भ्रष्टाचार का नग्न नृत्य- ग्राम टटगंवा में मनरेगा बना लूट का अड्डा, करोड़ों का वारा-न्यारा
दारू/हजारीबाग : विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली 'मनरेगा' योजना ग्राम पंचायत टटगंवा में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहाँ रोजगार सेवक और बीपीओ (BPO) की जुगलबंदी ने सरकारी खजाने को दीमक की तरह चाटते हुए एक ऐसे सुनियोजित लूट तंत्र को जन्म दिया है, जिसने नैतिकता और कानून की समस्त सीमाओं को लांघ दिया है।
कागजी 'टीसीपी' का तिलिस्म: ४ करोड़ का महाघोटाला
टटगंवा में भ्रष्टाचार का गणित किसी को भी हैरत में डाल सकता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले ८ महीनों में ४०० और ३ वर्षों के भीतर लगभग १००० 'टीसीपी' (TCP) निर्माण का दावा किया गया है।
तर्कहीन आंकड़े: यदि १००० टीसीपी के क्षेत्रफल का आकलन किया जाए, तो समूचा गांव—खेत, खलिहान और घर—सब कुछ टीसीपी में तब्दील हो जाना चाहिए था।
धरातल पर शून्य: हकीकत यह है कि एक ही संरचना की कई बार तस्वीरें खींचकर पोर्टल पर अपलोड की गई हैं। लगभग ४ करोड़ रुपये का यह गबन साक्ष्यों के साथ अधिकारियों की मिलीभगत की ओर स्पष्ट संकेत करता है।
फर्जी जॉब कार्ड और प्रशासनिक अराजकता
भ्रष्टाचार के मास्टरमाइंड्स ने ग्राम की जनसंख्या के अनुपात में दोगुने जॉब कार्ड निर्गत कर दिए हैं। हद तो तब हो गई जब नाबालिग बच्चों के नाम पर भी जॉब कार्ड जारी कर दिए गए। यह न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि बाल अधिकारों का भी घोर उल्लंघन है।
बहुआयामी लूट: मेढ़बंदी, बागवानी और डोभा निर्माण
केवल टीसीपी ही नहीं, बल्कि आम और मिश्रित बागवानी के नाम पर भी 'कागजी विकास' किया गया है। धरातल पर एक भी पौधा जीवित नहीं है, किंतु फाइलों में करोड़ों की निकासी पूर्ण हो चुकी है। जल छाजन और मनरेगा के बीच 'डबल फंड' का खेल खेलकर डोभा निर्माण में भी भारी अनियमितता बरती गई है।
जांच और रिकवरी की मांग
यह कोई सामान्य चूक नहीं, बल्कि एक संगठित वित्तीय अपराध है।
ग्रामीणों और प्रबुद्ध जनों ने मांग की है कि:
उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) जांच: निष्पक्ष जांच हेतु जिले से बाहर के अधिकारियों की टीम गठित हो।
दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई: मुख्य आरोपी रोजगार सेवक और बीपीओ के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
राजस्व वसूली: गबन की गई पाई-पाई की 'रिकवरी' संबंधित दोषियों की निजी संपत्ति से की जाए।
"जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? टटगंवा का यह घोटाला प्रशासन की आंखों में झोंकी गई धूल है, जिसकी सफाई अविलंब अनिवार्य है।"

