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Editor: Naresh Prasad Soni
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14 मार्च को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सस्ता और सुलभ न्याय देने के लिए 5000 मुकदमों की सूची तैयार


14 मार्च को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सस्ता और सुलभ न्याय देने के लिए 5000 मुकदमों की सूची तैयार

हजारीबाग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार हजारीबाग जिला न्यायालय परिसर में आगामी 14 मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने इस महाअभियान के तहत अब तक करीब पांच हजार सुलहनीय मामलों को चिन्हित कर लिया है, जिनका निपटारा आपसी सहमति के आधार पर किया जाएगा। इस बाबत प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने सोमवार को एक मैराथन बैठक कर अधिवक्ताओं और न्यायिक पदाधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की और पक्षकारों को त्वरित न्याय दिलाने की रणनीति तैयार की।

​प्रधान जिला जज ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिक से अधिक वादों का निष्पादन कर हजारीबाग को एक नजीर के रूप में पेश किया जाए। अधिवक्ताओं के साथ हुई बैठक में राजकुमार राजू, सुमन कुमार सिंह, विजय कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार सिन्हा, ओमप्रकाश सिंह, राजन चोपड़ा और शालिनी चोपड़ा जैसे वरिष्ठ वकीलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और लोक अदालत को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं, न्यायिक पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्रधान जिला जज ने निर्देश दिया कि जिन मामलों में सुलह की गुंजाइश है, उन पक्षकारों को तत्काल नोटिस भेजकर सूचित किया जाए ताकि समय रहते वे मानसिक तनाव और अदालती चक्करों से मुक्ति पा सकें।

​जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने जानकारी दी कि मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए केवल 14 मार्च का इंतजार नहीं किया जा रहा, बल्कि 15 जनवरी से ही 'प्री-सिटिंग' (पूर्व बैठक) की शुरुआत कर दी गई है। इसके सुखद परिणाम भी दिखने लगे हैं; अब तक 700 से अधिक पक्षकारों को नोटिस भेजे जा चुके हैं और 50 से अधिक मामलों का निष्पादन लोक अदालत से पहले ही किया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य पिछली बार के आंकड़ों को पार करना है, जिसके लिए सिविल कोर्ट प्रशासन पूरी शिद्दत से जुटा हुआ है।

​पक्षकारों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि जुर्माने की राशि जमा करने की व्यवस्था कोर्ट परिसर के भीतर ही की जा सके और लोगों को अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े। सचिव गौरव खुराना ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं। जो भी पक्षकार अपने बाद का सुलहनामा चाहते हैं, वे किसी भी कार्य दिवस में अपने पहचान पत्र की छायाप्रति और आवेदन के साथ संबंधित न्यायालय में संपर्क कर सकते हैं और आपसी सहमति से अपने विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं।

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