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Editor EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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बजट 2026!! अब खेतों से महकेगा चंदन और डालियों पर उगेंगे 'प्रीमियम' काजू, किसानों की जेब भरने के लिए सरकार ने खोला खजाने का सबसे बड़ा द्वार

बजट 2026!! अब खेतों से महकेगा चंदन और डालियों पर उगेंगे 'प्रीमियम' काजू, किसानों की जेब भरने के लिए सरकार ने खोला खजाने का सबसे बड़ा द्वार


​नई दिल्ली: संसद के पटल पर आज एक ऐसे भारत की तस्वीर रखी गई है जहाँ खेतों की मिट्टी अब सोना उगलेगी और किसान केवल अन्नदाता नहीं बल्कि एक सफल उद्यमी बनकर उभरेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश करते हुए विकसित भारत की नींव में 'सबका साथ सबका विकास' के मंत्र को एक नई धार दी है। इस बार का बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है बल्कि यह गाँव, गरीब, किसान और पूर्वोत्तर भारत के सपनों को हकीकत में बदलने वाला एक ठोस रोडमैप है जिसमें तकनीक, परंपरा और तरक्की का बेजोड़ संगम देखने को मिल रहा है।

​सरकार ने साफ कर दिया है कि अब खेती का मतलब केवल गेहूं और धान उगाना नहीं है बल्कि उच्च मूल्य वाली फसलों से तिजोरी भरना है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए वित्त मंत्री ने 'नारियल संवर्धन योजना' का ऐलान किया है। भारत जो दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक है वहां अब पुराने और फल न देने वाले पेड़ों की जगह नई और उन्नत किस्में लेंगी जिससे देश के तीन करोड़ से अधिक लोगों की जिंदगी में बहार आएगी। लेकिन असली गेम चेंजर साबित होने वाला है भारतीय काजू और कोको के लिए लाया गया समर्पित कार्यक्रम। सरकार ने ठान लिया है कि साल 2030 तक भारतीय काजू और कोको को एक 'प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड' बनाकर ही दम लेगी। अब भारत कच्चे काजू और कोको के लिए दूसरों का मुंह नहीं ताकेगा बल्कि आत्मनिर्भर बनकर दुनिया के बाजारों में अपनी बादशाहत कायम करेगा।

​पहाड़ों और जंगलों की खुशबू को भी इस बजट में आर्थिक पंख दिए गए हैं। चंदन की खेती जो कभी भारत की पहचान थी उसे फिर से जीवित करने के लिए केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर एक बड़ा अभियान छेड़ने जा रही है। चंदन के साथ-साथ पहाड़ी इलाकों में बादाम, अखरोट और खुमानी की खेती अब नए तौर-तरीकों से होगी। पुराने बागानों को फिर से हरा-भरा बनाने और 'हाई डेन्सिटी' खेती के जरिए युवाओं को इससे जोड़ने की यह पहल पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदल कर रख देगी। पूर्वोत्तर भारत और पूर्वोदय राज्यों पर विशेष ध्यान देते हुए अगर वुड जैसी कीमती लकड़ी को बढ़ावा देना सरकार की उस मंशा को जाहिर करता है कि विकास की सूरज की पहली किरण पूरब से ही निकलेगी।

​पशुपालन और मछली पालन को भी अब साइड बिजनेस नहीं बल्कि मुख्य धारा के रोजगार के रूप में स्थापित किया जाएगा। बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास का खाका खींचा गया है ताकि तटीय क्षेत्रों में मछली पालन को एक बड़ी इंडस्ट्री का रूप दिया जा सके। स्टार्टअप्स और महिला समूहों को सीधे बाजार से जोड़ने की यह कवायद ग्रामीण भारत में पैसों का प्रवाह तेज करेगी। पशुधन को आधुनिक बनाने और डेयरी सेक्टर में वैल्यू चेन बनाने के लिए ऋण आधारित सब्सिडी का भी प्रावधान किया गया है जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में नौकरियों की बहार ला सकता है।

​भविष्य की खेती को तकनीक से लैस करने के लिए सरकार ने अपना सबसे बड़ा डिजिटल दांव 'भारत-विस्तार' के रूप में चला है। यह एक ऐसा वर्चुअल प्लेटफॉर्म होगा जो एआई की मदद से किसानों को मौसम, फसल और बाजार की सटीक जानकारी उनकी अपनी भाषा में देगा। यह केवल एक एप नहीं बल्कि किसान का वह डिजिटल साथी होगा जो जोखिम कम करेगा और मुनाफा बढ़ाएगा। कुल मिलाकर बजट 2026-27 ने यह साबित कर दिया है कि सरकार का फोकस अब केवल सर्वाइवल पर नहीं बल्कि रूरल रिवाइवल पर है जहां दिव्यांगजनों, मानसिक स्वास्थ्य और कमजोर वर्गों को साथ लेकर एक सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण किया जाएगा।

वैश्विक क्षितिज पर झारखंड का उदय- दावोस और लंदन से लौटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भरी हुंकार, कहा- राज्य की नैसर्गिक संपदा और युवा शक्ति को अब मिलेंगे विकास के अंतहीन आकाश


वैश्विक क्षितिज पर झारखंड का उदय- दावोस और लंदन से लौटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भरी हुंकार, कहा- राज्य की नैसर्गिक संपदा और युवा शक्ति को अब मिलेंगे विकास के अंतहीन आकाश

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड 

रांची | 28 जनवरी 2026

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी विदेश यात्रा से लौटने के पश्चात रांची हवाई अड्डे पर एक अभूतपूर्व और उत्साहजनक वातावरण के बीच मीडिया से मुखातिब हुए। समर्थकों के गगनभेदी नारों और 'जय झारखंड' के उद्घोष के मध्य मुख्यमंत्री ने अपनी दावोस और लंदन यात्रा को राज्य के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड ने पहली बार वैश्विक पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है और दुनिया के सामने अपनी बात को पूरी प्रबलता के साथ रखा है।

मुख्यमंत्री ने अपनी यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद यह प्रथम अवसर है जब झारखंड ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान को इतनी गंभीरता से स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वे दावोस और लंदन से केवल यादें नहीं, बल्कि राज्य के विकास के लिए "बेहतर अनुभव" और "अपार संभावनाएं" लेकर स्वदेश लौटे हैं। श्री सोरेन ने विश्वास दिलाया कि इन वैश्विक अनुभवों के आधार पर झारखंड के 'जल, जंगल और जमीन' तथा यहाँ की नैसर्गिक संपदा को विकास का एक नया आयाम देने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी, जिससे राज्य की आर्थिक रीढ़ और मजबूत होगी।

विशेष रूप से शिक्षा और युवा सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रतिमान गढ़ने का प्रयास किया है, जो सीधे तौर पर राज्य की आने वाली पीढ़ी को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह और मीडिया को आश्वस्त किया कि इस विदेश यात्रा के दौरान तलाशी गई सभी संभावनाओं का सूक्ष्मता से आकलन कर उन्हें धरातल पर उतारा जाएगा, ताकि झारखंड के युवाओं के लिए एक उज्ज्वल और स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो सके। हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब और उनके वक्तव्य में झलकता आत्मविश्वास यह बताने के लिए पर्याप्त था कि झारखंड अब अपनी स्थानीय सीमाओं से निकलकर वैश्विक मानचित्र पर अपनी अमिट छाप छोड़ने को तत्पर है।





नियति का क्रूर परिहास- परीक्षा की दहलीज पर उजड़ा सुहाग, टटगांवा के कुलदीपक के बाद अर्धांगिनी ने भी त्यागे प्राण

नियति का क्रूर परिहास- परीक्षा की दहलीज पर उजड़ा सुहाग, टटगांवा के कुलदीपक के बाद अर्धांगिनी ने भी त्यागे प्राण

हजारीबाग: जिले के दारू प्रखंड अंतर्गत हरली की धरती गुरुवार को एक ऐसे मर्मांतक हादसे की साक्षी बनी, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। टटगांवा निवासी रामचंद्र महतो के घर का इकलौता चिराग और पांच बहनों का लाडला भाई, अरुण कुमार (30 वर्ष), विधाता के निष्ठुर विधान का ग्रास बन गया। नियति की क्रूरता का अंत यहीं नहीं हुआ; पति की मृत्यु के पश्चात रिम्स में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही पत्नी ज्योति कुमारी ने भी अंतत!


दम तोड़ दिया। इस दोहरी त्रासदी ने न केवल एक परिवार की वंशबेल को काट दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र को स्तब्ध और निस्तब्ध कर दिया है। यह दुर्घटना तब घटित हुई जब महज छह माह पूर्व परिणय सूत्र में बंधा यह नवविवाहित जोड़ा सुनहरे भविष्य की आकांक्षा लिए परीक्षा केंद्र की ओर अग्रसर था, किंतु मार्ग में काल बनकर आए एक अनियंत्रित ट्रेकर ने उनके समस्त स्वप्नों को क्षण भर में धूलधूसरित कर दिया।

ट्रेकर के गार्ड से हुई उस भीषण भिड़ंत ने खुशियों से चहकते परिवार को चीत्कारों के समंदर में डुबो दिया। स्थानीय लोगों के सहयोग से लहूलुहान दंपति को चिकित्सा हेतु ले जाया गया, परंतु विधि का विधान कुछ और ही था। चरही पहुँचते-पहुँचते अरुण के प्राण पखेरू उड़ गए और अब ज्योति के महाप्रयाण ने उस बूढ़े माँ-बाप के जीवन के अंतिम सहारे को भी छीन लिया है। टटगांवा की गलियाँ आज केवल परिजनों के करुण क्रंदन और चित्कारों से गूँज रही हैं। वह घर, जहाँ कुछ माह पूर्व तक शहनाइयाँ गूँजी थीं, आज वहां पसरा सन्नाटा पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने के लिए पर्याप्त है। पांच बहनों के स्नेह और माता-पिता की तपस्या का प्रतिफल रहा वह इकलौता पुत्र आज यादों की राख बन चुका है। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और अनियंत्रित वाहनों के तांडव पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका उत्तर उन बिलखते बुजुर्गों की आँखों में छिपे आंसुओं में कहीं खो गया है।

ईचाक में नशाबंदी के लिए सड़क पर उतरा जनसैलाब, पुलिस की सख्ती के बीच पुनाई और बसरिया में अब भी बेखौफ बिक रही 'मौत'

 

ईचाक में नशाबंदी के लिए सड़क पर उतरा जनसैलाब, पुलिस की सख्ती के बीच पुनाई और बसरिया में अब भी बेखौफ बिक रही 'मौत'

​हजारीबाग/ईचाक: इचाक में नशाखोरी के खिलाफ उबलते जनाक्रोश ने अब एक ब



ड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। युवा नेता बाबू गौतम मेहता के नेतृत्व में आयोजित ईचाक बंद पूरी तरह सफल रहा, जिसने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय समाज अब अपनी आने वाली पीढ़ियों को नशे के दलदल में डूबते हुए और नहीं देख सकता। इस जनांदोलन के दबाव और तत्परता का ही नतीजा है कि ईचाक पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह नशा तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, जिसके लिए स्थानीय नागरिक पुलिस प्रशासन को साधुवाद दे रहे हैं।

​हालाँकि, पुलिस की इस कार्रवाई के बावजूद इलाके की एक स्याह सच्चाई यह भी है कि दारू और ईचाक थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पुनाई और बसरिया जैसे गांवों में आज भी खुलेआम जहरीली महुआ शराब और गांजे की बिक्री का खेल जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले एक साल से सोशल मीडिया, ट्वीट और लिखित शिकायतों के माध्यम से प्रशासन को लगातार जगाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी ने नशा माफियाओं के हौसले बुलंद कर रखे हैं। स्थिति यह है कि अवैध शराब बेचने वाले तस्कर अब खुलेआम दावा करते हैं कि वे किसी भी थाने या एसपी ऑफिस से नहीं डरते और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, जो सीधे तौर पर सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

​इन इलाकों में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कम उम्र के स्कूली लड़के नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं और शाम होते ही शराबी तत्वों के जमावड़े के कारण महिलाओं और बेटियों का घर से निकलना या बाजार जाना तक दूभर हो गया है। नशा तस्करों के इस 'जंगलराज' से त्रस्त जनता ने अब सीधे मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और हजारीबाग पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि वे इस मामले का तत्काल संज्ञान लें और सिर्फ खानापूर्ति करने के बजाय पुनाई और बसरिया में व्यापक छापेमारी अभियान चलाकर इस अवैध धंधे को जड़ से खत्म करें, ताकि समाज को इस जहर से मुक्ति मिल सके।

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