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Editor: Naresh Prasad Soni
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भ्रष्टाचार का नग्न नृत्य- ग्राम टटगंवा में मनरेगा बना लूट का अड्डा, करोड़ों का वारा-न्यारा

भ्रष्टाचार का नग्न नृत्य- ग्राम टटगंवा में मनरेगा बना लूट का अड्डा, करोड़ों का वारा-न्यारा


दारू/हजारीबाग : विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली 'मनरेगा' योजना ग्राम पंचायत टटगंवा में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहाँ रोजगार सेवक और बीपीओ (BPO) की जुगलबंदी ने सरकारी खजाने को दीमक की तरह चाटते हुए एक ऐसे सुनियोजित लूट तंत्र को जन्म दिया है, जिसने नैतिकता और कानून की समस्त सीमाओं को लांघ दिया है।

कागजी 'टीसीपी' का तिलिस्म: ४ करोड़ का महाघोटाला

टटगंवा में भ्रष्टाचार का गणित किसी को भी हैरत में डाल सकता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले ८ महीनों में ४०० और ३ वर्षों के भीतर लगभग १००० 'टीसीपी' (TCP) निर्माण का दावा किया गया है।

तर्कहीन आंकड़े: यदि १००० टीसीपी के क्षेत्रफल का आकलन किया जाए, तो समूचा गांव—खेत, खलिहान और घर—सब कुछ टीसीपी में तब्दील हो जाना चाहिए था।

धरातल पर शून्य: हकीकत यह है कि एक ही संरचना की कई बार तस्वीरें खींचकर पोर्टल पर अपलोड की गई हैं। लगभग ४ करोड़ रुपये का यह गबन साक्ष्यों के साथ अधिकारियों की मिलीभगत की ओर स्पष्ट संकेत करता है।

फर्जी जॉब कार्ड और प्रशासनिक अराजकता

भ्रष्टाचार के मास्टरमाइंड्स ने ग्राम की जनसंख्या के अनुपात में दोगुने जॉब कार्ड निर्गत कर दिए हैं। हद तो तब हो गई जब नाबालिग बच्चों के नाम पर भी जॉब कार्ड जारी कर दिए गए। यह न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि बाल अधिकारों का भी घोर उल्लंघन है।

बहुआयामी लूट: मेढ़बंदी, बागवानी और डोभा निर्माण

केवल टीसीपी ही नहीं, बल्कि आम और मिश्रित बागवानी के नाम पर भी 'कागजी विकास' किया गया है। धरातल पर एक भी पौधा जीवित नहीं है, किंतु फाइलों में करोड़ों की निकासी पूर्ण हो चुकी है। जल छाजन और मनरेगा के बीच 'डबल फंड' का खेल खेलकर डोभा निर्माण में भी भारी अनियमितता बरती गई है।

जांच और रिकवरी की मांग

यह कोई सामान्य चूक नहीं, बल्कि एक संगठित वित्तीय अपराध है। 

ग्रामीणों और प्रबुद्ध जनों ने मांग की है कि:

 उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) जांच: निष्पक्ष जांच हेतु जिले से बाहर के अधिकारियों की टीम गठित हो।

 दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई: मुख्य आरोपी रोजगार सेवक और बीपीओ के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।

 राजस्व वसूली: गबन की गई पाई-पाई की 'रिकवरी' संबंधित दोषियों की निजी संपत्ति से की जाए।

"जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? टटगंवा का यह घोटाला प्रशासन की आंखों में झोंकी गई धूल है, जिसकी सफाई अविलंब अनिवार्य है।"

जी-राम-जी बिल पर विपक्ष के पेट में दर्द क्यों?

 जी-राम-जी बिल पर विपक्ष के पेट में दर्द क्यों?


 

सांसद मनीष जायसवाल ने गिनाए नए कानून के फायदे, कहा- राम नाम से नफरत ठीक नहीं

हजारीबाग। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्वरूप और नाम में प्रस्तावित बदलावों को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। सांसद ने मीडिया से मुखातिब होते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष 'जी-राम-जी' (G-RAM-G) बिल को लेकर जनता के बीच भ्रामक प्रचार कर रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह नया कानून मजदूरों और किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस देश में महात्मा गांधी के अंतिम शब्द 'हे राम' थे और जिनके हृदय में राम बसते थे, वहां अगर किसी जनकल्याणकारी बिल के संक्षिप्त नाम में प्रभु श्रीराम का नाम आता है, तो विपक्ष के पेट में दर्द क्यों हो रहा है। सांसद ने कड़े शब्दों में कहा कि यह रामभक्तों का देश है और राम नाम से ऐसी नफरत विपक्ष की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती है।

​सांसद मनीष जायसवाल ने नए विधेयक की खूबियां गिनाते हुए बताया कि पुराने कानून की तुलना में इसमें रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जो कि सीधे तौर पर 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहले खेती के पीक सीजन के दौरान जब किसान अपने खेतों में व्यस्त होते थे, तो वे मनरेगा के तहत काम नहीं कर पाते थे और उनके 100 दिनों के कोटे में नुकसान होता था। लेकिन नए प्रावधानों में खेती के 60 महत्वपूर्ण दिनों को ध्यान में रखते हुए रोजगार दिवसों की गणना की जाएगी, जिससे किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा। सांसद ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला एक क्रांतिकारी कदम बताया।

​भुगतान में होने वाली देरी, जो मनरेगा मजदूरों की सबसे बड़ी समस्या थी, उस पर सांसद ने कहा कि नए बिल में साप्ताहिक भुगतान का कड़ा प्रावधान किया गया है। अब मजदूरों को अपनी मजदूरी के लिए रोस्टर और बिल पास होने का महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा, भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और आधुनिक तकनीक के जरिए मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है ताकि शिकायतों का त्वरित निपटारा हो सके। सांसद ने यह भी कहा कि पहले मनरेगा का दायरा सीमित कार्यों तक था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर गांव के विकास की लगभग सभी योजनाओं से जोड़ दिया गया है। अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि यह योजना 2047 के 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में एक अहम भूमिका निभाएगी।

मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना राष्ट्रपिता का अपमान, कांग्रेस ने किया चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान

 मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना राष्ट्रपिता का अपमान, कांग्रेस ने किया चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान

नरेश सोनी विशेष संवाददाता 


हजारीबाग। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने की खबरों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हजारीबाग स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय कृष्ण बल्लभ आश्रम में शनिवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान जिला कांग्रेस मीडिया अध्यक्ष निसार खान ने इसे राष्ट्रपिता का घोर अपमान करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मनरेगा का नाम बदलकर 'जी राम जी' करके बापू की विचारधारा और उनके योगदान को मिटाने की साजिश रच रही है, जिसे कांग्रेस पार्टी कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

निसार खान ने आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस निर्णय के खिलाफ कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी। विरोध प्रदर्शन का आगाज 11 जनवरी को होगा, जब जिला मुख्यालयों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष कांग्रेसी कार्यकर्ता एक दिवसीय उपवास रखेंगे। इसके बाद जन-जागरण के लिए 12 जनवरी से 29 जनवरी तक जिले की सभी ग्राम पंचायतों में चौपाल और सघन जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। बापू की पुण्यतिथि 30 जनवरी को वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा, ताकि सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाई जा सके।

विरोध के अगले चरण में 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला उपायुक्त कार्यालय के समक्ष 'मनरेगा बचाओ' धरना प्रदर्शन किया जाएगा और विधेयक वापस लेने की मांग करते हुए उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा जाएगा। आंदोलन को और तेज करते हुए 7 फरवरी से 15 फरवरी तक राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव का कार्यक्रम तय किया गया है। अंत में 16 फरवरी से 25 फरवरी तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा चार प्रमुख क्षेत्रीय रैलियों के आयोजन के साथ इस महाअभियान का समापन होगा। प्रेस वार्ता में प्रदेश सचिव बिनोद सिंह, पूर्व जिला अध्यक्ष आबिद अंसारी, युवा कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष कोमल कुमारी और जिला महासचिव दिलीप कुमार रवि ने भी केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की और आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।


राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाओ अभियान रांची की रैली में हजारीबाग जिला से कांग्रेसी हुए शामिल

 राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाओ अभियान रांची की रैली में हजारीबाग जिला से कांग्रेसी हुए शामिल 



हजारीबाग : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम हटाए जाने के विरोध में राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाओ अभियान रैली में सोमवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रतिमा स्थल मोरहाबादी रांची चलकर लोकभवन ( राजभवन ) तक के पदयात्रा में हजारीबाग जिले से राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाओ अभियान कांग्रेसी शामिल हुए । राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाओ अभियान रैली में शामिल होने वालों में हिन्दु धार्मिक न्यास बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष जय शंकर पाठक सदर विधान सभा के पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह प्रदेश सचिव अवधेश कुमार सिंह, बिनोद सिंह, शशि मोहन सिंह जिला कांग्रेस के मीडिया अध्यक्ष निसार खान वरिष्ठ कांग्रेसी रजी अहमद, विरेन्द्र कुमार सिंह, दिलीप कुमार रवि, उदय पाण्डेय, सुनिल कुमार ओझा, शारदा रंजन दुबे, अनिल कुमार भुईंया, कलावती देवी, राजीव कुमार मेहता, देवेन्द्र कुमार रवि, रंजीत यादव, मनोज कुमार मोदी, डाॅ. मोईन खान, ओमप्रकाश मिश्रा, अजित कुमार सिंह, गोवर्धन गंझू के अतिरिक्त सैकड़ो कांग्रेसी शामिल थे ।

महत्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंट( mnrega) से भाजपा द्वारा महात्मा गांधी का नाम हटाने का सचेत निर्णय वैचारिक है - शहजादा अनवर

महत्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी से भाजपा द्वारा महात्मा गांधी का नाम हटाने का सचेत निर्णय वैचारिक है  - शहजादा अनवर

हजारीबाग : जिला कांग्रेस कार्यालय कृष्ण बल्लभ में भाजपा द्वारा महत्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी ( मनरेगा ) से महात्मा गांधी के नाम हटाए जाने पर एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया । आयोजित प्रेसवार्ता में प्रेस को संबोधित करते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर ने  मनरेगा का नाम बदल कर जी राम जी रखे जाने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि पांच जनवरी को राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाओ अभियान के तहत सम्पूर्ण झारखंड में 11 बजे महात्मा गांधी प्रतिमा स्थल मोरहाबादी रांची से लोकभवन ( राजभवन ) तक पदयात्रा की जाएगी । मनरेगा से भाजपा सरकार द्वारा महत्मा गांधी का  महात्मा गांधी का नाम हटाने का सचेत निर्णय वैचारिक है । गांधी की श्रम की गरिमा, समाजिक न्याय और सबसे गरीबों के प्रति राज्य की नैतिक जिम्मेदारी के प्रतीक है । यह नाम परिवर्तन गांधी जी के मुल्यों के प्रति भाजापा-आरएसएस की दीर्घकालिक असहजता और अविश्वास को दर्शाता है तथा एक जन केन्द्रित कल्याणकारी कानून से राष्ट्रपिता के जुड़ाव को मिटाने का प्रयास है । प्रस्तावित नया विधेयक उस कानूनी काम के अधिकार को समाप्त कर देता है जो, मनरेगा ने प्रदान किया था । यह मांग आधारित, वैधानिक अधिकार की जगह एक केन्द्र नियंत्रित योजना लाता है, जिसमे न तो रोजगार की कोई कानून लागू की जा सकने वाली गारंटी है न सार्वभौमिक कबरेज और न ही यह आश्वासन कि आवश्यकता के समय लोंगो को काम मिलेगा । वस्तुत: काम के अधिकार को ही समाप्त किया जा रहा है । मनरेगा के तहत मजदुरी के वित्तपोषण की प्राथमिक जिम्मेवारी केन्द्र सरकार की थी, जिससे यह एक वास्तविक राष्ट्रीय रोजगार गारंटी बनाती थी । नया विधेयक इस जिम्मेदारी से पिछे हटना चाहती है, बोझ राज्यों पर डालता है, आवंटनों पर सीमा लगता है और मांग आधारित कार्यक्रम की बुनियाद को कमजोर करता है । इससे संघवाद कमजोर होता है और वित्तीय बाधाओं के कारण राज्यों को काम की मांग दबाने के लिए मजबूर होना पड़ता है । गांधी जी की विरासत, श्रामिकों के अधिकार और संघीय जिम्मेदारी पर यह संयुक्त हमला भाजापा-आरएसएस की उस बड़ी साजिश को उजागर करता है, जिसके तहत अधिकार आधारित कल्याण को समाप्त कर केन्द्र नियंत्रित दया-दान की व्यव्स्था से बदला जा रहा है । प्रेसवार्ता में  वरिष्ठ कांग्रेसी अशोक देव प्रदेश सचिव बिनोद सिंह, शशि मोहन सिंह, कांग्रेस के जिला मीडिया अध्यक्ष निसार पूर्व नगर अध्यक्ष मनोज नारायण भगत आदि उपस्थित थे ।
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