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Editor: Naresh Prasad Soni
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नियति का क्रूर परिहास- परीक्षा की दहलीज पर उजड़ा सुहाग, टटगांवा के कुलदीपक के बाद अर्धांगिनी ने भी त्यागे प्राण

नियति का क्रूर परिहास- परीक्षा की दहलीज पर उजड़ा सुहाग, टटगांवा के कुलदीपक के बाद अर्धांगिनी ने भी त्यागे प्राण

हजारीबाग: जिले के दारू प्रखंड अंतर्गत हरली की धरती गुरुवार को एक ऐसे मर्मांतक हादसे की साक्षी बनी, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। टटगांवा निवासी रामचंद्र महतो के घर का इकलौता चिराग और पांच बहनों का लाडला भाई, अरुण कुमार (30 वर्ष), विधाता के निष्ठुर विधान का ग्रास बन गया। नियति की क्रूरता का अंत यहीं नहीं हुआ; पति की मृत्यु के पश्चात रिम्स में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही पत्नी ज्योति कुमारी ने भी अंतत!


दम तोड़ दिया। इस दोहरी त्रासदी ने न केवल एक परिवार की वंशबेल को काट दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र को स्तब्ध और निस्तब्ध कर दिया है। यह दुर्घटना तब घटित हुई जब महज छह माह पूर्व परिणय सूत्र में बंधा यह नवविवाहित जोड़ा सुनहरे भविष्य की आकांक्षा लिए परीक्षा केंद्र की ओर अग्रसर था, किंतु मार्ग में काल बनकर आए एक अनियंत्रित ट्रेकर ने उनके समस्त स्वप्नों को क्षण भर में धूलधूसरित कर दिया।

ट्रेकर के गार्ड से हुई उस भीषण भिड़ंत ने खुशियों से चहकते परिवार को चीत्कारों के समंदर में डुबो दिया। स्थानीय लोगों के सहयोग से लहूलुहान दंपति को चिकित्सा हेतु ले जाया गया, परंतु विधि का विधान कुछ और ही था। चरही पहुँचते-पहुँचते अरुण के प्राण पखेरू उड़ गए और अब ज्योति के महाप्रयाण ने उस बूढ़े माँ-बाप के जीवन के अंतिम सहारे को भी छीन लिया है। टटगांवा की गलियाँ आज केवल परिजनों के करुण क्रंदन और चित्कारों से गूँज रही हैं। वह घर, जहाँ कुछ माह पूर्व तक शहनाइयाँ गूँजी थीं, आज वहां पसरा सन्नाटा पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने के लिए पर्याप्त है। पांच बहनों के स्नेह और माता-पिता की तपस्या का प्रतिफल रहा वह इकलौता पुत्र आज यादों की राख बन चुका है। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और अनियंत्रित वाहनों के तांडव पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका उत्तर उन बिलखते बुजुर्गों की आँखों में छिपे आंसुओं में कहीं खो गया है।

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