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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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चरही एनएच पर दर्दनाक हादसा, टायर बदल रहे ट्रक चालक और उप-चालक की मौत, कार सवार भी घायल

चरही एनएच पर दर्दनाक हादसा, टायर बदल रहे ट्रक चालक और उप-चालक की मौत, कार सवार भी घायल

प्रधान सम्पादक, न्यूज़ प्रहरी।

चरही (हजारीबाग): झारखंड के हजारीबाग जिले से एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना की खबर सामने आई है। चरही थाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर स्थित 'पंद्रह माइल' के समीप एक अनियंत्रित कार ने सड़क किनारे खड़े ट्रक में जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे में ट्रक के चालक और उप-चालक (खलासी) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार में सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

Ghatnasthal photo,,

कैसे हुआ हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक मालवाहक ट्रक में तकनीकी खराबी (ब्रेकडाउन) आने के कारण वह पंद्रह माइल के पास सड़क किनारे खड़ा था। ट्रक का टायर पंचर हो गया था, जिसे बदलने के लिए ट्रक के चालक और उप-चालक नीचे उतरे थे। दोनों कर्मचारी सड़क की सुरक्षा सीमाओं के भीतर अपना काम कर रहे थे।

इसी दौरान, पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार बलेनो कार ने नियंत्रण खो दिया और सीधे ट्रक के पिछले हिस्से में जा घुसी। इस प्रक्रिया में कार ने टायर बदल रहे चालक और खलासी को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

कार सवारों की हालत गंभीर

इस दुर्घटना में बलेनो कार के परखच्चे उड़ गए। कार में सवार तीन लोग भी बुरी तरह घायल हो गए हैं। स्थानीय लोगों की सूचना पर चरही थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से कार में फंसे घायलों को बाहर निकाला और तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा। प्राथमिक उपचार के बाद घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया है।

पुलिस की कार्रवाई और यातायात व्यवस्था

घटना के बाद एनएच पर कुछ देर के लिए यातायात बाधित हुआ, जिसे पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर सुचारू कराया। पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। चरही थाना प्रभारी ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है और मृतकों के परिजनों को सूचित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सुरक्षा पर सवाल: अंधेरा या तेज रफ्तार?

राष्ट्रीय राजमार्गों पर अक्सर ब्रेकडाउन वाहनों के कारण होने वाली दुर्घटनाएं चिंता का विषय रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रात या सुबह के धुंधलके में सड़क किनारे खड़े वाहनों के पास उचित 'रिफ्लेक्टर' या 'इंडिकेटर' न होने से पीछे से आने वाले वाहन चालक धोखा खा जाते हैं। हालांकि, इस मामले में कार की रफ्तार भी एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।

निष्कर्ष:

सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना न केवल हमारी जिम्मेदारी है बल्कि जीवन के लिए अनिवार्य भी है। चरही की इस घटना ने एक बार फिर तेज रफ्तार और हाईवे सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हजारीबाग नेशनल लोक अदालत में न्याय की बड़ी जीत: एक दिन में सुलझे 73,812 मामले, ₹32 करोड़ का हुआ सेटलमेंट

हजारीबाग नेशनल लोक अदालत में न्याय की बड़ी जीत: एक दिन में सुलझे 73,812 मामले, ₹32 करोड़ का हुआ सेटलमेंट

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड
हजारीबाग सिविल कोर्ट में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ करते प्रधान जिला जज रंजीत कुमार एवं अन्य न्यायिक पदाधिकारी।

हजारीबाग/झारखंड: न्यायिक प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में शनिवार को हजारीबाग सिविल कोर्ट ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश पर आयोजित इस नेशनल लोक अदालत में आपसी सहमति और सुलह के जरिए हजारों परिवारों के वर्षों पुराने विवादों का अंत हुआ।

ऑनलाइन उद्घाटन और न्याय का बड़ा मंच

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने ऑनलाइन माध्यम से किया। इस अवसर पर हजारीबाग के प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने इस मंच की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "लोक अदालत एक ऐसा वैकल्पिक माध्यम है जहां न किसी की हार होती है और न किसी की जीत, बल्कि न्याय की जीत होती है।"

आंकड़ों में सफलता की कहानी

जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस लोक अदालत में रिकॉर्ड सफलता मिली है:

कुल निष्पादित मामले: 73,812

कुल समझौता राशि: ₹32,37,23,258 (32 करोड़ 37 लाख से अधिक)

प्रमुख मामले: बैंक रिकवरी (1174), बिजली विवाद (423), चेक बाउंस (153) और भू-अर्जन (597)।

6 साल बाद फिर बसा एक परिवार

इस लोक अदालत की सबसे भावुक तस्वीर तब दिखी जब कुटुंब न्यायालय के जज अनुज कुमार के प्रयासों से 6 वर्षों से अलग रह रहे एक पति-पत्नी फिर से एक साथ रहने को तैयार हुए। प्रधान जिला जज ने इस जोड़े को शुभकामनाएं दीं और उनकी 6 वर्षीय बेटी को उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद दिया। यह मामला साबित करता है कि लोक अदालत केवल पैसों का हिसाब नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने का भी केंद्र है।

विशेषज्ञों की राय: क्यों खास है लोक अदालत?

न्यायिक पदाधिकारियों के अनुसार, लोक अदालत में मामलों का निष्पादन त्वरित होता है और इसके फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती, जिससे कानूनी उलझनों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।

इस वृहद आयोजन को सफल बनाने में बार संघ अध्यक्ष राजकुमार, डीएफओ मौन प्रकाश, न्यायिक पदाधिकारी जूही कुमारी और सचिव गौरव खुराना सहित कई अधिवक्ताओं और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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