जेपीएससी परीक्षा धांधली मामला: 20 आरोपितों को जेल भेजने के बाद 7 फरार संदिग्धों की तलाश में सीआईडी की ताबड़तोड़ छापेमारी, कुर्की-जब्ती की तैयारी
नरेश सोनी, प्रधान संपादक
रांची (न्यूज़ प्रहरी):
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और बहुचर्चित मेधा घोटाले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते सहित 20 आरोपितों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने के बाद अब जांच एजेंसी की पैनी नजर उन 7 संदिग्धों पर टिकी है, जो लगातार फरार चल रहे हैं और गिरफ्तारी से बच रहे हैं।
![]() |
| CID Jharkhand investigating JPSC recruitment scam and tracing absconding suspects in Ranchi |
पांच दिनों से लगातार ठिकानों पर दबिश
सीआईडी की विशेष जांच टीमों ने विगत पांच दिनों के दौरान फरार चल रहे इन सातों संदिग्धों के कई संभावित ठिकानों पर लगातार सघन छापेमारी की है। हालांकि, अब तक किसी भी संदिग्ध की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी अब इन संदिग्धों को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त मोहलत देने के मूड में नहीं है और शिकंजा कसने के लिए सख्त कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।
हाजिर नहीं हुए तो अदालत से जारी होगा वारंट और कुर्की का आदेश
जांच से जुड़े सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि यदि ये संदिग्ध तत्काल प्रभाव से सीआईडी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग नहीं करते हैं, तो एजेंसी सीधे विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। सीआईडी अदालत से गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट (एनबीडब्ल्यू) हासिल करने की तैयारी में है। वारंट जारी होने के बावजूद निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी न होने की स्थिति में संदिग्धों की चल-अचल संपत्तियों की कुर्की-जब्ती (इश्तेहार एवं कुर्की) की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आने वाले दिनों में बड़े खुलासे की संभावना
जांच एजेंसी फरार संदिग्धों के हर गतिविधि और उनके संभावित मददगारों के नेटवर्क पर तकनीकी और गोपनीय स्तर से सतत निगरानी बनाए हुए है। माना जा रहा है कि इन संदिग्धों की गिरफ्त में आते ही परीक्षा परिणाम में हेरफेर और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई अन्य चेहरों की संलिप्तता भी उजागर हो सकती है, जिससे आने वाले दिनों में जांच और तेज होगी।

कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें