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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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विभावि UCET में जॉब फेयर की धूम: 150+ छात्रों ने दिया इंटरव्यू, Shaip AI व Teleperformance समेत कई दिग्गज कंपनियों ने लिया हिस्सा!

 

विभावि UCET में जॉब फेयर का सफल आयोजन: अनुदीप फाउंडेशन के सहयोग से 150 से अधिक छात्रों ने दिया इंटरव्यू, कई प्रतिष्ठित कंपनियों ने दी दस्तक

हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU), हजारीबाग के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (UCET) परिसर में अनुदीप फाउंडेशन के सहयोग से एक दिवसीय 'जॉब फेयर' (रोजगार मेला) का सफल आयोजन किया गया। इस जॉब फेयर में विश्वविद्यालय एवं विभिन्न संबद्ध महाविद्यालयों के 150 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रतिष्ठित कंपनियों में करियर बनाने के लिए साक्षात्कार (Interview) एवं चयन प्रक्रिया में शामिल हुए।

Students participating in Job Fair interview process at VBU UCET Hazaribagh in collaboration with Anudip Foundation

उद्योग जगत से सीधे जुड़ने का प्रभावी माध्यम: अर्चना रीना धान

​ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल की प्रभारी अर्चना रीना धान ने बताया कि इस प्रकार के जॉब फेयर का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा की प्रेरणा और मार्गदर्शन से संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि ऐसे रोजगार मेले विद्यार्थियों को सीधे उद्योग जगत (Industry) से जोड़ने का एक बेहद प्रभावी माध्यम हैं। विश्वविद्यालय भविष्य में भी छात्र-हित में ऐसे रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम और प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करता रहेगा।

निःशुल्क कौशल विकास के साथ रोजगार दे रहा अनुदीप फाउंडेशन: मो. इमरान

​अनुदीप फाउंडेशन के प्रबंधक मोहम्मद इमरान ने कहा कि उनकी संस्था युवाओं को निःशुल्क कौशल विकास (Skill Training) प्रदान करने के साथ-साथ देश की नामचीन कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। कार्यक्रम के सफल संचालन में अनुदीप फाउंडेशन के अभिलाष कुमार, प्रिंस मिश्रा एवं राहुल छाबड़ा का सराहनीय योगदान रहा।

इन प्रमुख कंपनियों ने लिया हिस्सा

​जॉब फेयर के दौरान विभिन्न सेक्टर्स की कई प्रतिष्ठित कंपनियों ने हिस्सा लिया और युवाओं का साक्षात्कार लिया। प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं:

  • ​Kalyani Solutions
  • ​Lemon Webtech
  • ​Vikas Teqsec
  • ​Virtual
  • ​Shaip AI
  • ​Teleperformance
  • ​Hired Next

​जॉब फेयर को लेकर इंजीनियरिंग व अन्य संकायों के विद्यार्थियों में भारी उत्साह देखा गया।

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VBU Hazaribagh Sports Board Meeting: चतरा में बनेगा 'स्पोर्ट्स हब', खेल के लिए 1.09 करोड़ मंजूर; VC प्रो. चंद्र भूषण शर्मा के कड़े निर्देश

 

VBU Hazaribagh: विभावि स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड की वार्षिक बैठक; चतरा में 'स्पोर्ट्स हब' और 1.09 करोड़ रुपये का बजट मंजूर, हॉकी पर रहेगा विशेष फोकस

हजारीबाग (News Prahari Desk): विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU), हजारीबाग के आर्यभट्ट सभागार में बुधवार को विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड की वार्षिक साधारण सभा का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने खेलकूद गतिविधियों को केवल कुछ दिनों के आयोजनों तक सीमित न रखकर वर्ष भर संचालित करने का स्पष्ट निर्देश दिया।

Vinoba Bhave University Vice Chancellor Prof Chandra Bhushan Sharma addressing Sports Control Board meeting at Aryabhatta Hall Hazaribagh

​बैठक के दौरान वर्ष 2026-27 के लिए खेल गतिविधियों हेतु 1 करोड़ 9 लाख रुपये (1.09 Cr) के अनुमानित बजट और व्यय प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की गई।

"खेलों को औपचारिकता न बनाएं, साल भर करें काम": कुलपति

​अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत करते हुए कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने कहा:

"खेलकूद को अत्यंत गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। इसे साल में कुछ दिनों के औपचारिक इवेंट्स में परिणत न होने दें, बल्कि इस पर वर्ष भर निरंतर काम करें। जिस प्रकार कला और संस्कृति के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने पहचान बनाई है, उसी प्रकार खेल के क्षेत्र में भी पूर्वी भारत में विनोबा भावे विश्वविद्यालय को एक नई पहचान दिलाएं। सभी संबद्ध संस्थान अपने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट घरानों से खेल इंफ्रास्ट्रक्चर व टूर्नामेंट्स को स्पॉन्सर कराने की दिशा में पहल करें।"


चतरा में 'स्पोर्ट्स हब' का निर्माण और छात्राओं की सहभागिता पर जोर

​बैठक में चतरा जैसे आकांक्षी और पिछड़े क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए बड़ा फैसला लिया गया। कुलपति ने चतरा जिले के तीनों अंगीभूत महाविद्यालयों के लिए संयुक्त रूप से एक आधुनिक "स्पोर्ट्स हब" तैयार करने का प्रस्ताव बनाने का निर्देश दिया।

​इसके साथ ही, अंतर-महाविद्यालयी खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाने और विशेष रूप से छात्राओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए। इस वर्ष विश्वविद्यालय प्रशासन ने राष्ट्रीय खेल हॉकी के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत संत कोलंबा कॉलेज के अलावा जेजे कॉलेज तिलैया, अन्नदा कॉलेज, रामगढ़ कॉलेज, पीजी एथलेटिक क्लब और चतरा कॉलेज को पुरुष व महिला हॉकी टीमें अनिवार्य रूप से तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

PTI की नियुक्ति, दैनिक भत्ता (DA) में वृद्धि और फिजियोथेरेपिस्ट की स्वीकृति

​खिलाड़ियों और खेल व्यवस्था में सुधार के लिए बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए:

  1. खेल अनुदेशकों (PTI) की नियुक्ति: विश्वविद्यालय और कॉलेजों में रिक्त पड़े Physical Training Instructors (PTI) के पदों पर जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया।
  2. दैनिक भत्ते (DA) में बढ़ोतरी: बढ़ती महंगाई को देखते हुए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल अधिकारियों के दैनिक भत्ते में आंशिक वृद्धि को मंजूरी दी गई, जिसे विश्वविद्यालय की वित्त समिति में शामिल किया जाएगा।
  3. टीम के साथ फिजियोथेरेपिस्ट: अंतर-विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिताओं में जाने वाली VBU की स्पोर्ट्स टीम के साथ एक प्रोफेशनल फिजियोथेरेपिस्ट भेजने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई।

सत्र 2026-27 के मेजबान संस्थानों का चयन

​सत्र 2026-27 में आयोजित होने वाली विभिन्न अंतर-महाविद्यालय प्रतियोगिताओं के लिए मेजबान कॉलेजों का चयन किया गया। तय किया गया कि जिस संस्थान को आयोजन की जिम्मेदारी मिलेगी, वही संस्थान विश्वविद्यालय टीम के लिए कोचिंग कैंप का आयोजन करेगा और अंतर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं में भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

​विगत वर्ष में सर्वाधिक खेलों में भाग लेने और शानदार प्रदर्शन करने के लिए संत कोलंबा महाविद्यालय और अन्नदा महाविद्यालय की विशेष सराहना की गई।

बैठक में प्रशासनिक व शैक्षणिक दिग्गजों की मौजूदगी

​कार्यक्रम की शुरुआत में छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष (DSW) डॉ. विकास कुमार ने स्वागत भाषण दिया और पिछली बैठक का कार्यवृत्त प्रस्तुत किया। खेल निदेशक डॉ. जॉनी रूफीना तिर्की ने पिछले एक वर्ष की खेल गतिविधियों और खर्च का ब्योरा दिया। धन्यवाद ज्ञापन कुलानुशासक डॉ. सादिक रज्जाक ने किया।

​बैठक में CCDC प्रो. मिथिलेश कुमार सिंह, कुलसचिव सुरेंद्र कुशवाहा, वित्त पदाधिकारी डॉ. प्रदीप पाल, पूर्व DSW डॉ. इंद्रजीत कुमार, पूर्व खेल निदेशक डॉ. राखो हरि, संत कोलंबा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बिमल रेवन, मारखम कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गजेंद्र कुमार सिंह, रामगढ़ कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ. रत्ना पांडे, पीजी एथलेटिक क्लब के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार दुबे, सचिव विजय कुजूर समेत 55 से अधिक संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य और खेल शिक्षक उपस्थित थे। 

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VBU Hazaribagh Seminar: विभावि फिजियोथेरेपी विभाग में राष्ट्रीय संगोष्ठी; पार्किंसनिज्म के इलाज पर एम्स के डॉ. प्रभात रंजन का व्याख्यान

 

VBU Hazaribagh: विभावि फिजियोथेरेपी विभाग में राष्ट्रीय संगोष्ठी; एम्स के डॉ. प्रभात रंजन ने पार्किंसनिज्म और आधुनिक इलाज पर दिए टिप्स

हजारीबाग (News Prahari Desk): विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU), हजारीबाग के भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) विभाग द्वारा 27 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय परिसर स्थित सी.वी. रमन साइंस ब्लॉक-1 के आर्यभट्ट सेमिनार हॉल में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।

National seminar on Parkinsonism and Physiotherapy at Vinoba Bhave University Hazaribagh Aryabhatta Hall

​इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय “पार्किंसनिज़्म” एवं “आधुनिक युग में फिजियोथेरेपी की भूमिका” रखा गया था। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने फिजियोथेरेपी के बढ़ते महत्व, न्यूरो रिहैबिलिटेशन और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की शुरुआत और प्रशासनिक संबोधन

​संगोष्ठी का शुभारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. उमेन्द्र सिंह के स्वागत भाषण के साथ हुआ। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) चन्द्र भूषण शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व और विभाग को मिलने वाले निरंतर प्रोत्साहन के प्रति आभार व्यक्त किया। विभागाध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से आने वाले समय में भी फिजियोथेरेपी के अत्याधुनिक और समसामयिक विषयों पर ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

​विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुरेन्द्र कुमार कुशवाहा ने विभाग को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह की राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान, क्लिनिकल रिसर्च और व्यावसायिक दक्षता को निखारने में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं।

​कार्यक्रम का संचालन डॉ. अम्बिका गुप्ता द्वारा किया गया। वहीं डॉ. मेराज नबी सिद्दीकी ने फिजियोथेरेपी विभाग का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए विभाग की स्थापना, उपलब्धियों और देश-विदेश में कार्यरत पूर्व विद्यार्थियों (Alumni) की सफलताओं पर प्रकाश डाला।

एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञ का 'पार्किंसनिज्म' पर मुख्य व्याख्यान

​संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एम्स (AIIMS), नई दिल्ली के न्यूरो रिहैबिलिटेशन विभाग के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रभात रंजन (पी.टी.) थे। उन्होंने 'पार्किंसनिज्म' (Parkinsonism) बीमारी के लक्षणों और फिजियोथेरेपी आधारित पुनर्वास पर विस्तृत तकनीकी व्याख्यान दिया।

​डॉ. प्रभात रंजन ने कहा:

"पार्किंसनिज्म से पीड़ित मरीजों में मांसपेशियों की अकड़न, हाथों में कंपन और संतुलन बिगड़ने की समस्या मुख्य रूप से देखने को मिलती है। समय पर बीमारी की प्रारंभिक पहचान, वैज्ञानिक मूल्यांकन, बैलेंस ट्रेनिंग (सुलतान प्रशिक्षण) और एविडेंस-बेस्ड (साक्ष्य-आधारित) फिजियोथेरेपी के जरिए मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार लाया जा सकता है।"


झारखंड स्टेट काउंसिल और अन्य विशेषज्ञों के विचार

​द्वितीय वक्ता झारखंड स्टेट काउंसिल ऑफ फिजियोथेरेपी (JSCPT) के रजिस्ट्रार एवं इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP) झारखंड के संयोजक डॉ. अजीत कुमार (पी.टी.) थे। उन्होंने “आधुनिक युग में फिजियोथेरेपी की भूमिका” विषय पर विचार रखते हुए कहा कि आज फिजियोथेरेपी केवल ऑर्थोपेडिक समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्डियाक, न्यूरो और स्पोर्ट्स मेडिसिन में भी इसका दायरा तेजी से बढ़ा है। उन्होंने शोध आधारित उपचार और प्रोफेशनल एथिक्स पर जोर दिया।

​विशिष्ट वक्ता रांची की डॉ. आयुषी (पी.टी.) ने “थिंक बियॉन्ड द शोल्डर” विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने कंधे की जटिल समस्याओं के समग्र मूल्यांकन और आधुनिक रिहैबिलिटेशन तकनीकों की जानकारी छात्रों के साथ साझा की।

राष्ट्रगान के साथ समापन

​कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. राहुल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथियों, वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह आयोजन विद्यार्थियों की मेडिकल समझ को गहरा करने में उपयोगी साबित होगा। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

Department of Physiotherapy - Vinoba Bhave University (VBU) Press Release & Desk Analysis

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VBU Sanskrit Department Teacher Parent Meet Farewell Ceremony

 

विभावि संस्कृत विभाग में शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी सह विदाई समारोह का आयोजन: बोले वक्ता—'संस्कृत में हैं अपार संभावनाएं'

हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग में गुरुवार (23 जुलाई 2026) को विभागाध्यक्ष अंजुम आरा की अध्यक्षता में शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी एवं विदाई समारोह का भव्य आयोजन किया गया।

VBU Hazaribagh News: संस्कृत विभाग में हुआ विदाई समारोह व Parent-Teacher Meet, विद्यार्थियों को मिली शुभकामनाएं!

​संगोष्ठी में अभिभावकों ने अपने विचार साझा किए। विभागाध्यक्ष अंजुम आरा ने विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति पर बल देते हुए अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से विश्वविद्यालय भेजने की अपील की और दैनिक कक्षाओं के लाभ बताए।

​"संस्कृत क्षेत्र में भविष्य बनाने की अपार संभावनाएं"

​कार्यक्रम के दौरान पूर्व विभागाध्यक्ष नकुल पाण्डेय ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत विषय में अपार संभावनाएं मौजूद हैं और छात्र इस क्षेत्र में बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि संत कोलंबा कॉलेज और केबी महिला कॉलेज में संस्कृत की पढ़ाई पुनः शुरू हो चुकी है।

​चतुर्थ समसत्र के विद्यार्थियों और शोधार्थी को दी गई विदाई

​संगोष्ठी के उपरांत द्वितीय समसत्र के विद्यार्थियों द्वारा चतुर्थ समसत्र (सेमेस्टर) के छात्र-छात्राओं और शोधार्थी हिमांशु कुमार के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया।

​विभागाध्यक्ष अंजुम आरा, पूर्व विभागाध्यक्ष नकुल पाण्डेय और पूर्व विभागाध्यक्ष अखिलेश्वर पाठक ने सभी निवर्तमान विद्यार्थियों तथा शोधार्थी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर द्वितीय समसत्र के छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

​कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, विद्यार्थी तथा शिक्षण सहायक सुधांशु पाण्डेय और मनीषा सिंह सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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गूंजे ब्रह्म संगीत के स्वर नवजागरण के ऐतिहासिक केंद्र ब्रह्म समाज में 'माघ उत्सव' पर उमड़ी आस्था, अतीत के गौरवशाली पन्नों को किया गया जीवंत

गूंजे ब्रह्म संगीत के स्वर नवजागरण के ऐतिहासिक केंद्र ब्रह्म समाज में 'माघ उत्सव' पर उमड़ी आस्था, अतीत के गौरवशाली पन्नों को किया गया जीवंत




Hazaribagh: आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना के प्रहरी 'हजारीबाग ब्रह्म समाज' के ऐतिहासिक प्रांगण में रविवार को भक्ति और संगीत की अविरल धारा प्रवाहित हुई। हजारीबाग में नवजागरण का शंखनाद करने वाली और 1867 में स्थापित इस प्रतिष्ठित संस्था में 'माघ उत्सव' का भव्य आयोजन किया गया, जहाँ श्रद्धालुओं ने परम सत्ता 'ब्रह्म' की आराधना कर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। ज्ञात हो कि 1828 में राजा राममोहन राय द्वारा प्रज्ज्वलित की गई ब्रह्म समाज की ज्योति की वर्षगांठ को समर्पित यह दिवस हजारीबाग में पूरी गरिमा, सादगी और शास्त्रीय परंपरा के साथ मनाया गया।

समारोह का शुभारंभ वैदिक ऋचाओं के पाठ और गंभीर नाद के साथ हुआ, जिससे पूरा वातावरण पवित्र हो उठा। कोलकाता से विशेष रूप से पधारे आचार्य सुप्रतिम चक्रवर्ती ने वेदी का दायित्व संभालते हुए ईश्वर आराधना का संचालन किया। इस अवसर पर ब्रह्म संगीत और रबीन्द्र संगीत की स्वर लहरियों ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायन की प्रस्तुति दो अलग-अलग समूहों द्वारा दी गई। प्रथम समूह में कोलकाता के कलाकारों—एलोरा चक्रवर्ती, जयश्री दे और सुपर्णा नंदी—ने अपनी सुरीली तान छेड़ दी, तो वहीं दूसरे समूह में हजारीबाग की स्थानीय प्रतिभाओं—तापसी दास और सुलगना—ने अपने गायन से समां बांध दिया, जिससे पूरा हॉल भक्तिमय हो गया।

आचार्य सुप्रतिम चक्रवर्ती ने अपने उद्बोधन में हजारीबाग के इस ऐतिहासिक धरोहर के स्वर्णिम अतीत पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्मरण कराया कि किस प्रकार जदुनाथ मुखर्जी ने पुनर्जागरण के उद्देश्य से अपनी निजी भूमि दान देकर इस समाज की नींव रखी थी, जो देखते ही देखते तत्कालीन बंगाल प्रांत में सांस्कृतिक क्रांति का एक सशक्त केंद्र बन गया। यह वही पवित्र स्थल है जहाँ ब्रह्मानंद केशव चंद्र सेन और गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर जैसी विभूतियों के चरण पड़े थे। समाज सुधार की दिशा में इस संस्था के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि 1930 के दशक में हरिजन समाज के उत्थान और शिक्षा हेतु यहाँ छह विद्यालय खोले गए थे, जिनमें से दो आज भी सरकारी विद्यालय के रूप में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

इतिहास के विस्मृत पन्नों को पलटते हुए आचार्य ने ब्रह्म समाज के पूर्व सचिव मनमथनाथ के त्याग और सेवाभाव का विशेष उल्लेख किया, जिनके कार्यों से प्रभावित होकर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वयं उनसे भेंट करने हजारीबाग ब्रह्म समाज पधारे थे। कालांतर में खड़गोसिंहो घोष, देबप्रसाद घोष, उज्जवला घोष और शांति चटर्जी जैसे मनीषियों ने इस संस्था को पल्लवित और पुष्पित करने में महती भूमिका निभाई।

इस आध्यात्मिक समागम को सफल बनाने में वर्तमान सचिव नीलांजन चटर्जी, श्रीजीता चटर्जी, डॉ. दीपक कुंडू, अनिमा कुंडू, अतनु घोष, मीरा घोष तथा मैत्रेई और प्रदीप मुखर्जी ने केंद्रीय भूमिका का निर्वहन किया। विशेष रूप से संस्थापक जदुनाथ मुखर्जी के वंशज अमिताभ मुखर्जी और सजल मुखर्जी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और विशिष्ट बना दिया। कार्यक्रम के दौरान सुकल्याण मोइत्रा, सुजित भट्टाचार्यजी, अमित भौमिक, नरेंद्रनाथ दे, मौमिता मल्लिक, पायल मुखर्जी सहित नगर के अनेक गणमान्य बुद्धिजीवियों और श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस पुनीत कार्य के साक्षी बने।


पुस्तकालयों की शोभा मात्र न बनें शोध ग्रंथ, अपितु राज्य की नीतियों को दें नई दिशा और दृष्टि: प्रो. अशोक शर्मा

पुस्तकालयों की शोभा मात्र न बनें शोध ग्रंथ, अपितु राज्य की नीतियों को दें नई दिशा और दृष्टि: प्रो. अशोक शर्मा

Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में अकादमिक विमर्श का एक नया अध्याय तब जुड़ गया जब राजस्थान के कोटा ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर अशोक कुमार शर्मा ने शोध की सार्थकता पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। शुक्रवार को शिक्षकों और शोधार्थियों के विशाल समूह को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शोध का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त कर उसे पुस्तकालय की बंद अलमारियों के हवाले कर देना नहीं है, बल्कि इसे राज्य के नीति-निर्धारकों के लिए एक प्रकाश स्तंभ की भूमिका निभानी चाहिए।

​प्रोफेसर शर्मा ने शोध की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब वर्णनात्मक शैली का युग लगभग अवसान पर है और वर्तमान समय व्यवहारजनित शोध का है। उन्होंने शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे ऐसे विषयों का चयन करें जो न केवल उन्हें आत्मिक संतोष प्रदान करें, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी कल्याणकारी सिद्ध हों। उनके अनुसार, एक गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य भविष्य के विद्यार्थियों के लिए एक उर्वर भूमि तैयार करता है, जिस पर चलकर वे अकादमिक जगत में नए कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं।

​शोध को शासन व्यवस्था से जोड़ते हुए पूर्व कुलपति ने प्रतिपादित किया कि सरकारों के पास अनेक विषयों पर जमीनी और तथ्यात्मक जानकारी का अभाव होता है। यदि विश्वविद्यालय स्तर पर किया गया शोध विश्वसनीय और प्रमाणिक हो, तो वह सरकार के लिए नीति निर्धारण में एक सशक्त उपकरण साबित हो सकता है। अलमारियों में धूल फांकने वाले ग्रंथों की बजाय हमें ऐसे शोध को प्राथमिकता देनी होगी जो व्यावहारिक धरातल पर उतरकर समाज को लाभान्वित कर सके। शिक्षकों के दायित्वों पर चर्चा करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरु का ज्ञान और मार्गदर्शन किसी एक छात्र तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विभाग का प्रत्येक पंजीकृत शोधार्थी उनके लिए समान होना चाहिए और उनका मार्गदर्शन करना सभी शिक्षकों का सामूहिक नैतिक दायित्व है।

​इस बौद्धिक सत्र में समाज विज्ञान संकाय की अध्यक्षा डॉ. रेनू बोस ने शोध में आंकड़ों की पवित्रता और वैज्ञानिक पद्धति की अनिवार्यता पर बल दिया। उन्होंने शोधार्थियों को निर्देशित किया कि वे डेटा संकलन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं और अपने शोध प्रबंध तथा प्रस्तुतीकरण में आकर्षक चित्रों व रेखाचित्रों के माध्यम से तथ्यों को सजीव करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने की, जिन्होंने अतिथियों का स्वागत किया। इस गरिमामय अवसर पर पूर्व संकायाध्यक्ष डॉ. बालेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ. अजय बहादुर सिंह, बरकट्ठा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बलदेव राम और मानवविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद रंजन सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ज्ञानयज्ञ से प्रेरणा ग्रहण की।

विभावि में 'विजन 2047' और जनजातीय अस्मिता पर बौद्धिक महाकुंभ का शंखनाद आज, 10 राज्यों के मनीषियों संग चिंतन करेंगी यूनेस्को सलाहकार पद्मश्री अन्विता अब्बी

विभावि में 'विजन 2047' और जनजातीय अस्मिता पर बौद्धिक महाकुंभ का शंखनाद आज, 10 राज्यों के मनीषियों संग चिंतन करेंगी यूनेस्को सलाहकार पद्मश्री अन्विता अब्बी


नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड | हजारीबाग

​हजारीबाग की बौद्धिक और शैक्षणिक धरा विनोबा भावे विश्वविद्यालय में आज से ज्ञान, परंपरा और संस्कृति के संरक्षण हेतु एक ऐतिहासिक अध्याय का शुभारंभ होने जा रहा है। विश्वविद्यालय और केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का विधिवत आगाज आज पूर्वाह्न 11 बजे स्वामी विवेकानंद सभागार में होगा। 'विजन 2047: जनजातीय भाषा संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा' विषय पर केंद्रित इस महामंथन में देश भर के भाषा वैज्ञानिकों और चिंतकों का जमावड़ा लगेगा, जो विलुप्त होती भाषाई धरोहरों को सहेजने और उन्हें भविष्य के भारत की नींव बनाने पर गहन विमर्श करेंगे।

​इस त्रिदिवसीय सारस्वत अनुष्ठान की गरिमा बढ़ाने के लिए मुख्य वक्ता के रूप में देश की मूर्धन्य भाषा वैज्ञानिक और पद्मश्री से विभूषित प्रो. अन्विता अब्बी उपस्थित रहेंगी। यूनेस्को की वर्ल्ड एटलस ऑफ लैंग्वेज की सलाहकार प्रो. अब्बी का हजारीबाग आना अकादमिक जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने हिमालय से लेकर अंडमान निकोबार तक की सौ से अधिक भाषाओं पर न केवल शोध किया है, बल्कि देश के छठे भाषा परिवार 'ग्रेट अंडमानी' की खोज कर वैश्विक पटल पर भारत का मान बढ़ाया है। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा करेंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात कथाकार और डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण संस्थान के पूर्व निदेशक रणेन्द्र अपने विचार साझा करेंगे।

​आयोजन सचिव और मानव विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनोद रंजन ने बताया कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का फलक अत्यंत व्यापक है, जिसमें दस राज्यों के विषय विशेषज्ञ, विद्वान और शोधार्थी अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगे। प्रथम दिवस तीन तकनीकी सत्रों और तीन विशेष व्याख्यानों का आयोजन होगा, जिसमें जनजातीय भाषाओं के डिजिटलाइजेशन, दस्तावेजीकरण और उन पर मंडराते अस्तित्व के संकट जैसे गंभीर विषयों पर मंथन किया जाएगा। विशेष व्याख्यान सत्र में नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी मेघालय के प्रो. ओम प्रकाश, नागालैंड विश्वविद्यालय के प्रो. रवि कुमार रंजन और टीआरआई के पूर्व निदेशक नरेंद्र कुमार अपने शोधपरक वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे।

​संगोष्ठी का मूल उद्देश्य केवल अकादमिक चर्चा तक सीमित न होकर, विजन 2047 के परिप्रेक्ष्य में जनजातीय ज्ञान परंपरा को मुख्यधारा के विमर्श में लाना है। इसमें संवेदनशील और संकटग्रस्त भाषाओं के संरक्षण, सरकारी नीतियों की समीक्षा, लोक परंपराओं में निहित वैज्ञानिकता और डिजिटल युग में आदिवासी संस्कृति की चुनौतियों पर विस्तृत प्रकाश डाला जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस ज्ञान यज्ञ में सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, प्राचार्यों और शोधार्थियों को आमंत्रित करते हुए इसे सफल बनाने का आह्वान किया है, ताकि भावी पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे और भारतीय ज्ञान परंपरा अक्षुण्ण रह सके।

श्रद्धापूर्वक मनाई गई राष्ट्रनायक नेताजी की जयंती

यूनियन क्लब के ऐतिहासिक केशव हॉल में गूंजा कदम-कदम बढ़ाए जा

श्रद्धापूर्वक मनाई गई राष्ट्रनायक नेताजी की जयंती

हजारीबाग: भारतीय स्वाधीनता संग्राम के देदीप्यमान नक्षत्र और अदम्य साहस के प्रतीक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती शुक्रवार को हजारीबाग के ऐतिहासिक यूनियन क्लब एंड लाइब्रेरी के केशव हॉल में अत्यंत गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाई गई। बंगाली एसोसिएशन हजारीबाग और यूनियन क्लब एंड लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गौरवमयी समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों ने शिरकत कर नेताजी के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा निवेदित की। कार्यक्रम का शुभारंभ बंगाली एसोसिएशन के सचिव सोमनाथ कुनार, पूजा समिति के सचिव रजत नाग और हिमांशु भट्टाचार्य द्वारा नेताजी के चित्र पर संयुक्त रूप से माल्यार्पण कर किया गया। इसके उपरांत उपस्थित विशिष्ट जनों और गणमान्य नागरिकों ने बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर देश की आजादी के लिए उनके सर्वस्व त्याग को स्मरण किया।


समारोह की महत्ता उस समय और बढ़ गई जब संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव के तकनीकी सलाहकार अमिताभ मुखर्जी, अन्नदा उच्च विद्यालय के प्रधानाचार्य दशरथ महतो और पूर्व पार्षद निवेदिता राय ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सुशोभित किया। श्रद्धांजलि सभा के दौरान पूरा हॉल राष्ट्रभक्ति के गीतों और गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा। मधुच्छंदा मुखर्जी के नेतृत्व में उपस्थित जनसमूह ने जब नेताजी का प्रिय गीत 'कदम-कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा' सामूहिक स्वर में गाया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का हृदय देशभक्ति की हिलोरों से भर उठा। 'जय हिंद', 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारों ने न केवल वातावरण को ऊर्जामय बना दिया, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के उस गौरवशाली कालखंड की स्मृतियों को भी जीवंत कर दिया।

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में बंगाली एसोसिएशन और यूनियन क्लब के वरिष्ठ पदाधिकारी विकास चौधरी, रूपा चटर्जी, सुतानु राय, चिन्मय सरकार सहित ध्रुव चक्रवर्ती, उज्जवल आयकत, आशीष चक्रवर्ती और सुजीत भट्टाचार्य जैसे कई गणमान्य सदस्य शामिल थे। कार्यक्रम में महिला शक्ति की भी व्यापक सहभागिता रही, जिसमें बर्षा दे, दोला गुहा, सुपर्णा सरकार और अन्य महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वक्ताओं ने नेताजी के विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए कहा कि उनका शौर्य और अनुशासन आज भी युवाओं के लिए पथ-प्रदर्शक है। इस आयोजन ने शहर में एक बार फिर राष्ट्रीय चेतना का संचार किया और नई पीढ़ी को देश के महानायकों के संघर्ष से परिचित कराया।


ज्ञान के साथ संस्कारों की नींव पर खड़ा होगा विकसित भारत, रावण और दुर्योधन के पास कौशल था पर मूल्य नहीं- स्वामी भावेशानंद

ज्ञान के साथ संस्कारों की नींव पर खड़ा होगा विकसित भारत, रावण और दुर्योधन के पास कौशल था पर मूल्य नहीं: स्वामी भावेशानंद


हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में सोमवार को विवेकानंद जयंती पखवाड़ा के तहत एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जहां शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण पर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम में विवि का माहौल तब और भी आध्यात्मिक हो गया जब मुख्य वक्ता रामकृष्ण मिशन रांची के सचिव स्वामी भावेशानंद जी महाराज ने तीन बार ओमकार के उद्घोष के साथ अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने सभागार में मौजूद सैकड़ों विद्यार्थियों और शिक्षाविदों को स्पष्ट संदेश दिया कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं में केवल ज्ञान और कौशल का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मूल्यों का विकास अनिवार्य है। उन्होंने रावण और दुर्योधन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन पौराणिक पात्रों में ज्ञान और कौशल की कोई कमी नहीं थी, लेकिन मूल्यों के अभाव ने उनका पतन किया, इसलिए आज के युवाओं को चरित्र निर्माण पर जोर देना होगा।

​स्वामी भावेशानंद ने भारत के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय का जिक्र किया, जहां कभी 82 राष्ट्रों के 9000 से अधिक विद्यार्थी एक ही परिसर में ज्ञान अर्जित करते थे और वहां इतना विशाल पुस्तक भंडार था कि उसे जलने में नौ महीने लग गए। उन्होंने कहा कि एक हजार वर्षों के विदेशी शासन ने हमारी स्थिति बदल दी, लेकिन अब भारत दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र है। स्वामी विवेकानंद ने कन्याकुमारी में जिस दिव्य दृष्टि से भारत के पुनरुत्थान को देखा था, उसे आज की युवा पीढ़ी को ही साकार करना है। उनके अनुसार, सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति में आत्मविश्वास भरे, उसे स्वावलंबी बनाए और मस्तिष्क की शक्ति में वृद्धि करे। सही और गलत का भेद समझने वाली विवेकपूर्ण बुद्धि ही भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन करेगी।

​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने विद्यार्थियों में साहस भरने का काम किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में जब 'सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका' कहा, तो वहां बजी तालियों की गूंज आज भी सुनाई देती है। कुलपति ने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे विवेकानंद की तरह हवा के विपरीत खड़े होने का साहस विकसित करें। उन्होंने कहा कि दुनिया ने भारत से ही चरित्र और नीति का पाठ पढ़ा है, लेकिन आज विडंबना है कि हम अपनी ही शक्तियों को भूलकर पश्चिम की ओर देख रहे हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे उठें, जागें और तब तक न रुकें जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। कुलपति ने विद्यार्थियों को अर्थपूर्ण सवाल पूछने और सही के लिए खड़े होने की सलाह दी, साथ ही आश्वस्त किया कि जब छात्र जागृत हो जाएंगे तो शिक्षक अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार मिलेंगे।

​इस वैचारिक महाकुंभ में स्वामी विवेकानंद युवा महामंडल के गजानन पाठक, धर्मेंद्र सिंह, डॉ. राजकुमार चौबे और डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में एक रोचक प्रश्नोत्तरी सत्र का भी आयोजन हुआ, जिसने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को नया आयाम दिया। इसके पूर्व, भाषण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को कुलपति ने प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया। मां संगीतायन संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भक्ति गीतों से पूरे वातावरण को रसमय बना दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मृत्युंजय प्रसाद ने और स्वागत भाषण डॉ. सुबोध कुमार सिंह ने किया।

विनोबा भावे विश्वविद्यालय में गूंजेगा स्वामी विवेकानंद के विचारों का शंखनाद

विनोबा भावे विश्वविद्यालय में गूंजेगा स्वामी विवेकानंद के विचारों का शंखनाद


19 जनवरी को रांची रामकृष्ण मिशन के सचिव देंगे चरित्र निर्माण का मंत्र

हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय का स्वामी विवेकानंद सभागार आगामी 19 जनवरी को आध्यात्म, राष्ट्रभक्ति और युवा चेतना के ओजस्वी विचारों से गुंजायमान होने वाला है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वामी विवेकानंद जयंती समारोह को भव्य और प्रेरणादायक बनाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है, जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर रांची मोराबादी स्थित रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी भवेशानंद जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर चंद्र भूषण शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न होगा, जिनकी विशेष पहल पर हजारीबाग के विद्यार्थियों को रामकृष्ण मिशन के सानिध्य में जीवन दर्शन सीखने का यह दुर्लभ अवसर मिल रहा है।

​राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने आयोजन की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए बताया कि यद्यपि स्वामी जी की जयंती 12 जनवरी को मनाई जाती है, लेकिन उस दिन रामकृष्ण मिशन में व्यस्तता के चलते संन्यासियों का आगमन संभव नहीं हो पाता। कुलपति की यह प्रबल इच्छा थी कि विश्वविद्यालय के छात्र सीधे किसी विद्वान संन्यासी के मुख से स्वामी जी के आदर्शों को सुनें और आत्मसात करें, इसी उद्देश्य से यह विशेष आयोजन 19 जनवरी को पूर्वाहन 11 बजे निर्धारित किया गया है। इस गरिमामयी समारोह में 'विकसित भारत' की संकल्पना और भारतीय दृष्टिकोण में स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता पर गहन मंथन किया जाएगा।

​समारोह का एक और प्रमुख आकर्षण हजारीबाग विवेकानंद युवा महामंडल के सहयोग से आयोजित होने वाला चरित्र निर्माण विषयक प्रशिक्षण और प्रश्नोत्तरी सत्र होगा, जो युवाओं को अनुशासित जीवन जीने की कला सिखाएगा। कार्यक्रम के समापन बेला में युवा सप्ताह के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में आयोजित भाषण प्रतियोगिताओं के प्रतिभाशाली विजेताओं को मंच पर पुरस्कृत कर उनका मान बढ़ाया जाएगा। आयोजन समिति के संयोजक डॉ. सुबोध कुमार सिंह 'शिवगीत' और यूसेट के प्राध्यापक डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने विश्वविद्यालय परिवार समेत सभी शिक्षण प्रेमियों को इस ज्ञानयज्ञ में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया है।

चरित्र निर्माण से ही रखी जाएगी विकसित भारत की नींव', भाषण प्रतियोगिता में शारदा ने मारी बाजी, ज्योति दूसरे और सोनू तीसरे स्थान पर

 

चरित्र निर्माण से ही रखी जाएगी विकसित भारत की नींव', भाषण प्रतियोगिता में शारदा ने मारी बाजी, ज्योति दूसरे और सोनू तीसरे स्थान पर


हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में शुक्रवार को शैक्षणिक वातावरण के बीच एक भव्य भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 'चरित्र निर्माण: विकसित भारत की पृष्ठभूमि' विषय पर आयोजित इस प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और अपने तर्कों से यह साबित किया कि एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण में ईंट-पत्थर से ज्यादा अहमियत नागरिकों के चरित्र और नैतिकता की होती है। प्रतियोगिता में अपनी बेहतरीन वाकपटुता और तार्किक प्रस्तुति के दम पर शारदा कुमारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि ज्योति कुमारी दूसरे और सोनू कुमार तीसरे स्थान पर रहे।

​कार्यक्रम के दौरान कुल दस प्रतिभागियों ने मंच साझा किया और विकसित भारत की परिकल्पना में नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत चरित्र की भूमिका पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि तकनीकी विकास के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और चरित्र का उत्थान ही भारत को विश्व गुरु बना सकता है। प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका विभाग के शोधार्थी अम्शा अहमद, पल्लवी कुमारी और अनुप कुमार ने निभाई, जिन्होंने प्रतिभागियों की विषय-वस्तु और प्रस्तुतीकरण का बारीकी से मूल्यांकन किया।

​कार्यक्रम का सफल संचालन और समन्वय डॉ. पुष्कर कुमार पुष्प द्वारा किया गया। उन्होंने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निखार और सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इस अवसर पर अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एम. कैसर, डॉ. उमेन्द्र सिंह और डॉ. इफ्शा खुर्शीद की गरिमामय उपस्थिति रही, जिन्होंने छात्रों का मार्गदर्शन किया। अंत में मानसी कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया।

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