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Editor: Naresh Prasad Soni
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पेट्रोल-डीजल की खुदरा खरीद पर केंद्र सरकार का नया कानून लागू: आम जनता के ईंधन पर उद्योगों के 'डाके' को रोकने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी

 

पेट्रोल-डीजल की खुदरा खरीद पर केंद्र सरकार का नया कानून लागू: आम जनता के ईंधन पर उद्योगों के 'डाके' को रोकने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी

"आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत थोक खरीदारों पर पूर्ण प्रतिबंध; ड्रम या कंटेनर में प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर तेल देने की सीमा तय, उल्लंघन पर सीधे जेल"— विशेष रिपोर्ट

प्रशासनिक एवं राष्ट्रीय ब्यूरो, नई दिल्ली / हजारीबाग

  • रिपोर्टर: राष्ट्रीय मामलों के ब्यूरो प्रमुख (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): भारत का राजपत्र (The Gazette of India), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, अधिसूचना संख्या G.S.R. 474(E) (दिनांक: 11 जून 2026)

नई दिल्ली / हजारीबाग:

देश के आम उपभोक्ताओं, वाहन चालकों और किसानों को पेट्रोल-डीजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा इसकी जमाखोरी व कालाबाजारी को पूरी तरह रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक विधिक कदम उठाया है। भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भारत के राजपत्र (The Gazette of India) में एक असाधारण अधिसूचना जारी की है। मंत्रालय के निदेशक अरुण कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस नए और कड़े कानून को 'मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (Temporary Regulation of Supply through Retail Outlets) ऑर्डर, 2026' नाम दिया गया है, जिसे तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू कर दिया गया है।

  • ⛽📜 केंद्र का बड़ा फैसला: पेट्रोल-डीजल की खुदरा खरीद पर देश में नया कानून लागू; उद्योगों की मुनाफाखोरी रोकने को जारी हुआ गजट नोटिफिकेशन!
वैश्विक संकट और कीमतों के अंतर के कारण उठाना पड़ा यह कड़ा कदम

​सरकारी अधिसूचना के प्रस्तावना खंड में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis) के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग लॉजिस्टिक्स पर विपरीत असर पड़ा है। इस संवेदनशील स्थिति में घरेलू स्तर पर तेल का विवेकपूर्ण प्रबंधन बेहद जरूरी हो गया था।

​सबसे बड़ी वजह यह सामने आई कि थोक (Bulk) और खुदरा (Retail) कीमतों में बड़ा अंतर होने के कारण औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत खरीदारों (जैसे बड़ी फैक्ट्रियां, निजी मॉल, कंस्ट्रक्शन कंपनियां) ने अपनी खुद की 'कंज्यूमर पंप' व्यवस्था से महंगे दाम पर तेल न खरीदकर, आम जनता के लिए बने सामान्य पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में डीजल-पेट्रोल उठाना शुरू कर दिया था। इससे देश के कई हिस्सों में कृत्रिम किल्लत और आम जनता के लिए ईंधन संकट पैदा होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा था।

नए कानून की 5 सबसे बड़ी और ठोस बातें:

  • 1. थोक खरीदारों पर पूर्ण विधिक प्रतिबंध: सभी संस्थागत, प्रत्यक्ष, औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों को अब सामान्य पेट्रोल पंपों (Retail Outlets) से पेट्रोल या डीजल (MS/HSD) खरीदने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। उन्हें अपनी ईंधन जरूरत सिर्फ अपने अधिकृत कंज्यूमर पंपों से ही महंगी दरों पर पूरी करनी होगी।
  • 2. खुदरा बिक्री पर सख्त सीमा: आम पेट्रोल पंप डीलर अब किसी भी ग्राहक या वाहन को केवल उनके वाहनों के ईंधन टैंक में ही सीधे डीजल-पेट्रोल भर सकेंगे। इसके अलावा, यदि किसी को कंटेनर में डीजल चाहिए, तो वह केवल PESO (Petroleum and Explosives Safety Organization) द्वारा स्वीकृत सुरक्षित कंटेनर में ही दिया जा सकेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रतिदिन प्रति ग्राहक 200 लीटर से अधिक नहीं होगी।
  • 3. रीसेल (फिर से बेचने) पर पूर्ण रोक: पेट्रोल पंपों से खुदरा दर पर खरीदे गए इस ईंधन को आगे किसी भी व्यावसायिक लाभ के लिए दोबारा बेचा (Resold) नहीं जा सकेगा।
  • 4. 90 दिनों की वैधता अवधि: यह सख्त आदेश शुरुआती तौर पर 90 दिनों की अवधि के लिए जारी किया गया है। यदि सरकार आवश्यक समझेगी, तो इसकी समीक्षा कर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
  • 5. छापेमारी और जब्ती के असीमित अधिकार (Power of Search and Seizure): इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने के लिए केंद्र व राज्य सरकार के राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers), पुलिस उपाधीक्षक (DSP) या उससे ऊपर के रैंक के पुलिस अधिकारियों, और तेल कंपनियों के सेल्स ऑफिसर (जो कम से कम रेंट ऑफिसर रैंक के हों) को सघन चेकिंग, औचक छापेमारी और नियम उल्लंघन पर ईंधन व वाहनों को ऑन-द-स्पॉट जब्त करने के सीधे विधिक अधिकार दिए गए हैं।

नियम तोड़ा तो आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मिलेगी सख्त सजा

​अधिसूचना के क्लॉज 7 के अनुसार, यदि कोई भी पेट्रोल पंप डीलर या वाणिज्यिक उपभोक्ता इन नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) की धारा 3 और अन्य संबंधित कड़े विधिक प्रावधानों के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ तत्काल विशेष टास्क फोर्स बनाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव व विधिक गाइड (विद्युत एवं ईंधन अधिकार / Essential Commodities Legal Framework)

​📌 जानिए क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और इसके तहत सजा के नियम?

  • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Section 3): यह कानून केंद्र सरकार को किसी भी आवश्यक वस्तु (जैसे पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल, दवाएं) के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और व्यापार को नियंत्रित करने का असीमित विधिक अधिकार देता है। यदि कोई भी इकाई या डीलर सरकार द्वारा तय की गई खुदरा बिक्री सीमा का उल्लंघन करता है, तो उसे इस अधिनियम के तहत अवैध माना जाता है।
  • सजा और जुर्माने के प्रावधान: इस कानून की धारा 7 के तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 3 महीने से लेकर अधिकतम 7 वर्ष तक के कठोर कारावास (जेल) का विधिक प्रावधान है। इसके साथ ही संबंधित पेट्रोल पंप का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) करने और पूरे स्टॉक को राजसात (जब्त) करने का विधिक नियम है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: उद्योगों की मुनाफाखोरी पर लगाम से बचेगी आम जनता और किसानों की गाढ़ी कमाई (Editorial)

सस्ते खुदरा तेल पर डाका डाल रहे उद्योगों पर सरकार का यह प्रहार स्वागत योग्य है

पेट्रोल और डीजल देश की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन हैं। थोक और खुदरा कीमतों के अंतर का फायदा उठाकर बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों और मॉल संचालकों द्वारा आम जनता के पेट्रोल पंपों से हजारों लीटर डीजल ड्रमों में भरकर ले जाना एक गंभीर आर्थिक अपराध था। इससे न केवल सरकारी तेल कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा था, बल्कि सुदूर जिलों (जैसे हजारीबाग, बोकारो और चतरा) के ग्रामीण इलाकों में खेती के सीजन में किसानों को ट्रैक्टरों के लिए डीजल नहीं मिल पा रहा था। मंत्रालय का यह नया गजट नोटिफिकेशन सीधे तौर पर इस सिंडिकेट की कमर तोड़ेगा। 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि अब असली जिम्मेदारी स्थानीय जिला प्रशासनों और पुलिस उपाधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारियों की है, जिन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले पेट्रोल पंपों पर चोरी-छिपे उद्योगों को तेल की सप्लाय न हो।

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बेरमो में मजदूरों के हक की बड़ी जीत: एशिन एनर्जी कंपनी में वेतन कटौती और दुर्व्यवहार के खिलाफ झुका प्रबंधन, विधायक जयराम महतो ने कराया समझौता

 

बेरमो में मजदूरों के हक की बड़ी जीत: एशिन एनर्जी कंपनी में वेतन कटौती और दुर्व्यवहार के खिलाफ झुका प्रबंधन, विधायक जयराम महतो ने कराया समझौता

"डुमरी विधायक ने मजदूरों की शिकायत पर कंपनी प्रबंधन को दी कड़ी चेतावनी; कहा- स्थानीय लोगों के अधिकार और मेहनत की कमाई से नहीं होगा कोई समझौता"— विशेष रिपोर्ट

प्रशासनिक एवं राजनीतिक ब्यूरो, बेरमो (बोकारो)

  • रिपोर्टर: क्षेत्र संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): आधिकारिक प्रेस वक्तव्य, विधायक कार्यालय (दिनांक: 12 जून 2026)

बेरमो:

झारखंड के बेरमो विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत संचालित औद्योगिक इकाई 'एशिन एनर्जी कंपनी' में स्थानीय मजदूरों के शोषण और दुर्व्यवहार के खिलाफ डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने एक बड़ा मोर्चा खोला है। कंपनी में कार्यरत स्थानीय मजदूरों द्वारा बड़े पैमाने पर वेतन कटौती किए जाने और प्रबंधन द्वारा उनके साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार की गंभीर शिकायतें विधायक को प्राप्त हुई थीं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विधायक ने तत्काल हस्तक्षेप किया और कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए मजदूरों की मांगों पर त्वरित विधिक व व्यावहारिक समाधान निकालने को विवश कर दिया।

बेरमो में जयराम महतो का बड़ा एक्शन! एशिन एनर्जी कंपनी के अधिकारी झुके, मजदूरों की हुई बड़ी जीत।"

विधायक की कड़ी चेतावनी: सम्मान और मेहनत की कमाई सर्वोपरि

​मजदूरों की समस्याओं को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से सुनने के बाद विधायक जयराम कुमार महतो ने सीधे कंपनी प्रबंधन के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। वार्ता के दौरान उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कंपनी के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि बेरमो और झारखंड की धरती पर स्थानीय मजदूरों के सम्मान, उनके विधिक अधिकारों और उनकी खून-पसीने की मेहनत की कमाई से किसी भी प्रकार का समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि कंपनियों को स्थानीय लोगों को रोजगार देने के साथ-साथ उन्हें गरिमापूर्ण कार्य वातावरण भी देना होगा।

  • बेरमो में जयराम महतो का बड़ा एक्शन! एशिन एनर्जी कंपनी के अधिकारी झुके, मजदूरों की हुई बड़ी जीत।" 
संवाद का असर: झुका कंपनी प्रबंधन, विवाद का हुआ स्थायी समाधान

​इस आक्रामक और सकारात्मक पहल के बाद एशिन एनर्जी कंपनी प्रबंधन बैकफुट पर आ गया। विधायक के सीधे हस्तक्षेप और कड़े रुख के परिणामस्वरूप मजदूरों और कंपनी प्रबंधन के बीच एक मेज पर बैठकर विस्तृत वार्ता हुई। सकारात्मक संवाद और विधिक तर्कों के बाद दोनों पक्षों के बीच सभी बिंदुओं पर पूर्ण सहमति बन गई। प्रबंधन ने मजदूरों के वेतन कटौती की समीक्षा करने, बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने और भविष्य में किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार न होने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद इस गंभीर औद्योगिक विवाद का पूरी तरह पटाक्षेप हो गया।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव व विधिक गाइड (श्रम अधिकार एवं न्यूनतम मजदूरी नियम / Labor Laws & Rights)

​📌 जानिए कंपनियों में कार्यरत मजदूरों के विधिक अधिकार और वेतन कटौती के कड़े नियम क्या हैं?

  • मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (Payment of Wages Act): इस केंद्रीय श्रम कानून के तहत कोई भी निजी या सरकारी कंपनी किसी भी कर्मचारी या मजदूर के वेतन में से बिना किसी विधिक कारण (जैसे अनधिकृत अनुपस्थिति या नुकसान) के एकतरफा कटौती नहीं कर सकती। यदि कंपनी ऐसा करती है, तो वह कानूनन अपराध है और मजदूर जिला श्रम अधीक्षक (Labor Superintendent) के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
  • 75% स्थानीय नियोजन कानून: झारखंड सरकार के नियमानुसार राज्य में संचालित सभी निजी कंपनियों को 40,000 रुपये तक के मासिक वेतन वाले पदों पर 75 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को अनिवार्य रूप से नियोजित करना है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर मजदूरों की गरिमा और सुरक्षा तय करना औद्योगिक सुरक्षा अधिनियम के तहत अनिवार्य विधिक जिम्मेदारी है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: झारखंडी मूलवासियों के श्रम का सम्मान ही औद्योगिक प्रगति की पहली शर्त (Editorial)

जयराम महतो का त्वरित एक्शन अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए नजीर, कंपनियों को छोड़नी होगी औपनिवेशिक मानसिकता

बेरमो के एशिन एनर्जी कंपनी में स्थानीय मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार और वेतन कटौती की घटना कोई नई बात नहीं है। झारखंड के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बाहरी कंपनियां यहाँ के संसाधनों का दोहन तो करती हैं, लेकिन स्थानीय मजदूरों को उनका जायज हक देने में आनाकानी करती हैं। डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो द्वारा इस मामले में दिखाई गई तत्परता और कड़ा रुख यह साबित करता है कि यदि जनप्रतिनिधि मजबूत इच्छाशक्ति दिखाए, तो पूंजीपति और बड़ी कंपनियां स्थानीय युवाओं का शोषण नहीं कर सकतीं। 'न्यूज़ प्रहरी' इस सफल समझौते का स्वागत करता है, लेकिन साथ ही जिला श्रम विभाग को यह चेतावनी भी देता है कि वे केवल शिकायतों का इंतजार न करें, बल्कि ऐसी कंपनियों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कर यह सुनिश्चित करें कि श्रम मानकों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं।

और पढ़ें :झारखंड के कोयलांचल में भारी बवाल: "बिजली नहीं तो कोयला नहीं" के नारे के साथ जेएलकेएम नेता बिहारी महतो ने सीसीएल अधिकारियों को घेरा


झारखंड के कोयलांचल में भारी बवाल: "बिजली नहीं तो कोयला नहीं" के नारे के साथ जेएलकेएम नेता बिहारी महतो ने सीसीएल अधिकारियों को घेरा

झारखंड के कोयलांचल में भारी बवाल: "बिजली नहीं तो कोयला नहीं" के नारे के साथ जेएलकेएम नेता बिहारी महतो ने सीसीएल अधिकारियों को घेरा

"850 आधिकारिक अलॉटमेंट पर फल-फूल रहीं 2000 अवैध कॉलोनियां; भीषण गर्मी में महिलाओं और बच्चों ने बीच सड़क पर रोकीं प्रशासनिक गाड़ियां"— विशेष रिपोर्ट

प्रशासनिक एवं कोयलांचल ब्यूरो, झारखंड

  • रिपोर्टर: विशेष संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी एवं जेएलकेएम (JLKM) क्षेत्र समिति (दिनांक: 11 जून 2026)

कोयलांचल क्षेत्र:

झारखंड के स्थानीय कोयलांचल क्षेत्र में बिजली कटौती और कथित प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ जन-आक्रोश फूट पड़ा है। बिजली संकट और अवैध अतिक्रमण की समस्या से त्रस्त सैकड़ों स्थानीय ग्रामीणों ने JLKM (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा) के दिग्गज नेता और पूर्व प्रत्याशी बिहारी महतो के नेतृत्व में CCL (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) के अधिकारियों के काफिले को बीच सड़क पर रोक लिया। भीषण और चिलचिलाती धूप में ग्रामीणों ने अधिकारियों की गाड़ियों को आगे नहीं बढ़ने दिया और अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। मौके पर तैनात पुलिस और सुरक्षा बल के जवान अधिकारियों को सुरक्षित निकालने और स्थिति को संभालने में भारी मशक्कत करते दिखे।

"झारखंड के कोयलांचल में भारी बवाल! जेएलकेएम नेता बिहारी महतो के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सीसीएल अधिकारियों को बीच सड़क पर बंधक बना लिया!"

"हम जनता की आवाज हैं, इसे दबा नहीं पाओगे" – बिहारी महतो

​प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बिहारी महतो ने सीसीएल के अधिकारियों और इंजीनियरों को आड़े हाथों लेते हुए उनके दुर्व्यवहार पर कड़े सवाल दागे। उन्होंने बेहद आक्रोशित लहजे में अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि वे जनता के प्रतिनिधि हैं और पिछले 5 दिनों से अधिकारी उनसे बात करने से बच रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 6 महीने पहले भी यहाँ ऐसी ही घटना घटी थी, लेकिन विभाग ने जांच रिपोर्ट पूरी किए बिना ही एकतरफा कार्रवाई करते हुए बिजली के कनेक्शन काट दिए और स्थानीय मूल निवासियों को परेशान करना शुरू कर दिया।

https://www.newsprahari.in/2026/06/hazaribagh-katkamdag-youth-climbs-mobile-tower-over-land-mutation-pending-2026.html

आवास आवंटन में महाघोटाला: भ्रष्टाचार के लगे गंभीर आरोप

​आंदोलनकारियों ने सीसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन पर अवैध निर्माण और संगठित बिजली चोरी को बढ़ावा देने का सीधा आरोप लगाया। बिहारी महतो ने अधिकारियों के सामने ऑन-द-स्पॉट दावा किया कि इस क्षेत्र में केवल 800 से 850 आवासों को ही आधिकारिक अलॉटमेंट (वैध आवंटन) मिला है, लेकिन विभागीय मिलीभगत के कारण यहाँ 2000 से अधिक अवैध कॉलोनियां बस चुकी हैं। विभाग के कुछ भ्रष्ट इंजीनियर और अधिकारी मोटी रकम लेकर इन अवैध निर्माणों को संरक्षण दे रहे हैं, जिसका सीधा खामियाजा यहाँ के मूल निवासियों को भारी बिजली कटौती और लो-वोल्टेज के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

"तुम्हें एसी मुबारक, हमें हमारी बिजली दो"

​इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत स्थानीय महिलाएं और बच्चे बने, जो भीषण गर्मी में भी तख्ती और बैनर लेकर सड़कों पर डटे रहे। जब अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से हटने और अपनी गाड़ियों में बैठकर वार्ता करने का आग्रह किया, तो महिलाओं का गुस्सा भड़क उठा। एक महिला ने अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा कि अधिकारी अपनी एसी गाड़ियों में बैठें, जनता तब तक टस से मस नहीं होगी जब तक हक की बिजली बहाल नहीं हो जाती।

'बिजली नहीं तो कोयला नहीं' का अल्टीमेटम, चक्का जाम की चेतावनी

​काफी देर तक चली तीखी नोकझोंक के बाद अधिकारियों ने मामले की जांच करने और बिजली सुचारू करने का आश्वासन दिया, जिसे ग्रामीणों ने सिरे से खारिज कर दिया। JLKM नेताओं और ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि पहले क्षेत्र में बिजली की सुचारू आपूर्ति शुरू की जाए, जांच उसके बाद होती रहेगी। ग्रामीणों ने स्पष्ट नारा दिया है कि "बिजली नहीं तो कोयला नहीं"—यानी अगर स्थानीय लोगों को बिजली नहीं मिली, तो कोयले का परिवहन और सीसीएल का कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा। क्षेत्र में फिलहाल टाईगर जयराम महतो की विचारधारा और क्रांतिकारी नारों के साथ ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है और भारी पुलिस बल तैनात है।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव व विधिक गाइड (कोलियरी नियम एवं नागरिक अधिकार / CCL Guidelines & Public Rights)

​📌 जानिए कोलियरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और अवैध कॉलोनियों को लेकर क्या हैं विधिक नियम?

  • कोलियरी कमांड एरिया और बिजली अधिकार: सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के तहत आने वाले कमांड एरिया में बिजली की बुनियादी आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रबंधन की विधिक जिम्मेदारी के अंतर्गत आता है। यदि बुनियादी सुविधाओं (बिजली-पानी) में कटौती होती है, तो नागरिक औद्योगिक विवाद अधिनियम और स्थानीय जनसुनवाई पोर्टल्स के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
  • अवैध बिजली कनेक्शन और लीज नियम: कोल इंडिया के नियमों के तहत अनधिकृत आवासों या कॉलोनियों को बिजली देना भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत 'बिजली चोरी' (Power Theft) की श्रेणी में आता है। यदि अधिकारी सांठगांठ कर अवैध कनेक्शन देते हैं, तो उनके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के तहत सीधे विधिक कार्रवाई की जा सकती है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: कोयलांचल की संपदा पर पहला हक यहां के मूल निवासियों का (Editorial)

जनता को अंधकार में रखकर अरबों का कोयला निकालना बंद करे सीसीएल प्रबंधन

झारखंड का कोयलांचल क्षेत्र पूरे देश को रोशन करता है, लेकिन यह कितनी बड़ी विडंबना है कि यहाँ के मूल निवासी खुद भीषण गर्मी में बिजली की एक-एक बूंद (यूनिट) के लिए तरस रहे हैं। जेएलकेएम नेता बिहारी महतो द्वारा उठाया गया 2000 अवैध कॉलोनियों का मुद्दा सीधे तौर पर सीसीएल के भीतर चल रहे गहरे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। जब वैध उपभोक्ताओं और मूल निवासियों के हक की बिजली भ्रष्ट तंत्र की वजह से अवैध कॉलोनियों में डायवर्ट की जाएगी, तो ऐसा जनाक्रोश भड़कना स्वाभाविक है। 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि सीसीएल प्रबंधन को "बिजली नहीं तो कोयला नहीं" के इस अल्टीमेटम को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जांच रिपोर्टों को दबाने वाले इंजीनियरों पर तत्काल कार्रवाई हो और स्थानीय जनता को अविलंब निर्बाध बिजली दी जाए।

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हजारीबाग में यातायात नियमों को लेकर पुलिस का महाअभियान: सड़कों पर उतरीं टीमें, 150 से अधिक वाहनों का काटा चालान

 

हजारीबाग में यातायात नियमों को लेकर पुलिस का महाअभियान: सड़कों पर उतरीं टीमें, 150 से अधिक वाहनों का काटा चालान

"पुलिस अधीक्षक के आदेश पर डीएसपी सीसीआर के नेतृत्व में चला विशेष चेकिंग अभियान; बाजार क्षेत्र में नो-पार्किंग और टोटो-टेंपो चालकों पर कसा शिकंजा"— विशेष रिपोर्ट

क्राइम एवं सुरक्षा ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: जिला संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): पुलिस अधीक्षक कार्यालय, हजारीबाग प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक: 11 जून 2026)

हजारीबाग:

हजारीबाग शहरी क्षेत्र में लगातार लग रहे जाम और बेलगाम होते यातायात को नियंत्रित करने के लिए जिला पुलिस ने एक बड़ा मोर्चा खोला है। पुलिस अधीक्षक के कड़े आदेशानुसार गुरुवार को पूरे शहर में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ एक व्यापक विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर की सड़कों को जाम मुक्त बनाना और आम जनता को सड़क सुरक्षा के प्रति सचेत करना है। इसके लिए पुलिस की गाड़ियों से लाउडस्पीकर के जरिए रिकॉर्डेड संदेशों का लगातार प्रसारण कर लोगों को जागरूक भी किया गया।

"हजारीबाग ट्रैफिक पुलिस का महाएक्शन! पीटीसी चौक पर कटे 150 से ज्यादा चालान, सड़कों पर मचा हड़कंप।"

डीएसपी सीसीआर के नेतृत्व में बनी विशेष टीम, चौक-चौराहों पर दी दबिश

​सड़कों पर व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जिले के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) सीसीआर के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय टीम का गठन किया गया। इस टीम में पु0नि0 (पुलिस निरीक्षक) सह यातायात थाना प्रभारी सहित 3 पुलिस पदाधिकारी और 8 गृह रक्षक (होमगार्ड) के जवान शामिल थे। इस गठित टीम ने डीएसपी सीसीआर और यातायात थाना प्रभारी की देखरेख में बारी-बारी से स्थान बदलते हुए पूरे हजारीबाग शहरी क्षेत्र में पैनी नजर रखी।

​पुलिस की टीमों ने डिस्ट्रिक्ट मोड़, पीटीसी चौक, मटवारी चौक, बाबू गांव चौक, कोर्रा चौक, इंद्रपुरी चौक से लेकर पानी टंकी, पैगोडा चौक, खाजा चौक, छोटी ग्वालटोली, सांसद महोदय मोड़, सुंदरी मार्केट, झंडा चौक और पंच मंदिर चौक तक के मुख्य मार्गों पर घूम-घूम कर नो-पार्किंग और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी।

पीटीसी चौक पर सघन चेकिंग: बिना हेलमेट और ट्रिपल लोडिंग पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

​अभियान के दूसरे चरण में पीटीसी चौक पर एक विशेष और सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसने नियम तोड़ने वाले चालकों में हड़कंप मचा दिया। इस दौरान पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए कुल 157 से अधिक वाहनों का चालान काटा। पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

  • बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले: 113 चालक नपे।
  • बाइक पर ट्रिपल लोडिंग: 25 वाहनों पर कार्रवाई हुई।
  • ड्राइविंग के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल: 07 चालकों को पकड़ा गया।
  • नो-पार्किंग में खड़े वाहन और अवैध ऑटो/टोटो: 12 वाहनों का चालान काटा गया।

​यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शहर की सुरक्षा और सुचारू यातायात व्यवस्था के लिए यह दंडात्मक और सुधारात्मक अभियान आने वाले दिनों में भी लगातार जारी रहेगा।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव व विधिक गाइड (मोटर वाहन अधिनियम / Motor Vehicle Act & Legal Guidelines)

​📌 जानिए यातायात नियमों के उल्लंघन पर क्या हैं विधिक प्रावधान और जुर्माने के नियम?

  • मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019: इस केंद्रीय कानून के तहत बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाने पर 1,000 रुपये का जुर्माना और 3 महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान है। वहीं, गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने (खतरनाक ड्राइविंग की श्रेणी) पर पहली बार में 1,000 से 5,000 रुपये तक के जुर्माने या कारावास का विधिक नियम है।
  • ट्रिपल राइडिंग और नो-पार्किंग: दुपहिया वाहन पर तीन लोगों को बिठाने (ट्रिपल लोडिंग) पर 1,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा, नगर निगम और पुलिस प्रशासन द्वारा घोषित 'नो-पार्किंग' जोन में वाहन खड़ा करने पर धारा 177 के तहत जुर्माना लगाने के साथ-साथ क्रेन से वाहन को जब्त करने का विधिक अधिकार पुलिस को प्राप्त है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: केवल चालान काटना समाधान नहीं, नागरिकों को बदलनी होगी मानसिकता (Editorial)

हजारीबाग पुलिस की कड़ाई सराहनीय, लेकिन टोटो और अवैध पार्किंग के स्थायी समाधान की जरूरत

हजारीबाग पुलिस अधीक्षक द्वारा शुरू किया गया यह अभियान शहर की चरमराती यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बेहद जरूरी था। पीटीसी चौक पर एक ही दिन में 113 लोगों का बिना हेलमेट पकड़ा जाना यह दर्शाता है कि लोग अपनी जान की सुरक्षा को लेकर कितने लापरवाही हैं। हालांकि, 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि केवल चालान काट देने से डिस्ट्रिक्ट मोड़ या झंडा चौक का जाम स्थायी रूप से खत्म नहीं होगा। शहर में टोटो और ऑटो के लिए रूट निर्धारण और मुख्य बाजारों में व्यवस्थित पार्किंग जोन का निर्माण करना जिला प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि फुटपाथ और सड़कों पर अतिक्रमण पूरी तरह रुक सके।

और पढ़ें :हजारीबाग प्रशासन का सख्त रुख: ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का हुआ संयुक्त निरीक्षण, NHAI और पेट्रोल पंप संचालकों को मिले कड़े निर्देश


हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' की स्थापना: बुजुर्गों को मिलेगी लंबी लाइनों से मुक्ति

हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' की स्थापना: बुजुर्गों को मिलेगी लंबी लाइनों से मुक्ति

"प्रधान जिला न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा के दिशानिर्देश पर प्राधिकार ने शुरू किया 30 दिवसीय विशेष शिविर; सचिव डॉ रवि प्रकाश तिवारी ने बताया सशक्तिकरण और गरिमा का माध्यम"— विशेष रिपोर्ट

विधिक एवं प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: जिला संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) हजारीबाग प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक: 11 जून 2026)

हजारीबाग:

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के निर्देशानुसार हजारीबाग में बुजुर्ग नागरिकों की प्रशासनिक व बैंकिंग सुविधाओं को सुगम बनाने के लिए एक बड़ी विधिक पहल की गई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) हजारीबाग के बैनर तले संचालित 90 दिवसीय कानूनी जागरूकता आउटरीच कार्यक्रम के तहत, 'जागृति स्कीम 2025' के अंतर्गत जून माह में 30 दिवसीय 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' (वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र) की स्थापना की गई है। यह विशेष डेस्क हजारीबाग शहर के हृदय स्थल में स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुख्य शाखा में सुचारू रूप से कार्य कर रही है।

"हजारीबाग के बुजुर्गों के लिए राहत की बड़ी खबर है! जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने स्टेट बैंक में सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क शुरू कर दिया है!"

प्रधान जिला न्यायाधीश और सचिव के नेतृत्व में बुजुर्गों को संबल

​इस पूरे जनकल्याणकारी कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार हजारीबाग, ध्रुव चंद्र मिश्रा के कुशल दिशानिर्देश में किया जा रहा है। शिविर के पहले चरण में अधिकार मित्र विकाश कुमार पांडेय ने बैंक पहुंचे दर्जनों वरिष्ठ नागरिकों से सीधे मुलाकात की। उन्होंने बुजुर्गों की रोजमर्रा की समस्याओं और बैंकिंग दिक्कतों को जाना तथा उनके त्वरित विधिक समाधान के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। उन्होंने बुजुर्गों को भरोसा दिलाया कि उनकी हर विधिक और व्यावहारिक समस्या के समाधान के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार चौबीसों घंटे तत्पर है।

सरकारी कार्यालयों और अस्पतालों में बिना परेशानी के होगा काम

​प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार हजारीबाग के सचिव, डॉ रवि प्रकाश तिवारी ने बताया कि यह 30 दिनों तक चलने वाला एक विशेष 'वरिष्ठ नागरिक सशक्तिकरण और गरिमा कार्यक्रम' है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य बुजुर्ग नागरिकों को सरकारी कार्यालयों, बैंकों और अस्पतालों में हर संभव सहायता प्रदान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस डेस्क के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि समाज के बुजुर्गों को किसी भी कार्यालय में बिना किसी परेशानी या लंबी लाइनों में खड़े हुए उनके काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाया जा सके।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (वरिष्ठ नागरिक विधिक अधिकार / Senior Citizens Legal Framework)

​📌 जानिए क्या हैं वरिष्ठ नागरिकों के विधिक अधिकार और भरण-पोषण के नियम?

  • माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम, 2007: इस केंद्रीय कानून के तहत यदि बच्चे या रिश्तेदार किसी वरिष्ठ नागरिक की देखरेख नहीं करते हैं, तो पीड़ित बुजुर्ग जिला अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) के समक्ष भरण-पोषण न्यायाधिकरण (Tribunal) में आवेदन कर सकते हैं। न्यायाधिकरण बच्चों को प्रति माह अधिकतम 10,000 रुपये तक गुजारा भत्ता देने का आदेश जारी कर सकता है।
  • त्वरित विधिक सहायता (RTI & Legal Aid): विधिक सेवा प्राधिकार अधिनियम, 1987 के तहत देश के हर वरिष्ठ नागरिक को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के माध्यम से किसी भी अदालती या विधिक कार्य के लिए पूरी तरह 'मुफ्त वकील' और कानूनी परामर्श पाने का विधिक अधिकार प्राप्त है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: बुजुर्गों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा समाज का पहला कर्तव्य (Editorial)

बैंकों और दफ्तरों में बुजुर्गों की उपेक्षा रोकने के लिए डीएलएसए (DLSA) की यह पहल अनुकरणीय

अक्सर देखा जाता है कि पेंशन, बैंकिंग या इलाज के काम से आने वाले बुजुर्गों को सरकारी और निजी संस्थानों में घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में 'सीनियर सिटीजन फैसिलिटिजेशन डेस्क' की स्थापना जिला प्रशासन और न्यायपालिका की संवेदनशीलता को दर्शाती है। प्रधान जिला न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा और सचिव डॉ रवि प्रकाश तिवारी का यह प्रयास प्रशंसनीय है क्योंकि यह सिर्फ एक हेल्पडेस्क नहीं, बल्कि बुजुर्गों को समाज में गरिमापूर्ण जीवन जीने का हक देता है। 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि इस तरह के सुविधा केंद्र केवल जून महीने के लिए नहीं, बल्कि हर बड़े सरकारी अस्पताल और समाहरणालय (Collectorate) में स्थायी रूप से स्थापित होने चाहिए।

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हजारीबाग में कानून की अलख जगा रहा DLSA: 16 प्रखंडों में 90 दिनों का महाभियान शुरू; प्रधान जिला न्यायाधीश और सचिव के नेतृत्व में घर-घर पहुंच रहे 'अधिकार मित्र'



झारखंड में प्रशासनिक फेरबदल: राज्य सूचना आयोग में चार नए सूचना आयुक्तों की हुई नियुक्ति, राज्यपाल ने दी मंजूरी

 

झारखंड में प्रशासनिक फेरबदल: राज्य सूचना आयोग में चार नए सूचना आयुक्तों की हुई नियुक्ति, राज्यपाल ने दी मंजूरी

"कार्मिक विभाग ने जारी की आधिकारिक अधिसूचना; अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक संभालेंगे नई जिम्मेदारी"— विशेष रिपोर्ट

राज्य प्रशासनिक ब्यूरो, रांची

  • रिपोर्टर: विशेष संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार (अधिसूचना संख्या: 3761, दिनांक: 10 जून 2026)

रांची:

झारखंड सरकार ने राज्य सूचना आयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, झारखंड के माननीय राज्यपाल ने सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI Act), 2005 की धारा-15 (3) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सूचना आयोग में रिक्त पड़े पदों पर चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कर दी है। सरकार के इस फैसले से राज्य में सूचना के अधिकार के तहत लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।

झारखंड सरकार का बड़ा आदेश! राज्य सूचना आयोग में 4 नए सूचना आयुक्त नियुक्त

इन चार प्रमुख व्यक्तियों को मिली सूचना आयुक्त की कमान

​जारी सरकारी पत्र "231322.jpg" के मुताबिक, झारखंड राज्य सूचना आयोग के सूचना आयुक्त के पद पर निम्नलिखित व्यक्तियों को नियुक्त किया गया है:

  1. अनुज कुमार सिन्हा: (पिता: सुरेंद्र प्रसाद सिन्हा), निवासी: दीपाटोली, सदर, रांची।
  2. तनुज खत्री: (पिता: देवराज खत्री), निवासी: रातू रोड, सुखदेवनगर, रांची।
  3. अमूल्य नीरज खलखो: (पिता: स्वर्गीय जफरीन खलखो), निवासी: पुराना लोवाडीह, नामकुम, रांची।
  4. शिवपूजन पाठक: (पिता: स्वर्गीय नरसिंह पाठक), निवासी: अपर बाजार, कोतवाली, रांची।

शपथ ग्रहण की तिथि से प्रभावी होगा कार्यकाल, ये हैं नियम

​अधिसूचना के पैरा संख्या 2 के अनुसार, सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा-16 (3) के आलोक में इन सभी नवनियुक्त सूचना आयुक्तों की नियुक्ति उनके शपथ ग्रहण की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी। इनका कार्यकाल पद ग्रहण करने से लेकर अगले 03 (तीन) वर्ष की अवधि अथवा 65 (पैंसठ) वर्ष की आयु पूरी होने तक (जो भी पहले हो) तक रहेगा।

Adhikarik Jari Patra.

​यह आदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार के हस्ताक्षर से जारी किया गया है और इसकी प्रतिलिपि विभागीय नोडल पदाधिकारी सहित ई-गजट को झारखंड राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशन के लिए भेज दी गई है।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (विधिक एवं प्रशासनिक ज्ञान / Legal & RTI Framework)

​📌 जानिए क्या होता है राज्य सूचना आयोग और सूचना आयुक्त का दायित्व?

  • अपील का सर्वोच्च मंच: राज्य सूचना आयोग (State Information Commission) राज्य स्तर पर एक स्वतंत्र विधिक संस्था है। जब कोई नागरिक किसी सरकारी विभाग से सूचना मांगता है और लोक सूचना अधिकारी (PIO) या प्रथम अपीलीय अधिकारी समय पर या सही जानकारी नहीं देते, तब नागरिक इस आयोग में द्वितीय अपील दर्ज कराता है।
  • जुर्माने का अधिकार: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत यदि कोई अधिकारी जानबूझकर सूचना छुपाता है या गलत तथ्य देता है, तो सूचना आयुक्तों को उस अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये से लेकर अधिकतम 25,000 रुपये तक का आर्थिक दंड (Penalties) लगाने का विधिक अधिकार प्राप्त है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: सूचना आयोग में नियुक्तियों से पारदर्शी शासन को मिलेगी ताकत (Editorial)

लंबे समय से खाली पदों के भरने से आम जनता को मिलेगी राहत, रुकेगा भ्रष्टाचार

झारखंड राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से आयुक्तों के पद रिक्त होने के कारण हजारों आरटीआई (RTI) अपीलें लंबित पड़ी थीं। सूचना आयुक्तों की अनुपस्थिति का सीधा नुकसान उन आम नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं को हो रहा था जो सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना चाहते हैं। 'न्यूज़ प्रहरी' सरकार के इस फैसले का स्वागत करता है। इन चार नई नियुक्तियों से न केवल प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास और मजबूत होगा। अब आवश्यकता इस बात की है कि नवनियुक्त अधिकारी बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्षता से आम जनमानस के सूचना के अधिकारों की रक्षा करें।

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इज़राइल के पीएम नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दी ऐतिहासिक जीत की बधाई, कहा- "आपके नेतृत्व में भारत ने बदली अपनी तस्वीर"

 

इज़राइल के पीएम नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दी ऐतिहासिक जीत की बधाई, कहा- "आपके नेतृत्व में भारत ने बदली अपनी तस्वीर"

नई दिल्ली / यरूशलेम:

भारत में आम चुनावों के नतीजों के बाद वैश्विक स्तर पर बधाई संदेशों का सिलसिला जारी है।


इसी कड़ी में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके लगातार तीसरी बार कार्यकाल संभालने और भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर बधाई दी है।


​नेतन्याहू ने पीएम मोदी को अपना 'प्रिय मित्र' बताते हुए भारत की आर्थिक प्रगति और दोनों देशों के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों की जमकर सराहना की।

​नेतन्याहू ने की भारत की आर्थिक प्रगति की तारीफ

​अपने वीडियो संदेश में इज़राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व ने भारत को पूरी तरह से बदल दिया है। उन्होंने भारत के विकास मॉडल को रेखांकित करते हुए दो महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  • तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था: 1.4 बिलियन (140 करोड़) से अधिक आबादी वाले इस देश को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाने का श्रेय पीएम मोदी के नेतृत्व को जाता है।
  • गरीबी उन्मूलन में बड़ी कामयाबी: उन्होंने इस बात की विशेष सराहना की कि मोदी सरकार के कार्यकाल में लगभग 25 करोड़ (250 मिलियन) भारतीयों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया है, जो कि अपने आप में एक सराहनीय मिशन है।

​"भारत और इज़राइल के रिश्ते अब तक के सबसे मजबूत दौर में"

​दोनों देशों के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों पर बात करते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, "हमारे बीच की दोस्ती और हमारे दो महान देशों के संबंध आज इतिहास के सबसे मजबूत पड़ाव पर हैं।" उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दोनों देश मिलकर विकास और सुरक्षा के कई अन्य क्षेत्रों में एक साथ काम करना जारी रखेंगे।

​'मज़ल तोव' कहकर दीं शुभकामनाएं

​अपने संदेश के अंत में इज़राइली पीएम ने पारंपरिक हिब्रू शब्द "मज़ल तोव" (Mazel Tov) कहकर पीएम मोदी को बधाई दी, जिसका अर्थ 'सौभाग्य' या 'बधाई' होता है। उन्होंने कहा, "मेरे अच्छे मित्र, आपको और आपके नेतृत्व में आगे बढ़ रहे पूरे भारत को ढेर सारी शुभकामनाएं।"

कटकमदाग हादसे की पीड़िता के परिवार की मदद को आगे आया प्रशासन प्रकोष्ठ: राशन सामग्री और वस्त्रों का किया गया वितरण

 

कटकमदाग हादसे की पीड़िता के परिवार की मदद को आगे आया प्रशासन प्रकोष्ठ: राशन सामग्री और वस्त्रों का किया गया वितरण

"भारतीय प्रशासनिक लोक शिकायत एवं प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने बच्ची को दिया भविष्य में मुफ्त शिक्षा का भरोसा; निस्वार्थ योगदान को बताया मानवता की सच्ची मिसाल"— विशेष रिपोर्ट

सामाजिक एवं प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: जिला संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): भारतीय प्रशासनिक लोक शिकायत एवं प्रकोष्ठ (IPGC) प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

हजारीबाग जिले के कटकमदाग में हाल ही में हुए बेहद दुखद हादसे की पीड़िता के परिवार को संबल देने के लिए सामाजिक संगठन और प्रबुद्ध नागरिक आगे आए हैं। मानवता की भावना और सामाजिक सहयोग के तहत 'भारतीय प्रशासनिक लोक शिकायत एवं प्रकोष्ठ' (IPGC) द्वारा पीड़ित परिवार से मुलाकात की गई। संगठन के पदाधिकारियों और स्थानीय समाजसेवियों के संयुक्त प्रयासों से पीड़ित परिवार को तत्काल राहत पहुंचाते हुए राशन सामग्री और वस्त्र प्रदान किए गए। इस नेक कार्य में सभी सहयोगकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और संकट की इस घड़ी में जरूरतमंद परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

🤝 मानवता की मिसाल: कटकमदाग हादसे की पीड़िता के साथ खड़ा हुआ 'प्रशासन प्रकोष्ठ'; राशन वितरण के साथ बच्ची की शिक्षा की ली जिम्मेदारी!

बच्ची की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाएगा आईपीजीसी (IPGC) परिवार

​इस मानवीय पहल के दौरान प्रकोष्ठ के प्रदेश उप सचिव कुमार गौरव ने हादसे से प्रभावित बच्ची से बात की और उसे ढांढस बंधाया। उन्होंने बच्ची को पूर्ण रूप से आश्वस्त किया कि भविष्य में उसकी पढ़ाई-लिखाई में आने वाले किसी भी व्यवधान को दूर करने के लिए आईपीजीसी (IPGC) परिवार की ओर से हर संभव वित्तीय और शैक्षणिक सहायता दी जाएगी। उपस्थित सदस्यों ने कहा कि ऐसे मानवीय कार्य समाज में एकता, करुणा और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।

राहत अभियान में इन प्रमुख पदाधिकारियों और समाजसेवियों का रहा योगदान

​अन्नदान एवं वस्त्रदान के इस पुण्य कार्य को सफल बनाने और पीड़ित परिवार तक सीधी सहायता पहुंचाने में संगठन के निम्नलिखित पदाधिकारियों और समाजसेवियों की मुख्य भूमिका रही:

  • कुमार गौरव (प्रदेश उप सचिव, भारतीय प्रशासनिक लोक शिकायत एवं प्रकोष्ठ)
  • विक्रमादित्य सिंह (जिला अध्यक्ष)
  • राज कुमार पासवान (जिला सचिव)
  • निमेष कुमार (मीडिया प्रभारी)
  • पप्पू प्रजापति (उपाध्यक्ष)
  • प्रदीप मेहता (वरिष्ठ समाजसेवी)
  • मनीष कुमार, पुनीत राम, रंजन गुप्ता और अंकिता मेहरा (सक्रिय सदस्य)

​संगठन के नेतृत्व ने इस निस्वार्थ योगदान को मानवता की सच्ची मिसाल बताते हुए कहा कि सभी सम्मानित सदस्यों की संवेदनशीलता और सेवा भाव के कारण ही पीड़ित परिवार के चेहरों पर मुस्कान लाना संभव हो सका है।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व सामाजिक सुरक्षा ज्ञान / Social Welfare Framework)

​📌 जानिए क्या हैं पीड़ित परिवारों के लिए सरकारी और विधिक सहायता के नियम?

  • आपदा एवं दुर्घटना मुआवजा: झारखंड सरकार के नियमानुसार किसी भी बड़े हादसे या दुर्घटना के शिकार परिवारों को जिला प्रशासन (Disaster Management Department) के माध्यम से त्वरित अनुग्रह राशि (Ex-gratia) और अंत्येष्टि सहायता दी जाती है।
  • बाल संरक्षण और मुफ्त शिक्षा: 'बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग' (NCPCR) और शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत, किसी भी हादसे में अनाथ या प्रभावित हुए बच्चों को मुफ्त अनिवार्य शिक्षा और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) जैसी आवासीय संस्थाओं में प्राथमिकता के आधार पर नामांकन का विधिक अधिकार प्राप्त है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: संकट के समय पीड़ित परिवारों को सामाजिक संबल देना जरूरी (Editorial)

सरकारी सहायता की सुस्ती के बीच सामाजिक संगठनों का आगे आना समाज की जीवंतता का प्रतीक

हजारीबाग के कटकमदाग में हुआ हादसा बेहद हृदयविदारक था। ऐसे समय में जब प्रशासनिक मुआवजा प्रक्रियाओं में अक्सर फाइलों का लंबा सफर तय करना पड़ता है, 'भारतीय प्रशासनिक लोक शिकायत एवं प्रकोष्ठ' (IPGC) का जमीन पर उतरकर राशन और वस्त्र पहुंचाना सराहनीय है। सबसे महत्वपूर्ण बात प्रदेश उप सचिव कुमार गौरव द्वारा पीड़ित बच्ची की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का आश्वासन देना है। किसी पीड़ित परिवार के लिए तात्कालिक राशन से ज्यादा जरूरी उसका भविष्य सुरक्षित करना होता है। 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि समाज के अन्य सक्षम लोगों और जिला प्रशासन को भी इस बच्ची के दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए आगे आना चाहिए ताकि उसका भविष्य अंधकारमय न हो।

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हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक जागरूकता शिविर आयोजित: मुफ्त कानूनी सहायता की मिली विस्तृत जानकारी


झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की आपात बैठक में हंगामा: परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध बताने पर जताया कड़ा विरोध

झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की आपात बैठक में हंगामा: परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध बताने पर जताया कड़ा विरोध

"चुनाव आयोग के फैसले से लोकतंत्र शर्मसार; राज्यसभा प्रत्याशी प्रणब झा, मंत्री दीपिका पांडे सिंह और विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप सहित वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र पर साधा निशाना"— विशेष रिपोर्ट

राजनीतिक ब्यूरो, रांची

  • रिपोर्टर: विशेष संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी / विधानसभा ब्यूरो (दिनांक: 10 जून 2026)

रांची:

झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। झारखंड विधानसभा परिसर में कांग्रेस पार्टी की ओर से एक भव्य और अति महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें आगामी चुनाव की रणनीतियों और हालिया घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग द्वारा परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को कथित तौर पर गलत तरीके से वैध (Valid) घोषित किए जाने के खिलाफ रणनीति तैयार करना और इस विधिक प्रक्रिया पर सामूहिक विचार-विमर्श करना था। बैठक में उपस्थित कांग्रेस के तमाम शीर्ष नेताओं ने चुनाव आयोग के इस फैसले पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया।

"झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले रांची में सियासी भूचाल आ गया है! परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर कांग्रेस ने सीधे चुनाव आयोग पर बड़ा हमला बोला है!"

लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति: कांग्रेस नेतृत्व

​बैठक के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने एक सुर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि जिस प्रकार नियमों को ताक पर रखकर परिमल नाथवानी के नामांकन को हरी झंडी दी गई है, वह पूरी तरह असंवैधानिक है। इस तरह की हरकतों से न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता खत्म होती है, बल्कि संपूर्ण लोकतंत्र शर्मसार होता है। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के लिए एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति करार दिया।

बैठक में महागठबंधन और कांग्रेस के ये दिग्गज रहे मौजूद

​राज्यसभा चुनाव की इस रणनीति बैठक में कांग्रेस और सत्ताधारी गठबंधन के कई कद्दावर चेहरे शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नेता उपस्थित थे:

  • प्रणब झा (कांग्रेस के आधिकारिक राज्यसभा प्रत्याशी)
  • दीपिका पांडे सिंह (कैबिनेट मंत्री, झारखंड सरकार)
  • राजेश कच्छप (कांग्रेस विधायक दल के उपनेता)
  • राजेश ठाकुर (कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष)
  • अनुप सिंह (विधायक, बेरमो)
  • विक्सल कोंगारी (विधायक, कोलेबिरा)
  • रियाज अहमद (वरिष्ठ कांग्रेस नेता)

​बैठक में इन सभी नेताओं के अलावा कई अन्य विधायकों और पदाधिकारियों ने भी अपनी बात रखी। इसके साथ ही राज्यसभा चुनाव की वोटिंग रणनीति, विधायकों की एकजुटता और राज्य के कई अन्य ज्वलंत राजनीतिक विषयों पर भी घंटों गहन मंथन किया गया।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व चुनावी ज्ञान / Rajya Sabha Election Framework)

​📌 जानिए कैसे होता है राज्यसभा चुनाव में नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) का नियम?

  • नामांकन की जांच (Scrutiny of Nomination): लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को यह शक्ति प्राप्त है कि वह उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच करे। यदि प्रस्तावक के हस्ताक्षर, शपथ पत्र (Affidavit) में विसंगति या लाभ के पद (Office of Profit) से जुड़ा कोई गंभीर मामला पाया जाता है, तो नामांकन रद्द किया जा सकता है।
  • अदालती चुनौती: यदि कोई राजनीतिक दल या प्रत्याशी चुनाव आयोग या रिटर्निंग ऑफिसर के किसी फैसले को गलत मानता है, तो वह चुनाव संपन्न होने के बाद संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) में 'चुनाव याचिका' (Election Petition) दायर कर उस फैसले को विधिक चुनौती दे सकता है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: राज्यसभा की जंग और झारखंड की दिलचस्प होती सियासत (Editorial)

नामांकन विवाद से कड़ा हुआ राज्यसभा का मुकाबला; साख बचाने की लड़ाई में उतरा सत्तारूढ़ गठबंधन

झारखंड से राज्यसभा की सीटों के लिए होने वाला यह मुकाबला अब सिर्फ मतों की गणित तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़े कानूनी और नैतिक युद्ध में बदल चुका है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणब झा के समर्थन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, मंत्री दीपिका पांडे सिंह और उपनेता राजेश कच्छप जैसे दिग्गजों का एक मंच पर आना यह दिखाता है कि पार्टी परिमल नाथवानी के मुद्दे पर बैकफुट पर जाने को तैयार नहीं है। चुनाव आयोग के फैसले को 'लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला' बताना यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में यह विवाद झारखंड विधानसभा से लेकर कोर्ट के कमरों तक गूंजेगा। जेएमएम और कांग्रेस गठबंधन के लिए यह चुनाव मुख्यमंत्री हेमंत सरेन और कल्पना मुर्मू सोरेन के नेतृत्व की भी बड़ी परीक्षा है, जहां उन्हें अपने विधायकों को क्रास वोटिंग से बचाते हुए प्रणब झा की जीत सुनिश्चित करनी होगी।

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हजारीबाग राजस्व समीक्षा बैठक में कड़े तेवर: प्रमंडलीय आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने कहा- दाखिल खारिज में लापरवाही पर अंचल अधिकारियों पर होगी सीधी कार्रवाई

 

हजारीबाग राजस्व समीक्षा बैठक में कड़े तेवर: प्रमंडलीय आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने कहा- दाखिल खारिज में लापरवाही पर अंचल अधिकारियों पर होगी सीधी कार्रवाई

"सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त करने के लिए उपायुक्त हेमंत सती का सख्त निर्देश; परिवहन, खनन, उत्पाद और नगर निगम को अपनी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग कर लक्ष्य प्राप्ति के आदेश"— प्रमंडलीय ब्यूरो

प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): प्रमंडलीय सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग (प्रेस विज्ञप्ति संख्या: 361/10.06.2026, दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

हजारीबाग समाहरणालय के सभाकक्ष में जिले के विभिन्न विभागों के राजस्व संग्रहण (Revenue Collection) से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रमंडलीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी कार्यों को गति देने के लिए राजस्व में वृद्धि अनिवार्य है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया कि वे अपनी समस्त वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य आधारित राजस्व की प्राप्ति हर हाल में सुनिश्चित करें। आयुक्त ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने नियमों, शासनादेशों और प्रक्रियाओं की जितनी बेहतर जानकारी होगी, वे उतना ही पारदर्शी और मजबूत काम कर सकेंगे।

"हजारीबाग में दाखिल-खारिज और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त और उपायुक्त ने अधिकारियों को बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं!"

दाखिल-खारिज में देरी पर लगेगा सेवा अधिकार अधिनियम (RTPS)

​लंबित दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के मामलों पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) और अंचल अधिकारियों (CO) को चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दाखिल-खारिज के मामलों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि तय समय सीमा के भीतर म्यूटेशन के मामलों का निष्पादन नहीं किया गया, तो संबंधित अंचल अधिकारी के विरुद्ध सेवा अधिकार अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

सरकारी और वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त रखने का उपायुक्त हेमंत सती का निर्देश

​बैठक में विशेष रूप से मौजूद हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती ने भूमि संरक्षण को लेकर कड़े निर्देश जारी किए। उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण, अनधिकृत गतिविधि या अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सरकारी जमीनों पर किए गए कब्जों को चिन्हित कर त्वरित रूप से अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाएं और उसकी नियमित ऑन-फील्ड निगरानी सुनिश्चित करें।

विभिन्न तकनीकी व राजस्व विभागों की बिंदुवार समीक्षा एवं आयुक्त के कड़े निर्देश:

  • परिवहन विभाग: जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) को दलालों और बिचौलियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने का निर्देश दिया गया। ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण जैसी सेवाओं को इतना सरल और सुगम बनाया जाए कि आम जनता को वेंडरों पर निर्भर न रहना पड़े। डिफॉल्टर, ओवरलोड वाहनों और अवैध बसों के खिलाफ सघन जांच अभियान चलाने को कहा गया।
  • उत्पाद विभाग: बिहार सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए आयुक्त ने गुप्तचर तंत्र (Intelligence Network) को सक्रिय करने का आदेश दिया। अवैध शराब निर्माण, तस्करी और भट्टियों को ध्वस्त करने के लिए सघन छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
  • खनन विभाग: विभिन्न नदी घाटों से हो रहे अवैध बालू उठाव और अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए। बिना वैध दस्तावेजों के खनिज ढोने वाले वाहनों के खिलाफ एमएमडीआर (MMDR) अधिनियम के तहत कठोर विधिक कार्रवाई करने को कहा गया।
  • वाणिज्य कर विभाग: जीएसटी (GST) का नियमित भुगतान न करने वाले ठेकेदारों और व्यवसायियों की सूची तैयार कर कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाने का आदेश दिया गया।
  • नगर निगम: राजस्व संग्रहण बढ़ाने के साथ-साथ हजारीबाग झील परिसर में हाई मास्ट लाइट लगाने, नियमित साफ-सफाई, फॉगिंग कराने और सार्वजनिक स्थानों पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
  • माप-तौल एवं मत्स्य विभाग: पेट्रोल पंपों का नियमित निरीक्षण करने और बड़े जलाशयों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए अंतर्विभागीय समन्वय का निर्देश दिया गया।

भू-अर्जन और आधारभूत संरचनाओं की समीक्षा

​बैठक के दौरान जिले में चल रही बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं जैसे एनटीपीसी (NTPC), विभिन्न कोल कंपनियों और एनएचएआई (NHAI) से जुड़े भू-अर्जन मामलों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इसके तहत म्यूटेशन, एलपीसी (LPC), लीज, जीएम जेजे भूमि, आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय, पैक्स भवनों के स्थानांतरण, ट्रांसमिशन लाइन तथा वनाधिकार अधिनियम (FRA) से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु भवन प्रमंडल के सहायक अभियंता को भवन मूल्यांकन कार्य जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में ये वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित

​इस उच्च स्तरीय प्रमंडलीय बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे:

  • ​हेमंत सती (उपायुक्त, हजारीबाग)
  • ​रिया सिंह (उपविकास आयुक्त, हजारीबाग)
  • ​ओमप्रकाश गुप्ता (नगर आयुक्त, हजारीबाग)
  • ​महेंद्र छोटन उरांव (अपर समाहर्ता, हजारीबाग)
  • ​जोहन टुडू (अनुमंडल पदाधिकारी, बरही)
  • ​प्रमंडल के सभी अंचल अधिकारी (CO), विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कोल कंपनियों के आधिकारिक प्रतिनिधि।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व प्रशासनिक ज्ञान / Revenue & RTPS Framework)

​📌 जानिए क्या है सेवा अधिकार अधिनियम (Right to Service Act) और म्यूटेशन की विधिक समय सीमा?

  • सेवा अधिकार अधिनियम (RTPS): इस कानून के तहत आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं (जैसे जाति, आवासीय प्रमाण-पत्र या दाखिल-खारिज) एक निश्चित समय सीमा के भीतर देना अनिवार्य है। यदि कोई अधिकारी बिना किसी ठोस विधिक कारण के फाइल रोकता है, तो उस पर वित्तीय जुर्माना और विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है।
  • MMDR अधिनियम: खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम के तहत बिना वैध चालान या लीज के खनिजों (जैसे बालू, कोयला, पत्थर) का उत्खनन और परिवहन गैर-कानूनी है, जिसमें वाहन जब्ती और गैर-जमानती प्राथमिकी (FIR) का प्रावधान है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: जनहित के लिए कड़े प्रशासनिक फैसले और भ्रष्टाचार पर चोट जरूरी (Editorial)

सिस्टम की सुस्ती पर आयुक्त के कड़े तेवर स्वागत योग्य, पर जमीनी स्तर पर अंचल कार्यालयों की कार्यशैली बदलना बड़ी चुनौती

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त विजय कुमार गुप्ता द्वारा दाखिल-खारिज में देरी पर अंचल अधिकारियों (CO) के खिलाफ सीधे सेवा अधिकार अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी देना एक बेहद जरूरी और साहसिक कदम है। झारखंड में अंचल कार्यालयों (अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारियों) की कार्यप्रणाली को लेकर आम जनता हमेशा त्रस्त रहती है। जमीन का म्यूटेशन कराने के लिए गरीबों को महीनों अंचल के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसी तरह, उपायुक्त हेमंत सती का सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का निर्देश भी हजारीबाग की शहरी और ग्रामीण व्यवस्था को बचाने के लिए आवश्यक है। 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि ये निर्देश केवल फाइलों तक सीमित न रहें; जब तक दो-चार दोषी अधिकारियों पर असल में दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बिचौलियों का तंत्र और अंचल कार्यालयों की सुस्ती खत्म होना नामुमकिन है।

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हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक जागरूकता शिविर आयोजित: मुफ्त कानूनी सहायता की मिली विस्तृत जानकारी

 

हजारीबाग एसबीआई मुख्य शाखा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक जागरूकता शिविर आयोजित: मुफ्त कानूनी सहायता की मिली विस्तृत जानकारी

"प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश धुव्र चंद्र मिश्रा के देखरेख में हुआ कार्यक्रम; प्राधिकार सचिव रवि प्रकाश तिवारी और अधिकार मित्र बिकाश कुमार पाण्डेय ने अधिकारों के प्रति किया जागरूक"— न्यूज़ प्रहरी विशेष

विधिक ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग (दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), रांची के दिशा-निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), हजारीबाग के तत्वावधान में बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह विशेष शिविर हजारीबाग स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुख्य शाखा में संचालित 'वरिष्ठजन सहायता एवं सुविधा केंद्र' में आयोजित हुआ। पूरा कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश धुव्र चंद्र मिश्रा की कुशल देखरेख और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस संबंध में विस्तृत जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रवि प्रकाश तिवारी ने मीडिया को दी।

"हजारीबाग के वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी हक दिलाने और मुफ्त कानूनी मदद पहुंचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने एक बेहतरीन कदम उठाया है!"

माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम की दी गई जानकारी

​शिविर के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकार मित्र बिकाश कुमार पाण्डेय ने वहां उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों, बैंक उपभोक्ताओं और आमजनों को उनके कानूनी अधिकारों, संरक्षण, सामाजिक कल्याण और राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।

  • "हजारीबाग के वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी हक दिलाने और मुफ्त कानूनी मदद पहुंचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने एक बेहतरीन कदम उठाया है!"
अधिकार मित्र ने विशेष रूप से 'माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007' के विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत वरिष्ठ नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन जीने, बच्चों या उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण प्राप्त करने और अपनी संपत्ति की सुरक्षा करने के क्या-क्या विधिक अधिकार प्राप्त हैं। इसके साथ ही बुजुर्गों के लिए चलाई जा रही विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और डीएलएसए के माध्यम से विधिक सहायता प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया।

हेल्पलाइन नंबर 15100 के जरिए घर बैठे मिलेगी कानूनी मदद

​जागरूकता शिविर में बुजुर्गों की समस्याओं को सुनते हुए मौके पर ही आवश्यक कानूनी परामर्श भी प्रदान किया गया। अधिकार मित्र ने बताया कि वरिष्ठजन सहायता केंद्र के माध्यम से बुजुर्गों को लगातार मार्गदर्शन दिया जा रहा है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जारी नालसा (NALSA) निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर 15100 की जानकारी भी सभी के साथ साझा की गई। उपस्थित लोगों से अपील की गई कि किसी भी प्रकार के शोषण, उपेक्षा या कानूनी अड़चन की स्थिति में वे बिना किसी संकोच के जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग के कार्यालय से संपर्क कर मुफ्त वकील और कानूनी सहायता का लाभ उठा सकते हैं।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व न्यायिक ज्ञान / Maintenance & Welfare Act)

​📌 जानिए क्या है माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम, 2007?

  • कानूनी अधिकार: इस अधिनियम के तहत यदि कोई बच्चा या संबंधी अपने माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक की देखरेख नहीं करता है, तो बुजुर्ग व्यक्ति 'भरण-पोषण अधिकरण' (Maintenance Tribunal) में शिकायत दर्ज करा सकता है। अधिकरण बच्चों को प्रति माह अधिकतम 10,000 रुपये (या राज्य सरकार द्वारा संशोधित राशि) तक भरण-पोषण भत्ता देने का आदेश दे सकता है।
  • मुफ्त कानूनी सहायता (Section 12 of LSA Act): कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत देश के सभी वरिष्ठ नागरिक (बुजुर्ग) बिना किसी आय सीमा की बाध्यता के, सरकारी खर्च पर मुफ्त कानूनी सहायता, विधिक परामर्श और अदालत में पैरवी के लिए सरकारी वकील प्राप्त करने के हकदार हैं।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: बैंकों में विधिक शिविर लगाना जिला विधिक सेवा प्राधिकार की बेहतरीन रणनीति (Editorial)

वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा के केंद्र 'बैंक' में जागरूकता शिविर का आयोजन सराहनीय और प्रभावी

समाज के सबसे संवेदनशील हिस्से, यानी हमारे बुजुर्गों को कानून की जानकारी उनके रोजमर्रा के स्थानों पर देना एक बेहतरीन प्रशासनिक पहल है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार हजारीबाग द्वारा भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा को इस शिविर के लिए चुनना बेहद दूरदर्शी कदम है, क्योंकि पेंशन और बैंकिंग कार्यों के लिए बुजुर्गों का सबसे ज्यादा आना-जाना यहीं होता है। अक्सर देखने में आता है कि कानून की पेचीदगियों और कोर्ट-कचहरी के डर से बुजुर्ग अपने हक की आवाज नहीं उठा पाते। नालसा हेल्पलाइन 15100 और प्राधिकार सचिव रवि प्रकाश तिवारी की अगुवाई में चलाया जा रहा यह अभियान तभी पूरी तरह सफल होगा, जब समाज का हर व्यक्ति अपने आसपास रहने वाले बेसहारा बुजुर्गों को डीएलएसए के इस मुफ्त विधिक मंच तक पहुंचाने में मददगार बनेगा।

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झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा की बड़ी बैठक आज: जयराम कुमार महतो ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के जिला प्रभारियों को किया तलब

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा की बड़ी बैठक आज: जयराम कुमार महतो ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के जिला प्रभारियों को किया तलब

"बोकारो और रामगढ़ जिला पुनर्गठन कार्यक्रम की तिथि और रणनीतियों पर होगा अंतिम निर्णय; केंद्रीय समिति के निर्देश पर शाम 6 बजे बुलाई गई आवश्यक बैठक"— न्यूज़ प्रहरी विशेष

राजनीतिक ब्यूरो, बोकारो/धनबाद

  • रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): केंद्रीय कार्यालय, जेएलकेएम (पत्रांक संख्या: JLKM/CP/39/26, दिनांक: 10 जून 2026)

बोकारो:

झारखंड की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे दल 'झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा' (JLKM) के सांगठनिक ढांचे को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। केंद्रीय समिति के निर्देशानुसार आज यानी 10 जून 2026 को शाम 06:00 बजे एक अति आवश्यक सांगठनिक बैठक आयोजित की गई है। इस हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता जेएलकेएम के केंद्रीय अध्यक्ष सह डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो द्वारा की जा रही है। बैठक को लेकर पार्टी के केंद्रीय कार्यालय द्वारा आधिकारिक पत्र (228685.jpg) जारी कर सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।

(228685.jpg)

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के इन 5 जिला प्रभारियों की बैठक

​सांगठनिक दृष्टिकोण से बुलाई गई इस अति आवश्यक बैठक में मुख्य रूप से उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी पाँचों जिलों के प्रभारियों को अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया गया है। बैठक में प्रमंडल के सांगठनिक विस्तार, बूथ स्तर की तैयारियों और कार्यकर्ताओं के सक्रिय जुड़ाव को लेकर गहन मंथन होना है।

बोकारो और रामगढ़ जिला पुनर्गठन पर लिया जाएगा अंतिम निर्णय

​साझा किए गए आधिकारिक पत्र (228685.jpg) के अनुसार, इस आपातकालीन बैठक का मुख्य एजेंडा दो प्रमुख जिलों के संगठन से जुड़ा हुआ है:

​"बैठक का मुख्य उद्देश्य बोकारो एवं रामगढ़ जिला पुनर्गठन कार्यक्रम की तिथि, समय एवं अन्य आवश्यक तैयारियों पर विचार-विमर्श कर अंतिम निर्णय लेना है। अतः सभी संबंधित प्रभारियों से अनुरोध है कि निर्धारित समय पर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें, ताकि आवश्यक निर्णय समयबद्ध रूप से लिए जा सकें।"


​राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि बोकारो और रामगढ़ में पार्टी अपने सांगठनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल कर सकती है, जिससे नए और जुझारू कार्यकर्ताओं को कमान सौंपी जा सके।

जेएलकेएम केंद्रीय व आवासीय कार्यालय का आधिकारिक विवरण

​पार्टी द्वारा जारी लेटरहेड के अनुसार, संगठन के मुख्य प्रशासनिक केंद्रों का विवरण निम्नलिखित है:

  • केंद्रीय कार्यालय: इन्द्रपुरी कॉलोनी बधराशबेटा, पो०- सतनपुर, थाना- सेक्टर 12, जिला- बोकारो (झारखंड) - 827013
  • आवासीय कार्यालय: मानटॉड़, पो०+थाना- तोपचांची, जिला- धनबाद (झारखंड) - 828402
  • डिजिटल संपर्क: ई-मेल (tigerjairamofficial@gmail.com) एवं आधिकारिक वेबसाइट (www.jlkmparty.org)

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( सांगठनिक व राजनीतिक ज्ञान / Political Party Framework)

​📌 जानिए क्या होता है राजनीतिक दलों में 'जिला पुनर्गठन' का महत्व?

  • सांगठनिक पुनर्गठन (Organizational Restructuring): किसी भी राजनीतिक दल के लिए जिला पुनर्गठन एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसके तहत पुराने या निष्क्रिय पदाधिकारियों को बदलकर नए चेहरों को जिला अध्यक्ष, सचिव या कोर कमेटी में जगह दी जाती है, ताकि स्थानीय स्तर पर पार्टी विरोधी लहर या सुस्ती को खत्म किया जा सके।
  • समयबद्ध निर्णय की अनिवार्यता: आगामी चुनावों या आंदोलनों को ध्यान में रखते हुए जिला पुनर्गठन की रूपरेखा तैयार की जाती है। बोकारो और रामगढ़ जैसे कोयलांचल और औद्योगिक क्षेत्रों में सांगठनिक पकड़ मजबूत करना किसी भी क्षेत्रीय दल के लिए जनाधार बढ़ाने की पहली शर्त होती है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: कोयलांचल में सांगठनिक पैठ मजबूत करने की कवायद में 'टाईगर' जयराम महतो (Editorial)

बोकारो और रामगढ़ में सांगठनिक बदलाव के संकेत; क्या नए चेहरों के भरोसे जंग फतह करेगी जेएलकेएम?

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष और डुमरी के विधायक जयराम कुमार महतो युवाओं के बीच अपनी आक्रामक और माटी से जुड़ी राजनीति के लिए जाने जाते हैं। उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के 5 जिला प्रभारियों की यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि जयराम महतो अब सिर्फ आंदोलनों तक सीमित न रहकर पार्टी को एक कॉरपोरेट और अनुशासित सांगठनिक ढांचे में ढालना चाहते हैं। बोकारो और रामगढ़ जिलों का पुनर्गठन इस दिशा में बड़ा कदम है। इन दोनों जिलों में पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान और नए-पुराने कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य की जो कमी दिख रही थी, उसे दूर करने के लिए खुद केंद्रीय अध्यक्ष ने मोर्चा संभाला है। देखना दिलचस्प होगा कि इस बैठक के बाद जो नई कमेटियां सामने आती हैं, वे जमीनी स्तर पर पार्टी को कितना फायदा पहुंचा पाती हैं।

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अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज़ 2A को केंद्रीय कैबिनेट की हरी झंडी: एयरपोर्ट कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 2,169 करोड़ रुपये होंगे खर्च

 

अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज़ 2A को केंद्रीय कैबिनेट की हरी झंडी: एयरपोर्ट कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 2,169 करोड़ रुपये होंगे खर्च

"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिया गया बड़ा फैसला; 6 किलोमीटर लंबे नए रूट पर बनेंगे 5 स्टेशन, जुड़वां शहरों का मेट्रो नेटवर्क बढ़कर होगा 77.63 किलोमीटर"— पीआईबी

राष्ट्रीय ब्यूरो, नई दिल्ली/अहमदाबाद

  • रिपोर्टर: नेशनल डेस्क (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार (दिनांक: 10 जून 2026)

नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (केंद्रीय कैबिनेट) ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के फेज़ 2A (Phase 2A) को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस नए फेज़ के तहत कोटेश्वर रोड से लेकर एयरपोर्ट कॉरिडोर तक मेट्रो नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद अहमदाबाद और गांधीनगर के जुड़वां शहरों में सक्रिय मेट्रो रेल नेटवर्क की कुल लंबाई बढ़कर 77.63 किलोमीटर हो जाएगी, जो गुजरात के शहरी परिवहन के इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

"अहमदाबाद और गांधीनगर के यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब सीधे मेट्रो से जा सकेंगे एयरपोर्ट, मोदी कैबिनेट ने दी मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी!"

परियोजना की लागत और रूट का पूरा विवरण

​केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत विवरण के अनुसार, अहमदाबाद मेट्रो फेज़ 2A की कुल लंबाई 6.032 किलोमीटर होगी। इस नए कॉरिडोर की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • कुल लागत: निर्माण के दौरान लगने वाले ब्याज (IDC) सहित इस प्रोजेक्ट की कुल समापन लागत 2,169.04 करोड़ रुपये आंकी गई है।
  • स्टेशनों की संख्या: इस पूरे रूट पर कुल 05 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें से 04 स्टेशन एलिवेटेड (जमीन से ऊपर) और 01 स्टेशन अंडरग्राउंड (भूमिगत) होगा।
  • स्टेशनों के नाम: इस नए कॉरिडोर में शामिल होने वाले स्टेशनों के नाम आश्रम रोड, कोटेश्वर प्राचीन मंदिर, साबरमती रिवर, सरदार नगर और एयरपोर्ट निर्धारित किए गए हैं।

रोजगार के नए अवसरों का होगा सृजन

​बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ यह प्रोजेक्ट रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ी राहत लेकर आएगा। अहमदाबाद मेट्रो फेज़ 2A के निर्माण कार्य के चरम (Peak Period) के दौरान लगभग 2,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, मेट्रो के सुचारू संचालन और रखरखाव (Operation & Maintenance) के चरण में लगभग 500 लोगों को स्थायी रूप से काम मिलने की संभावना है।

प्रोजेक्ट के बहुआयामी लाभ और भविष्य की खेल प्रतियोगिताएं

  • सुगम कनेक्टिविटी: यह नया फेज़ सीधे तौर पर अहमदाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को शहर के प्रमुख आवासीय और वाणिज्यिक हब से जोड़ेगा, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को बिना किसी ट्रैफिक जाम के एयरपोर्ट तक निर्बाध पहुंच मिलेगी।
  • अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में मददगार: इस रूट के आसपास के क्षेत्रों में विश्व पुलिस खेल 2029 (World Police Games 2029) और राष्ट्रमंडल खेल 2030 (Commonwealth Games 2030) के लिए अत्याधुनिक खेल सुविधाएं विकसित होने की प्रबल संभावना है, जिसमें यह मेट्रो कॉरिडोर रीढ़ की हड्डी का काम करेगा।
  • ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से राहत: मेट्रो का विस्तार होने से सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे यात्रा के समय में बचत होगी और सड़क सुरक्षा बढ़ेगी। साथ ही, पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर निर्भरता कम होने से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
  • आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: रेलवे स्टेशनों, बस डिपो और एयरपोर्ट के बीच बेहतर तालमेल से व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे समाज के सभी वर्गों को समान रूप से किफायती सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार आएगा।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( तकनीकी व अवसंरचना ज्ञान / Metro Infrastructure Insights)

​📌 जानिए क्या होती है निर्माण के दौरान ब्याज (IDC) लागत और अंडरग्राउंड मेट्रो की चुनौतियाँ?

  • आईडीसी (Interest During Construction): किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए लिए गए लोन पर निर्माण अवधि के दौरान जो ब्याज बनता है, उसे प्रोजेक्ट की कुल लागत (Completion Cost) में ही जोड़ दिया जाता है। इसे विधिक व वित्तीय भाषा में 'आईडीसी' कहा जाता है।
  • अंडरग्राउंड बनाम एलिवेटेड स्टेशन: एलिवेटेड स्टेशनों की तुलना में अंडरग्राउंड (भूमिगत) स्टेशन के निर्माण में तीन गुना अधिक लागत आती है, क्योंकि इसमें टनल बोरिंग मशीनों (TBM) का उपयोग और सघन भूमिगत सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। फेज़ 2A में एयरपोर्ट के पास सुरक्षा कारणों से ही 1 अंडरग्राउंड स्टेशन का प्रावधान किया गया है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: वैश्विक खेल आयोजनों और शहरी गतिशीलता की ओर बढ़ते कदम (Editorial)

कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और वर्ल्ड पुलिस गेम्स का मजबूत आधार बनेगा अहमदाबाद मेट्रो का नया विस्तार

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा अहमदाबाद मेट्रो फेज़ 2A को दी गई मंजूरी केवल एक यातायात कॉरिडोर का विस्तार नहीं है, बल्कि यह भारत के वैश्विक खेल हब बनने की तैयारियों का एक हिस्सा है। साल 2029 और 2030 में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के मद्देनजर एयरपोर्ट को मेट्रो ग्रिड से जोड़ना बेहद दूरदर्शी कदम है। 2,169 करोड़ रुपये का यह निवेश आने वाले समय में गुजरात के आर्थिक पहिए को और गति देगा। 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि इस प्रोजेक्ट की असली सफलता तब होगी जब निर्माण कार्य को तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाए, ताकि आम जनता और आने वाले अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को समय पर इसका लाभ मिल सके।

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चतरा में विकास योजनाओं के त्वरित निष्पादन को लेकर जिला प्रशासन गंभीर: उपायुक्त रवि आनंद ने वन विभाग से संबंधित लंबित मामलों की समीक्षा कर दिए कड़े निर्देश

 

चतरा में विकास योजनाओं के त्वरित निष्पादन को लेकर जिला प्रशासन गंभीर: उपायुक्त रवि आनंद ने वन विभाग से संबंधित लंबित मामलों की समीक्षा कर दिए कड़े निर्देश

"वनाधिकार अधिनियम, एनओसी और ग्राम सभा के प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने का आदेश; आपसी समन्वय से दूर होंगी तकनीकी बाधाएं"— उपायुक्त

प्रशासनिक ब्यूरो, चतरा

  • रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (IPRD), चतरा

चतरा:

चतरा समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में उपायुक्त रवि आनंद की अध्यक्षता में वन विभाग से संबंधित लंबित मामलों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के भीतर चल रही विभिन्न महत्वपूर्ण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में वन विभाग से संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं, जटिलताओं और अनुमतियों (क्लियरेंस) के कारण रुके या लंबित पड़े मामलों की बिंदुवार विस्तृत समीक्षा की गई।

चतरा में सड़क, बिजली और पानी की बंद पड़ी योजनाओं को चालू करने के लिए उपायुक्त रवि आनंद ने एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक कर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं!"

सड़क, बिजली और पानी जैसी जन-उपयोगी योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा

​समीक्षा के क्रम में उपायुक्त ने विद्युत संचरण परियोजनाओं (पावर ट्रांसमिशन), पेयजलापूर्ति पाइपलाइन, सड़क निर्माण, तथा पुल-पुलिया सहित अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी महत्वपूर्ण विकास योजनाओं के उन मामलों की गहन जांच की, जो वनाधिकार अधिनियम (FRA), अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) अथवा वन विभाग की अन्य आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण अटके हुए हैं। उपायुक्त रवि आनंद ने बैठक में मौजूद विभिन्न विभागों के कार्यपालक अभियंताओं से योजनावार जमीनी प्रगति की जानकारी प्राप्त की और सभी लंबित फाइलों के त्वरित निष्पादन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

ग्राम सभा का आयोजन कर वनाधिकार समिति से प्रस्ताव पास कराने का निर्देश

​बैठक में उपायुक्त ने सख्त निर्देश दिया कि जिन विकास योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन हेतु नियमानुसार ग्राम सभा का आयोजन आवश्यक है, उन मामलों में बिना किसी देरी के ग्राम सभा बुलाई जाए। ग्राम सभा से पारित प्रस्तावों को सबसे पहले अनुमंडल स्तरीय वनाधिकार समिति से अनुमोदित कराया जाए और तत्पश्चात जिला स्तरीय वनाधिकार समिति से अंतिम स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया समय सीमा के भीतर सुनिश्चित की जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी तालमेल और समन्वय स्थापित करते हुए सभी आवश्यक कागजी व विधिक प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करें, ताकि जनहित से जुड़ी इन विकास योजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारा जा सके और आम जनता को इसका लाभ समय पर मिल सके।

​उपायुक्त ने सभी संबंधित जिला स्तरीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लंबित मामलों का नियमित रूप से अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) करें और विभागीय समन्वय के माध्यम से उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करें।

बैठक में कई वरीय प्रशासनिक और वन अधिकारी रहे मौजूद

​इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे:

  • ​राहुल मीणा (वन प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तरी चतरा प्रमंडल)
  • ​मुकेश कुमार (वन प्रमंडल पदाधिकारी, दक्षिणी चतरा प्रमंडल)
  • ​अरविंद कुमार (अपर समाहर्ता, चतरा)
  • ​जहूर आलम (अनुमंडल पदाधिकारी, चतरा)
  • ​विभिन्न कार्यपालक अभियंता एवं संबंधित तकनीकी विभागों के कर्मचारी।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व प्रशासनिक ज्ञान / Forest Clearance Framework)

​📌 जानिए क्या है वनाधिकार अधिनियम (FRA) और विकास योजनाओं में इसकी भूमिका?

  • अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वनाधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006: इस कानून के तहत वन भूमि पर बुनियादी ढांचागत विकास (जैसे स्कूल, अस्पताल, सड़क, बिजली, पानी की पाइपलाइन) के लिए डायवर्जन हेतु स्थानीय ग्राम सभा की लिखित सहमति और अनापत्ति अनिवार्य है। इसके बिना कोई भी गैर-वानिकी कार्य वन क्षेत्र में नहीं हो सकता।
  • त्रि-स्तरीय वन समिति ढांचा: एफआरए के तहत किसी भी सरकारी योजना को पास करने के लिए प्रस्ताव पहले 'ग्राम सभा' से 'अनुमंडल स्तरीय वनाधिकार समिति' (SDLC) जाता है, और वहां से अंतिम मोहर के लिए 'जिला स्तरीय वनाधिकार समिति' (DLC) के पास पहुंचता है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं उपायुक्त करते हैं।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: वन विभाग और कार्यदायी संस्थाओं में तालमेल ही चतरा के विकास की कुंजी (Editorial)

एनओसी की फाइलों में दबे जनहित के प्रोजेक्ट्स: समयबद्ध जवाबदेही से ही बदलेगी चतरा की सूरत

चतरा जिला भौगोलिक रूप से घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहाँ विकास की कोई भी किरण (चाहे वह पानी की पाइपलाइन हो या बिजली के खंभे) वन विभाग के क्लियरेंस के बिना आगे नहीं बढ़ सकती। उपायुक्त रवि आनंद द्वारा बुलाई गई यह समीक्षा बैठक बेहद सामयिक है, क्योंकि अक्सर वन विभाग और लोक निर्माण या विद्युत विभाग के बीच समन्वय की कमी से फाइलें महीनों लटकी रहती हैं। सरकार की नीतियां कितनी भी अच्छी हों, लेकिन जब तक अनुमंडल और जिला स्तर की वनाधिकार समितियां डेडलाइन तय करके काम नहीं करेंगी, तब तक ग्रामीण जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती रहेगी। अधिकारियों को कागजी पत्राचार के जाल से बाहर निकलकर ऑन-फील्ड जॉइंट सर्वे पर ध्यान देना होगा, तभी चतरा विकास की मुख्यधारा से तेज गति से जुड़ पाएगा।

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हजारीबाग जिला प्रशासन की अनूठी पहल: 'पुस्तक दान, ज्ञान का सम्मान' अभियान शुरू, आपकी अनुपयोगी किताबें संवारेंगी किसी का उज्जवल भविष्यकार्यशाला संपन्न: जे.गुरुजी ऐप और रेल प्रोजेक्ट के जरिए बदलेगा शिक्षण का तरीका

 

हजारीबाग जिला प्रशासन की अनूठी पहल: 'पुस्तक दान, ज्ञान का सम्मान' अभियान शुरू, आपकी अनुपयोगी किताबें संवारेंगी किसी का उज्जवल भविष्य

"प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए डीसी की विशेष अपील; नए समाहरणालय भवन के कमरा संख्या A-206 में जमा होंगी पुस्तकें"— न्यूज़ प्रहरी विशेष

प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला जनसंपर्क कार्यालय (PRD), हजारीबाग (दिनांक: 10 जून 2026)

हजारीबाग:

शिक्षा और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने के लिए हजारीबाग जिला प्रशासन ने एक अत्यंत अनुकरणीय और मानवीय पहल की शुरुआत की है। हजारीबाग जिला प्रशासन द्वारा आधिकारिक तौर पर "पुस्तक दान, ज्ञान का सम्मान" अभियान का शंखनाद किया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सक्षम नागरिकों, सफल छात्रों और प्रबुद्ध समाज के घरों में रखी ऐसी प्रतियोगी किताबों को स्वेच्छा से दान कराना है, जो उनके उपयोग में नहीं हैं। प्रशासन इन किताबों को सहेजकर उन मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों तक पहुंचाएगा, जो पैसों के अभाव में महंगी पुस्तकें खरीदने में असमर्थ हैं।

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"ज्ञान बांटिए, अवसर बढ़ाइए" – एक पुस्तक बदल सकती है किसी का भविष्य

​शेयर किए गए आधिकारिक पोस्टर के अनुसार, जिला प्रशासन हजारीबाग ने आम जनता और युवाओं से अपील करते हुए कहा है कि:

​"आपकी अनुपयोगी पुस्तकें, किसी का उज्जवल भविष्य बन सकती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की उपयोगी पुस्तकों का दान करें और जरूरतमंद विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान दें। आपके द्वारा दान दी गई पुस्तकें हजारीबाग जिले के विभिन्न पुस्तकालयों (Libraries) एवं अध्ययन केंद्रों में उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।"

इन प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें की जा सकती हैं दान

​अगर आपके पास या आपके परिचितों के पास निम्नलिखित प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित NCERT, सामान्य अध्ययन, भारतीय राजव्यवस्था (Indian Polity), अर्थशास्त्र, गणित, भौतिकी, पर्यावरण या समसामयिकी (Current Affairs) की किताबें उपलब्ध हैं, तो आप उन्हें इस महाभियान में दान कर सकते हैं:

  • सिविल सेवा: UPSC और JPSC
  • तकनीकी व चिकित्सा: JEE और NEET
  • बैंकिंग व रेलवे: Banking और Railway
  • कर्मचारी चयन व शिक्षक पात्रता: SSC, JTET, CTET और CUET
  • ​एवं अन्य तमाम प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं की उपयोगी पुस्तकें।

📍 पुस्तक जमा करने का स्थान और समय नोट करें

​हजारीबाग जिला प्रशासन ने पुस्तकों के संग्रहण के लिए समाहरणालय में एक समर्पित केंद्र बनाया है, जहां कोई भी नागरिक अपनी पुस्तकें सुरक्षित जमा करा सकता है:

  • स्थान (Venue): जिला योजना कार्यालय, कमरा संख्या A-206, द्वितीय तल्ला (Second Floor), नया समाहरणालय भवन, हजारीबाग।
  • कार्यालय समय (Office Time): सुबह 10:30 AM से शाम 05:00 PM तक (कार्य दिवसों में)।

जनहित में जारी अपील: हजारीबाग जिला प्रशासन समस्त जिलावासियों, कोचिंग संस्थानों, और प्रबुद्ध नागरिकों से पुरजोर अपील करता है कि आप सभी इस पुनीत शिक्षा अभियान में बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व सामाजिक ज्ञान / Campaign Insights)

​📌 जानिए क्यों हजारीबाग के लिए गेम-चेंजर साबित होगा यह पुस्तक दान अभियान?

  • डिजिटल लाइब्रेरी नेटवर्क से जुड़ाव: हजारीबाग जिला प्रशासन पिछले कुछ समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पुस्तकालय क्रांति चला रहा है। इस अभियान से एकत्रित पुस्तकें सुदूर प्रखंडों की लाइब्रेरी तक पहुंचेंगी, जिससे सुदूर गांवों के युवाओं को भी UPSC-JPSC का स्टडी मटेरियल घर के पास मिल सकेगा।
  • रीसाइक्लिंग और पर्यावरण संरक्षण: पुरानी किताबों को कबाड़ में फेंकने या बेचने के बजाय दोबारा उपयोग में लाना रीसाइक्लिंग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है। एक पुरानी किताब किसी नए छात्र के लिए पूर्णतः नई मार्गदर्शिका बन जाती है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: किताबों की अलमारियों से निकलकर युवाओं के हाथों तक पहुंचे ज्ञान (Editorial)

कबाड़ में जाने वाली किताबें जब पुस्तकालयों की शान बनेंगी, तभी हजारीबाग का हर तबका 'आईएएस-आईपीएस' बनने का सपना देख सकेगा

हजारीबाग हमेशा से झारखंड का 'एजुकेशन हब' रहा है, लेकिन आज भी यहां सैकड़ों ऐसे छात्र हैं जो सिर्फ इसलिए प्रतियोगिता की दौड़ में पिछड़ जाते हैं क्योंकि वे चार से पांच हजार रुपये के बुक-सेट्स नहीं खरीद पाते। जिला प्रशासन की यह पहल सीधे तौर पर समाज के दो वर्गों को आपस में जोड़ती है—एक वो जो सफल हो चुके हैं और जिनकी किताबें अलमारियों में धूल फांक रही हैं, और दूसरे वो जो संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। 'न्यूज प्रहरी' प्रशासन के इस कदम की भूरि-भूरि सराहना करता है। हमारा मानना है कि शहर के बड़े स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को भी अपने स्तर पर 'बुक ड्रॉप बॉक्स' लगाना चाहिए, ताकि छात्र आसानी से इस अभियान का हिस्सा बन सकें।

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