अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाने वाले अमर सेनानी थे पांडेय गणपत राय, कांग्रेस ने 217वीं जयंती पर किया नमन
हजारीबाग। 1857 की क्रांति के महानायक और झारखंड की माटी के वीर सपूत अमर शहीद पांडेय गणपत राय की 217वीं जयंती शनिवार को जिला कांग्रेस कार्यालय कृष्ण बल्लभ आश्रम में पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कांग्रेस जनों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और देश की आजादी में उनके अदम्य साहस को याद किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मंत्री एवं जिला अध्यक्ष जय प्रकाश भाई पटेल ने शहीद पांडेय गणपत राय के जीवन संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि झारखंड के इस महान क्रांतिकारी का जन्म 17 जनवरी 1809 को लोहरदगा जिले के भंडरा प्रखंड स्थित भैरों गांव के एक कायस्थ परिवार में हुआ था। वे नागवंशी राजाओं के दीवान थे और झारखंड के दूसरे ऐसे जमींदार बने जिन्होंने 1857 की क्रांति का नेतृत्व संभाला। पटेल ने कहा कि पांडेय गणपत राय इस क्षेत्र में मुख्य सेनानायक की भूमिका में रहे और अपनी कुशल गुरिल्ला युद्ध नीति से अंग्रेजी सेना और उनके बड़े-बड़े सेनानायकों को लगातार घुटने टेकने पर मजबूर करते रहे।
वक्ताओं ने उनके बलिदान को याद करते हुए कहा कि जब भी रांची के शहीद चौक स्थित शहीद स्थल की ओर नजर जाती है, तो पांडेय गणपत राय की शहादत जीवंत हो उठती है। इसी पवित्र स्थल पर 21 अप्रैल 1858 को अंग्रेजी हुकूमत ने क्रूरता की हदें पार करते हुए उन्हें एक कदम के पेड़ पर लटकाकर फांसी दे दी थी। उनके बलिदान ने झारखंड में स्वतंत्रता संग्राम की आग को और धधका दिया था।
इस श्रद्धांजलि सभा में पूर्व प्रदेश महासचिव विजय कुमार यादव, प्रदेश सचिव अवधेश कुमार सिंह, बिनोद सिंह, जिला कांग्रेस के मीडिया अध्यक्ष निसार खान, सलीम रजा, दिलीप कुमार रवि और रघु जायसवाल समेत अनेक वरिष्ठ कांग्रेसी मौजूद रहे। इसके अलावा बाबर अंसारी, महेश प्रसाद साव, सदरूल होदा, एन.ए. चौधरी, दरगाही खान, निसार अहमद भोला, रियाजउद्दिन अंसारी, अजित कुमार सिंह, कौशल कुमार सिंह, मनोज मेहता, सतीश प्रसाद मेहता, अजय कुमार यादव और गिरजा शंकर ने भी अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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