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Editor: Naresh Prasad Soni
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हजारीबाग में दिनदहाड़े मां की गोद से तीन दिन का नवजात चोरी, पुलिस के लचर रवैये और 'सिस्टम' की नाकामी पर फूटा जनआक्रोश

हजारीबाग में दिनदहाड़े मां की गोद से तीन दिन का नवजात चोरी, पुलिस के लचर रवैये और 'सिस्टम' की नाकामी पर फूटा जनआक्रोश

हजारीबाग: शहर के हृदयस्थल में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक अत्यंत मार्मिक घटना प्रकाश में आई है, जिसने न केवल एक मां की ममता को छलनी किया है बल्कि शहर की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बहीमर निवासी बेबी देवी, जो अपने पति संदीप रॉय के साथ अपने महज तीन दिन के दुधमुंहे बच्चे का इलाज कराने शहर आई थीं, उनकी गोद सरेराह सूनी हो गई। यह हृदयविदारक घटना डॉ. एम.एम. हुसैन के क्लीनिक के समीप घटी, जब यह दंपत्ति चिकित्सक से परामर्श लेकर लौट रहा था।

प्रत्यक्षदर्शियों और स्वयं पीडि़ता के बयानों के अनुसार, सड़क पार करते समय प्रसूता बेबी देवी को अचानक चक्कर आ गया और वे अर्धमूर्छित अवस्था में सड़क पर ही लड़खड़ा गईं। इसी अफरातफरी और महिला की असहाय स्थिति का लाभ उठाते हुए एक अज्ञात महिला ने सहायता के बहाने बच्चे को अपनी गोद में लिया और पलक झपकते ही भीड़ में ओझल हो गई। जब तक बदहवास मां को होश आया, तब तक उनकी दुनिया लुट चुकी थी। महज 24 तारीख को जन्मे इस शिशु के वियोग में मां का करुण क्रंदन वहां मौजूद हर संवेदनशील व्यक्ति का कलेजा चीर रहा था, किंतु प्रशासन की संवेदनहीनता ने इस घाव को और गहरा कर दिया।

घटना के पश्चात वहां उपस्थित स्थानीय नागरिकों का गुस्सा उस वक्त सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब सूचना देने के घंटों बाद भी पुलिस मौके पर नदारद रही। आक्रोशित भीड़ ने झारखंड सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि शहर के अतिव्यस्त इलाके में दिनदहाड़े एक नवजात की चोरी हो जाना और उसके बाद पुलिस का घंटों तक घटनास्थल पर न पहुंचना, यह साबित करता है कि तंत्र पूरी तरह से विफल हो चुका है। भीड़ में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में आए दिन बच्चों की चोरी की घटनाएं, चाहे वह हजारीबाग हो, रांची या जमशेदपुर, एक संगठित अपराध का रूप ले चुकी हैं, जिस पर अंकुश लगाने में शासन-प्रशासन पूर्णतः अक्षम साबित हो रहा है।

इस सनसनीखेज वारदात ने आम जनमानस में असुरक्षा की भावना भर दी है। एक तरफ जहां बदहवास परिजन अपने जिगर के टुकड़े की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ घंटों विलंब से जागने वाली पुलिसिया कार्रवाई पर जनता का विश्वास डगमगा गया है। यह घटना मात्र एक चोरी नहीं, बल्कि उस 'सुरक्षा व्यवस्था' पर करारा तमाचा है, जो नागरिकों की हिफाजत का दम भरती है। अब देखना यह होगा कि सुस्त पड़ी पुलिस कब तक उस अज्ञात महिला को ढूंढ निकालती है और कब एक मां की सूनी गोद पुन! भर पाती है।

हजारीबाग पुलिस की प्रखर चेतावनी- झाड़-फूक और फर्जी अधिकारी बनकर ठगने वाले 'मायावियों' से रहें सावधान

हजारीबाग पुलिस की प्रखर चेतावनी- झाड़-फूक और फर्जी अधिकारी बनकर ठगने वाले 'मायावियों' से रहें सावधान

हजारीबाग: शहर एवं इसके सीमावर्ती क्षेत्रों में भोली-भाली महिलाओं को अपना निशाना बनाने वाले शातिर ठगों के विरुद्ध हजारीबाग पुलिस ने अब मोर्चा खोल दिया है। पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन के निर्देशन में जनहित में जारी एक विशेष जागरूकता संदेश के माध्यम से समाज को सचेत किया गया है कि आपराधिक तत्व अब भय और अंधविश्वास को अपना हथियार बना रहे हैं। इन अपराधियों का कार्य करने का तरीका अत्यंत कुटिल है; ये स्वयं को पुलिस, सीआईडी (CID) या भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) का फर्जी अधिकारी बताकर महिलाओं के मन में परिवार पर संकट आने का मिथ्या भय पैदा करते हैं। इसके पश्चात, झाड़-फूक करने या आंखें बंद करवाकर कुछ कदम चलने के बहाने महिलाओं को सम्मोहित कर उनके बहुमूल्य आभूषण, नकदी और अन्य कीमती सामान लेकर चंपत हो जाते हैं।

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वास्तविक प्रशासनिक अधिकारी सरेराह किसी नागरिक से गहने या नकदी की मांग नहीं करता। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को खाकी वर्दी या जांच एजेंसी का सदस्य बताकर ऐसी अनर्गल मांग करता है, तो वह सीधा अपराध का संकेत है। इस 'ठगी के नए प्रतिमान' से बचने के लिए नागरिकों को परामर्श दिया गया है कि वे किसी भी अपरिचित व्यक्ति की चिकनी-चुपड़ी बातों में न आएं और न ही किसी के कहने पर अपनी आंखें मूंदें। अपनी मेहनत की कमाई और कीमती सामान को सुरक्षित स्थानों पर रखें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि का आभास होते ही तत्काल शोर मचाकर आसपास के लोगों को एकत्रित करें।

हजारीबाग पुलिस ने आम जनमानस से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के अंधविश्वास के जाल में न फंसें और न ही अपरिचितों पर अति-विश्वास करें। किसी भी आपात स्थिति या ऐसी घटनाओं की सूचना अविलंब डायल 112 या नजदीकी पुलिस थाने को दी जानी चाहिए ताकि इन मायावी ठगों को कानून के शिकंजे में कसा जा सके। समाज की सतर्कता ही इन अपराधियों के नापाक मंसूबों को विफल करने का सबसे सशक्त माध्यम है।


भ्रष्टाचार का नग्न नृत्य- ग्राम टटगंवा में मनरेगा बना लूट का अड्डा, करोड़ों का वारा-न्यारा

भ्रष्टाचार का नग्न नृत्य- ग्राम टटगंवा में मनरेगा बना लूट का अड्डा, करोड़ों का वारा-न्यारा


दारू/हजारीबाग : विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली 'मनरेगा' योजना ग्राम पंचायत टटगंवा में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहाँ रोजगार सेवक और बीपीओ (BPO) की जुगलबंदी ने सरकारी खजाने को दीमक की तरह चाटते हुए एक ऐसे सुनियोजित लूट तंत्र को जन्म दिया है, जिसने नैतिकता और कानून की समस्त सीमाओं को लांघ दिया है।

कागजी 'टीसीपी' का तिलिस्म: ४ करोड़ का महाघोटाला

टटगंवा में भ्रष्टाचार का गणित किसी को भी हैरत में डाल सकता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले ८ महीनों में ४०० और ३ वर्षों के भीतर लगभग १००० 'टीसीपी' (TCP) निर्माण का दावा किया गया है।

तर्कहीन आंकड़े: यदि १००० टीसीपी के क्षेत्रफल का आकलन किया जाए, तो समूचा गांव—खेत, खलिहान और घर—सब कुछ टीसीपी में तब्दील हो जाना चाहिए था।

धरातल पर शून्य: हकीकत यह है कि एक ही संरचना की कई बार तस्वीरें खींचकर पोर्टल पर अपलोड की गई हैं। लगभग ४ करोड़ रुपये का यह गबन साक्ष्यों के साथ अधिकारियों की मिलीभगत की ओर स्पष्ट संकेत करता है।

फर्जी जॉब कार्ड और प्रशासनिक अराजकता

भ्रष्टाचार के मास्टरमाइंड्स ने ग्राम की जनसंख्या के अनुपात में दोगुने जॉब कार्ड निर्गत कर दिए हैं। हद तो तब हो गई जब नाबालिग बच्चों के नाम पर भी जॉब कार्ड जारी कर दिए गए। यह न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि बाल अधिकारों का भी घोर उल्लंघन है।

बहुआयामी लूट: मेढ़बंदी, बागवानी और डोभा निर्माण

केवल टीसीपी ही नहीं, बल्कि आम और मिश्रित बागवानी के नाम पर भी 'कागजी विकास' किया गया है। धरातल पर एक भी पौधा जीवित नहीं है, किंतु फाइलों में करोड़ों की निकासी पूर्ण हो चुकी है। जल छाजन और मनरेगा के बीच 'डबल फंड' का खेल खेलकर डोभा निर्माण में भी भारी अनियमितता बरती गई है।

जांच और रिकवरी की मांग

यह कोई सामान्य चूक नहीं, बल्कि एक संगठित वित्तीय अपराध है। 

ग्रामीणों और प्रबुद्ध जनों ने मांग की है कि:

 उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) जांच: निष्पक्ष जांच हेतु जिले से बाहर के अधिकारियों की टीम गठित हो।

 दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई: मुख्य आरोपी रोजगार सेवक और बीपीओ के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।

 राजस्व वसूली: गबन की गई पाई-पाई की 'रिकवरी' संबंधित दोषियों की निजी संपत्ति से की जाए।

"जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? टटगंवा का यह घोटाला प्रशासन की आंखों में झोंकी गई धूल है, जिसकी सफाई अविलंब अनिवार्य है।"

नियति का क्रूर परिहास- परीक्षा की दहलीज पर उजड़ा सुहाग, टटगांवा के कुलदीपक के बाद अर्धांगिनी ने भी त्यागे प्राण

नियति का क्रूर परिहास- परीक्षा की दहलीज पर उजड़ा सुहाग, टटगांवा के कुलदीपक के बाद अर्धांगिनी ने भी त्यागे प्राण

हजारीबाग: जिले के दारू प्रखंड अंतर्गत हरली की धरती गुरुवार को एक ऐसे मर्मांतक हादसे की साक्षी बनी, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। टटगांवा निवासी रामचंद्र महतो के घर का इकलौता चिराग और पांच बहनों का लाडला भाई, अरुण कुमार (30 वर्ष), विधाता के निष्ठुर विधान का ग्रास बन गया। नियति की क्रूरता का अंत यहीं नहीं हुआ; पति की मृत्यु के पश्चात रिम्स में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही पत्नी ज्योति कुमारी ने भी अंतत!


दम तोड़ दिया। इस दोहरी त्रासदी ने न केवल एक परिवार की वंशबेल को काट दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र को स्तब्ध और निस्तब्ध कर दिया है। यह दुर्घटना तब घटित हुई जब महज छह माह पूर्व परिणय सूत्र में बंधा यह नवविवाहित जोड़ा सुनहरे भविष्य की आकांक्षा लिए परीक्षा केंद्र की ओर अग्रसर था, किंतु मार्ग में काल बनकर आए एक अनियंत्रित ट्रेकर ने उनके समस्त स्वप्नों को क्षण भर में धूलधूसरित कर दिया।

ट्रेकर के गार्ड से हुई उस भीषण भिड़ंत ने खुशियों से चहकते परिवार को चीत्कारों के समंदर में डुबो दिया। स्थानीय लोगों के सहयोग से लहूलुहान दंपति को चिकित्सा हेतु ले जाया गया, परंतु विधि का विधान कुछ और ही था। चरही पहुँचते-पहुँचते अरुण के प्राण पखेरू उड़ गए और अब ज्योति के महाप्रयाण ने उस बूढ़े माँ-बाप के जीवन के अंतिम सहारे को भी छीन लिया है। टटगांवा की गलियाँ आज केवल परिजनों के करुण क्रंदन और चित्कारों से गूँज रही हैं। वह घर, जहाँ कुछ माह पूर्व तक शहनाइयाँ गूँजी थीं, आज वहां पसरा सन्नाटा पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने के लिए पर्याप्त है। पांच बहनों के स्नेह और माता-पिता की तपस्या का प्रतिफल रहा वह इकलौता पुत्र आज यादों की राख बन चुका है। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और अनियंत्रित वाहनों के तांडव पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका उत्तर उन बिलखते बुजुर्गों की आँखों में छिपे आंसुओं में कहीं खो गया है।

हजारीबाग पुलिस का नशा कारोबार पर वज्रपात: 20.5 किलो अवैध अफीम के साथ चतरा के तीन शातिर तस्कर गिरफ्तार


हजारीबाग पुलिस का नशा कारोबार पर वज्रपात-

20.5 किलो अवैध अफीम के साथ चतरा के तीन शातिर तस्कर गिरफ्तार

हजारीबाग: पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरजिला गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर लोहसिंघना थाना क्षेत्र में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत पुलिस ने करीब 20.5 किलोग्राम गीला अफीम बरामद करने में सफलता हासिल की है। इस दौरान पुलिस ने मौके से तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है, जो चतरा जिले के गिद्धौर के निवासी हैं। तस्करों के पास से तस्करी में प्रयुक्त एक सफेद रंग की अपाची मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है।

घटनाक्रम के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि 22 जनवरी को कोलघटी क्षेत्र में एक सफेद अपाची मोटरसाइकिल पर सवार तीन संदिग्ध व्यक्ति बोरे में कोई अवैध सामान लेकर घूम रहे हैं। इस सूचना की गंभीरता को देखते हुए सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। एसआईटी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोलघटी और उसके आसपास के इलाकों में सघन चेकिंग अभियान और नाकेबंदी शुरू कर दी। इसी दौरान कोलघटी एरिया के मालती टांड के पास पुलिस ने सफेद अपाची को रुकवाया। जब मोटरसाइकिल पर सवार तीनों युवकों के पास मौजूद बोरे की तलाशी ली गई, तो उसमें भारी मात्रा में अफीम पाया गया।

पुलिस की गिरफ्त में आए तस्करों की पहचान दीपक कुमार दांगी (20 वर्ष), बरुण कुमार (27 वर्ष) और सुदेश यादव (20 वर्ष) के रूप में हुई है। ये तीनों चतरा जिले के गिद्धौर थाना क्षेत्र के पांडेय टोला और राम सागर टोला के रहने वाले हैं। पूछताछ के बाद पुलिस ने लोहसिंघना थाना में कांड संख्या 07/26 दर्ज करते हुए एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) की धारा 17(सी), 18(सी), 21(सी) और 29 के तहत मामला पंजीकृत किया है। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

इस सफल उद्भेदन में सदर एसडीपीओ के अंगरक्षक सहित लोहसिंघना थाना प्रभारी निशांत केरकेटा, पेलावल ओपी प्रभारी वेदप्रकाश पाण्डेय, एसआई बिट्टू रजक, एसआई पिंटू कुमार और एएसआई काशीनाथ सिंह व सशस्त्र बलों की भूमिका सराहनीय रही। पुलिस की इस तत्परता ने नशा तस्करों के हौसले पस्त कर दिए हैं और यह कार्रवाई जिले में मादक पदार्थों के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।


क्रूर नियति का वज्रपात- हरली में मर्मांतक सड़क हादसे ने बुझाया टटगांवा का इकलौता कुलदीपक, छह माह पूर्व सेहरे से सजे युवक का सुहाग उजड़ा

क्रूर नियति का वज्रपात- हरली में मर्मांतक सड़क हादसे ने बुझाया टटगांवा का इकलौता कुलदीपक, छह माह पूर्व सेहरे से सजे युवक का सुहाग उजड़ा



दारू/हजारीबाग: दारू थाना क्षेत्र अंतर्गत हरली स्थित बीडीजेजे इंटर महाविद्यालय के समीप गुरुवार को घटित एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना ने टटगांवा निवासी रामचंद्र महतो के हंसते-खेलते परिवार को आजीवन अश्रुपूर्ण अंधकार में धकेल दिया है। नियति के इस निष्ठुर खेल में घर का इकलौता चिराग, 30 वर्षीय अरुण कुमार, काल के गाल में समा गया। विडंबना यह रही कि महज छह माह पूर्व ही जुलाई 2025 में परिणय सूत्र में बंधा यह नवविवाहित जोड़ा, सुनहरे भविष्य के सपने संजोए बाइक से परीक्षा देने हजारीबाग की ओर अग्रसर था, तभी काल बनकर आए एक अनियंत्रित ट्रेकर ने उनकी खुशियों को कुचल दिया। ट्रेकर के गार्ड से हुई भीषण टक्कर में दंपति लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़े।

​स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस की तत्परता से दोनों को हजारीबाग भेजा गया, जहाँ से उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए रिम्स, रांची रेफर किया गया, किन्तु चरही पहुंचते-पहुंचते अरुण के प्राण पखेरू उड़ गए, जबकि उसकी अर्धांगिनी अब भी अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्षरत है। पांच बहनों के बीच इकलौते और लाडले भाई के आकस्मिक निधन से टटगांवा में कोहराम मच गया है। परिजनों का करुण क्रंदन और चित्कार सुन पत्थर दिल भी पसीज उठे हैं, वहीं पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

हत्या के प्रयास और गंभीर धाराओं के आरोपी अरबाज और अभिनव पहुंचे सलाखों के पीछे

हत्या के प्रयास और गंभीर धाराओं के आरोपी अरबाज और अभिनव पहुंचे सलाखों के पीछे

हजारीबाग। जिले की मुफस्सिल थाना पुलिस ने कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। पुलिस ने मुफस्सिल थाना कांड संख्या-08/26 के तहत दर्ज मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो प्राथमिक अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपियों में हबीबी नगर निवासी मोहम्मद अरबाज उर्फ बिक्कू (30 वर्ष) और कोर्रा थाना क्षेत्र के ग्रीन सिटी निवासी अभिनव सौरभ (24 वर्ष) शामिल हैं।



मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इनके ठिकानों पर छापेमारी कर इन्हें धर दबोचा। दोनों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 304, 308(3) और 3(5) के तहत गंभीर आरोप दर्ज हैं, जो जानलेवा हमले और सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करते हैं। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आज दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन की अपराधियों के विरुद्ध एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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