सड़क हादसों के विरुद्ध केंद्र का 'महाकवच': अब मात्र 10 मिनट में पहुंचेगी 'जीवनरक्षक' एम्बुलेंस, मददगारों को सम्मान और घायलों का 1.5 लाख तक मुफ्त इलाज
नरेश सोनी विशेष संवाददाता
नई दिल्ली | 27 जनवरी 2026
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद के पटल पर सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाग्रस्त पीड़ितों के प्राणरक्षा हेतु एक ऐतिहासिक और मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत कार्ययोजना की घोषणा की है। सदन में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि देश में प्रतिवर्ष होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में लाखों लोग अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा केवल इसलिए काल के गाल में समा जाता है क्योंकि उन्हें 'गोल्डन ऑवर' यानी दुर्घटना के तुरंत बाद के बहुमूल्य समय में उचित चिकित्सा नहीं मिल पाती। इस विभीषिका को समाप्त करने हेतु केंद्र सरकार ने अब 'त्वरित प्रतिक्रिया' और 'निशुल्क उपचार' को अपनी प्राथमिकता बनाया है।
गडकरी ने सदन को आश्वस्त किया कि अब सड़क दुर्घटना के शिकार किसी भी व्यक्ति को उपचार के अभाव में दम नहीं तोड़ने दिया जाएगा। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल पहुँचाने पर उसके इलाज का प्रथम सात दिनों का खर्च, जो कि अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक होगा, वह पूरी तरह से सरकार या एनएचएआई द्वारा वहन किया जाएगा। यह कदम उन निर्धन परिवारों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होगा जो पैसों के अभाव में अपने प्रियजनों का इलाज नहीं करा पाते थे। इसके साथ ही, दुर्घटना के समय मदद करने से कतराने वाले आम जनों के मन से पुलिसिया पचड़े का भय निकालने के लिए सरकार ने 'गुड समैरिटन' (नेक राहगीर) नीति को और सशक्त किया है। अब घायलों को अस्पताल पहुँचाने वाले व्यक्ति को न केवल कानूनी झंझटों से मुक्त रखा जाएगा, बल्कि उन्हें 'राहगीर' की उपाधि से विभूषित कर 25,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित भी किया जाएगा.
सड़क सुरक्षा के बुनियादी ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अक्सर एम्बुलेंस के देर से पहुँचने या अलग-अलग हेल्पलाइन नंबरों के भ्रम में जान चली जाती है। इस समस्या के स्थाई समाधान हेतु अब पूरे देश में 'एक राष्ट्र-एक हेल्पलाइन' की तर्ज पर एकीकृत नंबर प्रणाली लागू की जाएगी। उन्होंने एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू को उजागर करते हुए बताया कि कई बार दुर्घटनाग्रस्त बस या कार के पिचक जाने से यात्री मलबे में फंस जाते हैं और सामान्य एम्बुलेंस कर्मियों के पास उन्हें बाहर निकालने के औजार नहीं होते। इस विवशता को दूर करने के लिए एनएचएआई अब राज्यों को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित एम्बुलेंस मुहैया कराएगा। इन एम्बुलेंस में न केवल डॉक्टर, ऑक्सीजन और ईसीजी की सुविधा होगी, बल्कि मलबे को काटकर घायलों को सुरक्षित निकालने वाले 'कटर' और अन्य बचाव उपकरण भी मौजूद होंगे.
इस महत्वकांक्षी योजना के क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार राज्यों के साथ एक विशेष समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने जा रही है। इसके तहत एनएचएआई राज्यों को निःशुल्क आधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराएगा, लेकिन इसके साथ एक अनिवार्य शर्त जुड़ी होगी— किसी भी दुर्घटना की सूचना मिलने के मात्र 10 मिनट के भीतर एम्बुलेंस को घटनास्थल पर पहुँचना होगा। गडकरी ने स्पष्ट किया कि 10 मिनट की यह समय-सीमा जीवन और मृत्यु के बीच का निर्णायक फासला है, जिसे पाटना ही सरकार का अंतिम ध्येय है। इस पहल ने यह सिद्ध कर दिया है कि सरकार अब सड़क सुरक्षा को केवल आंकड़ों के चश्मे से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की दृष्टि से देख रही है.















