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Editor: Naresh Prasad Soni
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जी-राम-जी बिल पर विपक्ष के पेट में दर्द क्यों?

 जी-राम-जी बिल पर विपक्ष के पेट में दर्द क्यों?


 

सांसद मनीष जायसवाल ने गिनाए नए कानून के फायदे, कहा- राम नाम से नफरत ठीक नहीं

हजारीबाग। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्वरूप और नाम में प्रस्तावित बदलावों को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। सांसद ने मीडिया से मुखातिब होते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष 'जी-राम-जी' (G-RAM-G) बिल को लेकर जनता के बीच भ्रामक प्रचार कर रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह नया कानून मजदूरों और किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस देश में महात्मा गांधी के अंतिम शब्द 'हे राम' थे और जिनके हृदय में राम बसते थे, वहां अगर किसी जनकल्याणकारी बिल के संक्षिप्त नाम में प्रभु श्रीराम का नाम आता है, तो विपक्ष के पेट में दर्द क्यों हो रहा है। सांसद ने कड़े शब्दों में कहा कि यह रामभक्तों का देश है और राम नाम से ऐसी नफरत विपक्ष की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती है।

​सांसद मनीष जायसवाल ने नए विधेयक की खूबियां गिनाते हुए बताया कि पुराने कानून की तुलना में इसमें रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जो कि सीधे तौर पर 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहले खेती के पीक सीजन के दौरान जब किसान अपने खेतों में व्यस्त होते थे, तो वे मनरेगा के तहत काम नहीं कर पाते थे और उनके 100 दिनों के कोटे में नुकसान होता था। लेकिन नए प्रावधानों में खेती के 60 महत्वपूर्ण दिनों को ध्यान में रखते हुए रोजगार दिवसों की गणना की जाएगी, जिससे किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा। सांसद ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला एक क्रांतिकारी कदम बताया।

​भुगतान में होने वाली देरी, जो मनरेगा मजदूरों की सबसे बड़ी समस्या थी, उस पर सांसद ने कहा कि नए बिल में साप्ताहिक भुगतान का कड़ा प्रावधान किया गया है। अब मजदूरों को अपनी मजदूरी के लिए रोस्टर और बिल पास होने का महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा, भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और आधुनिक तकनीक के जरिए मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है ताकि शिकायतों का त्वरित निपटारा हो सके। सांसद ने यह भी कहा कि पहले मनरेगा का दायरा सीमित कार्यों तक था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर गांव के विकास की लगभग सभी योजनाओं से जोड़ दिया गया है। अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि यह योजना 2047 के 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में एक अहम भूमिका निभाएगी।

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