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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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सभी 16 प्रखंडों में गूंजा DLSA का संदेश; पंचायतों से लेकर स्कूलों तक 'अधिकार मित्रों' ने पढ़ाया कानून का पाठ

सभी 16 प्रखंडों में गूंजा DLSA का संदेश; पंचायतों से लेकर स्कूलों तक 'अधिकार मित्रों' ने पढ़ाया कानून का पाठ

प्रधान जि
SaraiyaDih.

ला न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा के निर्देश पर महा-अभियान: चौक-चौराहों पर सजी विधिक चौपाल, टोल-फ्री नंबर 15100 के जरिए घर बैठे मुफ्त कानूनी सलाह की दी गई जानकारी।

हजारीबाग। हजारीबाग जिले के शहरी क्षेत्रों से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक आम नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति सजग और विधिक रूप से साक्षर बनाने के लिए एक बड़ा महा-अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JALSA) के तत्वाधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग के बैनर तले 90 दिवसीय विशेष कानूनी जागरूकता अभियान के तहत बुधवार को पूरे जिले में एक साथ विधिक साक्षरता की बयार बही।

यह वृहद कार्यक्रम प्रधान जिला न्यायाधीश (PDJ) सह अध्यक्ष ध्रुव चंद्र मिश्रा के कुशल दिशा-निर्देशन में तथा सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी की सीधी मॉनिटरिंग में आयोजित किया गया। इसी कड़ी में बुधवार को हजारीबाग जिला अंतर्गत सभी 16 प्रखंडों की विभिन्न पंचायतों, प्रमुख चौक-चौराहों और विद्यालयों में सघन जागरूकता सत्र चलाए गए।

मीडिएटर्स और अधिकार मित्रों ने संभाली कमान, जनता को किया जागरूक

जिले के सभी 16 प्रखंडों में प्राधिकार द्वारा प्रतिनियुक्त प्रशिक्षित मीडिएटर्स (मध्यस्थों) और 'अधिकार मित्रों' ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर कमान संभाली। उन्होंने स्कूली बच्चों, ग्रामीणों और राहगीरों को कानून की बुनियादी और आवश्यक धाराओं की जानकारी दी।

शिविरों के दौरान मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई:

नालसा और झालसा की कल्याणकारी योजनाएं: समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद, शोषित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए सरकारी स्तर पर चलाई जा रही विधिक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

सिर्फ एक आवेदन पर मुफ्त वकील: अधिकार मित्रों ने उपस्थित लोगों को बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार एक ऐसा सुलभ माध्यम है, जहां कोई भी गरीब व्यक्ति केवल एक साधारण आवेदन देकर कोर्ट-कचहरी के मामलों के लिए निःशुल्क सरकारी अधिवक्ता (वकील) की सेवा प्राप्त कर सकता है।

टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 की दी गई जानकारी

ग्रामीणों को कानूनी रूप से सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय विधिक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया गया। लोगों को बताया गया कि यदि उन्हें कोई कानूनी समस्या है या वे किसी विषय पर विधिक परामर्श चाहते हैं, तो वे इस नंबर पर कॉल करके घर बैठे पूरी तरह निःशुल्क और प्रामाणिक कानूनी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

'मध्यस्थता केंद्र' से मुकदमों के बोझ और खर्च से मिल रही राहत

शिविर में उपस्थित लोगों को न्याय सदन परिसर में संचालित मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) की कार्यशैली और फायदों से अवगत कराया गया। प्रबुद्ध वक्ताओं ने बताया कि:

इस केंद्र में प्रतिदिन अनेकों दीवानी, पारिवारिक और छोटे-मोटे आपसी वादों का निपटारा दोनों पक्षों की आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण बातचीत के आधार पर कराया जाता है।

सुलह-समझौते के आधार पर मामलों के निष्पादन से सालों-साल चलने वाले मुकदमों की प्रताड़ना, पैसों के भारी खर्च और कीमती समय की बर्बादी से आम जनता को सीधी राहत मिल रही है।

सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की रही उपस्थिति

जिलेभर में एक साथ आयोजित इस महा-अभियान में विभिन्न स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं, पंचायतों के प्रतिनिधि और सैकड़ों की संख्या में स्थानीय महिला-पुरुष शामिल हुए। कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग के अधीन कार्यरत सभी समर्पित अधिकार मित्रों और मीडिएटर्स ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए समाज को विधिक रूप से सशक्त करने का संकल्प दोहराया।

संपादकीय संदेश: हजारीबाग के सभी 16 प्रखंडों में एक ही दिन व्यापक स्तर पर कानूनी साक्षरता शिविर लगाना जिला विधिक सेवा प्राधिकार की एक अदभुत और ऐतिहासिक संगठनात्मक सफलता है। कानून की जानकारी का अभाव ही अक्सर ग्रामीणों के शोषण और अदालतों में बढ़ते मुकदमों का मुख्य कारण होता है। जब समाज का हर वर्ग टोल-फ्री नंबर 15100 और मध्यस्थता केंद्र जैसी सुविधाओं से अवगत होगा, तभी त्वरित और सुलभ न्याय का सपना साकार हो सकेगा।

प्रस्तुति: जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग।

रिपोर्ट: न्यूज़ प्रहरी डेस्क।

ईचाक और डाडी के स्कूलों में गूंजी 'डीएलएसए' की आवाज; बच्चों को सिखाए गए कानून के नियम, भ्रूण हत्या व डायन प्रथा पर कड़ा प्रहार

ईचाक और डाडी के स्कूलों में गूंजी 'डीएलएसए' की आवाज; बच्चों को सिखाए गए कानून के नियम, भ्रूण हत्या व डायन प्रथा पर कड़ा प्रहार

प्रधान जिला न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा के दिशा-निर्देश पर जागरूकता शिविर: 'अधिकार मित्रों' ने बालिकाओं को सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ किया सजग, टोल-फ्री नंबर 15100 की दी जानकारी।

हजारीबाग: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JALSA) के तत्वाधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग के बैनर तले जिले के ग्रामीण व शैक्षणिक क्षेत्रों में 90 दिवसीय विशेष कानूनी जागरूकता अभियान पूरी प्रतिबद्धता के साथ चलाया जा रहा है।

Dadi Kala Photo shoot Kiya Gaya.

यह वृहद कार्यक्रम प्रधान जिला न्यायाधीश (PDJ) सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग ध्रुव चंद्र मिश्रा के कुशल दिशा-निर्देशन में तथा सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी की सीधी मॉनिटरिंग में आयोजित किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को हजारीबाग जिला अंतर्गत ईचाक प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय (छावनी) तथा डाडी प्रखंड अंतर्गत झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय (डाडी) में विशेष विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।


भ्रूण हत्या और महिला उत्पीड़न जैसी सामाजिक कुप्रथाओं पर कड़ा प्रहार

शिविरों में उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए प्राधिकार द्वारा प्रशिक्षित 'अधिकार मित्रों' ने वर्तमान समाज के कई संवेदनशील और गंभीर कानूनी विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। अधिकार मित्रों ने संयुक्त रूप से:

महिला उत्पीड़न व यौन शोषण: महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए बने कड़े कानूनों की जानकारी दी।

भ्रूण जांच व भ्रूण हत्या: समाज के माथे पर कलंक बनी कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग जांच के खिलाफ बने पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के कड़े प्रावधानों से अवगत कराया।

डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम: सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास के कारण होने वाली प्रताड़ना (डायन-भूत कुप्रथा) पर कड़ा प्रहार करते हुए इसके कानूनी दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बतलाया।

घर बैठे मुफ्त कानूनी सलाह के लिए डायल करें '15100'

कार्यक्रम के दौरान लोगों को नालसा और झालसा की विभिन्न लोक-कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताया गया। अधिकार मित्रों ने उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय विधिक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि इस नंबर के माध्यम से कोई भी पीड़ित या जरूरतमंद व्यक्ति घर बैठे ही कानून से संबंधित सटीक जानकारी और सलाह प्राप्त कर सकता है, जो कि पूरी तरह निःशुल्क है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार एक ऐसा सुलभ मंच है जहां समाज का कोई भी शोषित वर्ग केवल एक साधारण आवेदन के माध्यम से मुफ्त सरकारी वकील (अधिवक्ता) और कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।

न्याय सदन के 'मध्यस्थता केंद्र' से बच रहा समय और पैसा

शिविर में कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति दिलाने वाले न्याय सदन स्थित मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) की उपयोगिता पर विशेष जोर दिया गया। लोगों को बताया गया कि इस केंद्र में प्रतिदिन अनेकों मुकदमों और पारिवारिक विवादों का निपटारा दोनों पक्षों की आपसी सहमति, सौहार्दपूर्ण बातचीत और सुलह-समझौते के आधार पर कराया जाता है। इससे न केवल लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों की मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति मिलती है, बल्कि पैसों की भारी खर्च और समय की बर्बादी से भी बचा जा सकता है।

प्रधानाचार्य ने भी की प्राधिकार की सराहना

आयोजन के दौरान संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों (प्रिंसिपल्स) ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने स्कूली स्तर पर बच्चों को कानूनन साक्षर बनाने के इस प्रयास की सराहना की और डीएलएसए से मिलने वाली विभिन्न विधिक सुविधाओं पर प्रकाश डाला।

इस पूरे गरिमामयी कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं मुख्य रूप से प्राधिकार के अधिकार मित्र निर्मल राम, अभिषेक कुमार, कंचन मेहता, सुरेंद्र कुमार, रामचंद्र राम और शशि कुमार सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

संपादकीय संदेश: प्राथमिक विद्यालय छावनी और डाडी बालिका आवासीय विद्यालय में जिस तरह जमीनी स्तर पर बच्चियों को कानून के प्रति जागरूक किया गया, वह बेहद सराहनीय है। भ्रूण हत्या, महिला उत्पीड़न और डायन जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ जब बचपन से ही कानूनी समझ विकसित होगी, तभी हमारा समाज सही मायने में अपराधमुक्त और सुरक्षित बन सकेगा। न्यूज़ प्रहरी डीएलएसए हजारीबाग के इस अभियान की सराहना करता है।

प्रस्तुति: जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग।

रिपोर्ट: न्यूज़ प्रहरी डेस्क।

युवा अधिवक्ता का आकस्मिक निधन, बार एसोसिएशन हजारीबाग में शोक की लहर

युवा अधिवक्ता  का आकस्मिक निधन, बार एसोसिएशन हजारीबाग में शोक की लहर

हजारीबाग:  बार एसोसिएशन हजारीबाग के युवा सदस्य अधिवक्ता गोविंद मोहन मिश्रा (38) का निधन 5 अपै्रल को हो गया। वे मुनका बगिचा के समीप रहते थे। उनका 15 दिन पहले हाई बीपी के कारण बे्रन हेम्रेज हो गया था। जिसके बाद वे कोमा में थे।

युवा सदस्य अधिवक्ता गोविंद मोहन मिश्रा प्रोफ़ाइल चित्र।

रांची स्थित मेडिका अस्पताल में उनका ईलाज चल रहा था जहां रविवार की सुबह 04ः00 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 2016 से अधिवक्ता संघ से जुड़कर नियमित रूप से वकालत कर रहे थे। वे अविवाहित थे। उनकी बड़ी बहन अनुराधा मिश्रा बार एसोसिएशन के कार्यकारणी सदस्य है। साथ ही बड़े गोपाल कृष्ण मिश्रा भी वकील है। वे अपने पीछे माता-पिता, दो बहन और एक भाई को पीछे छोड़ कर चले गए। उनके निधन के बाद बार एसोसिएशन में शोक की लहर दौड़ गई। सभी अधिवक्ताओं ने एक सुर में कहा कि गोविंद बहुत ही नेक, मृदुभाषी एवं मिलनसार व्यक्ति थे। उनका इस तरह से जाना बार में अपूर्णीय क्षति है। जिसे कभी पूरा नही किया जा सकता। उनका पार्थीव शरीर रांची से उनके निवास स्थान लाया गया। जहां सैकड़ों अधिवक्ताओं, राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन से जुड़े हुए लोगों ने अंतिम दर्शन कर नम आंखों से विदाई दी। बार एसोसिएशन के प्रभारी संयुक्त सचिव कुणाल कुमार ने बताया कि गोविंद मोहन मिश्रा के निधन के बाद 6 अप्रैल को बार एसोसिएशन में शोक सभा का आयोजन किया जाएगा। शोक सभा के बाद सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से अपने आप को अलग रखेंगे।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक ( न्यूज़ प्रहरी)


14 मार्च को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सस्ता और सुलभ न्याय देने के लिए 5000 मुकदमों की सूची तैयार


14 मार्च को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सस्ता और सुलभ न्याय देने के लिए 5000 मुकदमों की सूची तैयार

हजारीबाग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार हजारीबाग जिला न्यायालय परिसर में आगामी 14 मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने इस महाअभियान के तहत अब तक करीब पांच हजार सुलहनीय मामलों को चिन्हित कर लिया है, जिनका निपटारा आपसी सहमति के आधार पर किया जाएगा। इस बाबत प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने सोमवार को एक मैराथन बैठक कर अधिवक्ताओं और न्यायिक पदाधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की और पक्षकारों को त्वरित न्याय दिलाने की रणनीति तैयार की।

​प्रधान जिला जज ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिक से अधिक वादों का निष्पादन कर हजारीबाग को एक नजीर के रूप में पेश किया जाए। अधिवक्ताओं के साथ हुई बैठक में राजकुमार राजू, सुमन कुमार सिंह, विजय कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार सिन्हा, ओमप्रकाश सिंह, राजन चोपड़ा और शालिनी चोपड़ा जैसे वरिष्ठ वकीलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और लोक अदालत को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं, न्यायिक पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्रधान जिला जज ने निर्देश दिया कि जिन मामलों में सुलह की गुंजाइश है, उन पक्षकारों को तत्काल नोटिस भेजकर सूचित किया जाए ताकि समय रहते वे मानसिक तनाव और अदालती चक्करों से मुक्ति पा सकें।

​जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने जानकारी दी कि मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए केवल 14 मार्च का इंतजार नहीं किया जा रहा, बल्कि 15 जनवरी से ही 'प्री-सिटिंग' (पूर्व बैठक) की शुरुआत कर दी गई है। इसके सुखद परिणाम भी दिखने लगे हैं; अब तक 700 से अधिक पक्षकारों को नोटिस भेजे जा चुके हैं और 50 से अधिक मामलों का निष्पादन लोक अदालत से पहले ही किया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य पिछली बार के आंकड़ों को पार करना है, जिसके लिए सिविल कोर्ट प्रशासन पूरी शिद्दत से जुटा हुआ है।

​पक्षकारों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि जुर्माने की राशि जमा करने की व्यवस्था कोर्ट परिसर के भीतर ही की जा सके और लोगों को अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े। सचिव गौरव खुराना ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं। जो भी पक्षकार अपने बाद का सुलहनामा चाहते हैं, वे किसी भी कार्य दिवस में अपने पहचान पत्र की छायाप्रति और आवेदन के साथ संबंधित न्यायालय में संपर्क कर सकते हैं और आपसी सहमति से अपने विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं।

हजारीबाग में 'सुलह से समाधान' की नई पहल: मेडिएशन फॉर नेशन 2.0 के तहत 2500 मुकदमों के निपटारे का लक्ष्य, 23 मामलों में मिली ऐतिहासिक सफलता


हजारीबाग में 'सुलह से समाधान' की नई पहल, मेडिएशन फॉर नेशन 2.0 के तहत 2500 मुकदमों के निपटारे का लक्ष्य, 23 मामलों में मिली ऐतिहासिक सफलता

हजारीबाग: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर हजारीबाग कोर्ट परिसर स्थित न्याय सदन में एक बड़ी न्यायिक पहल की शुरुआत हुई है। प्रधान जिला जज रंजीत कुमार के कुशल मार्गदर्शन में चल रहे विशेष अभियान 'मेडिएशन फॉर नेशन 2.0' ने अदालती बोझ को कम करने और आपसी विवादों को बातचीत से सुलझाने की दिशा में रफ्तार पकड़ ली है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बैनर तले आयोजित इस मुहिम का असर अब धरातल पर दिखने लगा है, जहां वर्षों से कोर्ट के चक्कर काट रहे फरियादियों को त्वरित न्याय मिल रहा है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने अभियान की सफलता साझा करते हुए बताया कि अब तक कुल 23 पुराने और जटिल मामलों का समाधान केवल आपसी सुलह के आधार पर कर लिया गया है। लेकिन यह तो बस शुरुआत है, क्योंकि प्राधिकार ने जिले में लंबित लगभग 2500 ऐसे मामलों को चिन्हित किया है जिनका निपटारा मध्यस्थता के जरिए संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक मामले के सुलझने से उससे जुड़े कई अन्य छोटे-मोटे विवाद भी खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगे, जिससे पक्षकारों को सालों साल कोर्ट के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और उनके धन व समय दोनों की बचत होगी।

इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए एक दर्जन से अधिक प्रशिक्षित मध्यस्थों की टीम पूरी निष्ठा के साथ जुटी हुई है। न्याय सदन के मध्यस्थता केंद्र में वैवाहिक कलह, घरेलू हिंसा, मोटर दुर्घटना दावा, चेक बाउंस (एनआई एक्ट), जमीन विवाद और बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जा रहा है। इसके अलावा उपभोक्ता फोरम, कर्ज और व्यावसायिक विवादों को भी इस दायरे में लाया गया है ताकि समाज में शांति व्यवस्था बनी रहे। सचिव ने आम जनों से अपील की है कि वे अपनी जिद छोड़कर इस वैकल्पिक समाधान प्रक्रिया का हिस्सा बनें और लोक अदालतों व मध्यस्थता के माध्यम से अपने विवादों का स्थायी और सौहार्दपूर्ण अंत करें।


अपराध गोष्ठी में हजारीबाग एसपी के तीखे तेवर, थानेदारों को अल्टीमेटम - 60 दिनों में निपटाएं महिला उत्पीड़न के मामले, माफियाओं पर लगेगा सीसीए

अपराध गोष्ठी में हजारीबाग एसपी के तीखे तेवर, थानेदारों को अल्टीमेटम - 60 दिनों में निपटाएं महिला उत्पीड़न के मामले, माफियाओं पर लगेगा सीसीए


हजारीबाग।

हजारीबाग पुलिस अधीक्षक ने सोमवार को आयोजित मासिक अपराध गोष्ठी में जिले की कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कड़े तेवर दिखाए हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित इस अहम बैठक में एसपी ने सभी थाना प्रभारियों और पुलिस पदाधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि काम में कोताही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से महिला प्रताड़ना, हिंसा और अनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़े संवेदनशील मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए निर्देश दिया कि ऐसे कांडों में अविलंब कार्रवाई सुनिश्चित करें और हर हाल में साठ दिनों के भीतर इनका निष्पादन करें।

बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक ने वर्ष 2026 से पूर्व के लंबित सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का फरमान सुनाया। उन्होंने साफ कहा कि पुराने मामलों का बोझ खत्म करना पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके साथ ही चोरी, लूट, छिनतई और गृहभेदन जैसी घटनाओं में शामिल फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। वारंट, इश्तेहार और कुर्की-जब्ती के लंबित मामलों को लेकर भी एसपी ने थानेदारों को टास्क सौंपा है कि वे एक विशेष ड्राइव चलाकर इनकी तामिला सुनिश्चित करें, ताकि अपराधियों में कानून का खौफ पैदा हो सके।

जिले में संगठित अपराध और अवैध कारोबार पर नकेल कसने के लिए एसपी ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। उन्होंने निर्देश दिया कि संगठित गिरोहों, अवैध खनन माफियाओं और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सीसीए (क्राइम कंट्रोल एक्ट) के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। अवैध कोयला, बालू और पत्थर उत्खनन पर पूर्ण रोक लगाने के लिए अंचल अधिकारियों और जिला खनन पदाधिकारी के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर छापेमारी करने को कहा गया है। इसके अलावा अफीम की खेती और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों की सूची बनाकर उन्हें जेल भेजने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

आगामी सरस्वती पूजा को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने अभी से ही सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि पूर्व में हुए विवादों और सांप्रदायिक घटनाओं में शामिल रहे असामाजिक तत्वों को पहले ही चिन्हित कर लिया जाए ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर भी एसपी ने चिंता जताई और लंबित कांडों के त्वरित निष्पादन का आदेश दिया। बैठक के अंत में उन्होंने पुलिस की छवि सुधारने पर जोर देते हुए कहा कि सभी थानेदार अपने थानों में आने वाले आम नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनें और समय सीमा के भीतर उनका समाधान करें, ताकि पुलिस और पब्लिक के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत हो सके।


हजारीबाग डालसा ने नशाखोरी के खिलाफ छेड़ी निर्णायक जंग

हजारीबाग डालसा ने नशाखोरी के खिलाफ छेड़ी निर्णायक जंग

नरेश सोनी विशेष संवाददाता 

हजारीबाग: मुकुंदगंज स्थित गौतम बुद्ध शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में गुरुवार को एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर मंथन हुआ जहां जिला विधिक सेवा प्राधिकार के प्रधान जिला जज रंजीत कुमार के निर्देश पर आयोजित इस नशामुक्त जागरूकता कार्यशाला में नशाखोरी को वर्तमान समाज और युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए डालसा सचिव गौरव खुराना ने बेहद भावुक और सचेत करने वाले अंदाज में कहा कि नशा केवल एक आदत नहीं बल्कि अपराध की दुनिया का प्रवेश द्वार है। उन्होंने एक नाबालिग बच्चे का उदाहरण साझा करते हुए बताया कि कैसे ब्राउन शुगर की लत ने एक मासूम को चोरी के रास्ते पर धकेल दिया था लेकिन जिला विधिक सेवा प्राधिकार और प्रशासन के समय रहते हस्तक्षेप और ऑब्जर्वेशन होम में मिले सुधार के माहौल ने आज उसे एक नई और सम्मानजनक जिंदगी दी है।

सचिव ने अभिभावकों को भी कड़े शब्दों में सलाह दी कि वे अपनी जिम्मेदारियों से मुंह न मोड़ें और बच्चों की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखें क्योंकि बढ़ती नशाखोरी ही बढ़ते अपराधों की मुख्य जड़ है। युवाओं को अब खुद आगे आकर अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। वहीं पैनल अधिवक्ता गौरव सहाय ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि हमें अपने शहर को नशा मुक्त रखना है और इसे 'उड़ता पंजाब' जैसी स्थिति में जाने से बचाना है। उन्होंने नशा और उससे पनपते अपराधों के आंकड़ों और भयावहता को विस्तार से रखा।

इस जागरूकता अभियान को रचनात्मक रूप देने के लिए प्रशिक्षुओं के बीच एक पेंटिंग प्रतियोगिता भी कराई गई जिसके माध्यम से युवाओं ने कैनवास पर नशे के खिलाफ अपना आक्रोश और संदेश उकेरा। डालसा सचिव ने घोषणा की है कि इस प्रतियोगिता के शीर्ष तीन विजेताओं को गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. बसुंधरा कुमारी, सहायक प्राध्यापिका सुष्मिता घोषाल और पीएलवी दीपक कुमार समेत पूरे कॉलेज परिवार ने इस मुहिम में अपनी सहभागिता दर्ज कराई और राष्ट्रगान के साथ इस संकल्प को दोहराया गया कि हजारीबाग नशे के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा।



हजारीबाग को नशामुक्त बनाने के लिए सड़कों पर उतरे जज और वकील, 'जीवन को हां और नशे को ना' के उद्घोष से गूंजा शहर

हजारीबाग को नशामुक्त बनाने के लिए सड़कों पर उतरे जज और वकील, 'जीवन को हां और नशे को ना' के उद्घोष से गूंजा शहर

हजारीबाग। नशा एक सामाजिक अभिशाप है और इसे जड़ से मिटाने के लिए अब कानून के रखवालों ने ही मोर्चा संभाल लिया है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकारण के निर्देश पर पूरे देश में चल रहे नशामुक्ति अभियान की गूंज सोमवार को हजारीबाग की सड़कों पर भी सुनाई दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के बैनर तले सोमवार की सुबह एक भव्य प्रभातफेरी निकाली गई, जिसमें न्यायिक पदाधिकारियों, वकीलों और कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर शहरवासियों को नशे के खिलाफ जागरूक किया।

​सुबह सात बजे सिविल कोर्ट परिसर से निकली यह प्रभातफेरी झील रोड होते हुए वापस न्याय सदन भवन पहुंचकर संपन्न हुई। इस जागरूकता यात्रा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना, सिविल कोर्ट निबंधक दिव्यम चौधरी, विक्रांत रंजन और सुमंत दीक्षित समेत कई न्यायिक पदाधिकारी सड़क पर पैदल चलते नजर आए। उनके साथ पैनल अधिवक्ता, एलएडीसी के सदस्य, पारा लीगल वालेंटियर और कोर्ट कर्मचारी भी कदमताल करते हुए चल रहे थे। सभी के हाथों में नशामुक्ति के स्लोगन वाले बैनर थे, जो समाज को यह संदेश दे रहे थे कि नशा विनाश का कारण है और इससे दूर रहने में ही भलाई है।

​इस अभियान को और गति देने के लिए सोमवार को ही प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष रंजीत कुमार ने अपने कार्यालय में पत्रकार सम्मेलन कर आगामी रूपरेखा साझा की। उन्होंने घोषणा की कि यह विशेष जागरूकता अभियान 5 जनवरी से 12 जनवरी तक पूरे जिले में युद्धस्तर पर चलाया जाएगा। शहर की सीमाओं से निकलकर यह मुहीम अब जिले के सभी प्रखंडों और सुदूर पंचायतों तक पहुंचेगी। अभियान के तहत स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों, बैनरों और जनसंपर्क के माध्यम से युवाओं को नशे के जाल से बचाने का प्रयास किया जाएगा।

​प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जिले को नशामुक्त क्षेत्र बनाना ही विधिक सेवा प्राधिकार का मुख्य लक्ष्य है। इस कार्य में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नशा रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं और पुलिस व न्यायालय के समन्वय से आरोपियों को दंडित भी किया जा रहा है, लेकिन सिर्फ कानून काफी नहीं है। समाज को खुद आगे आकर 'जीवन को समझना और नशे को ना कहना' होगा। डालसा सचिव गौरव खुराना की मौजूदगी में उन्होंने बताया कि आने वाली युवा पीढ़ी को बचाने के लिए न्यायिक पदाधिकारी, मिडिएटर और पारा वालंटियर पूरी निष्ठा के साथ इस अभियान में अपना योगदान दे रहे हैं।

हजारीबाग नशामुक्ति जागरूकता अभियान प्रभातफेरी के साथ हुई शुरूआ

हजारीबाग नशामुक्ति जागरूकता अभियान प्रभातफेरी के साथ हुई शुरूआ

जीवन को समझना है और नशा को ना करना है-जिला जज

हजारीबाग: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर पूरे भारत में नशामुक्ति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बैनरतले अभियान की शरूआत सोमवार को प्रभातफेरी के साथ की गई। उक्त बातें जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष रंजीत कुमार ने अपने कार्यालय में आहुत पत्रकार सम्मेलन में कही। उन्होंने बताया कि 5-12 जनवरी तक नशामुक्ति जागरूकता अभियान पूरे जिले में चलाया जा रहा है। गांव के अंतिम पायदान तक जागरूकता लाने की कोशिश की जा रही है। प्रखंड, पंचायत, स्कूल, काॅलेज, शिक्षण संस्थान एवं सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जागरूकता के माध्यम से जीवन को समझना है और नशा को ना करना है कि अपील आमलोगों से की जाएगी। उन्होंने कहा नशा रोकने के लिए बहुत से कानून बनाए गए हैं। पुलिस और न्यायालय आपस में समांजस बनाकर आरोपियों को दंडित भी कर रहे है। इसके अलावा डालसा के नेतृत्व में अभियान चलाया जा रहा है। जिससे आने समय की युवा पीढ़ी को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि अभियान को सफल बनाने में न्यायिक पदाधिकारी, मिडिएटर, पारा वाॅलंटियर सहित अन्य न्यायालय कर्मी अपना योगदान दे रहे है। मौके पर डालसा सचिव गौरव खुराना भी मौजूद थे।
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