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Editor: Naresh Prasad Soni
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वैश्विक क्षितिज पर झारखंड का उदय- दावोस और लंदन से लौटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भरी हुंकार, कहा- राज्य की नैसर्गिक संपदा और युवा शक्ति को अब मिलेंगे विकास के अंतहीन आकाश


वैश्विक क्षितिज पर झारखंड का उदय- दावोस और लंदन से लौटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भरी हुंकार, कहा- राज्य की नैसर्गिक संपदा और युवा शक्ति को अब मिलेंगे विकास के अंतहीन आकाश

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड 

रांची | 28 जनवरी 2026

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी विदेश यात्रा से लौटने के पश्चात रांची हवाई अड्डे पर एक अभूतपूर्व और उत्साहजनक वातावरण के बीच मीडिया से मुखातिब हुए। समर्थकों के गगनभेदी नारों और 'जय झारखंड' के उद्घोष के मध्य मुख्यमंत्री ने अपनी दावोस और लंदन यात्रा को राज्य के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड ने पहली बार वैश्विक पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है और दुनिया के सामने अपनी बात को पूरी प्रबलता के साथ रखा है।

मुख्यमंत्री ने अपनी यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद यह प्रथम अवसर है जब झारखंड ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान को इतनी गंभीरता से स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वे दावोस और लंदन से केवल यादें नहीं, बल्कि राज्य के विकास के लिए "बेहतर अनुभव" और "अपार संभावनाएं" लेकर स्वदेश लौटे हैं। श्री सोरेन ने विश्वास दिलाया कि इन वैश्विक अनुभवों के आधार पर झारखंड के 'जल, जंगल और जमीन' तथा यहाँ की नैसर्गिक संपदा को विकास का एक नया आयाम देने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी, जिससे राज्य की आर्थिक रीढ़ और मजबूत होगी।

विशेष रूप से शिक्षा और युवा सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रतिमान गढ़ने का प्रयास किया है, जो सीधे तौर पर राज्य की आने वाली पीढ़ी को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह और मीडिया को आश्वस्त किया कि इस विदेश यात्रा के दौरान तलाशी गई सभी संभावनाओं का सूक्ष्मता से आकलन कर उन्हें धरातल पर उतारा जाएगा, ताकि झारखंड के युवाओं के लिए एक उज्ज्वल और स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो सके। हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब और उनके वक्तव्य में झलकता आत्मविश्वास यह बताने के लिए पर्याप्त था कि झारखंड अब अपनी स्थानीय सीमाओं से निकलकर वैश्विक मानचित्र पर अपनी अमिट छाप छोड़ने को तत्पर है।





नियति का क्रूर परिहास- परीक्षा की दहलीज पर उजड़ा सुहाग, टटगांवा के कुलदीपक के बाद अर्धांगिनी ने भी त्यागे प्राण

नियति का क्रूर परिहास- परीक्षा की दहलीज पर उजड़ा सुहाग, टटगांवा के कुलदीपक के बाद अर्धांगिनी ने भी त्यागे प्राण

हजारीबाग: जिले के दारू प्रखंड अंतर्गत हरली की धरती गुरुवार को एक ऐसे मर्मांतक हादसे की साक्षी बनी, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। टटगांवा निवासी रामचंद्र महतो के घर का इकलौता चिराग और पांच बहनों का लाडला भाई, अरुण कुमार (30 वर्ष), विधाता के निष्ठुर विधान का ग्रास बन गया। नियति की क्रूरता का अंत यहीं नहीं हुआ; पति की मृत्यु के पश्चात रिम्स में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही पत्नी ज्योति कुमारी ने भी अंतत!


दम तोड़ दिया। इस दोहरी त्रासदी ने न केवल एक परिवार की वंशबेल को काट दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र को स्तब्ध और निस्तब्ध कर दिया है। यह दुर्घटना तब घटित हुई जब महज छह माह पूर्व परिणय सूत्र में बंधा यह नवविवाहित जोड़ा सुनहरे भविष्य की आकांक्षा लिए परीक्षा केंद्र की ओर अग्रसर था, किंतु मार्ग में काल बनकर आए एक अनियंत्रित ट्रेकर ने उनके समस्त स्वप्नों को क्षण भर में धूलधूसरित कर दिया।

ट्रेकर के गार्ड से हुई उस भीषण भिड़ंत ने खुशियों से चहकते परिवार को चीत्कारों के समंदर में डुबो दिया। स्थानीय लोगों के सहयोग से लहूलुहान दंपति को चिकित्सा हेतु ले जाया गया, परंतु विधि का विधान कुछ और ही था। चरही पहुँचते-पहुँचते अरुण के प्राण पखेरू उड़ गए और अब ज्योति के महाप्रयाण ने उस बूढ़े माँ-बाप के जीवन के अंतिम सहारे को भी छीन लिया है। टटगांवा की गलियाँ आज केवल परिजनों के करुण क्रंदन और चित्कारों से गूँज रही हैं। वह घर, जहाँ कुछ माह पूर्व तक शहनाइयाँ गूँजी थीं, आज वहां पसरा सन्नाटा पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने के लिए पर्याप्त है। पांच बहनों के स्नेह और माता-पिता की तपस्या का प्रतिफल रहा वह इकलौता पुत्र आज यादों की राख बन चुका है। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और अनियंत्रित वाहनों के तांडव पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका उत्तर उन बिलखते बुजुर्गों की आँखों में छिपे आंसुओं में कहीं खो गया है।

ईचाक में नशाबंदी के लिए सड़क पर उतरा जनसैलाब, पुलिस की सख्ती के बीच पुनाई और बसरिया में अब भी बेखौफ बिक रही 'मौत'

 

ईचाक में नशाबंदी के लिए सड़क पर उतरा जनसैलाब, पुलिस की सख्ती के बीच पुनाई और बसरिया में अब भी बेखौफ बिक रही 'मौत'

हजारीबाग/ईचाक: इचाक में नशाखोरी के खिलाफ उबलते जनाक्रोश ने अब एक ब



ड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। युवा नेता बाबू गौतम मेहता के नेतृत्व में आयोजित ईचाक बंद पूरी तरह सफल रहा, जिसने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय समाज अब अपनी आने वाली पीढ़ियों को नशे के दलदल में डूबते हुए और नहीं देख सकता। इस जनांदोलन के दबाव और तत्परता का ही नतीजा है कि ईचाक पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह नशा तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, जिसके लिए स्थानीय नागरिक पुलिस प्रशासन को साधुवाद दे रहे हैं।

​हालाँकि, पुलिस की इस कार्रवाई के बावजूद इलाके की एक स्याह सच्चाई यह भी है कि दारू और ईचाक थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पुनाई और बसरिया जैसे गांवों में आज भी खुलेआम जहरीली महुआ शराब और गांजे की बिक्री का खेल जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले एक साल से सोशल मीडिया, ट्वीट और लिखित शिकायतों के माध्यम से प्रशासन को लगातार जगाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी ने नशा माफियाओं के हौसले बुलंद कर रखे हैं। स्थिति यह है कि अवैध शराब बेचने वाले तस्कर अब खुलेआम दावा करते हैं कि वे किसी भी थाने या एसपी ऑफिस से नहीं डरते और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, जो सीधे तौर पर सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

​इन इलाकों में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कम उम्र के स्कूली लड़के नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं और शाम होते ही शराबी तत्वों के जमावड़े के कारण महिलाओं और बेटियों का घर से निकलना या बाजार जाना तक दूभर हो गया है। नशा तस्करों के इस 'जंगलराज' से त्रस्त जनता ने अब सीधे मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और हजारीबाग पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि वे इस मामले का तत्काल संज्ञान लें और सिर्फ खानापूर्ति करने के बजाय पुनाई और बसरिया में व्यापक छापेमारी अभियान चलाकर इस अवैध धंधे को जड़ से खत्म करें, ताकि समाज को इस जहर से मुक्ति मिल सके।

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