ईचाक में नशाबंदी के लिए सड़क पर उतरा जनसैलाब, पुलिस की सख्ती के बीच पुनाई और बसरिया में अब भी बेखौफ बिक रही 'मौत'
हजारीबाग/ईचाक: इचाक में नशाखोरी के खिलाफ उबलते जनाक्रोश ने अब एक ब
ड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। युवा नेता बाबू गौतम मेहता के नेतृत्व में आयोजित ईचाक बंद पूरी तरह सफल रहा, जिसने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय समाज अब अपनी आने वाली पीढ़ियों को नशे के दलदल में डूबते हुए और नहीं देख सकता। इस जनांदोलन के दबाव और तत्परता का ही नतीजा है कि ईचाक पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह नशा तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, जिसके लिए स्थानीय नागरिक पुलिस प्रशासन को साधुवाद दे रहे हैं।
हालाँकि, पुलिस की इस कार्रवाई के बावजूद इलाके की एक स्याह सच्चाई यह भी है कि दारू और ईचाक थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पुनाई और बसरिया जैसे गांवों में आज भी खुलेआम जहरीली महुआ शराब और गांजे की बिक्री का खेल जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले एक साल से सोशल मीडिया, ट्वीट और लिखित शिकायतों के माध्यम से प्रशासन को लगातार जगाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी ने नशा माफियाओं के हौसले बुलंद कर रखे हैं। स्थिति यह है कि अवैध शराब बेचने वाले तस्कर अब खुलेआम दावा करते हैं कि वे किसी भी थाने या एसपी ऑफिस से नहीं डरते और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, जो सीधे तौर पर सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इन इलाकों में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कम उम्र के स्कूली लड़के नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं और शाम होते ही शराबी तत्वों के जमावड़े के कारण महिलाओं और बेटियों का घर से निकलना या बाजार जाना तक दूभर हो गया है। नशा तस्करों के इस 'जंगलराज' से त्रस्त जनता ने अब सीधे मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और हजारीबाग पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि वे इस मामले का तत्काल संज्ञान लें और सिर्फ खानापूर्ति करने के बजाय पुनाई और बसरिया में व्यापक छापेमारी अभियान चलाकर इस अवैध धंधे को जड़ से खत्म करें, ताकि समाज को इस जहर से मुक्ति मिल सके।


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