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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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Katkamsandi: छड़वा मैदान का ऐतिहासिक मुहर्रम मेला शांतिपूर्ण संपन्न; 22 गांवों के भव्य जुलूस में उमड़ा लाखों का जनसैलाब, RAF और ड्रोन से हुई निगरानी!

 

🕌 कटकमसांडी: छड़वा मैदान का ऐतिहासिक मुहर्रम मेला शांतिपूर्ण संपन्न; 22 गांवों के भव्य जुलूस के साथ उमड़ा जनसैलाब, हैरतअंगेज करतब रहे आकर्षण का केंद्र

कटकमसांडी (हजारीबाग): सांप्रदायिक सौहार्द, असीम आस्था और पारंपरिक जीवंतता का प्रतीक कटकमसांडी का ऐतिहासिक 'छड़वा मैदान मुहर्रम मेला' शुक्रवार को यौम-ए-आशूरा (दसवीं) के अवसर पर शांतिपूर्ण और गरिमामयी वातावरण में संपन्न हो गया। क्षेत्र में मुहर्रम का पर्व पूरी तरह से शांति, सुरक्षा और आपसी भाईचारे के माहौल में मनाया गया। इस दौरान छड़वा मुहर्रम मेला परिसर में आस-पास के 22 पंचायत क्षेत्रों से शहादत की याद में बनाए गए गगनचुंबी निशान (फरहेरा) और आकर्षक ताजिया का भव्य समागम हुआ।

KATKAMSANDI: A panoramic view of the historic Chadwa Maidan filled with lakhs of devotees and splendid Tajiyas during the Muharram festival. (Photo: News Prahari)

🥁 22 अखाड़ों के मिलान से गूंज उठा छड़वा मैदान; उमड़ी लाखों की भीड़

शुक्रवार दोपहर से ही विभिन्न गली-मोहल्लों और ग्रामीण अंचलों में भ्रमण कराते हुए विभिन्न गांवों के 22 अखाड़ेधारी अपने-अपने पारंपरिक साजो-सामान के साथ मुख्य मेला स्थल की ओर बढ़ने लगे। इनमें मुख्य रूप से:

खुटरा, सुलमी, हेदलाग, बलियंद, गदोखर वन, गदोखर टू, पबरा, लुपूंग, पिचरी, रोमी, डाड़, सारूगाड़ु, नवादा, डुकरा, हरना, कवातु, गोविंदपुर, भुसवा, पकरार एवं मंडई गांव के जुलूस शामिल थे।

इस्लाम धर्मावलंबियों द्वारा गाजे-बाजे और मातमी धुनों के बीच 'या अली, या हुसैन' के गगनभेदी नारों के साथ जुलूस लेकर छड़वा मैदान में प्रवेश किया गया। शाम करीब चार बजे तक पूरा छड़वा मैदान अकीदतमंदों और दर्शकों की भीड़ से खचाखच भर गया। इस अवसर पर विभिन्न अखाड़े से आए खिलाड़ियों और युवाओं ने पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों जैसे लाठी, डंडा, तलवार और पट्टे बाजी का प्रदर्शन करते हुए एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज करतब दिखाए, जो मैदान में उपस्थित लाखों लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बने रहे।

👮 हाईटेक सुरक्षा: RAF, जिला बल और ड्रोन-CCTV से रखी गई चप्पे-चप्पे पर नजर

मेले में सुरक्षा व्यवस्था और विधि-व्यवस्था को सुचारू ढंग से बनाए रखने के लिए हजारीबाग जिला और पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता और कड़े इंतजाम किए गए थे। मेले के हर कोने में जिला बल और सीआरपीएफ (CRPF) के सशस्त्र जवान व अधिकारी मुस्तैद दिखे। इसके साथ ही रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के महिला और पुरुष जवानों की विशेष टुकड़ी पूरे मेला परिसर में लगातार गश्त कर रही थी। असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र की डिजिटल निगरानी की जा रही थी।

🤝 उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक सहित आला प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद

मेले की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए जिले के कई वरीय प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पूरे समय मेला स्थल पर डटे रहे। शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर छड़वा मुहर्रम कमेटी द्वारा उपस्थित अतिथियों और अधिकारियों को पगड़ी व माला पहनाकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले अधिकारियों में मुख्य रूप से:

  • हजारीबाग उपायुक्त (DC) हेमंत सती, प्रशिक्षु आईएएस पूर्वा अग्रवाल, आरक्षी अधीक्षक (SP) अमन कुमार

  • एएसपी अमित कुमार, डीएसपी (हेडक्वार्टर) ज्ञान रंजन, डीएसपी (सीसीआर) अरमानूल हक

  • पुलिस निरीक्षक सपन कुमार महथा, डीटीओ संतोष चौधरी, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) पूजा कुमारी, अंचल अधिकारी (CO) अनिल कुमार गुप्ता तथा पेलावल ओपी प्रभारी बिट्टू रजक शामिल रहे।

🏆 मुहर्रम कमेटी और विशिष्ट जनों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाने में मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष नौशाद खान उर्फ डिस्को, उपाध्यक्ष बाबर अंसारी, सचिव कमालउद्दीन इराकी, अकमल अंसारी, कोषाध्यक्ष शेख इत्तेफाक हुसैन और मीडिया प्रभारी निसार खान सहित सभी सदस्यों की सराहनीय भूमिका रही। इस उत्कृष्ट प्रबंधन के लिए 'अजीम आर्ट पॉइंट फ्लेक्स प्रिंट' के संचालक अजीम अंसारी द्वारा कमेटी के पदाधिकारियों को मोमेंटो (स्मृति चिन्ह) देकर सम्मानित किया गया। वहीं, डाड़ ग्राम के मुखिया मोहम्मद इरशाद के द्वारा भी कमेटी को कप देकर प्रोत्साहित किया गया। मेले में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी और जीवंत मिसाल तब देखने को मिली, जब चार पीढ़ियों से मुहर्रम मना रहे अंतू साव के ताजिया जुलूस ने मैदान में प्रवेश किया, जिसकी सभी ने खूब सराहना की।

मेले में कटकमसांडी सरकारी अस्पताल से आए डॉ. भूषण राणा तथा डॉ. वेद प्रकाश पाठक की मेडिकल टीम ने स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से अपनी महत्वपूर्ण और सराहनीय सेवाएं प्रदान कीं।

👥 राजनीतिक एवं सामाजिक दिग्गजों की रही गरिमामयी उपस्थिति

ऐतिहासिक छड़वा मेले में कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और गणमान्य सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचे, जिन्हें कमेटी द्वारा सम्मानित किया गया। अतिथियों में: कांग्रेस जिला अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री जय प्रकाश भाई पटेल, झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष जय शंकर पाठक, सदर विधानसभा प्रत्याशी मुन्ना सिंह, पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, प्रदेश कोऑर्डिनेटर विनोद कुशवाहा, प्रदेश सचिव रेणू कुशवाहा, समाजसेवी बाबर कुरैशी, नगर निगम के पूर्व प्रत्याशी सरफराज अहमद, तसलीम अंसारी, राजा मोहम्मद, मनीष ठाकुर, अशोक राणा, पन्नू महतो, मनोज मोदी, अजय राधा उपस्थित थे।

इसके साथ ही सेंट्रल मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष टिंकू खान, महासचिव इरफान भाई उर्फ काजू, उपाध्यक्ष परवेज अहमद, वीरेंद्र कुमार सिंह, दिगंबर प्रसाद मेहता, संजर मल्लिक, शमशेर आलम, नरसिंह प्रजापति और अयान रजा भी मुख्य रूप से शामिल हुए।

इस भव्य और ऐतिहासिक समागम में संरक्षक अनवारूल हक, मोख्तार अहमद, अखाड़ेधारियों में मोहम्मद सिराजुद्दीन, कलाम अंसारी, असलम खान, गुलाम शाबिर उर्फ बबलू, इसरैल खान, मोहम्मद रुश्तम, मोहम्मद ताहिर, मोहम्मद इम्तियाज, मोहम्मद खालिक, मोहम्मद समसुद्दीन, मोहम्मद मुस्ताक, खातो मियां, मोहम्मद इस्लाम, मोहम्मद नसीम, खालिद इकबाल, गुलाम हुसैन, मोहम्मद शमीम, मोहम्मद अनवर सहित लाखों की संख्या में महिला, पुरुष, वृद्ध और बच्चे उपस्थित थे।

और पढ़ें: Katkamsandi: मुहर्रम को लेकर थाना परिसर में शांति समिति की बैठक, अखाड़ा लाइसेंसधारियों और जनप्रतिनिधियों को दिए गए जरूरी निर्देश! 

'जनता को जनता की भाषा में मिले न्याय': मातृभाषा में न्यायिक कार्यवाही के लिए भारतीय भाषा अभियान का देशव्यापी शंखनाद

'जनता को जनता की भाषा में मिले न्याय': मातृभाषा में न्यायिक कार्यवाही के लिए भारतीय भाषा अभियान का देशव्यापी शंखनाद

हजारीबाग: देश की न्याय प्रणाली में आम जनमानस की भागीदारी और समझ को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक वृहद और प्रभावशाली पहल आकार ले रही है। वर्ष दो हजार चार में स्थापित 'शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास' द्वारा संचालित 'शिक्षा बचाओ, देश बचाओ' प्रकल्प के अंतर्गत 'भारतीय भाषा अभियान' ने न्यायपालिका में भाषाई पारदर्शिता की एक अत्यंत प्रासंगिक मांग उठाई है। इस अभियान का मूल स्वर यही है कि देश के प्रत्येक नागरिक को न्याय उसी की भाषा में सुलभ होना चाहिए। वर्तमान न्यायिक व्यवस्था में अधिकांश कार्यवाहियां ऐसी भाषा में होती हैं जो आम वादी या प्रतिवादी की समझ से परे होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप न्याय की वास्तविक अनुभूति जनसामान्य तक नहीं पहुंच पाती।

"मातृभाषा में न्यायिक कार्यवाही के लिए भारतीय भाषा अभियान का देशव्यापी शंखनाद"


​न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलता और भाषाई अवरोध को दूर करने के लिए इस अभियान के तहत यह मांग पुरजोर तरीके से रखी जा रही है कि अदालतों में होने वाली बहस, संवाद और अंतिम निर्णय मातृभाषा अथवा स्थानीय भाषा में ही होने चाहिए। जब तक न्याय मांगने वाले पक्षकार को उसके मामले में हो रही जिरह और सुनाए गए फैसले का अर्थ अपनी मातृभाषा में समझ नहीं आएगा, तब तक न्याय प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता और जन-संतुष्टि की कल्पना बेमानी है। अभियान का स्पष्ट मानना है कि न्यायालयों के फैसले और वकीलों की बहस ऐसी सहज भाषा में हो जिसे मुवक्किल स्वयं सुन, पढ़ और समझ सके। यदि कोई नागरिक इस मौलिक अधिकार से वंचित रहता है, तो उसे न्याय के लिए पुनः गुहार लगाने का अवसर मिलना चाहिए।

​इस दिशा में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने निर्णयों का भारतीय संविधान की बाईस भाषाओं में अनुवाद करवाने की पहल का स्वागत करते हुए, अभियान अब इसे निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालयों तक अनिवार्य रूप से लागू करवाने के लिए प्रयासरत है। विशेषकर झारखंड प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में उच्च न्यायालयों और जिला एवं अनुमंडल न्यायालयों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे अपनी कार्यवाहियों में स्थानीय और मातृभाषा के उपयोग को प्राथमिकता दें। इस पुनीत उद्देश्य की प्राप्ति और जन जागरूकता के लिए वर्तमान में पूरे देश में इक्कीस से अट्ठाईस तारीख तक 'अंतरराष्ट्रीय हिंदी पखवाड़ा' मनाया जा रहा है।

​इस पखवाड़े के समापन पर, यानी अट्ठाईस तारीख को, अभियान से जुड़े प्रतिनिधि देश के शीर्ष न्यायिक और संवैधानिक पदों पर आसीन विभूतियों को अपना मांग पत्र सौंपेंगे। यह ज्ञापन माननीय सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों, भारत सरकार के विधि मंत्री, राज्य के विधि मंत्री, मुख्यमंत्री और महामहिम राज्यपाल को प्रेषित किया जाएगा। भारतीय भाषा अभियान के प्रदेश सह-संयोजक महंत विद्यानंद दास ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक न्यायपालिका के गलियारों में आम आदमी की भाषा को सम्मानजनक स्थान नहीं मिल जाता, तब तक यह भाषाई अस्मिता और न्याय का संघर्ष अनवरत जारी रहेगा।

विदाई की बेला में स्मृतियों का सैलाब, वाणिज्य संकाय के छात्रों को नम आंखों से दी गई भावपूर्ण विदाई

विदाई की बेला में स्मृतियों का सैलाब, वाणिज्य संकाय के छात्रों को नम आंखों से दी गई भावपूर्ण विदाई

हजारीबाग। स्थानीय जीएम महाविद्यालय के प्रांगण में इंटरमीडिएट वाणिज्य संकाय (सत्र 2024-26) के निवर्तमान छात्रों के सम्मान में आयोजित विदाई समारोह स्मृतियों, संकल्पों और भावनाओं का साक्षी बना। 'फेयरवेल' की इस बेला में हर्ष और विषाद के मिश्रित भावों के बीच कनिष्ठ छात्रों ने अपने अग्रजों को तिलक लगाकर और मंगलकामनाओं के साथ विदा किया। समारोह का विधिवत शुभारंभ माँ शारदे की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ, जिसके पश्चात प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

​समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महाविद्यालय के सचिव विनय कुमार ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि यह विदाई अंत नहीं, बल्कि जीवन के नए अध्याय का आरंभ है। उन्होंने छात्रों को आगामी वार्षिक परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु एकाग्रता और कठोर परिश्रम को सफलता का एकमात्र 'गुरुमंत्र' बताया। वहीं, प्राचार्य शम्भु कुमार ने वर्तमान परिदृश्य में वाणिज्य शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के इस दौर में वाणिज्य के विद्यार्थियों के लिए करियर की असीम संभावनाएं और अनंत आकाश खुले हैं।

​कार्यक्रम के दौरान वातावरण उस समय अत्यंत भावुक हो गया जब महाविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक  रंजन कुमार ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थी केवल संस्था की चहारदीवारी से विदा ले रहे हैं, शिक्षकों के हृदय से नहीं; गुरु और शिष्य का यह आत्मिक संबंध सदैव जीवंत रहेगा। छात्रा पायल कुमारी और मुस्कान कुमारी ने अपने सधे हुए मंच संचालन से कार्यक्रम को गति प्रदान की। समारोह के अंतिम क्षणों में छात्रा निशु कुमारी द्वारा प्रस्तुत विदाई गीत की मर्मस्पर्शी स्वरलहरियों ने वहां उपस्थित सभी जनों की आंखों को सजल कर दिया और पूरा माहौल उदासी की चादर में लिपट गया। कार्यक्रम का समापन 


उमेश ठाकुर के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। इस अवसर पर शिक्षक आशीष पांडे, मनोज राणा, रेयाज अहमद, कुंदन शशि शर्मा, कृष्ण कुमार, नीलिमा कुजूर, प्रिया कुमारी, पूनम कुमारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

भक्ति और शंखनाद के बीच मां शारदे को दी गई विदाई, हजारीबाग प्रेस क्लब में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ सरस्वती पूजनोत्सव


भक्ति और शंखनाद के बीच मां शारदे को दी गई विदाई, हजारीबाग प्रेस क्लब में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ सरस्वती पूजनोत्सव

हजारीबाग: विद्या, बुद्धि और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना का पर्व हजारीबाग प्रेस क्लब में इस वर्ष अत्यंत भव्य और गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। शुक्रवार को प्रेस क्लब भवन परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और पूर्ण विधि-विधान के साथ स्थापित की गई मां शारदे की प्रतिमा का शनिवार को श्रद्धापूर्ण विसर्जन किया गया। दो दिवसीय इस अनुष्ठान में जिले के प्रशासनिक अधिकारियों, राजनीतिक दिग्गजों और प्रबुद्ध जनों का तांता लगा रहा, जिससे पूरा परिसर भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी में सराबोर नजर आया।

पूजनोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में शनिवार को विशेष हवन और महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह सहित जिले के कई गणमान्य अतिथियों ने आहुति देकर जिले की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इस अवसर पर उपायुक्त ने प्रेस क्लब के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक मूल्यों और शिक्षा के प्रति चेतना जागृत करने का कार्य करते हैं। पूजा के दौरान उपस्थित अतिथियों और सदस्यों ने सामूहिक रूप से मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त किया, जिसके पश्चात विशाल भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने खिचड़ी महाप्रसाद ग्रहण किया।

समारोह का सबसे भावुक और उत्साहपूर्ण क्षण मां सरस्वती की विसर्जन शोभायात्रा रही। अबीर-गुलाल की उड़ती गुलाल और शंखनाद की मंगल ध्वनियों के बीच प्रेस क्लब के सदस्य मां की प्रतिमा को हाथों में उठाकर 'अगले बरस तू जल्दी आना' के जयकारों के साथ झील घाट पहुंचे। ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते सदस्यों और विदाई की घड़ी में नम आंखों के बीच मां शारदे की प्रतिमा का विसर्जन पूरी मर्यादा और अनुशासन के साथ किया गया। प्रेस क्लब के अध्यक्ष और सचिव ने इस सफल आयोजन को सामूहिक एकता और सांस्कृतिक निष्ठा का प्रतीक बताते हुए सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

हजारीबाग में सरस्वती पूजा पर प्रशासन का 'एक्शन प्लान' तैयार: विसर्जन 24 को, अश्लील गानों और जबरन चंदे पर पूर्ण प्रतिबंध

हजारीबाग में सरस्वती पूजा पर प्रशासन का 'एक्शन प्लान' तैयार,


विसर्जन 24 को, अश्लील गानों और जबरन चंदे पर पूर्ण प्रतिबंध

हजारीबाग: विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना के महापर्व को शांति, सौहार्द और अनुशासन के साथ संपन्न कराने के लिए हजारीबाग अनुमंडल प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इसी उद्देश्य से बुधवार को अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडेय की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आहूत की गई, जिसमें विधि-व्यवस्था संधारण को लेकर कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। प्रशासन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पूजा के दौरान हुड़दंग, अश्लीलता या जबरन चंदा वसूली जैसी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में उपस्थित सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों, अंचल अधिकारियों और थाना प्रभारियों को संबोधित करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पूजा पंडालों का निर्माण किसी भी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र या कोर्ट परिसर के समीप वर्जित रहेगा ताकि आवश्यक सेवाओं में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। ध्वनि प्रदूषण और सामाजिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने रात्रि 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही, डीजे या लाउडस्पीकर पर किसी भी प्रकार के भड़काऊ, आपत्तिजनक या अश्लील गीतों के प्रसारण को प्रतिबंधित करते हुए आयोजकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे भक्तिमय वातावरण को दूषित न होने दें।

प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन के लिए 24 जनवरी की तारीख मुकर्रर करते हुए सभी पूजा समितियों को इसी दिन प्रतिमा विसर्जन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। विसर्जन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों को लेकर नगर निगम को विशेष दायित्व सौंपे गए हैं। निगम को निर्देशित किया गया है कि वे तालाबों और जलाशयों की साफ-सफाई के साथ-साथ वहां किसी भी प्रकार के गहरे गड्ढे या खुदाई कार्य पर रोक लगाएं। किसी भी संभावित दुर्घटना या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विसर्जन स्थलों पर नौका और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया गया है।

बिजली विभाग को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्हें विसर्जन मार्गों और घाटों के आसपास झूलते जर्जर तारों को दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की विद्युत दुर्घटना से बचा जा सके। बैठक का सबसे अहम पहलू चंदा वसूली को लेकर रहा, जिसमें प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि आम नागरिकों से चंदा के नाम पर किसी भी प्रकार की जोर-जबरदस्ती या दबाव बनाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंत में प्रशासन ने जिले के सभी प्रबुद्ध नागरिकों और पूजा समितियों से अपील की है कि वे आस्था के इस पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं और प्रशासनिक निर्देशों का अक्षरशः पालन करें।


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