हजारीबाग में दिनदहाड़े मां की गोद से तीन दिन का नवजात चोरी, पुलिस के लचर रवैये और 'सिस्टम' की नाकामी पर फूटा जनआक्रोश
हजारीबाग: शहर के हृदयस्थल में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक अत्यंत मार्मिक घटना प्रकाश में आई है, जिसने न केवल एक मां की ममता को छलनी किया है बल्कि शहर की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बहीमर निवासी बेबी देवी, जो अपने पति संदीप रॉय के साथ अपने महज तीन दिन के दुधमुंहे बच्चे का इलाज कराने शहर आई थीं, उनकी गोद सरेराह सूनी हो गई। यह हृदयविदारक घटना डॉ. एम.एम. हुसैन के क्लीनिक के समीप घटी, जब यह दंपत्ति चिकित्सक से परामर्श लेकर लौट रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्वयं पीडि़ता के बयानों के अनुसार, सड़क पार करते समय प्रसूता बेबी देवी को अचानक चक्कर आ गया और वे अर्धमूर्छित अवस्था में सड़क पर ही लड़खड़ा गईं। इसी अफरातफरी और महिला की असहाय स्थिति का लाभ उठाते हुए एक अज्ञात महिला ने सहायता के बहाने बच्चे को अपनी गोद में लिया और पलक झपकते ही भीड़ में ओझल हो गई। जब तक बदहवास मां को होश आया, तब तक उनकी दुनिया लुट चुकी थी। महज 24 तारीख को जन्मे इस शिशु के वियोग में मां का करुण क्रंदन वहां मौजूद हर संवेदनशील व्यक्ति का कलेजा चीर रहा था, किंतु प्रशासन की संवेदनहीनता ने इस घाव को और गहरा कर दिया।
घटना के पश्चात वहां उपस्थित स्थानीय नागरिकों का गुस्सा उस वक्त सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब सूचना देने के घंटों बाद भी पुलिस मौके पर नदारद रही। आक्रोशित भीड़ ने झारखंड सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि शहर के अतिव्यस्त इलाके में दिनदहाड़े एक नवजात की चोरी हो जाना और उसके बाद पुलिस का घंटों तक घटनास्थल पर न पहुंचना, यह साबित करता है कि तंत्र पूरी तरह से विफल हो चुका है। भीड़ में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में आए दिन बच्चों की चोरी की घटनाएं, चाहे वह हजारीबाग हो, रांची या जमशेदपुर, एक संगठित अपराध का रूप ले चुकी हैं, जिस पर अंकुश लगाने में शासन-प्रशासन पूर्णतः अक्षम साबित हो रहा है।
इस सनसनीखेज वारदात ने आम जनमानस में असुरक्षा की भावना भर दी है। एक तरफ जहां बदहवास परिजन अपने जिगर के टुकड़े की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ घंटों विलंब से जागने वाली पुलिसिया कार्रवाई पर जनता का विश्वास डगमगा गया है। यह घटना मात्र एक चोरी नहीं, बल्कि उस 'सुरक्षा व्यवस्था' पर करारा तमाचा है, जो नागरिकों की हिफाजत का दम भरती है। अब देखना यह होगा कि सुस्त पड़ी पुलिस कब तक उस अज्ञात महिला को ढूंढ निकालती है और कब एक मां की सूनी गोद पुन! भर पाती है।
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