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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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न्यायालयों का आधुनिकीकरण: हजारीबाग बार संघ में अधिवक्ताओं के लिए ई-कोर्ट तकनीकी प्रशिक्षण शिविर आयोजित

 

डिजिटल युग में कंप्यूटराइजेशन से न्याय प्रक्रिया होगी सुलभ, ऑनलाइन पेमेंट से अब आसानी से मिलेगी प्रमाणित कॉपियां

संवाददाता, हजारीबाग:

सर्वोच्च न्यायालय, झारखंड उच्च न्यायालय तथा ज्यूडिशियल एकेडमी रांची के दिशा-निर्देशों के आलोक में हजारीबाग बार संघ के सभागार में ई-कोर्ट (e-Court) प्रणाली से संबंधित एक दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शुक्रवार को आयोजित इस विशेष सत्र में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने डिजिटल न्यायिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। शिविर के दौरान डिजिटल पेमेंट, ई-फाइलिंग, ई-कोर्ट पोर्टल पर अधिवक्ताओं का आधिकारिक पंजीकरण, मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से वादों (केस स्टेटस) की ट्रैकिंग और ई-कोर्ट परियोजना के रणनीतिक उद्देश्यों पर विस्तृत चर्चा की गई।

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मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ

​कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन प्रधान जिला जज ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस तकनीकी संगोष्ठी में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी और सिविल कोर्ट निबंधक दिव्यम चौधरी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, हजारीबाग बार संघ के अध्यक्ष राजकुमार और सचिव सुमन कुमार सिंह ने भी सत्र को संबोधित करते हुए इस प्रशिक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

​आधुनिकीकरण से दूर होगी कार्यस्थल की कठिनाइयाँ

​अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधान जिला जज ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने कहा कि समकालीन समय में ई-कोर्ट की तकनीकी बारीकियों से अवगत होना प्रत्येक विधि व्यवसायी के लिए अनिवार्य हो चुका है। न्यायालयों में जिस गति से कंप्यूटराइजेशन और सूचना प्रौद्योगिकी का समावेश हो रहा है, उसे देखते हुए यदि कोई अधिवक्ता या अधिवक्ता लिपिक (क्लर्क) इन परिवर्तनों से दूर रहता है, तो आगामी समय में उन्हें अपने दैनिक विधिक कार्यों के संपादन में अत्यधिक तकनीकी व व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

​मास्टर ट्रेनर्स ने दूर कीं तकनीकी शंकाएं

​इस प्रशिक्षण सेमिनार में बतौर मुख्य मास्टर ट्रेनर अधिवक्ता गौरव सहाय और अधिवक्ता दीपक कुमार गुप्ता उपस्थित थे। दोनों विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को ई-कोर्ट सॉफ़्टवेयर के संचालन की क्रमिक जानकारी दी। इसके साथ ही, डिजिटल टूल्स के उपयोग के दौरान अधिवक्ताओं के मन में उठने वाले तकनीकी प्रश्नों और शंकाओं का तार्किक निवारण कर उन्हें संतुष्ट किया।

​टिकट की किल्लत से मुक्ति, ऑनलाइन मिलेगी नकल

​प्रशिक्षण में शामिल अधिवक्ताओं को एक महत्वपूर्ण सुधार की जानकारी देते हुए बताया गया कि हजारीबाग सिविल कोर्ट प्रशासन द्वारा दी जाने वाली अभिप्रमाणित प्रतियों (सर्टिफाइड कॉपी) के लिए अब भौतिक टिकटों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। पूर्व में अदालती टिकटों की कमी के कारण वादकारियों को नकल प्राप्त करने में लंबी देरी का सामना करना पड़ता था। अब अधिवक्ता ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के माध्यम से निर्धारित शुल्क का भुगतान कर त्वरित गति से डिजिटल और सत्यापित कॉपियां प्राप्त कर सकेंगे। यह व्यवस्था न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और गतिशीलता लाने में मील का पत्थर साबित होगी।

और अधिक पढ़ें: हजारीबाग: सुरक्षा व्यवस्था परखने सिविल कोर्ट पहुंचे SP अमन कुमार, प्रधान जिला जज के साथ किया पूरे परिसर का निरीक्षण

Hazaribagh: केंद्रीय कारा में विधिक जागरूकता शिविर, प्रधान जिला जज ध्रुव चंद्र मिश्रा बोले- कोर्ट में बढ़ रहे NDPS के मामले, नशे से दूर रहें बंदी!

 

⚖️ हजारीबाग: केंद्रीय कारा में विधिक जागरूकता शिविर; प्रधान जिला जज ने कहा- सिविल कोर्ट में बढ़ रहे हैं NDPS के मामले, नशे से दूर रहें बंदी

हजारीबाग: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के निर्देशानुसार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) हजारीबाग के तत्वावधान में शुक्रवार को लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (सेंट्रल जेल) में एक विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस शिविर के दौरान उपस्थित बंदियों के बीच नशे के गंभीर दुष्प्रभावों, उससे बचने के उपायों और मादक पदार्थों के सेवन से समाज व परिवार पर पड़ने वाले असर के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।

HAZARIBAGH: Principal District and Sessions Judge Dhruva Chandra Mishra along with CJM Rajiv Tripathi and DLSA Secretary Dr. Ravi Prakash Tiwari addressing inmates during a legal awareness camp at Loknayak Jai Prakash Narayan Central Jail.

🚫 नशे से व्यक्ति ही नहीं, पूरा परिवार और समाज होता है बर्बाद: प्रधान जिला जज

इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा उपस्थित थे। बंदियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  • नशे का नुकसान: उन्होंने कहा कि नशे की लत से सिर्फ उसे करने वाले व्यक्ति को ही नुकसान नहीं होता, बल्कि उसका पूरा परिवार बिखर जाता है और समाज को भी इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।

  • अदालतों में बढ़ते मामले: प्रधान जिला जज ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में सिविल कोर्ट में एनडीपीएस (NDPS Act - नशीले पदार्थ अधिनियम) से जुड़े मामलों में काफी तेजी आई है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि समाज में नशे के खिलाफ बड़े पैमाने पर जागरूक रहने की गंभीर आवश्यकता है।

  • उन्होंने सभी बंदियों को सन्मार्ग (सही रास्ते) पर चलने की सलाह दी और भविष्य में समाज की मुख्यधारा में लौटकर अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

👥 जेल में बंदियों की सुनी गईं समस्याएं, त्वरित निष्पादन के निर्देश

जागरूकता अभियान के साथ-साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम द्वारा जेल में बंदियों की विभिन्न कानूनी और व्यक्तिगत समस्याओं को भी विस्तार पूर्वक सुना गया। मामलों के त्वरित और समयबद्ध निष्पादन के लिए प्राधिकार द्वारा एलएडीसी (LADC) सदस्यों को विशेष ध्यान देने और कानूनी मदद पहुंचाने के कड़े निर्देश दिए गए।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद: इस विधिक जागरूकता शिविर के मौके पर मुख्य रूप से जिला विधिक सेवा प्राधिकार के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) राजीव त्रिपाठी, सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी, जेल अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन, जेलर संजय श्रीवास्तव, जेल चिकित्सक डॉ. राहुल कुमार, एलएडीसी सदस्य मुरली राणा समेत कई अन्य जेल कर्मी और बंदी मुख्य रूप से उपस्थित थे।

(स्रोत: जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग)

और पढ़ें : Hazaribagh: DLSA की बड़ी पहल; सिविल कोर्ट से लेकर सेंट्रल जेल तक मनाया गया विश्व योग दिवस, बंदियों के लिए लगा मेडिकल कैंप! 

सभी 16 प्रखंडों में गूंजा DLSA का संदेश; पंचायतों से लेकर स्कूलों तक 'अधिकार मित्रों' ने पढ़ाया कानून का पाठ

सभी 16 प्रखंडों में गूंजा DLSA का संदेश; पंचायतों से लेकर स्कूलों तक 'अधिकार मित्रों' ने पढ़ाया कानून का पाठ

प्रधान जि
SaraiyaDih.

ला न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा के निर्देश पर महा-अभियान: चौक-चौराहों पर सजी विधिक चौपाल, टोल-फ्री नंबर 15100 के जरिए घर बैठे मुफ्त कानूनी सलाह की दी गई जानकारी।

हजारीबाग। हजारीबाग जिले के शहरी क्षेत्रों से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक आम नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति सजग और विधिक रूप से साक्षर बनाने के लिए एक बड़ा महा-अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JALSA) के तत्वाधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग के बैनर तले 90 दिवसीय विशेष कानूनी जागरूकता अभियान के तहत बुधवार को पूरे जिले में एक साथ विधिक साक्षरता की बयार बही।

यह वृहद कार्यक्रम प्रधान जिला न्यायाधीश (PDJ) सह अध्यक्ष ध्रुव चंद्र मिश्रा के कुशल दिशा-निर्देशन में तथा सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी की सीधी मॉनिटरिंग में आयोजित किया गया। इसी कड़ी में बुधवार को हजारीबाग जिला अंतर्गत सभी 16 प्रखंडों की विभिन्न पंचायतों, प्रमुख चौक-चौराहों और विद्यालयों में सघन जागरूकता सत्र चलाए गए।

मीडिएटर्स और अधिकार मित्रों ने संभाली कमान, जनता को किया जागरूक

जिले के सभी 16 प्रखंडों में प्राधिकार द्वारा प्रतिनियुक्त प्रशिक्षित मीडिएटर्स (मध्यस्थों) और 'अधिकार मित्रों' ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर कमान संभाली। उन्होंने स्कूली बच्चों, ग्रामीणों और राहगीरों को कानून की बुनियादी और आवश्यक धाराओं की जानकारी दी।

शिविरों के दौरान मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई:

नालसा और झालसा की कल्याणकारी योजनाएं: समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद, शोषित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए सरकारी स्तर पर चलाई जा रही विधिक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

सिर्फ एक आवेदन पर मुफ्त वकील: अधिकार मित्रों ने उपस्थित लोगों को बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार एक ऐसा सुलभ माध्यम है, जहां कोई भी गरीब व्यक्ति केवल एक साधारण आवेदन देकर कोर्ट-कचहरी के मामलों के लिए निःशुल्क सरकारी अधिवक्ता (वकील) की सेवा प्राप्त कर सकता है।

टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 की दी गई जानकारी

ग्रामीणों को कानूनी रूप से सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय विधिक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया गया। लोगों को बताया गया कि यदि उन्हें कोई कानूनी समस्या है या वे किसी विषय पर विधिक परामर्श चाहते हैं, तो वे इस नंबर पर कॉल करके घर बैठे पूरी तरह निःशुल्क और प्रामाणिक कानूनी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

'मध्यस्थता केंद्र' से मुकदमों के बोझ और खर्च से मिल रही राहत

शिविर में उपस्थित लोगों को न्याय सदन परिसर में संचालित मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) की कार्यशैली और फायदों से अवगत कराया गया। प्रबुद्ध वक्ताओं ने बताया कि:

इस केंद्र में प्रतिदिन अनेकों दीवानी, पारिवारिक और छोटे-मोटे आपसी वादों का निपटारा दोनों पक्षों की आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण बातचीत के आधार पर कराया जाता है।

सुलह-समझौते के आधार पर मामलों के निष्पादन से सालों-साल चलने वाले मुकदमों की प्रताड़ना, पैसों के भारी खर्च और कीमती समय की बर्बादी से आम जनता को सीधी राहत मिल रही है।

सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की रही उपस्थिति

जिलेभर में एक साथ आयोजित इस महा-अभियान में विभिन्न स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं, पंचायतों के प्रतिनिधि और सैकड़ों की संख्या में स्थानीय महिला-पुरुष शामिल हुए। कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग के अधीन कार्यरत सभी समर्पित अधिकार मित्रों और मीडिएटर्स ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए समाज को विधिक रूप से सशक्त करने का संकल्प दोहराया।

संपादकीय संदेश: हजारीबाग के सभी 16 प्रखंडों में एक ही दिन व्यापक स्तर पर कानूनी साक्षरता शिविर लगाना जिला विधिक सेवा प्राधिकार की एक अदभुत और ऐतिहासिक संगठनात्मक सफलता है। कानून की जानकारी का अभाव ही अक्सर ग्रामीणों के शोषण और अदालतों में बढ़ते मुकदमों का मुख्य कारण होता है। जब समाज का हर वर्ग टोल-फ्री नंबर 15100 और मध्यस्थता केंद्र जैसी सुविधाओं से अवगत होगा, तभी त्वरित और सुलभ न्याय का सपना साकार हो सकेगा।

प्रस्तुति: जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग।

रिपोर्ट: न्यूज़ प्रहरी डेस्क।

ईचाक और डाडी के स्कूलों में गूंजी 'डीएलएसए' की आवाज; बच्चों को सिखाए गए कानून के नियम, भ्रूण हत्या व डायन प्रथा पर कड़ा प्रहार

ईचाक और डाडी के स्कूलों में गूंजी 'डीएलएसए' की आवाज; बच्चों को सिखाए गए कानून के नियम, भ्रूण हत्या व डायन प्रथा पर कड़ा प्रहार

प्रधान जिला न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा के दिशा-निर्देश पर जागरूकता शिविर: 'अधिकार मित्रों' ने बालिकाओं को सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ किया सजग, टोल-फ्री नंबर 15100 की दी जानकारी।

हजारीबाग: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JALSA) के तत्वाधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग के बैनर तले जिले के ग्रामीण व शैक्षणिक क्षेत्रों में 90 दिवसीय विशेष कानूनी जागरूकता अभियान पूरी प्रतिबद्धता के साथ चलाया जा रहा है।

Dadi Kala Photo shoot Kiya Gaya.

यह वृहद कार्यक्रम प्रधान जिला न्यायाधीश (PDJ) सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग ध्रुव चंद्र मिश्रा के कुशल दिशा-निर्देशन में तथा सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी की सीधी मॉनिटरिंग में आयोजित किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को हजारीबाग जिला अंतर्गत ईचाक प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय (छावनी) तथा डाडी प्रखंड अंतर्गत झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय (डाडी) में विशेष विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।


भ्रूण हत्या और महिला उत्पीड़न जैसी सामाजिक कुप्रथाओं पर कड़ा प्रहार

शिविरों में उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए प्राधिकार द्वारा प्रशिक्षित 'अधिकार मित्रों' ने वर्तमान समाज के कई संवेदनशील और गंभीर कानूनी विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। अधिकार मित्रों ने संयुक्त रूप से:

महिला उत्पीड़न व यौन शोषण: महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए बने कड़े कानूनों की जानकारी दी।

भ्रूण जांच व भ्रूण हत्या: समाज के माथे पर कलंक बनी कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग जांच के खिलाफ बने पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के कड़े प्रावधानों से अवगत कराया।

डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम: सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास के कारण होने वाली प्रताड़ना (डायन-भूत कुप्रथा) पर कड़ा प्रहार करते हुए इसके कानूनी दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बतलाया।

घर बैठे मुफ्त कानूनी सलाह के लिए डायल करें '15100'

कार्यक्रम के दौरान लोगों को नालसा और झालसा की विभिन्न लोक-कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताया गया। अधिकार मित्रों ने उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय विधिक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि इस नंबर के माध्यम से कोई भी पीड़ित या जरूरतमंद व्यक्ति घर बैठे ही कानून से संबंधित सटीक जानकारी और सलाह प्राप्त कर सकता है, जो कि पूरी तरह निःशुल्क है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार एक ऐसा सुलभ मंच है जहां समाज का कोई भी शोषित वर्ग केवल एक साधारण आवेदन के माध्यम से मुफ्त सरकारी वकील (अधिवक्ता) और कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।

न्याय सदन के 'मध्यस्थता केंद्र' से बच रहा समय और पैसा

शिविर में कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति दिलाने वाले न्याय सदन स्थित मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) की उपयोगिता पर विशेष जोर दिया गया। लोगों को बताया गया कि इस केंद्र में प्रतिदिन अनेकों मुकदमों और पारिवारिक विवादों का निपटारा दोनों पक्षों की आपसी सहमति, सौहार्दपूर्ण बातचीत और सुलह-समझौते के आधार पर कराया जाता है। इससे न केवल लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों की मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति मिलती है, बल्कि पैसों की भारी खर्च और समय की बर्बादी से भी बचा जा सकता है।

प्रधानाचार्य ने भी की प्राधिकार की सराहना

आयोजन के दौरान संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों (प्रिंसिपल्स) ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने स्कूली स्तर पर बच्चों को कानूनन साक्षर बनाने के इस प्रयास की सराहना की और डीएलएसए से मिलने वाली विभिन्न विधिक सुविधाओं पर प्रकाश डाला।

इस पूरे गरिमामयी कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं मुख्य रूप से प्राधिकार के अधिकार मित्र निर्मल राम, अभिषेक कुमार, कंचन मेहता, सुरेंद्र कुमार, रामचंद्र राम और शशि कुमार सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

संपादकीय संदेश: प्राथमिक विद्यालय छावनी और डाडी बालिका आवासीय विद्यालय में जिस तरह जमीनी स्तर पर बच्चियों को कानून के प्रति जागरूक किया गया, वह बेहद सराहनीय है। भ्रूण हत्या, महिला उत्पीड़न और डायन जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ जब बचपन से ही कानूनी समझ विकसित होगी, तभी हमारा समाज सही मायने में अपराधमुक्त और सुरक्षित बन सकेगा। न्यूज़ प्रहरी डीएलएसए हजारीबाग के इस अभियान की सराहना करता है।

प्रस्तुति: जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग।

रिपोर्ट: न्यूज़ प्रहरी डेस्क।

हजारीबाग बंद !! विष्णुगढ़ की मासूम बेटी को न्याय दिलाने के लिए सड़क पर उतरे सांसद-विधायक, थम गई शहर की रफ्तार

हजारीबाग बंद !! विष्णुगढ़ की मासूम बेटी को न्याय दिलाने के लिए सड़क पर उतरे सांसद-विधायक, थम गई शहर की रफ्तार

हजारीबाग : झारखंड के हजारीबाग जिले में मानवता को शर्मसार करने वाली विष्णुगढ़ की घटना के खिलाफ आक्रोश की लहर दौड़ गई है। 12 वर्षीय मासूम के साथ हुई दरिंदगी और उसकी निर्मम हत्या के विरोध में आज पूरा हजारीबाग जिला स्वतः स्फूर्त बंद रहा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आह्वान पर बुलाए गए इस बंद का असर जिले के चप्पे-चप्पे पर देखने को मिला।

Hazaribagh Bandh Vishnugarh Case

"सड़कों पर उतरे दिग्गज "बेटी को न्याय दो" के नारों से गूंजा शहर 

सोमवार सुबह से ही हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल, बरही विधायक मनोज कुमार यादव और भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह कार्यकर्ताओं के साथ सड़कों पर उतरे। भाजपा नेताओं ने झंडा चौक, मेन रोड, पैगोडा चौक और इंद्रपुरी जैसे मुख्य इलाकों में घूम-घूम कर व्यापारियों से समर्थन मांगा। सांसद मनीष जायसवाल ने खुद हाथ जोड़कर दुकानदारों से इस न्याय की लड़ाई में भागीदार बनने की अपील की, जिसे देखते हुए व्यापारियों ने तुरंत अपने शटर गिरा दिए।

Hazaribagh Bandh Vishnugarh Casedusri photo

"यह मानवता पर कलंक है, दोषियों को फांसी मिले" - मनीष जायसवाल 

घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने कहा, "हमारी बेटी के साथ जो वीभत्स कृत्य हुआ है, वह पूरे समाज और मानवता के लिए कलंक है। सोई हुई सरकार और प्रशासन को जगाने के लिए हमें एकजुट होना ही होगा। जब तक दोषियों को फांसी के फंदे तक नहीं पहुंचाया जाता, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।" उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा।

हजारीबाग के सभी प्रखंडों में दिखा असर 

इस बंद का असर सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रहा। विष्णुगढ़, बड़कागांव, केरेडारी, डाड़ी, चुरचू, बरही, चौपारण, बरकट्ठा और इचाक जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक बंदी देखी गई। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और आम जनता ने भी स्वतः इस विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया।

हजारों कार्यकर्ताओं ने भरी हुंकार 

बंदी के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल मिश्रा, हरीश श्रीवास्तव, सुदेश चंद्रवंशी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जिला मीडिया प्रभारी जय नारायण प्रसाद के अनुसार, इस आंदोलन में समाज के हर वर्ग की भागीदारी यह साबित करती है कि अब लोग चुप बैठने वाले नही 

 

नरेश सोनी प्रधान संपादक (न्योज प्रहरी) 

हत्या के प्रयास और गंभीर धाराओं के आरोपी अरबाज और अभिनव पहुंचे सलाखों के पीछे

हत्या के प्रयास और गंभीर धाराओं के आरोपी अरबाज और अभिनव पहुंचे सलाखों के पीछे

हजारीबाग। जिले की मुफस्सिल थाना पुलिस ने कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। पुलिस ने मुफस्सिल थाना कांड संख्या-08/26 के तहत दर्ज मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो प्राथमिक अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपियों में हबीबी नगर निवासी मोहम्मद अरबाज उर्फ बिक्कू (30 वर्ष) और कोर्रा थाना क्षेत्र के ग्रीन सिटी निवासी अभिनव सौरभ (24 वर्ष) शामिल हैं।



मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इनके ठिकानों पर छापेमारी कर इन्हें धर दबोचा। दोनों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 304, 308(3) और 3(5) के तहत गंभीर आरोप दर्ज हैं, जो जानलेवा हमले और सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करते हैं। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आज दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन की अपराधियों के विरुद्ध एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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14 मार्च को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सस्ता और सुलभ न्याय देने के लिए 5000 मुकदमों की सूची तैयार


14 मार्च को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सस्ता और सुलभ न्याय देने के लिए 5000 मुकदमों की सूची तैयार

हजारीबाग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार हजारीबाग जिला न्यायालय परिसर में आगामी 14 मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने इस महाअभियान के तहत अब तक करीब पांच हजार सुलहनीय मामलों को चिन्हित कर लिया है, जिनका निपटारा आपसी सहमति के आधार पर किया जाएगा। इस बाबत प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने सोमवार को एक मैराथन बैठक कर अधिवक्ताओं और न्यायिक पदाधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की और पक्षकारों को त्वरित न्याय दिलाने की रणनीति तैयार की।

​प्रधान जिला जज ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिक से अधिक वादों का निष्पादन कर हजारीबाग को एक नजीर के रूप में पेश किया जाए। अधिवक्ताओं के साथ हुई बैठक में राजकुमार राजू, सुमन कुमार सिंह, विजय कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार सिन्हा, ओमप्रकाश सिंह, राजन चोपड़ा और शालिनी चोपड़ा जैसे वरिष्ठ वकीलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और लोक अदालत को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं, न्यायिक पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्रधान जिला जज ने निर्देश दिया कि जिन मामलों में सुलह की गुंजाइश है, उन पक्षकारों को तत्काल नोटिस भेजकर सूचित किया जाए ताकि समय रहते वे मानसिक तनाव और अदालती चक्करों से मुक्ति पा सकें।

​जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने जानकारी दी कि मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए केवल 14 मार्च का इंतजार नहीं किया जा रहा, बल्कि 15 जनवरी से ही 'प्री-सिटिंग' (पूर्व बैठक) की शुरुआत कर दी गई है। इसके सुखद परिणाम भी दिखने लगे हैं; अब तक 700 से अधिक पक्षकारों को नोटिस भेजे जा चुके हैं और 50 से अधिक मामलों का निष्पादन लोक अदालत से पहले ही किया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य पिछली बार के आंकड़ों को पार करना है, जिसके लिए सिविल कोर्ट प्रशासन पूरी शिद्दत से जुटा हुआ है।

​पक्षकारों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि जुर्माने की राशि जमा करने की व्यवस्था कोर्ट परिसर के भीतर ही की जा सके और लोगों को अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े। सचिव गौरव खुराना ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं। जो भी पक्षकार अपने बाद का सुलहनामा चाहते हैं, वे किसी भी कार्य दिवस में अपने पहचान पत्र की छायाप्रति और आवेदन के साथ संबंधित न्यायालय में संपर्क कर सकते हैं और आपसी सहमति से अपने विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं।

हजारीबाग में 'सुलह से समाधान' की नई पहल: मेडिएशन फॉर नेशन 2.0 के तहत 2500 मुकदमों के निपटारे का लक्ष्य, 23 मामलों में मिली ऐतिहासिक सफलता


हजारीबाग में 'सुलह से समाधान' की नई पहल, मेडिएशन फॉर नेशन 2.0 के तहत 2500 मुकदमों के निपटारे का लक्ष्य, 23 मामलों में मिली ऐतिहासिक सफलता

हजारीबाग: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर हजारीबाग कोर्ट परिसर स्थित न्याय सदन में एक बड़ी न्यायिक पहल की शुरुआत हुई है। प्रधान जिला जज रंजीत कुमार के कुशल मार्गदर्शन में चल रहे विशेष अभियान 'मेडिएशन फॉर नेशन 2.0' ने अदालती बोझ को कम करने और आपसी विवादों को बातचीत से सुलझाने की दिशा में रफ्तार पकड़ ली है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बैनर तले आयोजित इस मुहिम का असर अब धरातल पर दिखने लगा है, जहां वर्षों से कोर्ट के चक्कर काट रहे फरियादियों को त्वरित न्याय मिल रहा है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने अभियान की सफलता साझा करते हुए बताया कि अब तक कुल 23 पुराने और जटिल मामलों का समाधान केवल आपसी सुलह के आधार पर कर लिया गया है। लेकिन यह तो बस शुरुआत है, क्योंकि प्राधिकार ने जिले में लंबित लगभग 2500 ऐसे मामलों को चिन्हित किया है जिनका निपटारा मध्यस्थता के जरिए संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक मामले के सुलझने से उससे जुड़े कई अन्य छोटे-मोटे विवाद भी खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगे, जिससे पक्षकारों को सालों साल कोर्ट के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और उनके धन व समय दोनों की बचत होगी।

इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए एक दर्जन से अधिक प्रशिक्षित मध्यस्थों की टीम पूरी निष्ठा के साथ जुटी हुई है। न्याय सदन के मध्यस्थता केंद्र में वैवाहिक कलह, घरेलू हिंसा, मोटर दुर्घटना दावा, चेक बाउंस (एनआई एक्ट), जमीन विवाद और बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जा रहा है। इसके अलावा उपभोक्ता फोरम, कर्ज और व्यावसायिक विवादों को भी इस दायरे में लाया गया है ताकि समाज में शांति व्यवस्था बनी रहे। सचिव ने आम जनों से अपील की है कि वे अपनी जिद छोड़कर इस वैकल्पिक समाधान प्रक्रिया का हिस्सा बनें और लोक अदालतों व मध्यस्थता के माध्यम से अपने विवादों का स्थायी और सौहार्दपूर्ण अंत करें।


सड़क पर घायलों की मदद करने वाले बनेंगे 'गुड सेमेरिटन' पुलिस-प्रशासन के चक्कर से मिलेगी मुक्ति- संयुक्त जांच अभियान में चालकों को किया गया जागरूक

 

सड़क पर घायलों की मदद करने वाले बनेंगे 'गुड सेमेरिटन' पुलिस-प्रशासन के चक्कर से मिलेगी मुक्ति- संयुक्त जांच अभियान में चालकों को किया गया जागरूक


हजारीबाग: सड़क हादसों में कमी लाने और आम नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से हजारीबाग में एक अनूठी पहल देखने को मिली। जिला परिवहन कार्यालय और यातायात पुलिस ने शहर के प्रमुख चौराहों पर एक विशेष संयुक्त वाहन जांच अभियान चलाया, जो चालान काटने से ज्यादा जागरूकता फैलाने पर केंद्रित रहा। इस अभियान में सड़क सुरक्षा टीम ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई और नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों को रोककर उन्हें दंडित करने के बजाय सड़क सुरक्षा का पाठ पढ़ाया।

​इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि प्रशासन का रवैया पूरी तरह सहयोगात्मक था। जांच टीम ने नियम तोड़ने वाले चालकों की मौके पर ही काउंसलिंग की और उन्हें समझाया कि यातायात नियमों का पालन पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए करना अनिवार्य है। जागरूकता बढ़ाने के लिए चालकों के बीच सुरक्षा नियमों और यातायात संकेतों की जानकारी देने वाले पंपलेट भी वितरित किए गए, ताकि वे भविष्य में इन गलतियों को न दोहराएं।

​अभियान के दौरान अधिकारियों ने 'गुड सेमेरिटन' यानी 'नेक मददगार' कानून पर विशेष जोर दिया। अक्सर देखा जाता है कि सड़क दुर्घटना होने पर लोग कानूनी पचड़ों और पुलिस की पूछताछ के डर से घायलों की मदद करने से कतराते हैं। टीम ने वाहन चालकों के मन से इस डर को निकालते हुए स्पष्ट किया कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले को अब पुलिस या कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार और कानून ऐसे मददगारों को संरक्षण देता है और उन्हें प्रोत्साहित करता है।

​मौके पर मौजूद रोड इंजीनियर एनालिस्ट (सड़क सुरक्षा) सारिक इकबाल ने इस मुहिम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रशासन का लक्ष्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि चालकों के व्यवहार में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि जब लोग जागरूक होंगे और बिना डर के 'गुड सेमेरिटन' बनकर आगे आएंगे, तो दुर्घटना के समय घायलों को त्वरित मदद मिल सकेगी और कई कीमती जानें बचाई जा सकेंगी। प्रशासन की इस गांधीगिरी और जागरूकता पहल की आम लोगों ने भी सराहना की है।

हजारीबाग डालसा ने नशाखोरी के खिलाफ छेड़ी निर्णायक जंग

 हजारीबाग डालसा ने नशाखोरी के खिलाफ छेड़ी निर्णायक जंग


नरेश सोनी विशेष संवाददाता 

हजारीबाग: मुकुंदगंज स्थित गौतम बुद्ध शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में गुरुवार को एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर मंथन हुआ जहां जिला विधिक सेवा प्राधिकार के प्रधान जिला जज रंजीत कुमार के निर्देश पर आयोजित इस नशामुक्त जागरूकता कार्यशाला में नशाखोरी को वर्तमान समाज और युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए डालसा सचिव गौरव खुराना ने बेहद भावुक और सचेत करने वाले अंदाज में कहा कि नशा केवल एक आदत नहीं बल्कि अपराध की दुनिया का प्रवेश द्वार है। उन्होंने एक नाबालिग बच्चे का उदाहरण साझा करते हुए बताया कि कैसे ब्राउन शुगर की लत ने एक मासूम को चोरी के रास्ते पर धकेल दिया था लेकिन जिला विधिक सेवा प्राधिकार और प्रशासन के समय रहते हस्तक्षेप और ऑब्जर्वेशन होम में मिले सुधार के माहौल ने आज उसे एक नई और सम्मानजनक जिंदगी दी है।

सचिव ने अभिभावकों को भी कड़े शब्दों में सलाह दी कि वे अपनी जिम्मेदारियों से मुंह न मोड़ें और बच्चों की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखें क्योंकि बढ़ती नशाखोरी ही बढ़ते अपराधों की मुख्य जड़ है। युवाओं को अब खुद आगे आकर अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। वहीं पैनल अधिवक्ता गौरव सहाय ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि हमें अपने शहर को नशा मुक्त रखना है और इसे 'उड़ता पंजाब' जैसी स्थिति में जाने से बचाना है। उन्होंने नशा और उससे पनपते अपराधों के आंकड़ों और भयावहता को विस्तार से रखा।

इस जागरूकता अभियान को रचनात्मक रूप देने के लिए प्रशिक्षुओं के बीच एक पेंटिंग प्रतियोगिता भी कराई गई जिसके माध्यम से युवाओं ने कैनवास पर नशे के खिलाफ अपना आक्रोश और संदेश उकेरा। डालसा सचिव ने घोषणा की है कि इस प्रतियोगिता के शीर्ष तीन विजेताओं को गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. बसुंधरा कुमारी, सहायक प्राध्यापिका सुष्मिता घोषाल और पीएलवी दीपक कुमार समेत पूरे कॉलेज परिवार ने इस मुहिम में अपनी सहभागिता दर्ज कराई और राष्ट्रगान के साथ इस संकल्प को दोहराया गया कि हजारीबाग नशे के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी र

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