'तानाशाही नहीं चलेगी': एप्सटीन फाइल और बेरोजगारी के मुद्दे पर युवा कांग्रेस का उग्र सड़क संग्राम, पुतला दहन के दौरान भारी हंगामा
दारू/हजारीबाग: देश में व्याप्त बेरोजगारी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी कुछ संवेदनशील रिपोर्टों को लेकर राजनीतिक गलियारों की तपिश अब सड़कों पर उग्र रूप धारण कर चुकी है। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक विशाल और आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया। "जब-जब मोदी डरता है, पुलिस के आगे झुकता है" और "तानाशाही नहीं चलेगी" जैसे गगनभेदी नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने पूरे इलाके को गुंजायमान कर दिया। हाथों में तख्तियां और चेहरों पर सत्ता के प्रति गहरा आक्रोश लिए, इन युवाओं का यह जत्था अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करते हुए सड़क पर उतर आया।
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| "सड़क पर उग्र प्रदर्शन करते युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता और 'पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड' लिखी टी-शर्ट पहने प्रदर्शनकारी नेत्री, पुतला दहन के दौरान उत्पन्न हुआ भारी तनाव।" |
इस उग्र प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बिंदु महिलाओं की सुरक्षा, कथित एप्सटीन फाइल से जुड़े विवादित संदर्भ और देश के युवाओं का अंधकारमय होता भविष्य रहा। 'पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड' (PM IS COMPROMISED) लिखी श्वेत टी-शर्ट पहने युवा कांग्रेस की एक प्रमुख नेत्री ने सत्ता पक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए स्पष्ट किया कि देश का युवा अब मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा। उनका स्पष्ट आरोप था कि जिस सरकार को रोजगार सृजन और महिला सशक्तिकरण पर ध्यान देना चाहिए था, वह अब सवालों से भाग रही है और विपक्ष की आवाज को कुचलने का कुत्सित प्रयास कर रही है। प्रदर्शनकारियों का यह हुजूम अपने संकल्प पर अडिग था कि वे सत्ता के इस कथित अहंकार को चूर-चूर करके ही दम लेंगे।
हालाँकि, यह शांतिपूर्ण और पूर्व-अनुमोदित विरोध प्रदर्शन उस वक्त एक हिंसक और अराजक झंझावात में तब्दील हो गया, जब प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री का पुतला दहन कर रहे थे। नेत्री के कड़े शब्दों के अनुसार, उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) से विधिवत अनुमति प्राप्त कर रखी थी, इसके बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों और विरोधी विचारधारा के समर्थकों ने आकर माहौल को विषाक्त कर दिया। वीडियो के दृश्यों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि विरोधियों ने धधकते हुए पुतले को सड़क किनारे फेंक दिया, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई।
पुतले को फेंके जाने की इस घटना ने आग में घी का काम किया और दोनों गुटों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। एक ओर जहाँ युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए आक्रोशित थे, वहीं दूसरी ओर से 'जय श्री राम' के गगनभेदी उद्घोष के साथ उन्हें दबाने की पुरजोर कोशिश की गई। बीच सड़क पर हुई यह वैचारिक और शारीरिक भिड़ंत इस बात का ज्वलंत प्रमाण है कि राजनीतिक असहिष्णुता अपने चरम पर पहुँच चुकी है। एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में, जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, वहाँ इस तरह सरेआम विपक्ष की आवाज को बलपूर्वक रोकने का यह कृत्य प्रशासन की कार्यशैली और समाज में बढ़ती राजनीतिक कटुता पर एक अत्यंत गंभीर प्रश्नचिह्न अंकित करता है।

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