अमृतसर से आए रागी जत्थे के शबद-कीर्तन से निहाल हुई संगत, बोले सो निहाल के जयकारों से गूंजा हजारीबाग
हजारीबाग। सिखों के दसवें गुरु, सरबंस दानी धन-धन साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज का प्रकाश पर्व सोमवार को हजारीबाग में अपार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा परिसर में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि हर तरफ भक्ति का माहौल छा गया। सुबह 11 बजे से सजे दीवान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगत ने हाजिरी लगाई और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस पावन अवसर पर पूरा वातावरण 'वाहेगुरु' के सिमरन और जयकारों से गुंजायमान रहा।
विशेष दीवान की शुरुआत भाई परमजीत सिंह के मधुर शबद-कीर्तन से हुई, जिसने संगत को भावविभोर कर दिया। इसके उपरांत कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सचखंड हरमंदिर साहिब, दरबार साहिब (अमृतसर) से विशेष रूप से पधारे पंथ-प्रसिद्ध रागी भाई साहिब भाई बलदेव सिंह जी भूलपुर का कीर्तन रहा। उन्होंने अपनी रूहानी आवाज में गुरुवाणी का शबद-कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। अमृतसर से आए रागी जत्थे की वाणी सुनकर उपस्थित श्रद्धालु निहाल हो उठे और पूरा हॉल जो बोले सो निहाल, सत अकाल के उद्घोष से गूंज उठा।
दीवान की समाप्ति के बाद दोपहर दो बजे से गुरु का अटूट लंगर श्रद्धापूर्वक बरताया गया। लंगर में सामाजिक समरसता और भाईचारे की अद्भुत मिसाल देखने को मिली, जहां सदर विधायक प्रदीप प्रसाद सहित सभी धर्मों के लोगों और गणमान्य नागरिकों ने एक साथ पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान सेवा और समर्पण की भावना ने सभी का मन मोह लिया। विधायक प्रदीप प्रसाद ने भी मत्था टेका और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में गुरु सिंह सभा के सदस्यों का अहम योगदान रहा। सभा के अध्यक्ष स. परमवीर सिंह कालरा, उपाध्यक्ष गुरप्रीत सिंह व नितिन बावा, सचिव आनंद राज सिंह कालरा, कोषाध्यक्ष कुलतार सिंह और जसमीत सिंह ने दीवान में शामिल होने के लिए समस्त संगत का तहे दिल से धन्यवाद किया। कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रभारी रोहित बजाज ने बताया कि गुरु का अटूट लंगर सामूहिक साध संगत की ओर से निरंतर बरताया गया। प्रकाश पर्व के इस आयोजन ने शहर में आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द को और मजबूत किया है।