विरासत और अनुशासन का नया अध्याय 'टास्क मास्टर' डॉ. प्रणिता ने संभाली विनोबा भावे विश्वविद्यालय की कमान
हजारीबाग/रांची। विनोबा भावे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। रांची स्थित लोकभवन सचिवालय के आदेशानुसार रसायनशास्त्र विभाग की विदुषी प्राध्यापिका डॉ. प्रणिता को विश्वविद्यालय का नया कुलसचिव (रजिस्ट्रार) नियुक्त किया गया है। इस अहम जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए डॉ. प्रणिता ने गुरुवार को तत्काल प्रभाव से अपना पदभार ग्रहण कर लिया, जिसके बाद कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने उन्हें बधाई देते हुए सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
डॉ. प्रणिता का यह चयन न केवल उनकी वरिष्ठता बल्कि उनकी कार्यशैली का भी सम्मान है। वर्ष 2008 में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की अनुशंसा पर विश्वविद्यालय सेवा में आईं डॉ. प्रणिता की छवि एक बेहद अनुशासित और सख्त प्रशासक की रही है। अकादमिक गलियारों में उन्हें एक 'टास्क मास्टर' के रूप में जाना जाता है, जो समयबद्धता और नियमों के अनुपालन में कोई समझौता नहीं करतीं। उनकी नियुक्ति से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अब अपनी कार्यप्रणाली में कसावट और पारदर्शिता लाने के प्रति गंभीर है।
नव-नियुक्त कुलसचिव को शैक्षणिक और प्रशासनिक दक्षता विरासत में मिली है। वे रसायन शास्त्र के मूर्धन्य विद्वान और लब्धप्रतिष्ठित प्राध्यापक स्वर्गीय प्रो. राम यतन प्रसाद की सुपुत्री हैं। उनके पिता ने उस दौर में छात्रों के लिए रसायन शास्त्र की सुलभ पुस्तकें लिखी थीं, जब अध्ययन सामग्री का घोर अभाव था। बाद में उन्होंने कुलपति और प्रतिकुलपति के रूप में विभिन्न विश्वविद्यालयों को अपनी सेवाएं दीं। आज डॉ. प्रणिता अपने पिता की उसी समृद्ध शैक्षणिक विरासत और प्रशासनिक मूल्यों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं। पदभार ग्रहण करने के साथ ही विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने उन्हें बधाइयां दीं और उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय नए कीर्तिमान स्थापित करे
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