नियति का क्रूर अट्टहास-इकलौते 'कुलदीपक' के बाद अर्धांगिनी का भी महाप्रयाण, 'हादसे' की आड़ में 'हत्या' के आरोपों से दहला टटगांवा, खोखले वादों पर भारी पड़ा मुखिया का मरहम
किंतु, आंसुओं के इस सैलाब के बीच एक गहरा आक्रोश और संदेह भी फन उठाए खड़ा है। घटना के 72 घंटे बीत जाने के उपरांत भी पुलिसिया कार्रवाई की कछुआ चाल और आरोपी की गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार का धैर्य अब जवाब दे गया है। परिजनों ने इस हृदयविदारक घटना को महज एक संयोगवश हुआ 'सड़क हादसा' मानने से साफ इनकार करते हुए इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र और नृशंस 'हत्या' करार दिया है। विपत्ति के इस पहाड़ के नीचे दबे परिवार को जहाँ एक ओर स्थानीय मुखिया अनिल कुमार देव ने 50,000 रुपये की तात्कालिक सहायता राशि देकर और न्याय की लड़ाई में अंतिम सांस तक सारथी बनने का वचन देकर मानवता की मिसाल पेश की, वहीं दूसरी ओर रसूखदार जनप्रतिनिधियों के रवैये ने उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का कार्य किया है।
परिजनों का आरोप है कि क्षेत्र की सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी, विधायक अमित यादव और सदर विधायक प्रदीप प्रसाद के द्वारों से उन्हें केवल कोरे आश्वासन और सांत्वना की पुड़िया ही नसीब हुई। सांसद द्वारा 24 घंटे के भीतर आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने का दम भरा गया था, जो अब तक एक जुमला मात्र साबित हुआ है। जनप्रतिनिधियों और मीडिया के बार-बार घर आकर रस्मी पूछताछ करने से परिवार की मानसिक प्रताड़ना और बढ़ गई है। शोकाकुल परिवार ने प्रशासन की कार्यशैली पर गहरा अविश्वास जताते हुए मांग की है कि इस संदिग्ध प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच हेतु एसआईटी (SIT) का गठन किया जाए। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने अपनी कुंभकरणी नींद नहीं तोड़ी और दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर कठोरतम दंड नहीं दिया, तो यह दबा हुआ आक्रोश एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।


