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Editor: Naresh Prasad Soni
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नियति का क्रूर अट्टहास-इकलौते 'कुलदीपक' के बाद अर्धांगिनी का भी महाप्रयाण, 'हादसे' की आड़ में 'हत्या' के आरोपों से दहला टटगांवा, खोखले वादों पर भारी पड़ा मुखिया का मरहम


नियति का क्रूर अट्टहास-इकलौते 'कुलदीपक' के बाद अर्धांगिनी का भी महाप्रयाण, 'हादसे' की आड़ में 'हत्या' के आरोपों से दहला टटगांवा, खोखले वादों पर भारी पड़ा मुखिया का मरहम

हजारीबाग/दारू: हजारीबाग जिले के दारू प्रखंड अंतर्गत हरली की धरती एक ऐसे लोमहर्षक घटनाक्रम की साक्षी बनी है, जिसने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है, अपितु पूरे क्षेत्र को शोक के महासागर में डुबो दिया है। टटगांवा निवासी रामचंद्र महतो के आंगन पर नियति ने ऐसा वज्रपात किया कि वंशबेल ही उजड़ गई। घर के इकलौते चिराग और पांच बहनों के लाडले भाई, 30 वर्षीय अरुण कुमार के आकस्मिक निधन की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि रिम्स में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही उनकी धर्मपत्नी ज्योति कुमारी ने भी दम तोड़ दिया। इस दोहरी त्रासदी ने एक भरे-पूरे परिवार को श्मशान की राख में तब्दील कर दिया है। विडंबना देखिए कि महज छह माह पूर्व ही जिस युगल ने अग्नि को साक्षी मानकर सात जन्मों का साथ निभाने का वचन लिया था, नियति ने उन्हें मृत्यु में भी जुदा नहीं होने दिया। सुनहरे भविष्य की अभिलाषा लिए परीक्षा केंद्र की ओर अग्रसर यह जोड़ा जब काल बनकर आए एक अनियंत्रित ट्रेकर का ग्रास बना, तो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह सफर उनकी अंतिम यात्रा बन जाएगा। अरुण के प्राण पखेरू तो घटना के दिन ही उड़ गए थे, और अब अर्धांगिनी के महाप्रयाण ने वृद्ध माता-पिता के जीने का अंतिम सहारा भी छीन लिया है। टटगांवा की गलियां, जहां कुछ माह पूर्व शहनाइयों की गूंज थी, आज वहां पसरा मतमी सन्नाटा और परिजनों का करुण क्रंदन पत्थर दिल इंसान को भी द्रवित कर देने के लिए पर्याप्त है।

किंतु, आंसुओं के इस सैलाब के बीच एक गहरा आक्रोश और संदेह भी फन उठाए खड़ा है। घटना के 72 घंटे बीत जाने के उपरांत भी पुलिसिया कार्रवाई की कछुआ चाल और आरोपी की गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार का धैर्य अब जवाब दे गया है। परिजनों ने इस हृदयविदारक घटना को महज एक संयोगवश हुआ 'सड़क हादसा' मानने से साफ इनकार करते हुए इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र और नृशंस 'हत्या' करार दिया है। विपत्ति के इस पहाड़ के नीचे दबे परिवार को जहाँ एक ओर स्थानीय मुखिया अनिल कुमार देव ने 50,000 रुपये की तात्कालिक सहायता राशि देकर और न्याय की लड़ाई में अंतिम सांस तक सारथी बनने का वचन देकर मानवता की मिसाल पेश की, वहीं दूसरी ओर रसूखदार जनप्रतिनिधियों के रवैये ने उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का कार्य किया है।

परिजनों का आरोप है कि क्षेत्र की सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी, विधायक अमित यादव और सदर विधायक प्रदीप प्रसाद के द्वारों से उन्हें केवल कोरे आश्वासन और सांत्वना की पुड़िया ही नसीब हुई। सांसद द्वारा 24 घंटे के भीतर आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने का दम भरा गया था, जो अब तक एक जुमला मात्र साबित हुआ है। जनप्रतिनिधियों और मीडिया के बार-बार घर आकर रस्मी पूछताछ करने से परिवार की मानसिक प्रताड़ना और बढ़ गई है। शोकाकुल परिवार ने प्रशासन की कार्यशैली पर गहरा अविश्वास जताते हुए मांग की है कि इस संदिग्ध प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच हेतु एसआईटी (SIT) का गठन किया जाए। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने अपनी कुंभकरणी नींद नहीं तोड़ी और दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर कठोरतम दंड नहीं दिया, तो यह दबा हुआ आक्रोश एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।




पथ-सुरक्षा की प्रेरक प्रस्तुति- गणतंत्र दिवस समारोह में हजारीबाग परिवहन विभाग की झांकी ने फहराया विजय परचम

पथ-सुरक्षा की प्रेरक प्रस्तुति- गणतंत्र दिवस समारोह में हजारीबाग परिवहन विभाग की झांकी ने फहराया विजय परचम

हजारीबाग: गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आयोजित भव्य जिला स्तरीय समारोह में परिवहन विभाग की झांकी ने अपनी रचनात्मकता और जन-जागरूकता के अनूठे संगम से प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर गौरवशाली उपलब्धि हासिल की है। जिला परिवहन कार्यालय द्वारा प्रस्तुत इस झांकी का मूल उद्देश्य न केवल यातायात नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना था, बल्कि आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक प्रभावी ढंग से संप्रेषित करना भी था। समारोह के दौरान इस झांकी ने दर्शकों और निर्णायक मंडल का ध्यान अपनी ओर विशेष रूप से आकर्षित किया, जहाँ सड़क सुरक्षा के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।

इस पुरस्कृत झांकी की सबसे बड़ी विशेषता इसका जीवंत प्रदर्शन रहा, जिसमें सड़क दुर्घटना के दृश्यों का अत्यंत मार्मिक और सजीव चित्रण कर आम नागरिकों को यातायात के कड़े नियमों के प्रति सचेत किया गया। विभाग ने विभिन्न कट-आउट्स और कलाकृतियों के माध्यम से 'हिट एंड रन' के कड़े प्रावधानों, दुर्घटना में घायलों की सहायता करने वाले 'नेक मददगार' (गुड सेमेरिटन) और 'सड़क सुरक्षा दूत' जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। झांकी की इस संवेदनात्मक प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि सड़क सुरक्षा मात्र एक नियम नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा का एक अनिवार्य संकल्प है।

समारोह के मुख्य अतिथियों और उच्चाधिकारियों ने परिवहन विभाग के इस नवाचार की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसे सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया। झांकी के माध्यम से राहगीरों को यह बोध कराया गया कि उनकी एक सतर्कता किसी परिवार के चिराग को बुझने से बचा सकती है। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली इस झांकी ने गणतंत्र दिवस की गरिमा को बढ़ाते हुए हजारीबाग वासियों को यह संदेश दिया कि नियमबद्ध परिवहन ही एक सुरक्षित राष्ट्र की नींव है।

नियति का क्रूर परिहास- परीक्षा की दहलीज पर उजड़ा सुहाग, टटगांवा के कुलदीपक के बाद अर्धांगिनी ने भी त्यागे प्राण

नियति का क्रूर परिहास- परीक्षा की दहलीज पर उजड़ा सुहाग, टटगांवा के कुलदीपक के बाद अर्धांगिनी ने भी त्यागे प्राण

हजारीबाग: जिले के दारू प्रखंड अंतर्गत हरली की धरती गुरुवार को एक ऐसे मर्मांतक हादसे की साक्षी बनी, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। टटगांवा निवासी रामचंद्र महतो के घर का इकलौता चिराग और पांच बहनों का लाडला भाई, अरुण कुमार (30 वर्ष), विधाता के निष्ठुर विधान का ग्रास बन गया। नियति की क्रूरता का अंत यहीं नहीं हुआ; पति की मृत्यु के पश्चात रिम्स में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही पत्नी ज्योति कुमारी ने भी अंतत!


दम तोड़ दिया। इस दोहरी त्रासदी ने न केवल एक परिवार की वंशबेल को काट दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र को स्तब्ध और निस्तब्ध कर दिया है। यह दुर्घटना तब घटित हुई जब महज छह माह पूर्व परिणय सूत्र में बंधा यह नवविवाहित जोड़ा सुनहरे भविष्य की आकांक्षा लिए परीक्षा केंद्र की ओर अग्रसर था, किंतु मार्ग में काल बनकर आए एक अनियंत्रित ट्रेकर ने उनके समस्त स्वप्नों को क्षण भर में धूलधूसरित कर दिया।

ट्रेकर के गार्ड से हुई उस भीषण भिड़ंत ने खुशियों से चहकते परिवार को चीत्कारों के समंदर में डुबो दिया। स्थानीय लोगों के सहयोग से लहूलुहान दंपति को चिकित्सा हेतु ले जाया गया, परंतु विधि का विधान कुछ और ही था। चरही पहुँचते-पहुँचते अरुण के प्राण पखेरू उड़ गए और अब ज्योति के महाप्रयाण ने उस बूढ़े माँ-बाप के जीवन के अंतिम सहारे को भी छीन लिया है। टटगांवा की गलियाँ आज केवल परिजनों के करुण क्रंदन और चित्कारों से गूँज रही हैं। वह घर, जहाँ कुछ माह पूर्व तक शहनाइयाँ गूँजी थीं, आज वहां पसरा सन्नाटा पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने के लिए पर्याप्त है। पांच बहनों के स्नेह और माता-पिता की तपस्या का प्रतिफल रहा वह इकलौता पुत्र आज यादों की राख बन चुका है। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और अनियंत्रित वाहनों के तांडव पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका उत्तर उन बिलखते बुजुर्गों की आँखों में छिपे आंसुओं में कहीं खो गया है।

जीवन रक्षा का संकल्प - डीवीसी चौक पर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने चलाया सघन जांच व काउंसलिंग अभियान


जीवन रक्षा का संकल्प - डीवीसी चौक पर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने चलाया सघन जांच व काउंसलिंग अभियान

हजारीबाग: राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के निमित्त जिला प्रशासन द्वारा जन-मानस को सुरक्षित यातायात के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के क्रम में आज स्थानीय डीवीसी चौक पर एक प्रभावी संयुक्त कार्रवाई की गई। जिला परिवहन कार्यालय की सड़क सुरक्षा टीम और यातायात पुलिस ने समन्वय स्थापित करते हुए न केवल नियम विरुद्ध वाहन चलाने वालों पर अंकुश लगाया, बल्कि उन्हें जीवन की महत्ता का बोध भी कराया। इस विशेष अभियान के दौरान बिना हेलमेट, सीट बेल्ट के अभाव और तीव्र गति से वाहन संचालित करने वाले चालकों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई से इतर लोगों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना रहा, जिसके लिए मौके पर ही विशेष काउंसलिंग सत्र का आयोजन किया गया।

जांच अभियान के दौरान अधिकारियों ने वाहन चालकों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ यह समझाया कि सड़क सुरक्षा नियमों का अनुपालन केवल पुलिसिया दंड या चालान से बचने का माध्यम नहीं है, अपितु यह स्वयं के जीवन और परिजनों की खुशियों को सुरक्षित रखने का एकमात्र मार्ग है। काउंसलिंग में इस बात पर बल दिया गया कि असावधानी के एक क्षण की परिणति गंभीर दुर्घटना के रूप में हो सकती है। ज्ञात हो कि 1 जनवरी से निरंतर संचालित इस जागरूकता माह के अंतर्गत परिवहन कार्यालय द्वारा प्रतिदिन विभिन्न माध्यमों से लोगों को सजग किया जा रहा है, ताकि जिले में दुर्घटनाओं की दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।

इस महत्वपूर्ण अभियान का नेतृत्व यातायात प्रभारी अनूप कुमार, मोटर यान निरीक्षक बिरसू सिंह, सड़क सुरक्षा प्रबंधक संतोष कुमार, रोड इंजीनियर एनालिस्ट शारिक इकबाल और आईटी सहायक अरविंद कुमार ने संयुक्त रूप से किया। अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि सड़क पर अनुशासन ही दुर्घटनाओं के विरुद्ध सबसे सशक्त कवच है। पुलिस और परिवहन विभाग की इस सक्रियता ने राहगीरों के बीच एक सकारात्मक संदेश प्रवाहित किया है। इस संयुक्त कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि जिला प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर अत्यंत गंभीर है और भविष्य में भी ऐसे काउंसलिंग सत्रों के माध्यम से नागरिकों को जिम्मेदार चालक बनाने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

रफ्तार के सौदागरों पर 'ब्रेक' हजारीबाग में ओवर स्पीडिंग पर प्रशासन का सख्त प्रहार, सड़क पर ही क्लास और ऑनलाइन चालान

रफ्तार के सौदागरों पर 'ब्रेक' हजारीबाग में ओवर स्पीडिंग पर प्रशासन का सख्त प्रहार, सड़क पर ही क्लास और ऑनलाइन चालान


हजारीबाग। सड़कों पर बेलगाम दौड़ने वाले वाहनों और आए दिन हो रही दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए गुरुवार को हजारीबाग परिवहन विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार किया। जिला परिवहन पदाधिकारी और मोटर यान निरीक्षक (MVI) की संयुक्त टीम ने सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत एक विशेष और सघन जांच अभियान चलाकर नियम तोड़ने वालों की जमकर खबर ली। प्रशासन का यह अभियान पूरी तरह से 'ओवर स्पीडिंग' यानी तेज गति पर केंद्रित रहा, जिसने फर्राटे भर रहे चालकों के पसीने छुड़ा दिए।

​जांच के दौरान टीम ने तेज रफ्तार में वाहन चलाने वाले दर्जनों चालकों को रंगे हाथों पकड़ा और मौके पर ही उनका ऑनलाइन चालान काट दिया। हालांकि, प्रशासन की यह कार्रवाई केवल जुर्माने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सुधारात्मक दृष्टिकोण भी अपनाया गया। अधिकारियों ने पकड़े गए चालकों की सड़क किनारे ही काउंसलिंग की और उन्हें समझाया कि उनकी थोड़ी सी जल्दबाजी न केवल उनकी जान ले सकती है, बल्कि दूसरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है। चालकों को भविष्य में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित करते हुए सुरक्षा नियमों से जुड़े पंपलेट भी वितरित किए गए।

​जिला परिवहन पदाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि सड़क हादसों को रोकने के लिए विभाग अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रहा है और यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। इस कार्रवाई में जिला परिवहन पदाधिकारी और मोटर यान निरीक्षक के साथ-साथ सड़क सुरक्षा टीम की सक्रिय भूमिका रही, जिससे यह साफ संदेश गया है कि अब हजारीबाग की सड़कों पर नियमों की अनदेखी करने वालों की खैर नहीं है।

सड़क सुरक्षा माह 2026, हजारीबाग उच्च विद्यालय में लगी पाठशाला, छात्रों ने ली यातायात नियमों के पालन की शपथ

सड़क सुरक्षा माह 2026, हजारीबाग उच्च विद्यालय में लगी पाठशाला, छात्रों ने ली यातायात नियमों के पालन की शपथ



हजारीबाग: सड़क सुरक्षा माह 2026 के मद्देनजर जिला परिवहन कार्यालय हजारीबाग की ओर से जागरूकता अभियानों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में जिला परिवहन विभाग की सड़क सुरक्षा टीम ने हजारीबाग उच्च विद्यालय में एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूली छात्रों के भीतर कम उम्र से ही यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना था। इस कार्यक्रम में विभाग के अधिकारियों ने छात्रों को न केवल सड़क सुरक्षा के नियम सिखाए, बल्कि उन्हें जीवन रक्षा के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता को गंभीरता से समझने का पाठ भी पढ़ाया।

​इस जागरूकता अभियान के दौरान टीम ने विद्यार्थियों को सड़क पर चलते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम को रोचक और प्रभावकारी बनाने के लिए छात्रों के बीच विशेष पम्पलेट भी वितरित किए गए, ताकि सुरक्षा के संदेश को अनूठे तरीके से उन तक पहुंचाया जा सके और वे इसे अपने दैनिक जीवन में उतार सकें। इस पहल की विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की। कार्यक्रम के समापन सत्र में एक भावुक और जिम्मेदार क्षण तब आया जब उपस्थित सभी छात्रों ने एक स्वर में यातायात नियमों का सदैव पालन करने और सुरक्षित सफर को प्राथमिकता देने की शपथ ली।

​इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में परिवहन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने अपने अनुभवों से छात्रों का मार्गदर्शन किया। मुख्य रूप से मोटर यान निरीक्षक, सड़क सुरक्षा प्रबंधक, रोड इंजीनियर एनालिस्ट तथा आईटी सहायक (सड़क सुरक्षा) ने कार्यक्रम में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि सड़क सुरक्षा केवल एक नियम नहीं, बल्कि जीवन जीने का सलीका है और युवा पीढ़ी ही इस बदलाव की असली वाहक बन सकती है। आयोजन का समापन छात्रों द्वारा नियमों के अनुपालन के संकल्प के साथ हुआ, जो सड़क सुरक्षा माह 2026 के उद्देश्यों को सफल बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुआ।

सड़क सुरक्षा को लेकर बरही में प्रशासन सख्त- डीटीओ और एमवीआई ने चलाया सघन जांच अभियान, चालकों की हुई काउंसलिंग

सड़क सुरक्षा को लेकर बरही में प्रशासन सख्त- डीटीओ और एमवीआई ने चलाया सघन जांच अभियान, चालकों की हुई काउंसलिंग

बरही/हजारीबाग : सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात नियमों के प्रति आम जनमानस को जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला परिवहन कार्यालय (DTO) और मोटर यान निरीक्षक (MVI) कार्यालय द्वारा बरही में संयुक्त रूप से विशेष वाहन जांच अभियान चलाया गया। इस सघन अभियान के दौरान अधिकारियों ने न केवल नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की बारीकी से पड़ताल की, बल्कि चालकों के लिए एक विशेष काउंसलिंग सत्र का भी आयोजन किया। जांच के दौरान बिना हेलमेट, सीट बेल्ट के अभाव और ओवरलोडिंग जैसे मामलों पर सख्त हिदायत दी गई। अधिकारियों ने मौके पर ही चालकों को सड़क सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाते हुए बताया कि उनकी एक छोटी सी लापरवाही न केवल उनके लिए बल्कि दूसरों के जीवन के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।

अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर सुरक्षा संबंधी पम्पलेट वितरित किए गए, जिसमें यातायात नियमों और सुरक्षित सफर के मानकों की विस्तृत जानकारी दी गई थी। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह अभियान केवल चालान काटने के लिए नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। प्रशासन की इस सक्रियता से वाहन चालकों के बीच हड़कंप तो रहा, लेकिन स्थानीय नागरिकों ने इसे सुरक्षित यातायात की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भविष्य में भी इस तरह की जांच जारी रहेगी और नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हजारीबाग के कोर्रा चौक पर लगी ट्रैफिक की पाठशाला, सड़क पर उतरे सोशल मीडिया स्टार्स ने युवाओं को सिखाए सुरक्षा के पाठ

हजारीबाग के कोर्रा चौक पर लगी ट्रैफिक की पाठशाला, सड़क पर उतरे सोशल मीडिया स्टार्स ने युवाओं को सिखाए सुरक्षा के पाठ


हजारीबाग। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026 के अंतर्गत जिला परिवहन कार्यालय ने जागरूकता अभियान को एक नया और रोचक आयाम दिया है। इसी कड़ी में शहर के व्यस्ततम कोर्रा चौक पर यातायात नियमों की एक चलती-फिरती पाठशाला देखने को मिली, जहां सोशल मीडिया के चर्चित चेहरों ने वर्चुअल दुनिया से निकलकर सीधे सड़क पर युवाओं और विद्यार्थियों से संवाद किया। जिला परिवहन विभाग की इस अनूठी पहल ने न केवल राहगीरों का ध्यान खींचा बल्कि खेल-खेल में सड़क सुरक्षा का गंभीर संदेश भी जन-जन तक पहुंचाया।

​कार्यक्रम के दौरान स्थानीय सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स ने युवाओं के साथ 'ट्रैफिक क्विज' का आयोजन किया। इसमें यातायात नियमों, हेलमेट की अनिवार्यता, ट्रैफिक सिग्नल की समझ और सड़क सुरक्षा के मानकों पर आधारित सवाल पूछे गए। सबसे खास बात यह रही कि सही जवाब देने वाले जागरूक विद्यार्थियों और युवाओं को मौके पर ही पुरस्कृत किया गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में नियमों को जानने और पालन करने के प्रति खासा उत्साह देखा गया। इस दौरान जिला परिवहन कार्यालय की टीम ने आमजनों के बीच सड़क सुरक्षा संबंधी पम्पलेट का वितरण भी किया ताकि जागरूकता का यह संदेश घर-घर तक पहुंच सके।

​मौके पर उपस्थित मोटर यान निरीक्षक ने बताया कि अक्सर लोग नियमों को बोझ समझते हैं, इसलिए इस बार विभाग ने मनोरंजक तरीके से युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया है ताकि वे स्वेच्छा से यातायात नियमों को अपनी आदत में शुमार करें। इस अभियान में मोटर यान निरीक्षक के अलावा जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक, रोड इंजीनियर एनालिस्ट, आईटी सहायक, डिस्ट्रिक्ट रोल आउट मैनेजर और कार्यालय के अन्य कर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के इस रचनात्मक प्रयास की सराहना करते हुए इसे चालान काटने से बेहतर और प्रभावी तरीका बताया है।

सड़क हादसे की सूचना पर दौड़ पड़े ग्रामीण, शव की हालत देख जताई हत्या की आशंका; हजारीबाग में दशरथ महतो की मौत पर गहराया रहस्य

सड़क हादसे की सूचना पर दौड़ पड़े ग्रामीण, शव की हालत देख जताई हत्या की आशंका, हजारीबाग में दशरथ महतो की मौत पर गहराया रहस्य

हजारीबाग: दारू थान क्षेत्र में नानु ओरिया क्षेत्र के एक युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई, जिसे लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने हत्या की आशंका जताई है। मृतक की पहचान दशरथ महतो उर्फ बिट्टू के रूप में हुई है। शुरू में इसे एक सड़क दुर्घटना माना जा रहा था, लेकिन घटना स्थल पर पहुंचे परिजनों ने शव की स्थिति और घटनाक्रम को देखते हुए इसे सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या करार दिया है। घटना की सूचना मिलते ही गांव में कोहराम मच गया और करीब डेढ़ से दो सौ की संख्या में ग्रामीण कड़कड़ाती ठंड में घटनास्थल पर पहुंच गए।

मृतक के चाचा और भाई ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें फोन पर सूचना मिली थी कि बिट्टू का एक्सीडेंट हो गया है। आनन-फानन में जब परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो उन्होंने पाया कि शव सड़क के किनारे पड़ा था। परिजनों का आरोप है कि शव को देखने से ऐसा प्रतीत ही नहीं हो रहा था कि यह कोई साधारण दुर्घटना है। मृतक के शरीर के अगले हिस्से पर खरोंच के निशान नहीं थे, जिससे यह संदेह गहरा गया कि उसे पीछे से वार कर मारा गया है और फिर हादसे का रूप देने के लिए शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया। मृतक के चाचा ने भावुक होते हुए बताया कि जिस व्यक्ति ने बिट्टू को फोन कर घर से बुलाया था, उसी पर उन्हें शक है।

परिजनों के अनुसार, मौके पर पहुंची पुलिस और थाना प्रभारी ने भी प्रथम दृष्टया इसे संदिग्ध माना है। आक्रोशित परिजनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुट गई है। अस्पताल परिसर के पोस्टमार्टम हाउस से बोड़ी को सहर के डिस्टीक मोड़ पर ला कर मृतक के परिवार और ग्रामीणों के भारी भीड़ज्ञ ने सड़क जमा किया है, जिससे माहौल गमगीन बना हुआ है।


हजारीबाग में रंगों के जरिए नौनिहालों ने दिया जीवन रक्षा का संदेश


हजारीबाग में रंगों के जरिए नौनिहालों ने दिया जीवन रक्षा का संदेश

सड़क सुरक्षा माह के तहत परिवहन विभाग ने दिलाई यातायात नियमों के पालन की शपथ

हजारीबाग: के सिंदूर स्थित होटल विनायक पैलेस में रविवार को रचनात्मकता और जागरूकता का अनूठा संगम देखने को मिला। जिला परिवहन कार्यालय के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में स्कूली बच्चों ने अपनी तूलिका और रंगों के माध्यम से 'सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा' का ऐसा सशक्त संदेश उकेरा कि वहां मौजूद हर शख्स की अंतरात्मा जाग उठी। सड़क सुरक्षा माह के तहत आयोजित इस भव्य कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनों और विशेषकर युवा पीढ़ी को यातायात नियमों के प्रति गंभीर बनाना था ताकि सड़कों पर हो रही असमय मौतों के सिलसिले को रोका जा सके।

कार्यक्रम के दौरान जागरूकता अभियान को धार देते हुए जिला परिवहन कार्यालय और यातायात पुलिस के पदाधिकारियों ने एक सुर में सुरक्षा का मंत्र दिया। इस मौके पर उपस्थित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने, चार पहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने और यातायात के सभी नियमों का कड़ाई से पालन करने की सामूहिक शपथ दिलाई गई। पेंटिंग प्रतियोगिता में विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने अपनी कल्पनाशक्ति का परिचय देते हुए कैनवास पर सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय और सुरक्षित सफर के दृश्य चित्रित किए। इन नन्हे हाथों द्वारा बनाए गए चित्रों में छिपे गहरे संदेशों ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को विभाग द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में सड़क सुरक्षा प्रबंधक, रोड इंजीनियर एनालिस्ट, आईटी सहायक सड़क सुरक्षा सहित यातायात पुलिस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे जिन्होंने बच्चों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का समापन जिला परिवहन पदाधिकारी के उस प्रेरक संदेश के साथ हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि सुरक्षित ड्राइविंग न केवल चालक की बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे निर्दोष लोगों की जान भी बचाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चालान के डर से नहीं बल्कि जीवन की सुरक्षा के लिए नियमों का पालन करें क्योंकि जागरूकता ही बचाव का सबसे सशक्त माध्यम है।


रफ्तार का कहर


रफ्तार का कहर

हजारीबाग में स्वास्थ्य केंद्र के पास अनियंत्रित होकर पलटाl papp l कोयले से लदा हाईवा, मलबे में दबकर कई मवेशियों की दर्दनाक मौत

हजारीबाग: जिले के दारू थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पेटो में आज सुबह0 sa रफ्तार का कहर देखने को मिला जब एक भीषण सड़क हादसे में कई बेजुबान मवेशियों की जान चली गई। पेटो स्वास्थ्य केंद्र के समीप सुबह करीब साढ़े नौ बजे उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब कोयले से लदा एक तेज रफ्तार हाईवा अचानक अनियंत्रित हो गया। वाहन की गति इतनी तेज थी कि चालक उस पर से अपना नियंत्रण खो बैठा और देखते ही देखते भारी-भरकम गाड़ी सड़क किनारे स्थित एक घर के पास पलट गई।

​यह हादसा इतना भयानक था कि घर के बाहर बंधे मवेशियों को वहां से हटने का मौका तक नहीं मिला। हाईवा के पलटने से कोयले का पूरा ढेर और गाड़ी का भारी हिस्सा वहां बंधे पशुओं पर जा गिरा। इस दर्दनाक घटना में मलबे के नीचे दबने से एक दुधारू गाय और चार से पांच बकरियों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पशु मालिक को भारी आर्थिक क्षति हुई है। गनीमत यह रही कि इस खौफनाक दुर्घटना में हाईवा का चालक बाल-बाल बच गया और किसी भी ग्रामीण या इंसान की जान नहीं गई, अन्यथा यह हादसा और भी भयावह रूप ले सकता था।

​घटना की जानकारी मिलते ही दारू थाना प्रभारी इकबाल हुसैन तत्काल अपने दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भीड़ को नियंत्रित किया और मामले को अपने संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद से पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों में रिहायशी इलाकों से गुजरने वाले तेज रफ्तार भारी वाहनों को लेकर गहरा रोष व्याप्त है।

हजारीबाग की सड़कों पर उतरा प्रशासन - वाहन जांच के साथ नियमों की दी गई घुट्टी, हिट-एंड-रन के नए मुआवजे से कराया अवगत

 

हजारीबाग की सड़कों पर उतरा प्रशासन - वाहन जांच के साथ नियमों की दी गई घुट्टी, हिट-एंड-रन के नए मुआवजे से कराया अवगत


हजारीबाग: जिले राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत आज जिला परिवहन कार्यालय, सड़क सुरक्षा टीम और यातायात पुलिस ने संयुक्त रूप से एक व्यापक जागरूकता एवं सघन जांच अभियान चलाया। शहर के विभिन्न प्रमुख चौराहों पर चलाए गए इस विशेष अभियान का नेतृत्व करते हुए अधिकारियों ने न केवल नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों को रोका, बल्कि मौके पर ही उनकी काउंसलिंग कर सुरक्षित ड्राइविंग की शपथ भी दिलाई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य चालान काटने से अधिक नागरिकों के भीतर उत्तरदायित्व की भावना पैदा करना और सड़क दुर्घटनाओं की दर में प्रभावी कमी लाना रहा।


जांच के दौरान जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक ने आमजन को 'हिट एंड रन' दुर्घटनाओं से संबंधित सरकार के नए नियमों और मुआवजा प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। टीम ने बताया कि ऐसी दुखद घटनाओं में अब मृतक के आश्रितों को 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को अधिक संवेदनशील बनाने के लिए मौके पर पम्पलेट्स का वितरण भी किया गया, जिसमें यातायात संकेतों और जीवन रक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां अंकित थीं।


अभियान के दौरान यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की टीम ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह मुहिम केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि सुरक्षित सफर सुनिश्चित करने की दिशा में एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। सड़कों पर मौजूद अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यातायात नियमों का पालन करना न केवल कानूनी अनिवार्यता है बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी भी है। इस अभियान ने न केवल लापरवाह चालकों को सचेत किया, बल्कि शहरवासियों को यह भी अहसास कराया कि उनकी थोड़ी सी जागरूकता कई कीमती जानें बचा सकती है।

एनएच 522 पर बेलसोती पुल बना खूनी गलियारा


 

एनएच 522 पर बेलसोती पुल बना खूनी गलियारा

संकीर्णता और जर्जर गार्डवाल ले रही मासूमों की जान, एनएचएआई की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश


दारू/हजारीबाग: हजारीबाग से बगोदर होकर कोलकाता को जोड़ने वाली मुख्य जीवनरेखा एनएच 522 पर स्थित बेलसोती पुल इन दिनों यात्रियों के लिए काल का पर्याय बन चुका है। दारू प्रखंड के अंतर्गत आने वाला यह पुल अपनी बनावट और प्रशासनिक अनदेखी के कारण एक खतरनाक 'डेथ ट्रैप' में तब्दील हो गया है, जहां बीते छह महीनों के भीतर ही तीन से अधिक भीषण वाहन दुर्घटनाएं घटित हो चुकी हैं। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो तेज रफ्तार गाड़ियां अक्सर अनियंत्रित होकर सीधे पुल के नीचे जा गिरती हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है।



इस खूनी सिलसिले की सबसे बड़ी वजह पुल का अत्यधिक संकीर्ण होना और फोरलेन सड़क की चौड़ाई के साथ इसका तालमेल न होना है। चकाचक और चौड़ी फोरलेन सड़क पर फर्राटा भरते वाहन जैसे ही इस पुल के समीप पहुंचते हैं, अचानक सड़क के सिमट जाने से चालक भ्रमित हो जाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। रही-सही कसर पुल के जर्जर गार्डवाल ने पूरी कर दी है, जिसका एक हिस्सा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और दूसरा हिस्सा किसी भी वक्त गिर सकता है। सुरक्षा मानकों की यह घोर अनदेखी राहगीरों के लिए हर पल मौत का बुलावा साबित हो रही है।

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