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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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Hazaribagh News: उपायुक्त हेमंत सती ने व्यवहार न्यायालय का किया भ्रमण, न्यायिक-प्रशासनिक समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था पर हुई चर्चा

Hazaribagh News: उपायुक्त हेमंत सती ने व्यवहार न्यायालय का किया भ्रमण, न्यायिक-प्रशासनिक समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था पर हुई चर्चा

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश से की शिष्टाचार भेंट; न्यायालय परिसर में एटीएम और उप डाकघर जैसी नई सुविधाओं का लिया जायजा।

नरेश सोनी न्यूज़ प्रहरी प्रधान सम्पादक |

हजारीबाग: जिले के प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों में बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को उपायुक्त हेमंत सती ने हजारीबाग व्यवहार न्यायालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रणजीत कुमार से उनके कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार भेंट की।

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न्यायिक एवं प्रशासनिक समन्वय पर जोर मुलाकात के दौरान उपायुक्त और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के बीच जिले की न्यायिक प्रक्रियाओं और प्रशासनिक सहयोग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि प्रशासन और न्यायपालिका के बीच बेहतर तालमेल से आम जनता को न्याय मिलने में सुगमता होगी और लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।
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परिसर की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण भेंट के पश्चात उपायुक्त ने पूरे व्यवहार न्यायालय परिसर का गहन भ्रमण किया। उन्होंने विशेष रूप से मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थापित सुरक्षा उपकरणों और फ्रिस्किंग (जांच) व्यवस्था का जायजा लिया। उपायुक्त ने सुरक्षा कर्मियों को निर्देशित किया कि परिसर की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। इसके साथ ही उन्होंने न्यायालय परिसर में स्थित पार्क, स्वच्छता की स्थिति, शौचालय और पार्किंग व्यवस्था का भी अवलोकन किया।

नई सुविधाओं का अवलोकन भ्रमण के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश  रणजीत कुमार ने उपायुक्त को न्यायालय परिसर के भीतर हाल ही में स्थापित की गई सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिवक्ताओं, कर्मियों और वादकारियों की सुविधा के लिए परिसर में नया एटीएम मशीन और उप डाकघर (Sub Post Office) शुरू किया गया है।

उपायुक्त हेमंत सती ने इन जन-सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि न्यायालय आने वाले लोगों के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत होना आवश्यक है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन व्यवस्थाओं को भविष्य में भी सुदृढ़ बनाए रखें ताकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इस दौरान व्यवहार न्यायालय के अन्य न्यायिक पदाधिकारी और प्रशासनिक कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

हजारीबाग सिविल कोर्ट: मासिक लोक अदालत में 82 मामलों का निष्पादन, 1.34 करोड़ से अधिक की राशि पर बनी सहमति

हजारीबाग सिविल कोर्ट: मासिक लोक अदालत में 82 मामलों का निष्पादन, 1.34 करोड़ से अधिक की राशि पर बनी सहमति

चेक बाउंस के मामलों में हुई रिकॉर्ड वसूली; 9 मई को आयोजित होगी 'नेशनल लोक अदालत', तैयारी शुरू।

हजारीबाग : आम नागरिकों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के उद्देश्य से हजारीबाग सिविल कोर्ट परिसर में शनिवार को 'मासिक लोक अदालत' का आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार के मार्गदर्शन और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के तत्वावधान में आयोजित इस अदालत में सुलह-समझौते के आधार पर करोड़ों रुपये के वादों का निपटारा किया गया।

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चेक बाउंस के मामलों का रहा दबदबा

इस लोक अदालत में कुल 82 मामलों का निष्पादन आपसी सहमति से किया गया। इस दौरान कुल 1 करोड़ 34 लाख 97 हजार 870 रुपये के सेटलमेंट पर पक्षकारों के बीच सहमति बनी। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक सफलता एनआई एक्ट (चेक बाउंस) के मामलों में मिली, जहां 51 मुकदमों का निपटारा हुआ। अकेले चेक बाउंस के मामलों में 1 करोड़ 31 लाख 51 हजार 52 रुपये की राशि पर समझौता हुआ।

बिजली और बैंक रिकवरी के मामलों में भी राहत

लोक अदालत में विभिन्न श्रेणियों के मामलों को सुलझाया गया:

बिजली विभाग: कुल 27 मामलों का निपटारा हुआ, जिससे सरकार को 2 लाख 32 हजार रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई।

बैंक रिकवरी: बैंक ऋण से संबंधित 2 महत्वपूर्ण मामलों को निष्पादित किया गया।

आपराधिक मामले: सुलहनीय प्रकृति के एक आपराधिक मामले को भी आपसी समझौते से बंद किया गया।

9 मई को लगेगी नेशनल लोक अदालत

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने जानकारी दी कि मासिक लोक अदालत की सफलता के बाद अब 9 मई को भव्य 'नेशनल लोक अदालत' का आयोजन किया जाएगा। प्रधान जिला जज रंजीत कुमार के निर्देशानुसार, समाज के अंतिम व्यक्ति तक कानूनी मदद पहुंचाने के लिए संबंधित विभागों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। नेशनल लोक अदालत के लिए पक्षकारों को नोटिस और सूचनाएं भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

इस सफल आयोजन में न्यायिक पदाधिकारियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, हजारीबाग बार संघ के सदस्यों और सिविल कोर्ट के कर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हजारीबाग सिविल कोर्ट में 9 मई को लगेगी 'नेशनल लोक अदालत', पीडीजे ने पुलिस अधिकारियों को दिए लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के निर्देश

 हजारीबाग सिविल कोर्ट में 9 मई को लगेगी 'नेशनल लोक अदालत', पीडीजे ने पुलिस अधिकारियों को दिए लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के निर्देश

सुलहनीय वादों पर फोकस: वन, उत्पाद और बिजली विभाग से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए पुलिस और विधिक सेवा प्राधिकार ने कसी कमर।

हजारीबाग।

आमजन को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। आगामी 9 मई को हजारीबाग सिविल कोर्ट परिसर में 'नेशनल लोक अदालत' का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए शुक्रवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (PDJ) रंजीत कुमार ने पुलिस विभाग के वरीय पदाधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।

पुलिस और प्रशासन को एक ठोस कार्ययोजना बनाने और आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया

समन्वय से मिलेगा आमजन को लाभ

बैठक को संबोधित करते हुए पीडीजे रंजीत कुमार ने स्पष्ट किया कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से मामलों का निपटारा करना है। उन्होंने कहा, "वैसे मामले जो सुलहनीय वादों (Compromisable Cases) की श्रेणी में आते हैं, उनमें शामिल पक्षकारों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित करना आवश्यक है।" न्यायाधीश ने पुलिस और प्रशासन को एक ठोस कार्ययोजना बनाने और आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस मंच का लाभ मिल सके।

पीडीजे ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया

इन विशेष मामलों पर रहेगा जोर

बैठक के दौरान पीडीजे ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्राथमिकता के आधार पर लंबित मामलों को चिन्हित करें। विशेष रूप से निम्नलिखित श्रेणियों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है:

वन विभाग (Forest Department) से जुड़े मामले

उत्पाद विभाग (Excise) के वाद

मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के उल्लंघन

बिजली विभाग (Electricity) से संबंधित विवाद

उन्होंने पुलिस को निर्देशित किया कि इन मामलों में जल्द-से-जल्द आरोप पत्र (Charge Sheet) समर्पित कर न्यायालय भेजें, ताकि लोक अदालत के दिन इनका निष्पादन सुगमता से हो सके।

समस्याओं का होगा समाधान

विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने भी बैठक में अपनी बात रखी। पीडीजे ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस पदाधिकारियों को नोटिस तामिला या प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है, तो वे सीधे सचिव से संपर्क कर समाधान पा सकते हैं। बैठक में पुलिस पदाधिकारियों ने भी अपनी चुनौतियों को साझा किया, जिसे न्यायाधीश ने गंभीरता से सुना और उनके त्वरित निराकरण का आश्वासन दिया।

बैठक में ये रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी, जिला वन पदाधिकारी (पश्चिमी डिवीजन) मोहित कुमार बंसल, एडिशनल एसपी हजारीबाग अमित कुमार, इंस्पेक्टर अनिल कुमार, सदर महिला थाना प्रभारी विंध्यवासिनी कुमारी सिन्हा, लोहसिंघना थाना प्रभारी निशांत केरकेट्टा सहित जिले के लगभग सभी थानों के प्रभारी उपस्थित थे।

निष्कर्ष:

9 मई की नेशनल लोक अदालत उन लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो वर्षों से कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे हैं। हजारीबाग जिला प्रशासन और न्यायालय की यह सक्रियता संकेत देती है कि इस बार रिकॉर्ड स्तर पर मामलों का समझौता कराया जाएगा।

नोट: यदि आप अपने मामले को लोक अदालत में रखना चाहते हैं, तो अविलंब हजारीबाग जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

हजारीबाग नेशनल लोक अदालत में न्याय की बड़ी जीत: एक दिन में सुलझे 73,812 मामले, ₹32 करोड़ का हुआ सेटलमेंट

हजारीबाग नेशनल लोक अदालत में न्याय की बड़ी जीत: एक दिन में सुलझे 73,812 मामले, ₹32 करोड़ का हुआ सेटलमेंट

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड
हजारीबाग सिविल कोर्ट में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ करते प्रधान जिला जज रंजीत कुमार एवं अन्य न्यायिक पदाधिकारी।

हजारीबाग/झारखंड: न्यायिक प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में शनिवार को हजारीबाग सिविल कोर्ट ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश पर आयोजित इस नेशनल लोक अदालत में आपसी सहमति और सुलह के जरिए हजारों परिवारों के वर्षों पुराने विवादों का अंत हुआ।

ऑनलाइन उद्घाटन और न्याय का बड़ा मंच

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने ऑनलाइन माध्यम से किया। इस अवसर पर हजारीबाग के प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने इस मंच की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "लोक अदालत एक ऐसा वैकल्पिक माध्यम है जहां न किसी की हार होती है और न किसी की जीत, बल्कि न्याय की जीत होती है।"

आंकड़ों में सफलता की कहानी

जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस लोक अदालत में रिकॉर्ड सफलता मिली है:

कुल निष्पादित मामले: 73,812

कुल समझौता राशि: ₹32,37,23,258 (32 करोड़ 37 लाख से अधिक)

प्रमुख मामले: बैंक रिकवरी (1174), बिजली विवाद (423), चेक बाउंस (153) और भू-अर्जन (597)।

6 साल बाद फिर बसा एक परिवार

इस लोक अदालत की सबसे भावुक तस्वीर तब दिखी जब कुटुंब न्यायालय के जज अनुज कुमार के प्रयासों से 6 वर्षों से अलग रह रहे एक पति-पत्नी फिर से एक साथ रहने को तैयार हुए। प्रधान जिला जज ने इस जोड़े को शुभकामनाएं दीं और उनकी 6 वर्षीय बेटी को उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद दिया। यह मामला साबित करता है कि लोक अदालत केवल पैसों का हिसाब नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने का भी केंद्र है।

विशेषज्ञों की राय: क्यों खास है लोक अदालत?

न्यायिक पदाधिकारियों के अनुसार, लोक अदालत में मामलों का निष्पादन त्वरित होता है और इसके फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती, जिससे कानूनी उलझनों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।

इस वृहद आयोजन को सफल बनाने में बार संघ अध्यक्ष राजकुमार, डीएफओ मौन प्रकाश, न्यायिक पदाधिकारी जूही कुमारी और सचिव गौरव खुराना सहित कई अधिवक्ताओं और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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