बड़कागांव में 'अडानी प्रोजेक्ट' पर संग्राम, फर्जी रैयतों की 'प्रायोजित घुसपैठ' पर बिफरीं अंबा, केंद्र-राज्य और कॉरपोरेट की 'साठगांठ' पर बोला तीखा हमला
हजारीबाग/बड़कागांव: बड़कागांव के गर्भ में पल रही अडानी परियोजना का विरोध अब एक निर्णायक और विस्फोटक मोड़ पर पहुंच चुका है। सोमवार को प्रस्तावित आमसभा के दौरान गिरिडीह से कथित तौर पर 'फर्जी रैयतों' को बुलाए जाने के प्रकरण ने क्षेत्र में जनाक्रोश की ऐसी लहर पैदा कर दी कि प्रशासन को अंततः सभा स्थगित करनी पड़ी। इस सुनियोजित घटनाक्रम के बाद बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने एक प्रेस वार्ता आहूत कर केंद्र और राज्य सरकार की कार्यशैली पर सीधा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापन का दंश झेल रही जनता की आवाज को दबाने के लिए प्रशासन और कॉरपोरेट का 'अपवित्र गठबंधन' काम कर रहा है।
अंबा प्रसाद ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि स्थानीय रैयतों के अधिकारों का हनन करने के लिए गिरिडीह से बाहरी लोगों का 'आयात' करना एक गंभीर षड्यंत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब मूल निवासियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा हो, तो उनका आक्रोशित होना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। पूर्व विधायक ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि 'जल, जंगल और जमीन' को बचाने की अस्तित्वगत लड़ाई है, जिसे अब जानबूझकर राजनीतिक रंग देने और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का कुचक्र रचा जा रहा है।
अपने आक्रामक तेवरों के लिए जानी जाने वाली अंबा प्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय विधायक के सोशल मीडिया पोस्ट्स का अवलोकन करने पर उनकी मंशा स्वतः स्पष्ट हो जाती है। ये जनप्रतिनिधि जनता की पीड़ा का स्वर बनने के बजाय कॉरपोरेट घरानों की 'पैरवी' में मशगूल हैं, जो लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने राज्य सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रशासन की मूक सहमति के बिना इतनी बड़ी संख्या में बाहरी तत्वों का प्रवेश संभव नहीं था।
अंत में, अंबा प्रसाद ने सरकार और कंपनी प्रबंधन को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सत्ता के मद में चूर होकर दमनकारी नीतियां अपनाई गईं, तो यह आंदोलन और भी उग्र और व्यापक रूप धारण करेगा। उन्होंने संकल्प दोहराया कि बड़कागांव की जनता अपने भविष्य और पुरखों की जमीन के साथ रत्ती भर भी समझौता नहीं करेगी। अडानी परियोजना को लेकर उपजा यह असंतोष अब उस मुहाने पर खड़ा है, जहां सरकार का अगला कदम यह तय करेगा कि क्षेत्र में शांति बहाल होगी या संघर्ष का नया अध्याय लिखा जाएगा।