21वीं सदी भारत की होगी": 2047 तक $1 ट्रिलियन तक पहुंचेगी देश की बायो-इकोनॉमी, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा
IIT रुड़की में बोले डॉ. जितेंद्र सिंह- जीन से लेकर क्यूबिट और गहरे समुद्र से अंतरिक्ष तक तकनीक में परचम लहरा रहा है भारत।
नई दिल्ली/रुड़की: केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक बार फिर दोहराया है कि 21वीं सदी पूरी तरह से भारत की होने वाली है। IIT रुड़की में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने देश की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी शक्ति का खाका पेश किया। मंत्री ने विशेष रूप से जैव-अर्थव्यवस्था (Bio-Economy) पर जोर देते हुए भविष्यवाणी की कि वर्ष 2047 तक भारत की बायो-इकोनॉमी 1 ट्रिलियन डॉलर के विशाल आंकड़े को छू लेगी।
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| Bio-Economy par Vishesh antrasriye sammelan |
तकनीकी क्षमता: जीन से लेकर क्यूबिट तक
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आज केवल उपभोगता नहीं, बल्कि नवाचार का केंद्र बन चुका है। उन्होंने भारत की 'फुल-स्पेक्ट्रम' तकनीकी प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि हम जीन (Biotechnology) से लेकर क्यूबिट (Quantum Computing) तक अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। भारत की पहुंच आज समुद्र की गहराइयों (Deep Ocean Mission) से लेकर अंतरिक्ष की ऊंचाइयों (Outer Space) तक है।
BioE3 नीति: अर्थव्यवस्था और पर्यावरण का संगम
सरकार की दूरदर्शी नीतियों का जिक्र करते हुए मंत्री ने BioE3 नीति (Biotechnology for Economy, Environment, and Employment) पर प्रकाश डाला। 2024 में स्वीकृत इस नीति का उद्देश्य है:
अर्थव्यवस्था (Economy): जैव-आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देकर जीडीपी में योगदान देना।
पर्यावरण (Environment): कार्बन उत्सर्जन कम करना और टिकाऊ समाधान खोजना।
रोजगार (Employment): बायोटेक क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करना।
उन्होंने बताया कि यह नीति 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करेगी।
निष्कर्ष
डॉ. सिंह के अनुसार, भारत की यह प्रगति वैश्विक स्तर पर देश की नई पहचान बना रही है। उच्च तकनीक और नवाचार के मेल से भारत न केवल अपनी समस्याओं का समाधान कर रहा है, बल्कि दुनिया को भी नई दिशा दिखा रहा है।

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