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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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Hazaribagh Congress Maun Satyagraha: हजारीबाग में कांग्रेस का विजय मार्च, राजीव रंजन बोले— धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवाओं की जीत

 

Hazaribagh Congress Maun Satyagraha: हजारीबाग में कांग्रेस का मौन सत्याग्रह व विजय मार्च, राजीव रंजन बोले— "धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के Gen Z की जीत"

हजारीबाग:

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के निर्देशानुसार, हजारीबाग जिला कांग्रेस कमिटी द्वारा नीट (NEET) एवं सीबीएसई (CBSE) परीक्षा संबंधी अनियमितताओं तथा छात्रों पर हुए दमन के विरोध में राज्यव्यापी मौन सत्याग्रह एवं विजय मार्च का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरीय उपाध्यक्ष शारदा रंजन दुबे ने की।

Hazaribagh Congress leaders conducting Maun Satyagraha and Vijay March at Jhanda Chowk

​जिला कांग्रेस कार्यालय कृष्ण बल्लभ आश्रम से शुरू हुआ यह विजय मार्च कांग्रेस रोड और मालवीय मार्ग होते हुए झंडा चौक पर समाप्त हुआ। कांग्रेस नेताओं ने इसे देश के लाखों युवाओं के संघर्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दृढ़ नेतृत्व को समर्पित बताया।

"युवाओं के सत्य के सामने नरेंद्र मोदी का घमंड टूटा": राजीव रंजन प्रसाद

​मौन सत्याग्रह के उपरांत हजारीबाग जिला कांग्रेस के प्रभारी सह झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव राजीव रंजन प्रसाद ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला।

  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया: राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के करोड़ों युवाओं और 'Gen Z' की जीत है, जिन्होंने भ्रष्ट एवं अयोग्य शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।
  • राहुल गांधी का मिला साथ: उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक के पहले ही दिन से राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर संसद तक छात्रों को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं।
  • आंदोलन जारी रहने का ऐलान: उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ और पारदर्शी नहीं हो जाती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

कांग्रेस ने रखीं तीन प्रमुख माँगें

​कांग्रेस पार्टी ने छात्रों के हित में केंद्र सरकार के समक्ष तीन मुख्य मांगें रखी हैं:

कांग्रेस की प्रमुख मांगें:

  1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: अयोग्य शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल त्यागपत्र (जो अब हो चुका है)।
  2. संसद में विशेष चर्चा: पेपर लीक और परीक्षा धांधली के इस पूरे प्रकरण पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।
  3. मुकदमे वापस हों: आंदोलन के दौरान छात्रों और युवाओं पर दर्ज किए गए सभी आपराधिक मामलों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

कार्यक्रम में प्रमुख नेताओं की रही मौजूदगी

​इस राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और विजय मार्च में कांग्रेस के कई वरीय नेता एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।

  • प्रमुख उपस्थिति: कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद, सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह, प्रदेश कोऑर्डिनेटर बिनोद कुशवाहा, प्रदेश सचिव शैलेंद्र कुमार यादव, नवीन कुमार, अशोक देव, डॉ. प्रकाश कुमार, विजय यादव, आबिद अंसारी, बिनोद सिंह, शशि मोहन सिंह, वीरेंद्र कुमार सिंह, निसार खान, साजिद अली खान और परवेज अहमद सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

​कार्यक्रम के समापन पर “युवाओं के सम्मान में, कांग्रेस है मैदान में” के गगनभेदी नारे लगाए गए।

District Congress Committee, Hazaribagh (Official Press Release)

और पढ़ें: Hazaribagh Congress Protest Against NEET Paper Leak: Memorandum Submitted to DC

Chhatrasal Stadium Detention Centre: Rahul Gandhi's Video Message to Students on NEET & Education System

 

​छत्रसाल स्टेडियम डिटेंशन सेंटर से राहुल गांधी का सरकार पर हमला: बोले—'शिक्षा व्यवस्था चरमराई, प्रधानमंत्री देश के युवाओं से मांगें माफी'

नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छत्रसाल स्टेडियम डिटेंशन सेंटर से एक वीडियो संदेश जारी कर सरकार और प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला.

    • Chhatrasal Stadium से राहुल गांधी का बड़ा संदेश: PM देश के युवाओं से माफी मांगें, परीक्षा तंत्र पूरी तरह ध्वस्त!
​वीडियो में सीढ़ियों पर बैठकर देश के छात्रों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज देश की संपूर्ण शिक्षा प्रणाली (Higher Education System) ध्वस्त हो चुकी है और लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

​"शिक्षा व्यवस्था चरमराई, परिवारों की गाढ़ी कमाई हो रही बर्बाद": राहुल गांधी

​डिटेंशन सेंटर से जारी अपने संदेश में राहुल गांधी ने निम्नलिखित प्रमुख बातें रखीं:

  • शिक्षा प्रणाली का पतन: देश की उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली पूरी तरह चरमरा चुकी है। लगातार हो रहे पेपर लीक और अनियमितताओं से अभ्यर्थियों का भरोसा टूट रहा है।
  • अभिभावकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ: लाखों परिवार अपने बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए अपनी जमा-पूंजी और संसाधन लगा देते हैं, लेकिन परीक्षा रद्द होने और धांधली के कारण उनका भविष्य और मेहनत दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
  • प्रधानमंत्री मांगे माफी: राहुल गांधी ने कहा कि जिस तरह से देश के करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है, उसके लिए प्रधानमंत्री को देश के युवाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
  • परीक्षा प्रणाली में तत्काल सुधार की मांग: उन्होंने मांग की कि देश के एग्जामिनेशन सिस्टम और पूरे एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि भविष्य में अभ्यर्थियों को ऐसी अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

​"संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष रहेगा जारी"

​राहुल गांधी ने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता (LoP) के रूप में वे अभ्यर्थियों और युवाओं की आवाज को दबने नहीं देंगे। उन्होंने कहा, "हम संसद के भीतर और सड़क पर आपकी लड़ाई लगातार लड़ते रहेंगे। जब तक देश के छात्रों को न्याय और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली नहीं मिल जाती, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।"

और पढ़ें: Dharmendra Pradhan attacks Rahul Gandhi over NEET protest and Parliament debate

चुपश्चिम बंगाल चुनाव: सोनामुखी विधानसभा पहुंचे कांग्रेस नेता मुन्ना सिंह, कार्यकर्ताओं में भरा जोश; बदलाव का किया दावा

चुपश्चिम बंगाल चुनाव: सोनामुखी विधानसभा पहुंचे कांग्रेस नेता मुन्ना सिंह, कार्यकर्ताओं में भरा जोश; बदलाव का किया दावा

संगठन की जिम्मेदारी संभालते हुए मुन्ना सिंह ने राहुल बाउरी के पक्ष में बनाई चुनावी रणनीति, 'जनहित और विकास' को बताया पार्टी का मूल मंत्र।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक, न्यूज़ प्रहरी।

हजारीबाग/पश्चिम बंगाल: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा सौंपी गई सांगठनिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए हजारीबाग के प्रमुख कांग्रेस नेता मुन्ना सिंह इन दिनों पश्चिम बंगाल के चुनावी दौरे पर हैं। पश्चिम बंगाल के प्रभारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव  गुलाम अहमद मीर के निर्देशानुसार, मुन्ना सिंह ने सोनामुखी (SC) विधानसभा क्षेत्र का सघन दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और आगामी चुनावों में जीत सुनिश्चित करने के लिए विशेष रणनीति साझा की।

"Congress leader Munna Singh meeting with Rahul Bauri in Sonamukhi West Bengal"

कार्यकर्ताओं के साथ आत्मीय संवाद

सोनामुखी प्रवास के दौरान मुन्ना सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी राहुल बाउरी और स्थानीय समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए मुन्ना सिंह ने बताया कि क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह और गर्मजोशी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का यह जोश इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्र की जनता अब बदलाव चाहती है और कांग्रेस के प्रति उनका विश्वास बढ़ा है।

चुनाव रणनीति और पार्टी का मूल मंत्र

बैठक को संबोधित करते हुए मुन्ना सिंह ने सांगठनिक मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी का मूल मंत्र हमेशा से जनहित, विकास और सामाजिक न्याय रहा है। हमें इसी संदेश को घर-घर तक पहुँचाना है।" उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर जनता के बीच जाएं और क्षेत्र की खुशहाली के लिए पूरी ताकत झोंक दें।

रणनीतिक चर्चा के दौरान उन्होंने बूथ स्तर पर मैनेजमेंट और मतदाताओं से सीधे संवाद करने की बारीकियों को समझाया। उनके अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव न केवल क्षेत्र के विकास के लिए बल्कि सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

नेताओं के प्रति जताया आभार

मुन्ना सिंह ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व, विशेषकर गुलाम अहमद मीर, के.सी. वेणुगोपाल और झारखंड प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोनामुखी के साथियों द्वारा मिले स्नेह और अटूट समर्थन के लिए भी धन्यवाद दिया।

इस दौरे के दौरान कांग्रेस की विचारधारा को मजबूती देने और संगठन को धारदार बनाने पर विशेष फोकस रहा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुन्ना सिंह जैसे अनुभवी नेताओं के बंगाल दौरे से स्थानीय संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।

'तानाशाही नहीं चलेगी': एप्सटीन फाइल और बेरोजगारी के मुद्दे पर युवा कांग्रेस का उग्र सड़क संग्राम, पुतला दहन के दौरान भारी हंगामा

'तानाशाही नहीं चलेगी': एप्सटीन फाइल और बेरोजगारी के मुद्दे पर युवा कांग्रेस का उग्र सड़क संग्राम, पुतला दहन के दौरान भारी हंगामा

दारू/हजारीबाग: देश में व्याप्त बेरोजगारी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी कुछ संवेदनशील रिपोर्टों को लेकर राजनीतिक गलियारों की तपिश अब सड़कों पर उग्र रूप धारण कर चुकी है। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक विशाल और आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया। "जब-जब मोदी डरता है, पुलिस के आगे झुकता है" और "तानाशाही नहीं चलेगी" जैसे गगनभेदी नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने पूरे इलाके को गुंजायमान कर दिया। हाथों में तख्तियां और चेहरों पर सत्ता के प्रति गहरा आक्रोश लिए, इन युवाओं का यह जत्था अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करते हुए सड़क पर उतर आया।

"सड़क पर उग्र प्रदर्शन करते युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता और 'पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड' लिखी टी-शर्ट पहने प्रदर्शनकारी नेत्री, पुतला दहन के दौरान उत्पन्न हुआ भारी तनाव।"

​इस उग्र प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बिंदु महिलाओं की सुरक्षा, कथित एप्सटीन फाइल से जुड़े विवादित संदर्भ और देश के युवाओं का अंधकारमय होता भविष्य रहा। 'पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड' (PM IS COMPROMISED) लिखी श्वेत टी-शर्ट पहने युवा कांग्रेस की एक प्रमुख नेत्री ने सत्ता पक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए स्पष्ट किया कि देश का युवा अब मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा। उनका स्पष्ट आरोप था कि जिस सरकार को रोजगार सृजन और महिला सशक्तिकरण पर ध्यान देना चाहिए था, वह अब सवालों से भाग रही है और विपक्ष की आवाज को कुचलने का कुत्सित प्रयास कर रही है। प्रदर्शनकारियों का यह हुजूम अपने संकल्प पर अडिग था कि वे सत्ता के इस कथित अहंकार को चूर-चूर करके ही दम लेंगे।

​हालाँकि, यह शांतिपूर्ण और पूर्व-अनुमोदित विरोध प्रदर्शन उस वक्त एक हिंसक और अराजक झंझावात में तब्दील हो गया, जब प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री का पुतला दहन कर रहे थे। नेत्री के कड़े शब्दों के अनुसार, उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) से विधिवत अनुमति प्राप्त कर रखी थी, इसके बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों और विरोधी विचारधारा के समर्थकों ने आकर माहौल को विषाक्त कर दिया। वीडियो के दृश्यों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि विरोधियों ने धधकते हुए पुतले को सड़क किनारे फेंक दिया, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई।

​पुतले को फेंके जाने की इस घटना ने आग में घी का काम किया और दोनों गुटों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। एक ओर जहाँ युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए आक्रोशित थे, वहीं दूसरी ओर से 'जय श्री राम' के गगनभेदी उद्घोष के साथ उन्हें दबाने की पुरजोर कोशिश की गई। बीच सड़क पर हुई यह वैचारिक और शारीरिक भिड़ंत इस बात का ज्वलंत प्रमाण है कि राजनीतिक असहिष्णुता अपने चरम पर पहुँच चुकी है। एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में, जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, वहाँ इस तरह सरेआम विपक्ष की आवाज को बलपूर्वक रोकने का यह कृत्य प्रशासन की कार्यशैली और समाज में बढ़ती राजनीतिक कटुता पर एक अत्यंत गंभीर प्रश्नचिह्न अंकित करता है।

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