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Editor: Naresh Prasad Soni
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हत्या के प्रयास और गंभीर धाराओं के आरोपी अरबाज और अभिनव पहुंचे सलाखों के पीछे

हत्या के प्रयास और गंभीर धाराओं के आरोपी अरबाज और अभिनव पहुंचे सलाखों के पीछे

हजारीबाग। जिले की मुफस्सिल थाना पुलिस ने कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। पुलिस ने मुफस्सिल थाना कांड संख्या-08/26 के तहत दर्ज मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो प्राथमिक अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपियों में हबीबी नगर निवासी मोहम्मद अरबाज उर्फ बिक्कू (30 वर्ष) और कोर्रा थाना क्षेत्र के ग्रीन सिटी निवासी अभिनव सौरभ (24 वर्ष) शामिल हैं।



मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इनके ठिकानों पर छापेमारी कर इन्हें धर दबोचा। दोनों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 304, 308(3) और 3(5) के तहत गंभीर आरोप दर्ज हैं, जो जानलेवा हमले और सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करते हैं। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आज दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन की अपराधियों के विरुद्ध एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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14 मार्च को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सस्ता और सुलभ न्याय देने के लिए 5000 मुकदमों की सूची तैयार


14 मार्च को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सस्ता और सुलभ न्याय देने के लिए 5000 मुकदमों की सूची तैयार

हजारीबाग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार हजारीबाग जिला न्यायालय परिसर में आगामी 14 मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने इस महाअभियान के तहत अब तक करीब पांच हजार सुलहनीय मामलों को चिन्हित कर लिया है, जिनका निपटारा आपसी सहमति के आधार पर किया जाएगा। इस बाबत प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने सोमवार को एक मैराथन बैठक कर अधिवक्ताओं और न्यायिक पदाधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की और पक्षकारों को त्वरित न्याय दिलाने की रणनीति तैयार की।

​प्रधान जिला जज ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिक से अधिक वादों का निष्पादन कर हजारीबाग को एक नजीर के रूप में पेश किया जाए। अधिवक्ताओं के साथ हुई बैठक में राजकुमार राजू, सुमन कुमार सिंह, विजय कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार सिन्हा, ओमप्रकाश सिंह, राजन चोपड़ा और शालिनी चोपड़ा जैसे वरिष्ठ वकीलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और लोक अदालत को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं, न्यायिक पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्रधान जिला जज ने निर्देश दिया कि जिन मामलों में सुलह की गुंजाइश है, उन पक्षकारों को तत्काल नोटिस भेजकर सूचित किया जाए ताकि समय रहते वे मानसिक तनाव और अदालती चक्करों से मुक्ति पा सकें।

​जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने जानकारी दी कि मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए केवल 14 मार्च का इंतजार नहीं किया जा रहा, बल्कि 15 जनवरी से ही 'प्री-सिटिंग' (पूर्व बैठक) की शुरुआत कर दी गई है। इसके सुखद परिणाम भी दिखने लगे हैं; अब तक 700 से अधिक पक्षकारों को नोटिस भेजे जा चुके हैं और 50 से अधिक मामलों का निष्पादन लोक अदालत से पहले ही किया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य पिछली बार के आंकड़ों को पार करना है, जिसके लिए सिविल कोर्ट प्रशासन पूरी शिद्दत से जुटा हुआ है।

​पक्षकारों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि जुर्माने की राशि जमा करने की व्यवस्था कोर्ट परिसर के भीतर ही की जा सके और लोगों को अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े। सचिव गौरव खुराना ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं। जो भी पक्षकार अपने बाद का सुलहनामा चाहते हैं, वे किसी भी कार्य दिवस में अपने पहचान पत्र की छायाप्रति और आवेदन के साथ संबंधित न्यायालय में संपर्क कर सकते हैं और आपसी सहमति से अपने विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं।

हजारीबाग में 'सुलह से समाधान' की नई पहल: मेडिएशन फॉर नेशन 2.0 के तहत 2500 मुकदमों के निपटारे का लक्ष्य, 23 मामलों में मिली ऐतिहासिक सफलता


हजारीबाग में 'सुलह से समाधान' की नई पहल, मेडिएशन फॉर नेशन 2.0 के तहत 2500 मुकदमों के निपटारे का लक्ष्य, 23 मामलों में मिली ऐतिहासिक सफलता

हजारीबाग: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर हजारीबाग कोर्ट परिसर स्थित न्याय सदन में एक बड़ी न्यायिक पहल की शुरुआत हुई है। प्रधान जिला जज रंजीत कुमार के कुशल मार्गदर्शन में चल रहे विशेष अभियान 'मेडिएशन फॉर नेशन 2.0' ने अदालती बोझ को कम करने और आपसी विवादों को बातचीत से सुलझाने की दिशा में रफ्तार पकड़ ली है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बैनर तले आयोजित इस मुहिम का असर अब धरातल पर दिखने लगा है, जहां वर्षों से कोर्ट के चक्कर काट रहे फरियादियों को त्वरित न्याय मिल रहा है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने अभियान की सफलता साझा करते हुए बताया कि अब तक कुल 23 पुराने और जटिल मामलों का समाधान केवल आपसी सुलह के आधार पर कर लिया गया है। लेकिन यह तो बस शुरुआत है, क्योंकि प्राधिकार ने जिले में लंबित लगभग 2500 ऐसे मामलों को चिन्हित किया है जिनका निपटारा मध्यस्थता के जरिए संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक मामले के सुलझने से उससे जुड़े कई अन्य छोटे-मोटे विवाद भी खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगे, जिससे पक्षकारों को सालों साल कोर्ट के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और उनके धन व समय दोनों की बचत होगी।

इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए एक दर्जन से अधिक प्रशिक्षित मध्यस्थों की टीम पूरी निष्ठा के साथ जुटी हुई है। न्याय सदन के मध्यस्थता केंद्र में वैवाहिक कलह, घरेलू हिंसा, मोटर दुर्घटना दावा, चेक बाउंस (एनआई एक्ट), जमीन विवाद और बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जा रहा है। इसके अलावा उपभोक्ता फोरम, कर्ज और व्यावसायिक विवादों को भी इस दायरे में लाया गया है ताकि समाज में शांति व्यवस्था बनी रहे। सचिव ने आम जनों से अपील की है कि वे अपनी जिद छोड़कर इस वैकल्पिक समाधान प्रक्रिया का हिस्सा बनें और लोक अदालतों व मध्यस्थता के माध्यम से अपने विवादों का स्थायी और सौहार्दपूर्ण अंत करें।


सड़क पर घायलों की मदद करने वाले बनेंगे 'गुड सेमेरिटन' पुलिस-प्रशासन के चक्कर से मिलेगी मुक्ति- संयुक्त जांच अभियान में चालकों को किया गया जागरूक

 

सड़क पर घायलों की मदद करने वाले बनेंगे 'गुड सेमेरिटन' पुलिस-प्रशासन के चक्कर से मिलेगी मुक्ति- संयुक्त जांच अभियान में चालकों को किया गया जागरूक


हजारीबाग: सड़क हादसों में कमी लाने और आम नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से हजारीबाग में एक अनूठी पहल देखने को मिली। जिला परिवहन कार्यालय और यातायात पुलिस ने शहर के प्रमुख चौराहों पर एक विशेष संयुक्त वाहन जांच अभियान चलाया, जो चालान काटने से ज्यादा जागरूकता फैलाने पर केंद्रित रहा। इस अभियान में सड़क सुरक्षा टीम ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई और नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों को रोककर उन्हें दंडित करने के बजाय सड़क सुरक्षा का पाठ पढ़ाया।

​इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि प्रशासन का रवैया पूरी तरह सहयोगात्मक था। जांच टीम ने नियम तोड़ने वाले चालकों की मौके पर ही काउंसलिंग की और उन्हें समझाया कि यातायात नियमों का पालन पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए करना अनिवार्य है। जागरूकता बढ़ाने के लिए चालकों के बीच सुरक्षा नियमों और यातायात संकेतों की जानकारी देने वाले पंपलेट भी वितरित किए गए, ताकि वे भविष्य में इन गलतियों को न दोहराएं।

​अभियान के दौरान अधिकारियों ने 'गुड सेमेरिटन' यानी 'नेक मददगार' कानून पर विशेष जोर दिया। अक्सर देखा जाता है कि सड़क दुर्घटना होने पर लोग कानूनी पचड़ों और पुलिस की पूछताछ के डर से घायलों की मदद करने से कतराते हैं। टीम ने वाहन चालकों के मन से इस डर को निकालते हुए स्पष्ट किया कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले को अब पुलिस या कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार और कानून ऐसे मददगारों को संरक्षण देता है और उन्हें प्रोत्साहित करता है।

​मौके पर मौजूद रोड इंजीनियर एनालिस्ट (सड़क सुरक्षा) सारिक इकबाल ने इस मुहिम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रशासन का लक्ष्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि चालकों के व्यवहार में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि जब लोग जागरूक होंगे और बिना डर के 'गुड सेमेरिटन' बनकर आगे आएंगे, तो दुर्घटना के समय घायलों को त्वरित मदद मिल सकेगी और कई कीमती जानें बचाई जा सकेंगी। प्रशासन की इस गांधीगिरी और जागरूकता पहल की आम लोगों ने भी सराहना की है।

हजारीबाग डालसा ने नशाखोरी के खिलाफ छेड़ी निर्णायक जंग

 हजारीबाग डालसा ने नशाखोरी के खिलाफ छेड़ी निर्णायक जंग


नरेश सोनी विशेष संवाददाता 

हजारीबाग: मुकुंदगंज स्थित गौतम बुद्ध शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में गुरुवार को एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर मंथन हुआ जहां जिला विधिक सेवा प्राधिकार के प्रधान जिला जज रंजीत कुमार के निर्देश पर आयोजित इस नशामुक्त जागरूकता कार्यशाला में नशाखोरी को वर्तमान समाज और युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए डालसा सचिव गौरव खुराना ने बेहद भावुक और सचेत करने वाले अंदाज में कहा कि नशा केवल एक आदत नहीं बल्कि अपराध की दुनिया का प्रवेश द्वार है। उन्होंने एक नाबालिग बच्चे का उदाहरण साझा करते हुए बताया कि कैसे ब्राउन शुगर की लत ने एक मासूम को चोरी के रास्ते पर धकेल दिया था लेकिन जिला विधिक सेवा प्राधिकार और प्रशासन के समय रहते हस्तक्षेप और ऑब्जर्वेशन होम में मिले सुधार के माहौल ने आज उसे एक नई और सम्मानजनक जिंदगी दी है।

सचिव ने अभिभावकों को भी कड़े शब्दों में सलाह दी कि वे अपनी जिम्मेदारियों से मुंह न मोड़ें और बच्चों की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखें क्योंकि बढ़ती नशाखोरी ही बढ़ते अपराधों की मुख्य जड़ है। युवाओं को अब खुद आगे आकर अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। वहीं पैनल अधिवक्ता गौरव सहाय ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि हमें अपने शहर को नशा मुक्त रखना है और इसे 'उड़ता पंजाब' जैसी स्थिति में जाने से बचाना है। उन्होंने नशा और उससे पनपते अपराधों के आंकड़ों और भयावहता को विस्तार से रखा।

इस जागरूकता अभियान को रचनात्मक रूप देने के लिए प्रशिक्षुओं के बीच एक पेंटिंग प्रतियोगिता भी कराई गई जिसके माध्यम से युवाओं ने कैनवास पर नशे के खिलाफ अपना आक्रोश और संदेश उकेरा। डालसा सचिव ने घोषणा की है कि इस प्रतियोगिता के शीर्ष तीन विजेताओं को गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. बसुंधरा कुमारी, सहायक प्राध्यापिका सुष्मिता घोषाल और पीएलवी दीपक कुमार समेत पूरे कॉलेज परिवार ने इस मुहिम में अपनी सहभागिता दर्ज कराई और राष्ट्रगान के साथ इस संकल्प को दोहराया गया कि हजारीबाग नशे के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी र

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