एक रस्मी मुलाकात नहीं थी, बल्कि जन-आकांक्षाओं और जमीनी हकीकतों से रूबरू होने का एक संजीदा प्रयास था, जहां विधायक ने प्रत्येक आगंतुक की पीड़ा को पूरी संवेदनशीलता के साथ आत्मसात किया।

इस वृहद जन-संवाद कार्यक्रम के दौरान समस्याओं का दायरा अत्यंत व्यापक रहा। शिक्षा के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं की लचर स्थिति और जर्जर सड़कों से लेकर पेयजल संकट, बिजली की आंख-मिचौली, रोजगार की विकटता और पेंशन की विसंगतियों तक—हर तरह की अर्जियां विधायक के समक्ष रखी गईं। विधायक की कार्यशैली में गजब की तत्परता देखने को मिली; कई गंभीर और तात्कालिक प्रकृति के मामलों में उन्होंने मौके पर ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को दूरभाष के माध्यम से कड़े निर्देश जारी किए, जबकि नीतिगत और जटिल समस्याओं के लिए समयबद्ध निराकरण का ठोस आश्वासन दिया। प्रशासनिक शिथिलता के प्रति उनका रुख अत्यंत सख्त नजर आया।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने उपस्थित जनसमूह को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट शब्दों में दोहराया कि जनविश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है और जनता के हितों के साथ किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने हजारीबाग विधानसभा क्षेत्र के संतुलित और समग्र विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करते हुए कहा कि वे अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सुविधा पहुँचाने के लिए कृतसंकल्पित हैं। वहां उपस्थित नागरिकों ने अपने जनप्रतिनिधि की इस सहजता, सुलभता और संवेदनशीलता की मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यालय से निकलते वक्त फरियादियों के चेहरों पर यह संतोष स्पष्ट था कि उनकी आवाज न केवल सुनी गई है, बल्कि अब उस पर अमल भी होगा।

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