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Editor: Naresh Prasad Soni
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विरासत और अनुशासन का नया अध्याय 'टास्क मास्टर' डॉ. प्रणिता ने संभाली विनोबा भावे विश्वविद्यालय की कमान

विरासत और अनुशासन का नया अध्याय  'टास्क मास्टर' डॉ. प्रणिता ने संभाली विनोबा भावे विश्वविद्यालय की कमान

हजारीबाग/रांची। विनोबा भावे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। रांची स्थित लोकभवन सचिवालय के आदेशानुसार रसायनशास्त्र विभाग की विदुषी प्राध्यापिका डॉ. प्रणिता को विश्वविद्यालय का नया कुलसचिव (रजिस्ट्रार) नियुक्त किया गया है। इस अहम जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए डॉ. प्रणिता ने गुरुवार को तत्काल प्रभाव से अपना पदभार ग्रहण कर लिया, जिसके बाद कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने उन्हें बधाई देते हुए सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

डॉ. प्रणिता का यह चयन न केवल उनकी वरिष्ठता बल्कि उनकी कार्यशैली का भी सम्मान है। वर्ष 2008 में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की अनुशंसा पर विश्वविद्यालय सेवा में आईं डॉ. प्रणिता की छवि एक बेहद अनुशासित और सख्त प्रशासक की रही है। अकादमिक गलियारों में उन्हें एक 'टास्क मास्टर' के रूप में जाना जाता है, जो समयबद्धता और नियमों के अनुपालन में कोई समझौता नहीं करतीं। उनकी नियुक्ति से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अब अपनी कार्यप्रणाली में कसावट और पारदर्शिता लाने के प्रति गंभीर है।

नव-नियुक्त कुलसचिव को शैक्षणिक और प्रशासनिक दक्षता विरासत में मिली है। वे रसायन शास्त्र के मूर्धन्य विद्वान और लब्धप्रतिष्ठित प्राध्यापक स्वर्गीय प्रो. राम यतन प्रसाद की सुपुत्री हैं। उनके पिता ने उस दौर में छात्रों के लिए रसायन शास्त्र की सुलभ पुस्तकें लिखी थीं, जब अध्ययन सामग्री का घोर अभाव था। बाद में उन्होंने कुलपति और प्रतिकुलपति के रूप में विभिन्न विश्वविद्यालयों को अपनी सेवाएं दीं। आज डॉ. प्रणिता अपने पिता की उसी समृद्ध शैक्षणिक विरासत और प्रशासनिक मूल्यों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं। पदभार ग्रहण करने के साथ ही विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने उन्हें बधाइयां दीं और उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय नए कीर्तिमान स्थापित करे

गा।

हजारीबाग में 'खाद्य सुरक्षा' की अलख जगाने गांवों की ओर निकला जागरूकता रथ, डीडीसी ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

हजारीबाग:


समाहरणालय परिसर बुधवार को एक नई प्रशासनिक पहल का गवाह बना, जहां जन-वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा योजनाओं को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता रथ को रवाना किया गया। उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह के निर्देश पर उप विकास आयुक्त रिया सिंह ने इस प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर क्षेत्र भ्रमण के लिए विदा किया। यह जागरूकता रथ केवल एक प्रचार माध्यम नहीं, बल्कि पारदर्शिता और सशक्तिकरण का वह जरिया है जो जिले के सुदूरवर्ती प्रखंडों और गांवों में जाकर आम नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति सजग करेगा।

इस व्यापक अभियान का मुख्य ध्येय खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना है। यह रथ ग्रामीणों को 'वन नेशन-वन राशन कार्ड' जैसी क्रांतिकारी सुविधाओं और ऑनलाइन आवेदन की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराएगा, साथ ही पीजीएमएस पोर्टल के माध्यम से समस्याओं के समाधान की राह भी दिखाएगा। प्रशासन ने इस पहल के जरिये अयोग्य लाभुकों को भी कड़ा संदेश देने का प्रयास किया है। रथ के माध्यम से यह स्पष्ट चेतावनी दी जाएगी कि यदि कोई अपात्र व्यक्ति गलत तरीके से या धोखाधड़ी कर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहा है, तो उस पर सख्त दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस चलते-फिरते प्रचार केंद्र के माध्यम से झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री नमक और दाल वितरण योजना, सोना-सोबरन धोती-साड़ी योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम जैसी महत्वपूर्ण पहलों की विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। प्रशासन का प्रयास है कि जानकारी के अभाव में कोई भी जरूरतमंद अपने वाजिब हक से वंचित न रहे। इस अवसर पर सदर अनुमंडल पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी और जिला योजना पदाधिकारी सहित प्रशासन के कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे, जो इस अभियान की गंभीरता और प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


केमिस्ट्री हब के होनहारों पर बरसे लैपटॉप और मेडल, युवा नेता गौतम बोले- बेरोजगारी का दर्द समझता हूं, इसलिए शिक्षा ही एकमात्र हथियार




केमिस्ट्री हब के होनहारों पर बरसे लैपटॉप और मेडल, युवा नेता गौतम बोले- बेरोजगारी का दर्द समझता हूं, इसलिए शिक्षा ही एकमात्र हथियार

हजारीबाग। शहर के पैराडाइज रिजॉर्ट में रविवार को प्रतिभा और परिश्रम का अनूठा संगम देखने को मिला, मौका था 'केमिस्ट्री हब' कोचिंग सेंटर द्वारा आयोजित भव्य विदाई सह सम्मान समारोह का। इस रंगारंग कार्यक्रम में संस्थान के 11वीं और 12वीं कक्षा के सैकड़ों विद्यार्थियों को न केवल विदाई दी गई, बल्कि उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। समारोह का मुख्य आकर्षण वे मेधावी छात्र रहे जिन्होंने केमिस्ट्री में 98 से 99 प्रतिशत अंक हासिल कर संस्थान का मान बढ़ाया है; इन होनहारों को मुख्य अतिथियों ने लैपटॉप, मेडल और शील्ड देकर पुरस्कृत किया।

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आदर्श युवा संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष और चर्चित युवा नेता गौतम कुमार ने विद्यार्थियों में जोश भरते हुए एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि वे खुद एक युवा हैं और बेरोजगारी के दंश को बखूबी समझते हैं, इसलिए उनका मानना है कि कड़ी शिक्षा ही वह एकमात्र हथियार है जिससे भविष्य की चुनौतियों को जीता जा सकता है। गौतम कुमार ने अपने संघर्षों को साझा करते हुए कहा कि यदि उन्होंने कम उम्र में समाज सेवा और आंदोलनों की राह न चुनी होती, तो आज उन्हें युवाओं के बीच खड़ा होने का यह सौभाग्य नहीं मिलता। डाढ़ा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि दयानand मेहता ने भी मंच साझा किया और संस्थान के निदेशक बसंत मेहता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में एक शिक्षक के रूप में हजारों बच्चों का भविष्य संवारना और गुरु का दर्जा प्राप्त करना किसी स्टारडम से कम नहीं है, यह पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

​संस्थान के निदेशक बसंत कुमार मेहता ने अपनी सफलता का श्रेय कड़े संघर्ष को देते हुए बताया कि वे स्वयं एक बेहद गरीब परिवार से आते हैं, लेकिन आज हजारों बच्चों को शिक्षित होते देख उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती है। समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरा माहौल उत्सवमय हो गया। अंत में अतिथियों ने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने का आह्वान किया।

जीएम कॉलेज इचाक में खेल महाकुंभ का आगाज, 200 मीटर दौड़ में बालिकाओं ने दिखाया दम, प्राचार्य ने कहा- देश में गूंज रहा हमारे छात्रों का नाम

जीएम कॉलेज इचाक में खेल महाकुंभ का आगाज, 200 मीटर दौड़ में बालिकाओं ने दिखाया दम, प्राचार्य ने कहा- देश में गूंज रहा हमारे छात्रों का नाम


इचाक। किताबी ज्ञान के साथ-साथ शारीरिक दक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जीएम महाविद्यालय, इचाक में तीन दिवसीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ सोमवार को हुआ। महाविद्यालय परिसर में उत्साह और प्रतिस्पर्धा का अद्भुत नजारा तब देखने को मिला जब प्राचार्य शंभू कुमार ने 200 मीटर बालिका दौड़ को हरी झंडी दिखाकर प्रतियोगिता का विधिवत आगाज किया। पहले ही दिन विद्यार्थियों ने ट्रैक एंड फील्ड से लेकर पारंपरिक खेलों में जमकर पसीना बहाया। बालिकाओं की दौड़ के साथ शुरू हुए इस आयोजन में रस्सी कूद, भाला फेंक, चक्का फेंक, गोला फेंक और कबड्डी जैसी विधाओं में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

​खेलकूद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्राचार्य शंभू कुमार ने कहा कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बौद्धिक और मानसिक विकास की कुंजी है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं अपनी खेल प्रतिभा के दम पर अब पूरे देश में संस्थान का नाम रोशन कर रहे हैं। वहीं, खेलकूद प्रभारी शिक्षक संजीत कुमार यादव ने प्रतिभागियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब युवा मोबाइल और किताबों में सिमट कर रह गए हैं, ऐसे आयोजन उन्हें सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। खेल से एकाग्रता, निर्णय लेने की क्षमता और टीम भावना का विकास होता है, जो भविष्य में उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

​आयोजन समिति ने बताया कि यह प्रतियोगिता अगले दो दिनों तक जारी रहेगी, जिसमें जीत-हार से परे आपसी भाईचारे और नेतृत्व क्षमता को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इस तीन दिवसीय खेल महाकुंभ को सफल बनाने में महाविद्यालय प्रभारी पंकज कुमार, शिक्षक रत्नेश कुमार राणा, अजीत हंसदा, संगम कुमारी, संजीत यादव, रवि कुमार महतो, पार्वती कुमारी, विनोद कुमार, कृष्ण कुमार, राजकुमार, प्रिया कुमारी और सुनीता टोप्पो सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

ज्ञान के साथ संस्कारों की नींव पर खड़ा होगा विकसित भारत, रावण और दुर्योधन के पास कौशल था पर मूल्य नहीं- स्वामी भावेशानंद

ज्ञान के साथ संस्कारों की नींव पर खड़ा होगा विकसित भारत, रावण और दुर्योधन के पास कौशल था पर मूल्य नहीं: स्वामी भावेशानंद


हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में सोमवार को विवेकानंद जयंती पखवाड़ा के तहत एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जहां शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण पर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम में विवि का माहौल तब और भी आध्यात्मिक हो गया जब मुख्य वक्ता रामकृष्ण मिशन रांची के सचिव स्वामी भावेशानंद जी महाराज ने तीन बार ओमकार के उद्घोष के साथ अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने सभागार में मौजूद सैकड़ों विद्यार्थियों और शिक्षाविदों को स्पष्ट संदेश दिया कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं में केवल ज्ञान और कौशल का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मूल्यों का विकास अनिवार्य है। उन्होंने रावण और दुर्योधन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन पौराणिक पात्रों में ज्ञान और कौशल की कोई कमी नहीं थी, लेकिन मूल्यों के अभाव ने उनका पतन किया, इसलिए आज के युवाओं को चरित्र निर्माण पर जोर देना होगा।

​स्वामी भावेशानंद ने भारत के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय का जिक्र किया, जहां कभी 82 राष्ट्रों के 9000 से अधिक विद्यार्थी एक ही परिसर में ज्ञान अर्जित करते थे और वहां इतना विशाल पुस्तक भंडार था कि उसे जलने में नौ महीने लग गए। उन्होंने कहा कि एक हजार वर्षों के विदेशी शासन ने हमारी स्थिति बदल दी, लेकिन अब भारत दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र है। स्वामी विवेकानंद ने कन्याकुमारी में जिस दिव्य दृष्टि से भारत के पुनरुत्थान को देखा था, उसे आज की युवा पीढ़ी को ही साकार करना है। उनके अनुसार, सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति में आत्मविश्वास भरे, उसे स्वावलंबी बनाए और मस्तिष्क की शक्ति में वृद्धि करे। सही और गलत का भेद समझने वाली विवेकपूर्ण बुद्धि ही भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन करेगी।

​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने विद्यार्थियों में साहस भरने का काम किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में जब 'सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका' कहा, तो वहां बजी तालियों की गूंज आज भी सुनाई देती है। कुलपति ने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे विवेकानंद की तरह हवा के विपरीत खड़े होने का साहस विकसित करें। उन्होंने कहा कि दुनिया ने भारत से ही चरित्र और नीति का पाठ पढ़ा है, लेकिन आज विडंबना है कि हम अपनी ही शक्तियों को भूलकर पश्चिम की ओर देख रहे हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे उठें, जागें और तब तक न रुकें जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। कुलपति ने विद्यार्थियों को अर्थपूर्ण सवाल पूछने और सही के लिए खड़े होने की सलाह दी, साथ ही आश्वस्त किया कि जब छात्र जागृत हो जाएंगे तो शिक्षक अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार मिलेंगे।

​इस वैचारिक महाकुंभ में स्वामी विवेकानंद युवा महामंडल के गजानन पाठक, धर्मेंद्र सिंह, डॉ. राजकुमार चौबे और डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में एक रोचक प्रश्नोत्तरी सत्र का भी आयोजन हुआ, जिसने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को नया आयाम दिया। इसके पूर्व, भाषण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को कुलपति ने प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया। मां संगीतायन संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भक्ति गीतों से पूरे वातावरण को रसमय बना दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मृत्युंजय प्रसाद ने और स्वागत भाषण डॉ. सुबोध कुमार सिंह ने किया।

अब घर बैठे सुलझेंगी पिएम किसान सम्मान निधिऔर खेती-किसानी की उलझनें, झारखण्ड सरकार ने अन्नदाताओं की मदद के लिए जारी किया हेल्पलाइन नंबर

अब घर बैठे सुलझेंगी पिएम किसान सम्मान निधि

और खेती-किसानी की उलझनें, झारखण्ड सरकार ने अन्नदाताओं की मदद के लिए जारी किया हेल्पलाइन नंबर

रांची: झारखण्ड के किसानों को अब अपनी फसलों, सरकारी योजनाओं या खेती से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे क्योंकि राज्य सरकार ने अन्नदाताओं की सुविधा के लिए एक समर्पित 'किसान कॉल सेंटर' की शुरुआत की है। कृषि निदेशालय और झारखण्ड सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य राज्य के दूर-दराज गांवों में बैठे किसान तक सरकारी मदद पहुँचाना है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के नेतृत्व में शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत अब किसान भाई-बहन सोमवार से शनिवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अपनी शिकायतें या जानकारी दर्ज करा सकते हैं।

इस कॉल सेंटर के माध्यम से सरकार ने कृषि से जुड़े लगभग हर पहलू को कवर करने की कोशिश की है। किसान अब घर बैठे ही पीएम किसान योजना, केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड), मृदा जांच, बीज विनिमय और वितरण जैसी बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ले सकते हैं। इतना ही नहीं, यदि किसी किसान को खाद या उर्वरक मिलने में दिक्कत हो रही है या कोई डीलर तय कीमत (एमआरपी) से ज्यादा पैसे मांग रहा है, तो उसकी शिकायत भी तुरंत इसी नंबर पर दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा झारखण्ड कृषि ऋण माफी योजना, किसान समृद्धि योजना, मिलेट मिशन और बिरसा फसल विस्तार योजना जैसी महत्वपूर्ण स्कीमों का लाभ कैसे उठाना है, इसकी भी पूरी जानकारी विशेषज्ञ उपलब्ध कराएंगे।

सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए अधिकारियों और कर्मियों के कार्यकलाप से जुड़ी शिकायतों को भी सुनने का प्रावधान रखा है। तकनीकी युग को ध्यान में रखते हुए संपर्क के कई माध्यम जारी किए गए हैं। किसान टोल फ्री नंबर 1800-123-1136 पर कॉल करने के अलावा व्हाट्सप्प या एसएमएस नंबर 8797891222 के जरिए भी जुड़ सकते हैं। पढ़े-लिखे युवा किसान ईमेल info@kccjharkhand.in या वेबसाइट kccjharkhand.in के माध्यम से भी अपनी बात विभाग तक पहुँचा सकते हैं। यह पहल न केवल किसानों के समय और पैसे की बचत करेगी बल्कि राज्य में कृषि व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने में भी मील का पत्थर साबित होगी।


हिंद महासागर में भारत की वैज्ञानिक कूटनीति का नया अध्याय, आठ देशों के ऐतिहासिक सफर पर निकला आईएनएस सागरध्वनि


हिंद महासागर में भारत की वैज्ञानिक कूटनीति का नया अध्याय, आठ देशों के ऐतिहासिक सफर पर निकला आईएनएस सागरध्वनि

देश : रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर हिंद महासागर में वैज्ञानिक सहयोग और कूटनीतिक रिश्तों को नई धार देने के लिए 'सागर मैत्री-5' मिशन का आगाज कर दिया है। कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान से भारत के प्रतिष्ठित समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि को रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मिशन केवल एक समुद्री यात्रा नहीं, बल्कि भारत सरकार के 'महासागर' (MAHASAGAR) विजन के तहत पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा और विकास के साझा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम है।

​इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत आईएनएस सागरध्वनि 1962-65 के दौरान आईएनएस कृष्णा द्वारा तय किए गए ऐतिहासिक समुद्री रास्तों पर दोबारा सफर करेगा। यह पोत हिंद महासागर रिम के आठ प्रमुख देशों—ओमान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और म्यांमार—के साथ वैज्ञानिक संबंधों को मजबूत करेगा। इस मिशन की शुरुआत मालदीव के साथ सहयोगी समुद्र विज्ञान अध्ययनों से हो रही है, जिससे इन देशों के वैज्ञानिकों के बीच संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का नया रास्ता खुलेगा। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह सफर भारत की 'मैत्री' पहल (मरीन एंड एलाइड इंटरडिसिप्लिनरी ट्रेनिंग एंड रिसर्च इनिशिएटिव) का एक अहम हिस्सा है।

​डीआरडीओ की नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (एनपीओएल) द्वारा डिजाइन किया गया और जीआरएसई द्वारा निर्मित यह जहाज समुद्री ध्वनिक अनुसंधान में भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। मिशन के दौरान यह पोत समुद्र के भीतर की गतिविधियों और महत्वपूर्ण ध्वनिक डेटा को इकट्ठा करेगा, जो भारतीय नौसेना के लिए 'अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस' (यूडीए) हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगा। 1994 में कमीशन किया गया आईएनएस सागरध्वनि पिछले तीन दशकों से भारत की समुद्री वैज्ञानिक क्षमताओं की रीढ़ बना हुआ है और अब यह सागर मैत्री मिशन के जरिए पड़ोसी मुल्कों के साथ तकनीक, विश्वास और सहयोग का एक मजबूत पुल तैयार करने निकल पड़ा है।

विनोबा भावे विश्वविद्यालय में गूंजेगा स्वामी विवेकानंद के विचारों का शंखनाद

विनोबा भावे विश्वविद्यालय में गूंजेगा स्वामी विवेकानंद के विचारों का शंखनाद


19 जनवरी को रांची रामकृष्ण मिशन के सचिव देंगे चरित्र निर्माण का मंत्र

हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय का स्वामी विवेकानंद सभागार आगामी 19 जनवरी को आध्यात्म, राष्ट्रभक्ति और युवा चेतना के ओजस्वी विचारों से गुंजायमान होने वाला है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वामी विवेकानंद जयंती समारोह को भव्य और प्रेरणादायक बनाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है, जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर रांची मोराबादी स्थित रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी भवेशानंद जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर चंद्र भूषण शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न होगा, जिनकी विशेष पहल पर हजारीबाग के विद्यार्थियों को रामकृष्ण मिशन के सानिध्य में जीवन दर्शन सीखने का यह दुर्लभ अवसर मिल रहा है।

​राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने आयोजन की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए बताया कि यद्यपि स्वामी जी की जयंती 12 जनवरी को मनाई जाती है, लेकिन उस दिन रामकृष्ण मिशन में व्यस्तता के चलते संन्यासियों का आगमन संभव नहीं हो पाता। कुलपति की यह प्रबल इच्छा थी कि विश्वविद्यालय के छात्र सीधे किसी विद्वान संन्यासी के मुख से स्वामी जी के आदर्शों को सुनें और आत्मसात करें, इसी उद्देश्य से यह विशेष आयोजन 19 जनवरी को पूर्वाहन 11 बजे निर्धारित किया गया है। इस गरिमामयी समारोह में 'विकसित भारत' की संकल्पना और भारतीय दृष्टिकोण में स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता पर गहन मंथन किया जाएगा।

​समारोह का एक और प्रमुख आकर्षण हजारीबाग विवेकानंद युवा महामंडल के सहयोग से आयोजित होने वाला चरित्र निर्माण विषयक प्रशिक्षण और प्रश्नोत्तरी सत्र होगा, जो युवाओं को अनुशासित जीवन जीने की कला सिखाएगा। कार्यक्रम के समापन बेला में युवा सप्ताह के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में आयोजित भाषण प्रतियोगिताओं के प्रतिभाशाली विजेताओं को मंच पर पुरस्कृत कर उनका मान बढ़ाया जाएगा। आयोजन समिति के संयोजक डॉ. सुबोध कुमार सिंह 'शिवगीत' और यूसेट के प्राध्यापक डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने विश्वविद्यालय परिवार समेत सभी शिक्षण प्रेमियों को इस ज्ञानयज्ञ में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया है।

ज्ञान ज्योति पैरामेडिकल स्कूल में नवागंतुक छात्रों का आत्मीय स्वागत, रवि मिस्टर और सानिया चुनी गईं मिस फ्रेशर

ज्ञान ज्योति पैरामेडिकल स्कूल में नवागंतुक छात्रों का आत्मीय स्वागत, रवि मिस्टर और सानिया चुनी गईं मिस फ्रेशर

हजारीबाग: पी.डब्ल्यू.डी. चौक स्थित ज्ञान ज्यो


ति पैरामेडिकल स्कूल के प्रांगण में नए शैक्षणिक सत्र के विद्यार्थियों के लिए एक भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। सीनियर छात्रों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में चारों ओर उत्साह और हर्षोल्लास का माहौल रहा। दीप प्रज्वलन और मनमोहक स्वागत नृत्य के साथ शुरू हुए इस समारोह ने नए छात्रों को संस्थान की संस्कृति और शैक्षणिक वातावरण से रूबरू कराया। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने नृत्य और गायन की शानदार प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया।


समारोह में मुख्य रूप से मौजूद विद्यालय के सचिव बिनय कुमार ने स्वास्थ्य सेवाओं में पैरामेडिकल स्टाफ की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में पैरामेडिकल कर्मी रीढ़ की हड्डी के समान होते हैं, जो डॉक्टरों के साथ मिलकर मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने नवागंतुक छात्रों को अनुशासन और ईमानदारी के साथ अपने कौशल को निखारने के लिए प्रेरित किया। वहीं प्राचार्य डॉ. संजय कुमार ने छात्रों को जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह देते हुए कहा कि निरंतर मेहनत और सही दिशा ही सफलता की कुंजी है। विभागाध्यक्ष अनीता कुमारी ने भी नए विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।


समारोह का मुख्य आकर्षण मिस्टर और मिस फ्रेशर प्रतियोगिता रही, जिसमें छात्रों के बीच दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले। पुश-अप चैलेंज और साड़ी पहनाने जैसे रोचक खेलों में अपनी प्रतिभा और सूझबूझ दिखाकर रवि कुमार ने मिस्टर फ्रेशर और सानिया ने मिस फ्रेशर का खिताब अपने नाम किया। कार्यक्रम के अंत में नए और पुराने छात्रों ने एक साथ थिरकते हुए आपसी सौहार्द की मिसाल पेश की। इस आयोजन को सफल बनाने में कुनाल गोस्वामी, प्रीति, अंकिता रानी, सौम्या सोनल, पूजा कुमारी और सुजीत कुमार सहित अन्य शिक्षकों एवं छात्रों का विशेष सहयोग रहा।

विभावि में गूंजा स्वामी विवेकानंद का संदेश, दीक्षारम्भ में विशेषज्ञों ने कहा- अध्यात्म और आत्म-समीक्षा से ही गढ़ी जाएगी विकसित भारत की नींव

 

विभावि में गूंजा स्वामी विवेकानंद का संदेश, दीक्षारम्भ में विशेषज्ञों ने कहा- अध्यात्म और आत्म-समीक्षा से ही गढ़ी जाएगी विकसित भारत की नींव


हजारीबाग:​विनोबा भावे विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग में स्वामी विवेकानंद की जयंती और नव-नामांकित छात्रों के लिए आयोजित दीक्षारम्भ कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर अकादमिक सत्र और आध्यात्मिक चिंतन का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. किशोर कुमार गुप्ता और विभागीय शिक्षकों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं पुष्पार्चन कर किया, जिसके बाद नए सत्र के छात्रों और अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया।

​समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पधारे अभिषेक कुमार ने स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान और एमसीए के छात्रों को जीवन प्रबंधन के सूत्र दिए। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में विकसित भारत की इबारत यही युवा पीढ़ी लिखेगी, लेकिन इसके लिए उन्हें अध्यात्म से जुड़ना होगा। उन्होंने छात्रों को 'आत्मबोध' और 'तत्वबोध' का मंत्र देते हुए समझाया कि प्रत्येक सुबह को नया जन्म मानकर दिनचर्या की योजना बनानी चाहिए और रात को सोने से पहले उसे मृत्यु मानकर दिनभर के कर्मों की निष्पक्ष आत्म-समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यही साधना युवाओं को आत्मसंयमी और आत्मविश्वास से परिपूर्ण बनाएगी।

​इस मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. किशोर कुमार गुप्ता ने दीक्षारम्भ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यूजीसी द्वारा निर्धारित यह एक नियोजित कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें उन क्रियाकलापों के प्रति जागरूक करना है जो उनके समग्र व्यक्तित्व निर्माण में सहायक हों, साथ ही उन्हें विषय से संबंधित संस्थानों का भ्रमण भी कराया जाता है। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन सहायक शिक्षिका मोहसिना और कपिल ने किया, जबकि डॉ. राजेंद्र मिस्त्री ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। आयोजन को सफल बनाने में संजू, प्रभात, ईशा, अर्पिता, राज और दिलीप की भूमिका सराहनीय रही।

रोजगार की दिशा में हजारीबाग के युवाओं की ऊंची उड़ान, अमीन ट्रेनिंग में महादेव सर संस्थान के सभी 23 विद्यार्थियों ने लहराया सफलता का परचम


 

रोजगार की दिशा में हजारीबाग के युवाओं की ऊंची उड़ान, अमीन ट्रेनिंग में महादेव सर संस्थान के सभी 23 विद्यार्थियों ने लहराया सफलता का परचम

हजारीबाग: शहर के कोरा रोड स्थित महादेव सर अमीन ट्रेनिंग सेंटर ने एक बार फिर कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। संस्थान के संस्थापक महादेव कुमार साव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बताया कि 10 जनवरी 2026 को घोषित हुए परीक्षा परिणामों में संस्थान के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस परीक्षा में कुल 23 विद्यार्थी शामिल हुए थे और सभी ने अपनी मेहनत और उचित मार्गदर्शन के दम पर सफलता हासिल की है। महादेव डिग्री कॉलेज चतरा और झारखंड राज्य खुला विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त इस संस्थान ने हजारीबाग में अमीन और लैंड सर्वेयर की ट्रेनिंग में एक नया मानक स्थापित किया है। संस्थापक ने उत्तीर्ण सभी छात्रों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि यह परिणाम संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रमाण है।

​प्रेस वार्ता के दौरान संस्थान की विश्वसनीयता और रोजगार के अवसरों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह केंद्र भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और इसका पंजीकरण संख्या SCPR068 है। यहाँ शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों और किसानों को भू-मापक, सर्वे नियम और भूमि चकबंदी का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। संस्थान में दो महीने, तीन महीने और एक साल के डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध हैं, जो छात्रों को अमीन बनने का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं। यहाँ से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवा न केवल अपना स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं, बल्कि सरकारी और गैर-सरकारी विभागों जैसे राजस्व विभाग, वन विभाग, अंचल अमीन, और सीसीएल, बीसीसीएल, एनटीपीसी जैसी बड़ी परियोजनाओं में भी सेवा दे सकते हैं। संस्थान का दावा है कि उनके यहाँ से प्रशिक्षित सैकड़ों छात्र आज हजारीबाग, रांची और दुमका समेत कई जिलों में बंदोबस्त कार्यालयों में अमीन के पद पर कार्यरत हैं।

​विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने हजारीबाग में बड़कागांव रोड और कोरा पोस्ट ऑफिस के पास अपनी शाखाओं का विस्तार किया है। यहाँ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाई की व्यवस्था है, साथ ही मेधावी और जरूरतमंद छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। संस्थान आधुनिक तरीके से जमीन बंटवारा और मापी का प्रशिक्षण देता है और प्लेसमेंट की गारंटी के साथ सीमित सीटों पर नामांकन लेता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जो युवा हुनरमंद बनकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं, उनके लिए अमीन ट्रेनिंग एक बेहतरीन विकल्प है, जहाँ रविवार को विशेष कक्षाओं की भी व्यवस्था है ताकि कामकाजी लोग भी इसका लाभ उठा सकें।

दारू पुलिस का शिकंजा, अलग-अलग मामलों में कविलासी के दो आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

 

दारू पुलिस का शिकंजा, अलग-अलग मामलों में कविलासी के दो आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल


हजारीबाग/दारू। जिले में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से दारू पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए दो अलग-अलग मामलों में नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। दारू थाना प्रभारी इकबाल हुसैन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कविलासी गांव में दबिश दी और कानून के शिकंजे से बच रहे दो आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्तों में कविलासी निवासी मोहम्मद हकीम का पुत्र ताज मोहम्मद और रकीब मियां का पुत्र मोहम्मद साजिद शामिल है।

​ताज मोहम्मद को दारू थाना कांड संख्या 02/26 में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है, जबकि मोहम्मद साजिद की गिरफ्तारी कांड संख्या 03/26 के तहत की गई है। दोनों ही मामलों में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कागजी प्रक्रिया पूरी की और गिरफ्तार अभियुक्तों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में असामाजिक तत्वों के बीच हड़कंप है और प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून तोड़ने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

15 दिनों में रोशन होंगे जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र, डीडीसी ने अधिकारियों को दिया अल्टीमेटम

 15 दिनों में रोशन होंगे जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र, डीडीसी ने अधिकारियों को दिया अल्टीमेटम

हजारीबाग। जिले के नौनिहालों को अब अंधेरे या बिजली के अभाव में समय नहीं बिताना पड़ेगा। उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह के निर्देश पर जिला प्रशासन ने आंगनबाड़ी केंद्रों की सूरत बदलने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में शनिवार को समाहरणालय सभाकक्ष में उप विकास आयुक्त रिया सिंह ने एक अहम समीक्षा बैठक की, जिसमें बिजली विभाग और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। डीडीसी ने दो टूक शब्दों में कहा कि जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। इसके लिए उन्होंने बिजली विभाग के अभियंताओं को महज 15 दिनों का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी केंद्रों तक बिजली पहुंच जानी चाहिए। कनेक्शन स्थापित होने की पुष्टि के लिए सीडीपीओ और बिजली विभाग के अभियंताओं को एक संयुक्त रिपोर्ट (ज्वाइंट रिपोर्ट) भी सौंपनी होगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि धरातल पर काम पूरा हो चुका है।

बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त ने सिर्फ बिजली ही नहीं, बल्कि अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन केंद्रों पर शौचालय निर्माण या रेन वाटर हार्वेस्टिंग का काम अधूरा है, वहां युद्धस्तर पर काम करते हुए उसे समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। डीडीसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े इन मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि आंगनबाड़ी केंद्र सर्वसुविधायुक्त हों ताकि वहां आने वाले बच्चों को बेहतर माहौल मिल सके। इस समीक्षा बैठक में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी शिप्रा सिन्हा, बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सीडीपीओ और महिला पर्यवेक्षिकाओं ने भाग लिया और मौजूदा स्थिति से प्रशासन को अवगत कराया।


हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर उपायुक्त ने जिला स्तरीय बैठक आयोजित की

हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर उपायुक्त ने जिला स्तरीय बैठक आयोजित की

हजारीबाग: उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिले में हाथियों की आवाजाही से उत्पन्न समस्याओं एवं उससे होने वाली घटनाओं की समीक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य हाथी प्रभावित क्षेत्रों में आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा जान-माल की क्षति को न्यूनतम करना था।

बैठक में पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी  मौन प्रकाश ने बताया कि हाथियों से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए आम लोगों में जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जानकारी दी कि हाथियों से हुई मृत्यु, फसलों की क्षति, अनाज भंडारण एवं मकानों के नुकसान की स्थिति में सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा का भुगतान किया जाता है।

उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों से मुआवजा भुगतान से संबंधित अंचल स्तर पर लंबित आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने पर बल दिया। साथ ही, मृत्यु के मामलों में संबंधित थाना प्रभारी द्वारा एफआईआर की प्रति शीघ्र वन विभाग को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया, ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर मुआवजा मिल सके।

स्थानीय स्तर पर हाथियों की आवाजाही की सूचना आमजन तक शीघ्र पहुँचाने के लिए माइकिंग आदि माध्यमों के उपयोग पर जोर दिया गया। इस क्रम में डीएफओ द्वारा जानकारी दी गई कि सरकार द्वारा विकसित *“Hamar Haathi 2.0”* नामक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से हाथियों की लोकेशन की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों एवं विशेष रूप से हाथी प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों से इस एप्लिकेशन https://play.google.com/store/apps/details?id=com.kalpvaig.jktracker&pcampaignid=web_share को प्ले-स्टोर से डाउनलोड कर उपयोग करने की अपील की।

उपायुक्त  शशि प्रकाश सिंह ने बैठक में बताया कि हाथियों के प्रकोप से लोगों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रशिक्षु आईएफएस को जिला नियंत्रण कक्ष का नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला नियंत्रण कक्ष 24×7 संचालित रहेगी। हाथियों के आगमन से संबंधित सूचना सभी पदाधिकारी एवं प्रभावित क्षेत्र के लोग सीधे जिला नियंत्रण कक्ष को देंगे। नियंत्रण कक्ष से संबंधित क्षेत्र के मुखिया एवं ग्रामीणों को तत्काल सूचित किया जाएगा, जिससे समय रहते आवश्यक सावधानियाँ बरती जा सकें एवं प्रशासनिक कदम उठाए जा सकें।


उपायुक्त ने सभी संबंधित अंचलाधिकारियों को हाथी से संबंधित मामलों को गंभीरता से लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हाथियों द्वारा हुए नुकसान के लिए मुआवजा भुगतान जिम्मेदारी के साथ समय पर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया गया कि हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को सुरक्षित एवं निर्बाध रखा जाए। इसके अतिरिक्त हाथी कॉरिडोर क्षेत्रों को अतिक्रमण-मुक्त एवं साफ-सुथरा रखने का भी निर्देश दिया गया।

हाथियों से बचने के लिए क्या करें?

1. हाथी आने की सूचना तत्काल निकटवर्ती वन विभाग के कर्मचारियों को दें।

2. यदि हाथी से सामना हो जाए तो तुरंत उसके लिए रास्ता छोड़ें। पहाड़ी स्थानों में सामना होने पर ढलान की ओर दौड़ें, ऊपर की ओर नहीं। सीधे न दौड़कर आड़े-तिरछे दौड़ें, कुछ दूर दौड़ने पर गमछा, पगड़ी, टोपी अथवा कोई वस्त्र फेंक दें ताकि कुछ समय तक हाथी उसमें उलझा रहे और आपको सुरक्षित स्थान पर पहुँचने का मौका मिल जा

3. अगर हाथी गांव में आ ही जाता है तो मशाल के साथ कम से कम आठ-दस लोग मिलकर एक साथ ढोल या टीना पीटकर उसे भगाने का प्रयास करें। इस प्रक्रिया में भी हाथी के बहुत नजदीक न जाएं। हाथी प्रभावित क्षेत्रों के गांवों में रात्रि में दल बनाकर मशाल के साथ पहरा दें।

4. अगर मचान बनाकर खेत की रखवाली करनी हो, तो मचान ऊँचा बनाएं, विशेषकर उसे ऊँचे मजबूत पेड़ के ऊपर बनाएं और उसे नीचे जमीन पर लकड़ी से आग जलाये रखें।

5. हाथी जिस जंगल में दिखे उस क्षेत्र में चारा, जलावन एकत्र करने नहीं जाएं। हाथी जिन क्षेत्रों में हो उसके आस-पास के गांवों में संध्या से प्रातः काल तक आवागमन से बचें।

6. हाथी द्वारा कान खड़े कर, सुंढ़ ऊपर कर आवाज देना, इस बात का संकेत है कि वह आप पर हमला करने आ रहा है। अतः तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जाए।

7. हाथियों की सूंघने की शक्ति अत्यधिक प्रबल होती है। अतः हाथी को भगाने के क्रम में हवा की दिशा का ध्यान रखें।

8. वैज्ञानिक प्रयोग के आधार पर पाया गया है कि मधुमक्खियों के गुनगुनाने की आवाज हाथियों को भगाने में सहायक साबित होती है।

हाथियों से बचने के लिए क्या न करें?

1. हाथी के चारों ओर कौतुहलवश भीड़ न लगाएं। हाथियों के चलने दौड़ने की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। अतः हाथी से कम से कम 200 मीटर की दूरी बनाएं रखें। बच्चों, स्त्रियों एवं वृद्धों को कभी भी हाथी के समक्ष नहीं जाने दें।

2. हाथियों को छेड़े नहीं, विशेषकर उन पर पत्थर, तीर, जलता हुआ टायर या मशाल आदि फेंककर प्रहार न करें। पटाखें आदि का प्रयोग से हाथियों को गुस्सा आ सकता है एवं इससे क्षति की संभावना बढ़ सकती है, अतः इसके प्रयोग से बचें।

3. हाथियों को अनाज अथवा अन्य खाद्य सामग्री न दें, क्योंकि इससे उनकी खाद्य सामग्री के प्रति रूचि बढ़ेगी एवं इस कारण वे मकानों को तोड़कर खाद्य सामग्री प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं। हाथी प्रभावित क्षेत्र में जिस कमरे में अनाज का भंडारण हो उसमें न सोएं एवं कुछ दिनों के लिए किसी सुरक्षित जगह पर अनाज को रख दें।

4. क्षेत्र में जबतक हाथी रहे, तबतक हड़िया या देशी शराब (महुआ) नहीं बनाएं। इसका भंडारण भी न करें। हाथी शराब की ओर आकर्षित होते हैं और प्राप्त करने के उद्देश्य से ये घरों को क्षति पहुँचाते हैं।

5. गर्भवती हथिनी अथवा नवजात शिशु के साथ होने पर हथिनी या उसके झुण्ड को भगाने का प्रयास न करें, उसे थोड़ा समय दें।

6. हाथियों को भगाने के क्रम में श्वेत वस्त्र या लाल वस्त्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह रंग उन्हें चिड़चिड़ा बनाता है।

7. हाथी को देखकर पूजा या प्रणाम करने के उद्देश्य से उनके नजदीक न जाएं।

बैठक में पुलिस अधीक्षक 


अंजनी अंजन, उप विकास आयुक्त  रिया सिंह, नगर आयुक्त  ओमप्रकाश गुप्ता, अपर समाहर्ता  संतोष सिंह, प्रशिक्षु आईएएस  आनंद शर्मा, प्रशिक्षु आईएफएस, बरही एसडीओ  जोहन टुडू सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, थाना प्रभारी एवं अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित थे।

हाथी-मानव संघर्ष थामने को सड़क पर उतरा जागरूकता रथ, विधायक प्रदीप प्रसाद ने दिखाई हरी झंडी

हाथी-मानव संघर्ष थामने को सड़क पर उतरा जागरूकता रथ, विधायक प्रदीप प्रसाद ने दिखाई हरी झंडी


नरेश सोनी विशेष संवाददाता 

हजारीबाग। जिले में हाथी और इंसान के बीच बढ़ते संघर्ष पर विराम लगाने और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में शनिवार को एक ठोस पहल की गई। कार्मल चौक स्थित वन विभाग के प्रमंडल कार्यालय से सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने जन-जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह विशेष रथ केवल एक वाहन नहीं बल्कि सुरक्षा का संदेश है जो जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों में घूम-घूमकर लोगों को सतर्क करेगा। इसका मुख्य काम ग्रामीणों को यह बताना है कि हाथियों की आहट मिलने पर उन्हें क्या करना चाहिए, किस तरह का सुरक्षित व्यवहार अपनाना चाहिए और आपातकालीन स्थिति में वन विभाग से कैसे संपर्क साधा जाए। प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है कि सही समय पर सही जानकारी देकर किसी भी संभावित अनहोनी को टाला जा सके ताकि जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोका जा सके।

​इस मौके पर विधायक प्रदीप प्रसाद ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा केवल एक वन्यजीव समस्या नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर जन-सुरक्षा और सामाजिक चेतना से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है और जब ग्रामीण सशक्त होंगे तभी वे आपात स्थिति में सही निर्णय लेकर अपने परिवार की सुरक्षा कर पाएंगे। विधायक ने वन विभाग और आम जनता के बीच तालमेल पर जोर देते हुए कहा कि संयुक्त प्रयासों से ही सह-अस्तित्व का वातावरण बन सकता है। साथ ही उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे केवल जागरूकता तक सीमित न रहें बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखें और किसी भी सूचना पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराएं। कार्यक्रम के दौरान पूर्वी डीएफओ समेत वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी, भाजपा नेता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे जिन्होंने इस पहल को जिले में पर्यावरणीय संतुलन के लिए एक मील का पत्थर बताया।

सड़क सुरक्षा का संदेश देने मैदान में उतरा प्रशासन, बड़कागांव में मीडिया और अधिकारियों के बीच रोमांचक फुटबॉल मैच

सड़क सुरक्षा का संदेश देने मैदान में उतरा प्रशासन, बड़कागांव में मीडिया और अधिकारियों के बीच रोमांचक फुटबॉल मैच


नरेश सोनी विशेष संवाददाता 

बड़कागांव/हजारीबाग। सड़क सुरक्षा के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के लिए हजारीबाग जिला परिवहन कार्यालय ने एक अनोखी और सराहनीय पहल की है। सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत विभागीय निर्देशानुसार जिला परिवहन कार्यालय और बड़कागांव प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय के सहयोग से बड़कागांव में एक भव्य फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। इस मैत्रीपूर्ण मुकाबले में मीडिया और प्रशासन की टीमें आमने-सामने थीं, जहां खेल के माध्यम से जीवन रक्षा का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य केवल खेल का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि लोगों को यातायात नियमों के प्रति गंभीर बनाना था। मैच के दौरान मैदान में उपस्थित खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच सड़क सुरक्षा संबंधी जागरूकता पंपलेट वितरित किए गए। साथ ही सभी को यातायात नियमों का पालन करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की शपथ दिलाई गई। मैच समाप्ति के बाद विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि खेल युवाओं से जुड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है, इसलिए सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए इस फुटबॉल मैच का आयोजन किया गया।

इस मौके पर जिला परिवहन पदाधिकारी वैद्यनाथ कामती ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सड़क पर अनुशासन उतना ही जरूरी है जितना खेल के मैदान में। कार्यक्रम को सफल बनाने में मोटर यान निरीक्षक विजय गौतम, जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक संतोष कुमार, रोड इंजीनियर एनालिस्ट शारीक इकबाल, आईटी सहायक अरविंद कुमार, डिस्ट्रिक्ट रोल आउट मैनेजर रविशंकर और परिवहन कार्यालय के ऑपरेटर दीपक सोनी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह टूर्नामेंट सड़क सुरक्षा माह के दौरान चलाई जा रही विभिन्न जागरूकता गतिविधियों की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हु

आ।

चरित्र निर्माण से ही रखी जाएगी विकसित भारत की नींव', भाषण प्रतियोगिता में शारदा ने मारी बाजी, ज्योति दूसरे और सोनू तीसरे स्थान पर

 

चरित्र निर्माण से ही रखी जाएगी विकसित भारत की नींव', भाषण प्रतियोगिता में शारदा ने मारी बाजी, ज्योति दूसरे और सोनू तीसरे स्थान पर


हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में शुक्रवार को शैक्षणिक वातावरण के बीच एक भव्य भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 'चरित्र निर्माण: विकसित भारत की पृष्ठभूमि' विषय पर आयोजित इस प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और अपने तर्कों से यह साबित किया कि एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण में ईंट-पत्थर से ज्यादा अहमियत नागरिकों के चरित्र और नैतिकता की होती है। प्रतियोगिता में अपनी बेहतरीन वाकपटुता और तार्किक प्रस्तुति के दम पर शारदा कुमारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि ज्योति कुमारी दूसरे और सोनू कुमार तीसरे स्थान पर रहे।

​कार्यक्रम के दौरान कुल दस प्रतिभागियों ने मंच साझा किया और विकसित भारत की परिकल्पना में नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत चरित्र की भूमिका पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि तकनीकी विकास के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और चरित्र का उत्थान ही भारत को विश्व गुरु बना सकता है। प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका विभाग के शोधार्थी अम्शा अहमद, पल्लवी कुमारी और अनुप कुमार ने निभाई, जिन्होंने प्रतिभागियों की विषय-वस्तु और प्रस्तुतीकरण का बारीकी से मूल्यांकन किया।

​कार्यक्रम का सफल संचालन और समन्वय डॉ. पुष्कर कुमार पुष्प द्वारा किया गया। उन्होंने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निखार और सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इस अवसर पर अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एम. कैसर, डॉ. उमेन्द्र सिंह और डॉ. इफ्शा खुर्शीद की गरिमामय उपस्थिति रही, जिन्होंने छात्रों का मार्गदर्शन किया। अंत में मानसी कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया।

हजारीबाग में मौत बनकर घूम रहे जंगली हाथी: बनहा में शौच के लिए निकले किसान को कुचलकर मारा, वन विभाग की सुस्त कार्यशैली पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा


 हजारीबाग में मौत बनकर घूम रहे जंगली हाथी- बनहा में शौच के लिए निकले किसान को कुचलकर मारा, वन विभाग की सुस्त कार्यशैली पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

हजारीबाग: जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों का खूनी तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके चलते शुक्रवार की सुबह एक और परिवार हमेशा के लिए उजड़ गया। बनहा गांव के नवादा टोला में अहले सुबह करीब पांच बजे प्रकृति की गोद में बसा यह गांव उस वक्त चीत्कार से गूंज उठा जब शौच के लिए घर से निकले किसान गणेश गोप का सामना मौत बनकर खड़े जंगली हाथी से हो गया। हाथी ने गणेश गोप पर अचानक हमला कर उन्हें बेरहमी से पटककर कुचल दिया जिससे घटनास्थल पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

मृतक गणेश गोप अपने पीछे पत्नी रोहनी देवी, चार बेटियों और एक बेटे का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठने से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और वन विभाग की टीम आनन-फानन में मौके पर पहुंची। विभाग ने पीड़ित परिवार को तत्काल राहत देते हुए अंतिम संस्कार के लिए पचास हजार रुपये नकद सौंपे और कुल चार लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की, जिसकी शेष राशि कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद दी जाएगी। हालांकि, ग्रामीण मुआवजे से ज्यादा अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखे क्योंकि क्षेत्र में हाथियों की निरंतर आवाजाही ने उनकी नींद उड़ा रखी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर विधायक प्रदीप प्रसाद भी तत्काल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की व्यवस्था कराई और वन विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि मानव-हाथी संघर्ष का कोई ठोस और स्थायी समाधान निकाला जाए। विधायक ने उपायुक्त से भी दूरभाष पर वार्ता कर प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की बात कही। यह घटना एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलती है कि तमाम दावों के बावजूद ग्रामीण इलाकों में लोग भय के साए में जीने को मजबूर हैं और जंगली जानवरों के हमले में अपनी जान गंवा रहे हैं

केंद्र सरकार की बड़ी सौगात, उज्ज्वला योजना के तहत 25 लाख परिवारों को मिलेगा मुफ्त गैस कनेक्शन, चूल्हा और पहली रिफिल भी पूरी तरह फ्री



केन्द्र सरकार की बड़ी सौगात, उज्ज्वला योजना के तहत 25 लाख परिवारों को मिलेगा मुफ्त गैस कनेक्शन, चूल्हा और पहली रिफिल भी पूरी तरह फ्री

हजारीबाग/रांची/नई दिल्ली: देश की गरीब महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाने और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के विस्तार को मंजूरी देते हुए सरकार ने देश भर में 25 लाख अतिरिक्त मुफ्त एलपीजी कनेक्शन जारी करने का निर्णय लिया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, इस फैसले से उन वंचित परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा जिनके पास अब तक रसोई गैस की सुविधा नहीं थी। सरकार की यह पहल न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखेगी बल्कि उनके जीवन स्तर में भी व्यापक सुधार लाएगी। तेल विपणन कंपनियों ने इस योजना को और अधिक कल्याणकारी बनाते हुए घोषणा की है कि नए नामांकित होने वाले सभी लाभार्थियों को गैस कनेक्शन के साथ एलपीजी स्टोव और पहली रिफिल भी पूरी तरह मुफ्त दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, लाभार्थियों को जमा-मुक्त सिलेंडर, प्रेशर रेगुलेटर, सुरक्षा पाइप और डीजीसीसी कार्ड के लिए कोई भी प्रशासनिक शुल्क नहीं देना होगा।

​योजना का लाभ लेने के लिए प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बनाया गया है। इच्छुक आवेदक अपने नजदीकी एलपीजी वितरक, सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) या विभागीय वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए व्यस्क सदस्यों के आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज अनिवार्य होंगे, साथ ही बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण भी जरूरी होगा। सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष राहत देते हुए घोषणा की है कि यदि उनके पास पते का प्रमाण नहीं है, तो वे केवल एक स्व-घोषणा पत्र जमा करके इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह योजना जाति के बंधन से मुक्त है, यानी आवेदन के लिए किसी भी जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। गौरतलब है कि मई 2016 में शुरू हुई इस योजना ने अब तक 10 करोड़ से अधिक परिवारों की रसोई की तस्वीर बदल दी है। आंकड़े बताते हैं कि उज्ज्वला लाभार्थियों के बीच एलपीजी की खपत में लगातार वृद्धि हो रही है, जो इस योजना की सफलता का प्रमाण है। लाभार्थी अपनी सुविधानुसार 14.2 किलोग्राम या 5 किलोग्राम के सिलेंडर का विकल्प भी चुन सकते हैं।

हजारीबाग ने रचा इतिहास: मानवता की मिसाल बनकर उभरा वॉलंटरी ब्लड डोनर्स एसोसिएशन, 86 शिविर लगाकर झारखंड में बनाया सर्वाधिक रक्तदान शिविर का रिकॉर्ड

 हजारीबाग ने रचा इतिहास-


मानवता की मिसाल बनकर उभरा वॉलंटरी ब्लड डोनर्स एसोसिएशन, 86 शिविर लगाकर झारखंड में बनाया सर्वाधिक रक्तदान शिविर का रिकॉर्ड

हजारीबाग: हजारीबाग की धरती ने एक बार फिर मानवता सेवा में पूरे झारखंड के सामने एक नजीर पेश की है। शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक को संजीवनी देने के उद्देश्य से गठित वॉलंटरी ब्लड डोनर्स एसोसिएशन ने सेवा और समर्पण का ऐसा अध्याय लिखा है जिसे प्रदेश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। वर्ष 2025 में संस्था ने न केवल 1253 यूनिट रक्त का संग्रह किया बल्कि सर्वाधिक 86 रक्तदान शिविर आयोजित कर पूरे झारखंड में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। नवंबर 2020 में अपनी स्थापना के बाद से यह संस्था लगातार मानव सेवा में तत्पर है और पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकारी, गैर-सरकारी और स्वैच्छिक रक्तदाताओं के सहयोग से अब तक लगभग 50 हजार यूनिट रक्त का महासंग्रह किया जा चुका है। अकेले वर्ष 2025 में ही जिले में कुल 12,108 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ है जो यह दर्शाता है कि हजारीबाग के रगों में दौड़ता रक्त अब दूसरों की जिंदगी बचाने के काम आ रहा है।

संस्था का सबसे संवेदनशील और सराहनीय पहलू थैलेसीमिया और एचआईवी पीड़ितों के प्रति उनका समर्पण है। इन मरीजों को बिना किसी रिप्लेसमेंट के रक्त उपलब्ध कराया गया और उनकी पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखकर समाज में किसी भी प्रकार के भेदभाव से बचाया गया। 300 से अधिक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाने के लिए एसोसिएशन ने माँ सेवा समिति, फोर्टिस हॉस्पिटल गुरुग्राम, दात्री फाउंडेशन और नारायणा बेंगलुरु के सहयोग से इस वर्ष दो विशाल एचएलए जांच शिविर आयोजित किए। सुखद परिणाम यह रहा कि कई बच्चों का बोन मैरो मैच हुआ और स्थानीय सांसद, विधायक, विभिन्न संस्थाओं एवं कोल इंडिया के आर्थिक सहयोग से उनका मुफ्त इलाज संभव हो सका। इस पहल से कई बच्चों को अब जीवन भर रक्त चढ़ाने की पीड़ा से मुक्ति मिल जाएगी।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर 'ब्लड मैन' के नाम से मशहूर और शहर में रक्तदान की अलख जगाने वाले एसोसिएशन के अध्यक्ष निर्मल जैन ने इस महायज्ञ में आहुति देने वाले सभी रक्तदाताओं, सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं और ब्लड बैंक के डॉक्टर व तकनीशियनों का हृदय से आभार व्यक्त किया है। वहीं महासचिव विनीत छाबड़ा ने इस कीर्तिमान का श्रेय अध्यक्ष के अथक प्रयासों और पूरी टीम की एकजुटता को दिया है। हजारीबाग का यह मॉडल अब पूरे राज्य के लिए प्रेरणा बन गया है कि कैसे सामुदायिक सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति से स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदली जा सकती है और मासूम जिंदगियों को बचाया जा सकता है।


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