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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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PM Modi on Jantar Mantar Controversy: "बच्चों से गलतियां होती हैं, सजा नहीं, सही मार्गदर्शन और क्षमा की ज़रूरत"

 

जंतर-मंतर बयानबाज़ी पर पीएम मोदी का बड़ा संदेश: "बच्चों से गलतियां होती हैं, सजा नहीं, सही मार्गदर्शन और क्षमा की ज़रूरत"

नई दिल्ली (डेस्क): हाल ही में देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रमों और प्रदर्शन के दौरान युवाओं द्वारा इस्तेमाल की गई तीखी व अभद्र बयानबाज़ी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अत्यंत संवेदनशील और विचारणीय वक्तव्य सामने आया है। प्रधानमंत्री ने विरोध प्रदर्शन में शामिल युवाओं के आचरण पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कठोर दंडात्मक कार्रवाई के बजाय भारतीय संस्कृति के पारंपरिक मूल्यों—"क्षमा, सुधार और समावेश"—पर विशेष बल दिया है।

PM Narendra Modi addressing the nation regarding youth conduct and forgiveness after Jantar Mantar event

​संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए स्पष्ट किया कि भटक रहे युवाओं को अदालती प्रक्रियाओं और सजा में उलझाने के बजाय समाज को बड़प्पन दिखाकर उन्हें सही राह दिखाने का प्रयास करना चाहिए।

संबोधन और घटनाक्रम का मुख्य विवरण:

  1. सांस्कृतिक मर्यादा और जन-आक्रोश पर चिंता:
    • ​प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, किंतु सार्वजनिक मंचों से भाषा की मर्यादा तोड़ना किसी भी सभ्य समाज को शोभा नहीं देता।
    • ​उन्होंने भावुक होकर उल्लेख किया कि प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी स्वर्गीय माताजी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। पीएम ने कहा कि समाज में इस घटना से जो सांस्कृतिक आघात (Cultural Shock) और जन-आक्रोश फैला है, वे उसकी गंभीरता को भली-भांति समझते हैं।
  2. दंडात्मक कार्रवाई के स्थान पर सुधार का दृष्टिकोण:
    • कानूनी सजा समाधान नहीं: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि युवाओं पर एफआईआर दर्ज कराना, जेल भेजना या अदालतों के चक्कर कटवाना समस्या का स्थाई हल नहीं है। इससे उनका भविष्य अंधकारमय हो सकता है।
    • क्षमा-भाव की अपील: उन्होंने देशवासियों से अपील की कि आवेश या बहकावे में आकर गलतियां करने वाले युवाओं को माफ कर उन्हें मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया जाए।
  3. "दांत और जीभ" का व्यावहारिक जीवन दर्शन:
    • ​प्रधानमंत्री ने दैनिक जीवन का उदाहरण देते हुए समझाया कि कभी-कभी असावधानी में अपने ही दांतों से जीभ कट जाती है और खून निकल आता है, लेकिन हम गुस्से में अपने दांत नहीं तोड़ते।
    • ​उसी प्रकार, ये राह भटके हुए युवा भी हमारे अपने ही समाज का हिस्सा हैं। समाज की जिम्मेदारी 'दांत तोड़ने' जैसी कठोरता दिखाने की नहीं, बल्कि घाव भरकर सही राह दिखाने की है।
  4. राष्ट्र निर्माण का आह्वान:
    • ​उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा को विवादों में नष्ट करने के बजाय करियर और देश के विकास में लगाने की अपील की। उन्होंने दोहराया कि सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और भारत की प्रगति के लिए पूरी तरह समर्पित है।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषण

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जंतर-मंतर विवाद के बाद बने तनावपूर्ण माहौल में प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल एक बयान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता बनाए रखने का प्रयास है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों और समाज दोनों के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि कटुता और विवादों को बढ़ाने के स्थान पर युवाओं को सकारात्मक दिशा में मोड़ने की नीति ही दीर्घकालिक हित में है।

Source & Disclaimer Note: यह रिपोर्ट आधिकारिक वक्तव्यों, जन-संबोधन और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध प्रामाणिक समाचार इनपुट पर आधारित एक स्वतंत्र पत्रकारिता विश्लेषण (Original Editorial Analysis) है। यह पोस्ट पूरी तरह से कॉपीराइट-मुक्त और 'न्यूज़ प्रहरी' के संपादकीय मानकों के अनुरूप तैयार की गई है।

और पढ़ें: PM Modi Statement on Paper Leak: Strict Law and Fast Track Courts Proposed


अंतरिक्ष जगत में भारत की नई उड़ान: निजी क्षेत्र के पहले रॉकेट 'Vikram-1' का सफल प्रक्षेपण, अंतरिक्ष सुधारों से खुली नवाचार की राह

निजी क्षेत्र की ऐतिहासिक उपलब्धि: 'Vikram-1' रॉकेट ने भरी अंतरिक्ष में उड़ान, भारत के अंतरिक्ष मिशन में एक नया अध्याय 

  •  Maiden-orbital-launch-of-Vikram-1-by-Skyroot-Aerospace 

 नई दिल्ली/हजारीबाग: भारत के अंतरिक्ष मिशन में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। निजी क्षेत्र की अग्रणी अंतरिक्ष कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने अपने पहले निजी तौर पर विकसित लॉन्च व्हीकल 'Vikram-1' का सफल प्रक्षेपण किया। आज सुबह 11:30 बजे हुए इस मिशन के साथ भारत अब अंतरिक्ष सेवाओं के क्षेत्र में दुनिया के चुनिंदा देशों की पंक्ति में मजबूती से खड़ा हो गया है।

Maiden-orbital-launch-of-Vikram-1-by-Skyroot-Aerospace

​'Vikram-1' की विशेषताएं:

​यह चार चरणों (four-stage) वाला रॉकेट विशेष रूप से 'ऑन-डिमांड' और त्वरित लॉन्च सेवाएं प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। अपनी अनूठी तकनीकी क्षमताओं के कारण, यह भविष्य में कम लागत और कम समय में उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने में क्रांतिकारी भूमिका निभाएगा।

  •  Maiden-orbital-launch-of-Vikram-1-by-Skyroot-Aerospace 

​नवाचार और उद्यम का संगम

​इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए, देश के नेतृत्व ने इसे भारत के युवाओं की प्रतिभा और दृढ संकल्प का परिणाम बताया है। अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए हालिया सुधारों के चलते अब निजी कंपनियों के लिए नवाचार के नए रास्ते खुले हैं। यह मिशन न केवल एक रॉकेट का प्रक्षेपण है, बल्कि यह देश के उन लाखों युवा इनोवेटर्स के लिए प्रेरणा है, जो अंतरिक्ष विज्ञान में अपना भविष्य देख रहे हैं।

​#IndiaWithVikram1 के साथ उमड़ा जन-समर्थन

​इस ऐतिहासिक मिशन को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। 'Team Skyroot' की इस उपलब्धि पर देशभर से बधाइयों का तांता लगा है। आम नागरिकों से लेकर युवा पीढ़ी तक, सभी इस सफलता को भारत की 'आत्मनिर्भर अंतरिक्ष यात्रा' के रूप में देख रहे हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत के निजी उद्यम अब वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष उद्योग को नई दिशा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय (आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल), दिनांक 18/07/2026

और पढ़ेंNew Delhi: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया 'VIP Culture in India' पुस्तक का विमोचन, कहा- हर भारतीय विशेष है!

21वीं सदी भारत की होगी": 2047 तक $1 ट्रिलियन तक पहुंचेगी देश की बायो-इकोनॉमी, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा

21वीं सदी भारत की होगी": 2047 तक $1 ट्रिलियन तक पहुंचेगी देश की बायो-इकोनॉमी, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा

IIT रुड़की में बोले डॉ. जितेंद्र सिंह- जीन से लेकर क्यूबिट और गहरे समुद्र से अंतरिक्ष तक तकनीक में परचम लहरा रहा है भारत।


नई दिल्ली/रुड़की: केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक बार फिर दोहराया है कि 21वीं सदी पूरी तरह से भारत की होने वाली है। IIT रुड़की में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने देश की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी शक्ति का खाका पेश किया। मंत्री ने विशेष रूप से जैव-अर्थव्यवस्था (Bio-Economy) पर जोर देते हुए भविष्यवाणी की कि वर्ष 2047 तक भारत की बायो-इकोनॉमी 1 ट्रिलियन डॉलर के विशाल आंकड़े को छू लेगी।
Bio-Economy par Vishesh antrasriye sammelan

तकनीकी क्षमता: जीन से लेकर क्यूबिट तक


डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आज केवल उपभोगता नहीं, बल्कि नवाचार का केंद्र बन चुका है। उन्होंने भारत की 'फुल-स्पेक्ट्रम' तकनीकी प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि हम जीन (Biotechnology) से लेकर क्यूबिट (Quantum Computing) तक अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। भारत की पहुंच आज समुद्र की गहराइयों (Deep Ocean Mission) से लेकर अंतरिक्ष की ऊंचाइयों (Outer Space) तक है।

BioE3 नीति: अर्थव्यवस्था और पर्यावरण का संगम


सरकार की दूरदर्शी नीतियों का जिक्र करते हुए मंत्री ने BioE3 नीति (Biotechnology for Economy, Environment, and Employment) पर प्रकाश डाला। 2024 में स्वीकृत इस नीति का उद्देश्य है:

अर्थव्यवस्था (Economy): जैव-आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देकर जीडीपी में योगदान देना।

पर्यावरण (Environment): कार्बन उत्सर्जन कम करना और टिकाऊ समाधान खोजना।

रोजगार (Employment): बायोटेक क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करना।

उन्होंने बताया कि यह नीति 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करेगी।

निष्कर्ष

डॉ. सिंह के अनुसार, भारत की यह प्रगति वैश्विक स्तर पर देश की नई पहचान बना रही है। उच्च तकनीक और नवाचार के मेल से भारत न केवल अपनी समस्याओं का समाधान कर रहा है, बल्कि दुनिया को भी नई दिशा दिखा रहा है।

कर्तव्य पथ पर 'कर्तव्य भवन-2' का उद्घाटन, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंत्रालय के नए कार्यालय का किया शुभारंभ

कर्तव्य पथ पर 'कर्तव्य भवन-2' का उद्घाटन, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंत्रालय के नए कार्यालय का किया शुभारंभ

आधुनिक सुविधाओं से लैस नए भवन से कानून मंत्रालय के कार्यों में आएगी तेजी; सार्वजनिक सेवा के संकल्प को मिलेगी नई ऊर्जा।

नई दिल्ली:देश की राजधानी में प्रशासनिक सुधारों और आधुनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज नई दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर नवनिर्मित 'कर्तव्य भवन-2' में कानून एवं न्याय मंत्रालय के नए कार्यालय का विधिवत उद्घाटन किया।

Nyaay Mantri.

आधुनिक और एकीकृत कार्यक्षेत्र

उद्घाटन समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री ने नवनिर्मित भवन का निरीक्षण किया और विश्वास व्यक्त किया कि यह आधुनिक, एकीकृत और सुरक्षित इमारत मंत्रालय के विभिन्न विभागों के कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह भवन न केवल बुनियादी ढांचे के मामले में उन्नत है, बल्कि सुरक्षा और तकनीक के लिहाज से भी वर्तमान जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है।

कार्यक्षमता में वृद्धि और जनसेवा का संकल्प

 मेघवाल ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि नए कार्यालय के शुरू होने से मंत्रालय के कामकाज में अधिक दक्षता (Greater Efficiency) आएगी। उन्होंने कहा:

"यह नया कार्यालय लोक सेवा की भावना को एक नई गति प्रदान करेगा। एक ही परिसर में आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता से कार्यों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित होगा और मंत्रालय के लक्ष्य को प्राप्त करने में नयाMomentum (संवेग) प्राप्त होगा।"

प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की ओर कदम

कर्तव्य पथ पर स्थित यह नया कार्यालय केंद्र सरकार के उस विजन का हिस्सा है जिसके तहत प्रशासनिक इकाइयों को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए उन्हें आधुनिक परिवेश में स्थानांतरित किया जा रहा है। मंत्रालय के अधिकारियों ने भी इस बदलाव का स्वागत किया है और माना है कि इससे कार्य संस्कृति में सकारात्मक बदलाव आएगा।

लौह अयस्क के कचरे से बनेंगी 'ग्रीन सड़कें' CSIR-CRRI और AMNS इंडिया के बीच ऐतिहासिक समझौता

लौह अयस्क के कचरे से बनेंगी 'ग्रीन सड़कें' CSIR-CRRI और AMNS इंडिया के बीच ऐतिहासिक समझौता

Delhi : सड़क निर्माण के क्षेत्र में भारत जल्द ही एक बड़ी क्रांति का गवाह बनने जा रहा है। अब लौह अयस्क (Iron Ore) के कचरे का इस्तेमाल सिर्फ डंपिंग ग्राउंड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे देश भर में मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल 'हरित सड़कें' (Green Roads) बनाई जाएंगी। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर, भारत के प्रमुख सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) और इस्पात क्षेत्र की दिग्गज कंपनी आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील (AMNS) इंडिया ने इस दिशा में एक अहम अनुसंधान एवं विकास (R&D) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के महानिदेशक और सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी

हर साल निकलता है 20 मिलियन टन कचरा

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के महानिदेशक और सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने इस समझौते के महत्व को समझाते हुए चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) और 'कचरे से कंचन' (Waste to Wealth) की अवधारणा पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक जैसे राज्यों में फैले लौह अयस्क प्लांट से हर साल लगभग 18 से 20 मिलियन टन कचरा निकलता है। इसे आमतौर पर 'स्लाइम' कहा जाता है, जिसे बड़े-बड़े बांधों में स्टोर करना पड़ता है। यह कचरा पर्यावरण के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।

प्राकृतिक संसाधनों की होगी बचत

सड़क निर्माण में इस अपशिष्ट के उपयोग से दो बड़े फायदे होंगे:

कचरा प्रबंधन: खनन अपशिष्ट की बढ़ती समस्या का स्थायी समाधान मिलेगा।

संसाधनों की बचत: सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्राकृतिक संसाधनों (जैसे मिट्टी और पत्थर) की मांग में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा।

कैसे काम करेगी यह तकनीक?

इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व CSIR-CRRI के फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख सतीश पांडे कर रहे हैं, जिन्हें 'स्टील स्लैग रोड तकनीक' का आविष्कारक भी माना जाता है। इस समझौते के तहत, CRRI के वैज्ञानिक इस कचरे की प्रयोगशाला में गहन जांच करेंगे। यह परखा जाएगा कि सड़क की अलग-अलग परतों में लौह अयस्क अपशिष्ट को किस तरह से और कितनी मात्रा में सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।

एएमएनएस इंडिया के मुख्य सतत विकास अधिकारी डॉ. अरविंद बोधंकर ने इस साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि औद्योगिक उप-उत्पादों का यह इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण और सतत अवसंरचना विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

इन आधुनिक तकनीकों का भी हुआ प्रदर्शन

इस खास मौके पर CSIR-CRRI ने सड़क निर्माण से जुड़ी कई अन्य अत्याधुनिक तकनीकों का भी प्रदर्शन किया, जिनमें प्रमुख हैं:

कृषि कचरे से बना बायो-बिटुमेन (Bio-Bitumen)।

गड्ढों की तुरंत मरम्मत करने वाली स्टील स्लैग आधारित 'इकोफिक्स' (Ecofix) तकनीक।

सड़कों के रखरखाव के लिए स्लैग और फ्लाई ऐश आधारित टेरासर्फेसिंग तकनीक।

इस पहल से यह साफ हो गया है कि भविष्य में भारत का सड़क नेटवर्क सिर्फ लंबा और चौड़ा ही नहीं, बल्कि पूरी तरह से टिकाऊ और इको-फ्रेंडली भी होगा।

जनसेवा का सम्मान: सांसद पप्पू यादव को दिल्ली में मिला 'दादासाहेब फाल्के आइकन अवार्ड', शुभचिंतकों को किया समर्पित

जनसेवा का सम्मान: सांसद पप्पू यादव को दिल्ली में मिला 'दादासाहेब फाल्के आइकन अवार्ड', शुभचिंतकों को किया समर्पित

दिल्ली में DPIAF – कल्चरल एंड टूरिज्म शिखर सम्मेलन का भव्य आयोजन

नई दिल्ली: राजनीति के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों में हमेशा सक्रिय रहने वाले सांसद पप्पू यादव को एक बड़े राष्ट्रीय सम्मान से नवाज़ा गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित 'DPIAF – कल्चरल एंड टूरिज्म शिखर सम्मेलन' (Cultural and Tourism Summit) में उन्हें प्रतिष्ठित दादासाहेब फाल्के आइकन अवार्ड फिल्म्स आर्गेनाइजेशन (NGO) द्वारा सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके जनसेवा और सामाजिक योगदान को देखते हुए प्रदान किया गया।

दिल्ली में आयोजित DPIAF कल्चरल एंड टूरिज्म शिखर सम्मेलन के दौरान 'भारत गौरव आइकॉन अवार्ड' ग्रहण करते सांसद पप्पू यादव।

"यह सम्मान मेरा नहीं, मेरे शुभचिंतकों का है"

अवार्ड ग्रहण करने के बाद सांसद पप्पू यादव ने अपनी चिर-परिचित शैली में विनम्रता व्यक्त की। उन्होंने इस सम्मान को केवल अपनी उपलब्धि न मानकर, अपने समर्थकों और जनता के प्यार का परिणाम बताया।

मंच से अपनी भावनाएं साझा करते हुए उन्होंने कहा, "यह सम्मान मेरे लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है। मैं इस प्रतिष्ठित मंच के सभी आयोजकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मुझे इस सम्मान के योग्य समझा।" उन्होंने आगे जोड़ा कि किसी भी जनप्रतिनिधि की असली ताकत उसकी जनता होती है। "यह सम्मान न केवल मेरे लिए बल्कि उन सभी साथियों और शुभचिंतकों के लिए भी है, जिनके सहयोग और विश्वास से मुझे हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रही है।"

समाज और संस्कृति के प्रति दोहराया अपना संकल्प

इस खास अवसर पर सांसद ने भविष्य के लिए भी अपना विजन स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान जिम्मेदारियों को और बढ़ा देते हैं। पप्पू यादव ने संकल्प लेते हुए कहा कि वे भविष्य में भी समाज, संस्कृति और जनसेवा के कार्यों में अपनी जिम्मेदारी को और अधिक निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने का निरंतर प्रयास करते रहेंगे।

इस भव्य समारोह में कला, संस्कृति, और राजनीति जगत की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं, जिन्होंने पप्पू यादव को उनकी इस उपलब्धि पर बधाइयां दीं।

अजीत दादा का आकस्मिक निधन, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा शोक, कहा- जनसेवा को समर्पित एक और अध्याय का अंत

अजीत दादा का आकस्मिक निधन,


प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा शोक, कहा- जनसेवा को समर्पित एक और अध्याय का अंत

नरेश सोनी विशेष संवाददाता | नई दिल्ली/मुंबई

महाराष्ट्र की राजनीति को आज एक गहरा आघात लगा है। जननेता और कुशल प्रशासक अजीत पवार का आकस्मिक निधन हो गया है। इस दुखद समाचार ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के गलियारों को भी स्तब्ध कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे देश के लिए, विशेषकर महाराष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए अजीत पवार के साथ अपने पुराने संस्मरणों को साझा किया और उन्हें एक सच्चे जननायक के रूप में याद किया।

प्रधानमंत्री ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि अजीत पवार जनता से सीधे जुड़े हुए नेता थे जिनका नाता समाज के अंतिम व्यक्ति तक था। वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जो सदैव जनसेवा के कार्यों में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहते थे, जिसके कारण उन्हें व्यापक जनसमर्थन और आदर प्राप्त था। प्रधानमंत्री ने उनकी कार्यशैली की सराहना करते हुए बताया कि अजीत पवार को प्रशासनिक मामलों की अद्भुत और सूक्ष्म समझ थी। शासन चलाने की उनकी दक्षता और गरीब तथा वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए उनकी तड़प विशेष रूप से उल्लेखनीय थी। उनका पूरा जीवन आम जनमानस की समस्याओं को सुलझाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में समर्पित रहा।

उनके इस तरह अचानक चले जाने को प्रधानमंत्री ने अत्यंत धक्कादायक और पीड़ादायी बताया है। उन्होंने कहा कि एक मेहनती और समर्पित व्यक्तित्व का यूं असमय जाना अत्यंत दुखद है। इस कठिन समय में प्रधानमंत्री ने अजीत पवार के परिजनों और उनके असंख्य समर्थकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की है। अजीत पवार के जाने से भारतीय राजनीति ने एक ऐसा नेता खो दिया है जिसकी पकड़ जमीन पर जितनी मजबूत थी, प्रशासनिक गलियारों में उतनी ही प्रभावशाली थी।

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