विधानसभा में गूंजी जयराम महतो की दहाड़: फिसड्डी सीडी रेशियो, अफसरशाही की सुस्ती और सिख दंगा पीड़ितों के न्याय पर सरकार को घेरा
रांची: झारखंड विधानसभा के पटल पर डुमरी से विधायक जयराम कुमार महतो ने राज्य की बदहाल आर्थिक स्थिति, प्रशासनिक शून्यता और दशकों पुराने अन्यायों पर सरकार को आड़े हाथों लिया। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने ग्रामीण कार्य विभाग की घोर लापरवाही को उजागर किया।
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| "झारखंड विधानसभा के पटल पर पूरी बेबाकी और तथ्यों के साथ राज्य की आर्थिक नीतियों और प्रशासनिक रिक्तियों पर सवाल उठाते डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो।" |
उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल बजट की आधी राशि भी खर्च न कर पाने वाला विभाग अब अनुपूरक बजट के रूप में लगभग सत्रह सौ सत्रह करोड़ रुपये की मांग कर रहा है, जो एक बड़ी विडंबना है। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र डुमरी का एक ज्वलंत उदाहरण देते हुए कहा कि एक संकीर्ण पुलिया के निर्माण की अनुशंसा एक वर्ष पूर्व करने के बावजूद वह आज तक लंबित है, जिसके परिणामस्वरूप वहां आए दिन प्राणघातक दुर्घटनाएं हो रही हैं। विधायक ने सवाल उठाया कि जब विभाग आवंटित राशि का सदुपयोग करने में ही अक्षम है, तो वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में नई राशि के आवंटन का क्या औचित्य रह जाता है।
आर्थिक मोर्चे पर राज्य की विफलता को रेखांकित करते हुए विधायक महतो ने 'क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो' (सीडी रेशियो) का मुद्दा पूरी गंभीरता के साथ उठाया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जहां राष्ट्रीय औसत अस्सी प्रतिशत है, वहीं झारखंड का सीडी रेशियो महज बावन प्रतिशत के करीब सिमटा हुआ है। इसका सीधा अर्थ यह है कि राज्य की लगभग अड़तालीस फीसदी पूंजी का पलायन अन्य राज्यों में हो रहा है, जिसका लाभ बाहरी लोग उठा रहे हैं। इस बैंकिंग उदासीनता के कारण राज्य के स्थानीय उद्यमियों, किसानों और एमएसएमई सेक्टर को ऋण उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और रोजगार सृजन की प्रक्रिया पूरी तरह से बाधित हो गई है। उन्होंने माननीय वित्त मंत्री से इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए सीडी रेशियो को साठ से सत्तर प्रतिशत तक ले जाने का कड़ा आग्रह किया, अन्यथा प्रचुर खनिज संपदा के बावजूद झारखंड आर्थिक रूप से पिछड़ा ही रह जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी के गिरते प्रवाह पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।
प्रशासनिक पंगुता और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर भी उनका रुख बेहद आक्रामक और संवेदनशील रहा। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि नई सरकार के गठन के बाद से ही डुमरी अनुमंडल में एसडीओ और बीडीओ जैसे महत्वपूर्ण पद रिक्त पड़े हैं, तथा प्रखंड स्तर पर भी तेरह पद खाली हैं, जिन्हें अविलंब भरा जाना चाहिए ताकि जनता के कार्य बाधित न हों। सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर उन्होंने मैया सम्मान योजना की तर्ज पर राज्य के सभी दिव्यांगों, विधवाओं और वृद्धजनों को पच्चीस सौ रुपये की नियमित पेंशन देने की जोरदार वकालत की। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने वर्ष उन्नीस सौ चौरासी के सिख विरोधी दंगों का एक मर्मस्पर्शी प्रसंग छेड़ा। उन्होंने बताया कि दिल्ली और कानपुर के बाद तत्कालीन धनबाद का चास क्षेत्र इस हिंसा का एक बड़ा केंद्र था, जहां भारी आगजनी और लूटपाट के बीच बहत्तर से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इकतालीस वर्ष बीत जाने के बाद भी उन पीड़ितों को समुचित न्याय नहीं मिल सका है। विधायक ने सरकार से पुरजोर मांग की कि उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित 'वन-मैन कमीशन' को पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए जाएं, ताकि पीड़ितों को त्वरित मुआवजा, नौकरियां, पेंशन बहाली और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग प्राप्त हो सके।

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