डीजे विवाद में हुई सूरज राणा की हत्या की गुत्थी सुलझी, नोएडा और बड़कागांव से 8 आरोपी गिरफ्तार
हजारीबाग: जिले के पुलिस ने नए साल के पहले दिन लोहसिंघना थाना क्षेत्र के इंद्रपुरी चौक के पास हुए बहुचर्चित सूरज राणा हत्याकांड का सफल उद्भेदन कर लिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस जघन्य वारदात में शामिल आठ आरोपियों को देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार किया है। पुलिस की विशेष जांच दल ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त खून से सनी तलवार और बेसबॉल बैट भी बरामद कर लिया है, जिससे मामले में अहम सबूत हाथ लगे हैं।
घटना की मुख्य वजह 1 जनवरी 2026 को कोल्घटी में डीजे बजाने को लेकर हुआ मामूली विवाद बताया गया है, जिसने बाद में खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। प्रतिशोध की भावना से ग्रसित अपराधियों ने योजनाबद्ध तरीके से इंद्रपुरी चौक के समीप हथियारों से लैस होकर हमला बोला था। 1 जनवरी की रात करीब 10 बजे हुए इस हमले में सूरज कुमार राणा की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी, जबकि हमले के दौरान कुलदीप सोनी गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इस संबंध में मृतक की पत्नी काजल कुमारी के बयान पर लोहसिंघना थाना में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
कांड की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने सदर एसडीपीओ अमित आनंद के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया था। इस टीम ने हत्यारों की धरपकड़ के लिए नई दिल्ली, नोएडा, भिलाई, चतरा, रामगढ़, रांची और बड़कागांव जैसे कई स्थानों पर लगातार छापेमारी अभियान चलाया। पुलिस को बड़ी सफलता तब मिली जब तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 10 जनवरी को नोएडा के सेक्टर-126 से मुख्य आरोपी राहुल कुमार यादव, रौशन यादव और दीपक यादव को गिरफ्तार किया गया।
नोएडा से पकड़े गए आरोपियों से पुलिस द्वारा की गई कड़ाई से पूछताछ के बाद मामले की पूरी परतें खुल गईं। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने बड़कागांव थाना क्षेत्र के पिपराडीह से सोनू कुमार, राहुल उर्फ लोलो, अमन कुमार उर्फ रोहन और मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया, जिन्हें ट्रांजिट रिमांड पर हजारीबाग लाया गया। इसके अतिरिक्त कोल्घटी से एक विधि-विवादित किशोर को भी निरुद्ध किया गया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से कई का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वे पहले भी कई संगीन मामलों में शामिल रहे हैं। इस पूरे ऑपरेशन में लोहसिंघना, बड़कागांव और पेलावल पुलिस के साथ तकनीकी शाखा की भूमिका सराहनीय रही।

