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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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पश्चिम एशिया संकट: विदेश मंत्रालय ने स्थापित किया विशेष कंट्रोल रूम, जारी किए हेल्पलाइन नंबर्स

पश्चिम एशिया संकट: विदेश मंत्रालय ने स्थापित किया विशेष कंट्रोल रूम, जारी किए हेल्पलाइन नंबर्स
"भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के लिए जारी विशेष कंट्रोल रूम और दूतावासों के आपातकालीन संपर्क नंबर।"

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (West Asia) और खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में चल रहे मौजूदा हालातों के मद्देनजर, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs - MEA) ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए एक 'विशेष कंट्रोल रूम' स्थापित किया है।

बुधवार, 4 मार्च 2026 को जारी एक आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह कंट्रोल रूम सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक कार्यरत रहेगा। किसी भी आपात स्थिति या जानकारी के लिए भारतीय नागरिक इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।

विदेश मंत्रालय (MEA) के विशेष कंट्रोल रूम के नंबर

नागरिक सीधे दिल्ली स्थित मुख्यालय में इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

टोल फ्री नंबर (Toll Free): 1800 11 8797

अन्य फोन नंबर: * +91 11 2301 2113

+91 11 2301 4104

+91 11 2301 7905

खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों में भारतीय दूतावासों के आपातकालीन नंबर

इसके अलावा, मंत्रालय ने क्षेत्र के विभिन्न देशों में स्थित भारतीय दूतावासों (Indian Embassies) के आपातकालीन संपर्क नंबर भी जारी किए हैं, जो इस प्रकार हैं:

बहरीन (Bahrain): +973 39418071

ईरान (Iran): +98 9128109115 / +98 9128109102 / +98 9128109109 / +98 9932179359

इराक (Iraq): +964 771 651 1185 / +964 770444 4899

इजराइल (Israel): +972 54 7520711 / +972 54 2428378

जॉर्डन (Jordan): +962 770 422 276

कुवैत (Kuwait): +965 65501946

लेबनान (Lebanon): +961 76860128

ओमान (Oman): +968 98282270 (WhatsApp) / 80071234 (Toll free)

कतर (Qatar): +974 55647502

रामल्लाह, फिलिस्तीन (Ramallah, Palestine): +970 592916418

सऊदी अरब - रियाद (Saudi Arabia - Riyadh): +966 11 4884697 / 800 247 1234 (Toll free)

सऊदी अरब - जेद्दा (Saudi Arabia - Jeddah): +966 126648660 / +966 12 2614093

संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates): +971 543090571 (WhatsApp) / 800 46342 (Toll free)

विदेश मंत्रालय ने अपील की है कि इन क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय नागरिक सतर्क रहें और किसी भी आवश्यकता पड़ने पर तुरंत अपने नजदीकी दूतावास या कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

'जनता को जनता की भाषा में मिले न्याय': मातृभाषा में न्यायिक कार्यवाही के लिए भारतीय भाषा अभियान का देशव्यापी शंखनाद

'जनता को जनता की भाषा में मिले न्याय': मातृभाषा में न्यायिक कार्यवाही के लिए भारतीय भाषा अभियान का देशव्यापी शंखनाद

हजारीबाग: देश की न्याय प्रणाली में आम जनमानस की भागीदारी और समझ को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक वृहद और प्रभावशाली पहल आकार ले रही है। वर्ष दो हजार चार में स्थापित 'शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास' द्वारा संचालित 'शिक्षा बचाओ, देश बचाओ' प्रकल्प के अंतर्गत 'भारतीय भाषा अभियान' ने न्यायपालिका में भाषाई पारदर्शिता की एक अत्यंत प्रासंगिक मांग उठाई है। इस अभियान का मूल स्वर यही है कि देश के प्रत्येक नागरिक को न्याय उसी की भाषा में सुलभ होना चाहिए। वर्तमान न्यायिक व्यवस्था में अधिकांश कार्यवाहियां ऐसी भाषा में होती हैं जो आम वादी या प्रतिवादी की समझ से परे होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप न्याय की वास्तविक अनुभूति जनसामान्य तक नहीं पहुंच पाती।

"मातृभाषा में न्यायिक कार्यवाही के लिए भारतीय भाषा अभियान का देशव्यापी शंखनाद"


​न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलता और भाषाई अवरोध को दूर करने के लिए इस अभियान के तहत यह मांग पुरजोर तरीके से रखी जा रही है कि अदालतों में होने वाली बहस, संवाद और अंतिम निर्णय मातृभाषा अथवा स्थानीय भाषा में ही होने चाहिए। जब तक न्याय मांगने वाले पक्षकार को उसके मामले में हो रही जिरह और सुनाए गए फैसले का अर्थ अपनी मातृभाषा में समझ नहीं आएगा, तब तक न्याय प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता और जन-संतुष्टि की कल्पना बेमानी है। अभियान का स्पष्ट मानना है कि न्यायालयों के फैसले और वकीलों की बहस ऐसी सहज भाषा में हो जिसे मुवक्किल स्वयं सुन, पढ़ और समझ सके। यदि कोई नागरिक इस मौलिक अधिकार से वंचित रहता है, तो उसे न्याय के लिए पुनः गुहार लगाने का अवसर मिलना चाहिए।

​इस दिशा में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने निर्णयों का भारतीय संविधान की बाईस भाषाओं में अनुवाद करवाने की पहल का स्वागत करते हुए, अभियान अब इसे निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालयों तक अनिवार्य रूप से लागू करवाने के लिए प्रयासरत है। विशेषकर झारखंड प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में उच्च न्यायालयों और जिला एवं अनुमंडल न्यायालयों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे अपनी कार्यवाहियों में स्थानीय और मातृभाषा के उपयोग को प्राथमिकता दें। इस पुनीत उद्देश्य की प्राप्ति और जन जागरूकता के लिए वर्तमान में पूरे देश में इक्कीस से अट्ठाईस तारीख तक 'अंतरराष्ट्रीय हिंदी पखवाड़ा' मनाया जा रहा है।

​इस पखवाड़े के समापन पर, यानी अट्ठाईस तारीख को, अभियान से जुड़े प्रतिनिधि देश के शीर्ष न्यायिक और संवैधानिक पदों पर आसीन विभूतियों को अपना मांग पत्र सौंपेंगे। यह ज्ञापन माननीय सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों, भारत सरकार के विधि मंत्री, राज्य के विधि मंत्री, मुख्यमंत्री और महामहिम राज्यपाल को प्रेषित किया जाएगा। भारतीय भाषा अभियान के प्रदेश सह-संयोजक महंत विद्यानंद दास ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक न्यायपालिका के गलियारों में आम आदमी की भाषा को सम्मानजनक स्थान नहीं मिल जाता, तब तक यह भाषाई अस्मिता और न्याय का संघर्ष अनवरत जारी रहेगा।

हजारीबाग में सरस्वती पूजा पर प्रशासन का 'एक्शन प्लान' तैयार: विसर्जन 24 को, अश्लील गानों और जबरन चंदे पर पूर्ण प्रतिबंध

हजारीबाग में सरस्वती पूजा पर प्रशासन का 'एक्शन प्लान' तैयार,


विसर्जन 24 को, अश्लील गानों और जबरन चंदे पर पूर्ण प्रतिबंध

हजारीबाग: विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना के महापर्व को शांति, सौहार्द और अनुशासन के साथ संपन्न कराने के लिए हजारीबाग अनुमंडल प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इसी उद्देश्य से बुधवार को अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडेय की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आहूत की गई, जिसमें विधि-व्यवस्था संधारण को लेकर कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। प्रशासन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पूजा के दौरान हुड़दंग, अश्लीलता या जबरन चंदा वसूली जैसी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में उपस्थित सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों, अंचल अधिकारियों और थाना प्रभारियों को संबोधित करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पूजा पंडालों का निर्माण किसी भी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र या कोर्ट परिसर के समीप वर्जित रहेगा ताकि आवश्यक सेवाओं में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। ध्वनि प्रदूषण और सामाजिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने रात्रि 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही, डीजे या लाउडस्पीकर पर किसी भी प्रकार के भड़काऊ, आपत्तिजनक या अश्लील गीतों के प्रसारण को प्रतिबंधित करते हुए आयोजकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे भक्तिमय वातावरण को दूषित न होने दें।

प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन के लिए 24 जनवरी की तारीख मुकर्रर करते हुए सभी पूजा समितियों को इसी दिन प्रतिमा विसर्जन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। विसर्जन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों को लेकर नगर निगम को विशेष दायित्व सौंपे गए हैं। निगम को निर्देशित किया गया है कि वे तालाबों और जलाशयों की साफ-सफाई के साथ-साथ वहां किसी भी प्रकार के गहरे गड्ढे या खुदाई कार्य पर रोक लगाएं। किसी भी संभावित दुर्घटना या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विसर्जन स्थलों पर नौका और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया गया है।

बिजली विभाग को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्हें विसर्जन मार्गों और घाटों के आसपास झूलते जर्जर तारों को दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की विद्युत दुर्घटना से बचा जा सके। बैठक का सबसे अहम पहलू चंदा वसूली को लेकर रहा, जिसमें प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि आम नागरिकों से चंदा के नाम पर किसी भी प्रकार की जोर-जबरदस्ती या दबाव बनाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंत में प्रशासन ने जिले के सभी प्रबुद्ध नागरिकों और पूजा समितियों से अपील की है कि वे आस्था के इस पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं और प्रशासनिक निर्देशों का अक्षरशः पालन करें।


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