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Editor: Naresh Prasad Soni
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अब घर बैठे सुलझेंगी पिएम किसान सम्मान निधिऔर खेती-किसानी की उलझनें, झारखण्ड सरकार ने अन्नदाताओं की मदद के लिए जारी किया हेल्पलाइन नंबर

अब घर बैठे सुलझेंगी पिएम किसान सम्मान निधि

और खेती-किसानी की उलझनें, झारखण्ड सरकार ने अन्नदाताओं की मदद के लिए जारी किया हेल्पलाइन नंबर

रांची: झारखण्ड के किसानों को अब अपनी फसलों, सरकारी योजनाओं या खेती से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे क्योंकि राज्य सरकार ने अन्नदाताओं की सुविधा के लिए एक समर्पित 'किसान कॉल सेंटर' की शुरुआत की है। कृषि निदेशालय और झारखण्ड सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य राज्य के दूर-दराज गांवों में बैठे किसान तक सरकारी मदद पहुँचाना है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के नेतृत्व में शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत अब किसान भाई-बहन सोमवार से शनिवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अपनी शिकायतें या जानकारी दर्ज करा सकते हैं।

इस कॉल सेंटर के माध्यम से सरकार ने कृषि से जुड़े लगभग हर पहलू को कवर करने की कोशिश की है। किसान अब घर बैठे ही पीएम किसान योजना, केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड), मृदा जांच, बीज विनिमय और वितरण जैसी बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ले सकते हैं। इतना ही नहीं, यदि किसी किसान को खाद या उर्वरक मिलने में दिक्कत हो रही है या कोई डीलर तय कीमत (एमआरपी) से ज्यादा पैसे मांग रहा है, तो उसकी शिकायत भी तुरंत इसी नंबर पर दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा झारखण्ड कृषि ऋण माफी योजना, किसान समृद्धि योजना, मिलेट मिशन और बिरसा फसल विस्तार योजना जैसी महत्वपूर्ण स्कीमों का लाभ कैसे उठाना है, इसकी भी पूरी जानकारी विशेषज्ञ उपलब्ध कराएंगे।

सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए अधिकारियों और कर्मियों के कार्यकलाप से जुड़ी शिकायतों को भी सुनने का प्रावधान रखा है। तकनीकी युग को ध्यान में रखते हुए संपर्क के कई माध्यम जारी किए गए हैं। किसान टोल फ्री नंबर 1800-123-1136 पर कॉल करने के अलावा व्हाट्सप्प या एसएमएस नंबर 8797891222 के जरिए भी जुड़ सकते हैं। पढ़े-लिखे युवा किसान ईमेल info@kccjharkhand.in या वेबसाइट kccjharkhand.in के माध्यम से भी अपनी बात विभाग तक पहुँचा सकते हैं। यह पहल न केवल किसानों के समय और पैसे की बचत करेगी बल्कि राज्य में कृषि व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने में भी मील का पत्थर साबित होगी।


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