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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में 'नौकरी के बदले नोट' का खेल!

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शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में 'नौकरी के बदले नोट' का खेल!

आरक्षण दरकिनार, आउटसोर्सिंग एजेंसी पर पैसे लेकर बहाली करने का सनसनीखेज आरोप

हजारीबाग। हजारीबाग के प्रतिष्ठित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसबीएमसीएच) की साख पर एक बार फिर बट्टा लगा है। अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था के बाद अब आउटसोर्सिंग के जरिए हो रही नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धांधली का मामला उजागर हुआ है। अस्पताल में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत कंप्यूटर ऑपरेटरों की बहाली प्रक्रिया में सरकारी नियमों और आरक्षण रोस्टर की खुलेआम धज्जियां उड़ाने की बात सामने आई है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस गंभीर अनियमितता को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह के मीडिया सलाहकार विक्की धान ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने उपायुक्त को लिखित शिकायत सौंपते हुए आउटसोर्सिंग एजेंसी 'राइडर सिक्योरिटी सर्विसेज' पर पैसे लेकर अवैध रूप से नियुक्तियां करने का सीधा और गंभीर आरोप लगाया है।

​मामले की गहराई में जाने पर एक सुनियोजित धांधली की तस्वीर उभरती है। दस्तावेजों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक ने पत्रांक 3480 (दिनांक 17/12/2025) के जरिए रांची स्थित एजेंसी मेसर्स राइडर सिक्योरिटी सर्विसेज प्रा. लि. को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के सुचारू संचालन हेतु 10 अतिरिक्त कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति का आदेश दिया था। इस आदेश में अधीक्षक ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में हिदायत दी थी कि बहाली प्रक्रिया में झारखंड सरकार की आरक्षण नियमावली और रोस्टर का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, लेबर लॉ का पालन करते हुए पारदर्शी तरीके से वैकेंसियाँ निकालने और कॉलेज की जांच कमेटी द्वारा दक्षता परीक्षण के बाद ही अंतिम चयन करने का निर्देश था।

​बावजूद इसके, उपायुक्त को सौंपी गई शिकायत में दावा किया गया है कि एजेंसी ने अपनी मनमानी करते हुए अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन के इन निर्देशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। विक्की धान ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि एजेंसी ने आरक्षण रोस्टर को पूरी तरह दरकिनार कर दिया, जिससे एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के योग्य अभ्यर्थी अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रह गए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया योग्यता या मेरिट के आधार पर नहीं, बल्कि 'पैसे लेकर' की गई है, जो कि सीधे तौर पर भ्रष्टाचार है।

​इस खुलासे ने सरकारी संस्थानों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता ने उपायुक्त से मांग की है कि संदिग्ध तरीके से हुई इन नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, आरक्षण नियमों का पालन करते हुए नए सिरे से पारदर्शी बहाली प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है ताकि गरीब और जरूरतमंद मेधावी छात्रों को न्याय मिल सके। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस 'भर्ती घोटाले' पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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