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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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भारत-चिली आर्थिक संबंधों में नया अध्याय: पीयूष गोयल और चिली के विदेश मंत्री के बीच द्विपक्षीय व्यापार पर गहन चर्चा

भारत-चिली आर्थिक संबंधों में नया अध्याय: पीयूष गोयल और चिली के विदेश मंत्री के बीच द्विपक्षीय व्यापार पर गहन चर्चा

व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को विस्तार देने पर बनी सहमति; दोनों देशों ने बिजनेस-टू-बिजनेस जुड़ाव बढ़ाने का दोहराया संकल्प।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक न्यूज़ प्रहरी।


नई दिल्ली:भारत और चिली ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने चिली के विदेश मंत्री फ्रांसिस्को पेरेज़ मैकेना के साथ एक उच्च स्तरीय और उत्पादक बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 

आर्थिक सहयोग का विस्तार


चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और चिली के बीच मौजूदा व्यापारिक संबंधों की समीक्षा की और भविष्य में विकास की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। पीयूष गोयल ने निवेश के नए अवसरों और आर्थिक सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिल सके।

बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) जुड़ाव पर जोर


बैठक का एक प्रमुख बिंदु बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) जुड़ाव को बढ़ावा देना रहा। दोनों पक्षों ने इस बात पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि दोनों देशों के निजी क्षेत्रों और व्यापारिक समुदायों के बीच सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे न केवल व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, बल्कि नवाचार और नए उपक्रमों को भी बढ़ावा मिलेगा।

महत्वपूर्ण निष्कर्ष


भारत और चिली के बीच यह संवाद वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। अधिकारियों के अनुसार, इस वार्ता से आने वाले समय में द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिल सकती है। अंत में, दोनों मंत्रियों ने भविष्य में भी निरंतर संवाद और सहयोग बनाए रखने का संकल्प लिया।

वैश्विक तेल संकट: विकसित देशों ने खोले 'रणनीतिक तेल भंडार' के दरवाजे, क्या कम होंगी कीमतें?

वैश्विक तेल संकट: विकसित देशों ने खोले 'रणनीतिक तेल भंडार' के दरवाजे, क्या कम होंगी कीमतें?
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वाशिंगटन: दुनिया भर में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति की कमी को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा कदम उठाया गया है। विकसित देशों ने बाजार में स्थिरता लाने के लिए अपने आपातकालीन रणनीतिक तेल भंडार (SPR) को खोलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत करीब 32 देशों ने मिलकर बाजार में 400 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई करने पर सहमति जताई है, ताकि आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाई जा सके।

क्या होता है रणनीतिक तेल भंडार (SPR)?

यह कच्चे तेल का एक विशाल भंडार होता है, जिसे सरकारें किसी युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक आपूर्ति बाधित होने जैसी आपातकालीन स्थितियों के लिए सुरक्षित रखती हैं। अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है, जिसे अमेरिकी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) कहा जाता है। इसकी स्थापना 1975 में तत्कालीन राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड द्वारा की गई थी। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के नियमों के अनुसार, सदस्य देशों को कम से कम 90 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर तेल रिजर्व रखना अनिवार्य है।

जापान की ऐतिहासिक पहल और वैश्विक भागीदारी

इस बार जापान ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी तेल रिलीज प्रक्रिया शुरू की है। जापान सरकार ने शुरुआती चरण में 15 दिनों की खपत के बराबर निजी क्षेत्र का तेल भंडार जारी करने का आदेश दिया है। जापान के पास कुल 230 दिनों का भंडार है, जो दुनिया में सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा, अमेरिका पहले ही 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। जर्मनी और फ्रांस ने भी इस सामूहिक प्रयास में अपना सहयोग देने की पुष्टि की है।

भारत की स्थिति: घरेलू सुरक्षा पहली प्राथमिकता

अगर भारत की बात करें, तो मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत का शुद्ध रणनीतिक भंडार लगभग 10 दिनों का है (लगभग 39-40 मिलियन बैरल)। हालांकि, यदि तेल कंपनियों और पाइपलाइनों में मौजूद स्टॉक को जोड़ दिया जाए, तो यह क्षमता 74 दिनों तक पहुंच जाती है। वर्तमान वैश्विक संकट के बावजूद, भारत ने अपने रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने से मना कर दिया है ताकि देश की आंतरिक ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू जरूरतों को प्रभावित न होने दिया जाए।

तेल रिलीज से आम आदमी को क्या फायदा?

जब बाजार में तेल की कमी होती है, तो मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ जाती हैं। अतिरिक्त तेल की आपूर्ति से कीमतों में स्थिरता आती है। इसका सीधा लाभ परिवहन, बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों को मिलता है, जिससे महंगाई दर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इतिहास गवाह है कि 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 के कैटरीना तूफान और 2022 के यूक्रेन-रूस जंग के दौरान भी इसी तरह भंडार खोलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभाला गया था।

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