वैश्विक तेल संकट: विकसित देशों ने खोले 'रणनीतिक तेल भंडार' के दरवाजे, क्या कम होंगी कीमतें?
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वाशिंगटन: दुनिया भर में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति की कमी को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा कदम उठाया गया है। विकसित देशों ने बाजार में स्थिरता लाने के लिए अपने आपातकालीन रणनीतिक तेल भंडार (SPR) को खोलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत करीब 32 देशों ने मिलकर बाजार में 400 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई करने पर सहमति जताई है, ताकि आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाई जा सके।
क्या होता है रणनीतिक तेल भंडार (SPR)?
यह कच्चे तेल का एक विशाल भंडार होता है, जिसे सरकारें किसी युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक आपूर्ति बाधित होने जैसी आपातकालीन स्थितियों के लिए सुरक्षित रखती हैं। अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है, जिसे अमेरिकी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) कहा जाता है। इसकी स्थापना 1975 में तत्कालीन राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड द्वारा की गई थी। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के नियमों के अनुसार, सदस्य देशों को कम से कम 90 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर तेल रिजर्व रखना अनिवार्य है।
जापान की ऐतिहासिक पहल और वैश्विक भागीदारी
इस बार जापान ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी तेल रिलीज प्रक्रिया शुरू की है। जापान सरकार ने शुरुआती चरण में 15 दिनों की खपत के बराबर निजी क्षेत्र का तेल भंडार जारी करने का आदेश दिया है। जापान के पास कुल 230 दिनों का भंडार है, जो दुनिया में सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा, अमेरिका पहले ही 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। जर्मनी और फ्रांस ने भी इस सामूहिक प्रयास में अपना सहयोग देने की पुष्टि की है।
भारत की स्थिति: घरेलू सुरक्षा पहली प्राथमिकता
अगर भारत की बात करें, तो मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत का शुद्ध रणनीतिक भंडार लगभग 10 दिनों का है (लगभग 39-40 मिलियन बैरल)। हालांकि, यदि तेल कंपनियों और पाइपलाइनों में मौजूद स्टॉक को जोड़ दिया जाए, तो यह क्षमता 74 दिनों तक पहुंच जाती है। वर्तमान वैश्विक संकट के बावजूद, भारत ने अपने रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने से मना कर दिया है ताकि देश की आंतरिक ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू जरूरतों को प्रभावित न होने दिया जाए।
तेल रिलीज से आम आदमी को क्या फायदा?
जब बाजार में तेल की कमी होती है, तो मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ जाती हैं। अतिरिक्त तेल की आपूर्ति से कीमतों में स्थिरता आती है। इसका सीधा लाभ परिवहन, बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों को मिलता है, जिससे महंगाई दर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इतिहास गवाह है कि 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 के कैटरीना तूफान और 2022 के यूक्रेन-रूस जंग के दौरान भी इसी तरह भंडार खोलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभाला गया था।

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