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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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डुमरी विधायक जयराम महतो ने रिम्स पहुँचकर जाना मरीजों का हाल, बोले- 'इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं'

डुमरी विधायक जयराम महतो ने रिम्स पहुँचकर जाना मरीजों का हाल, बोले- 'इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं'
रिम्स अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार सुजीत कुमार का हालचाल जानते और परिजनों को सांत्वना देते डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो।

रांची/डुमरी: झारखंड की राजनीति में अपनी सक्रियता और जनसरोकारों के लिए पहचाने जाने वाले डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने एक बार फिर संवेदनशीलता का परिचय दिया है। विधायक जयराम महतो शुक्रवार को राजधानी रांची स्थित रिम्स (RIMS) अस्पताल पहुँचे, जहाँ उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से आए गंभीर मरीजों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का जायजा लिया।

सुजीत कुमार की स्थिति देख भावुक हुए विधायक

विधायक के इस दौरे का मुख्य केंद्र डुमरी विधानसभा के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत नारायणपुर पंचायत के निवासी सुजीत कुमार रहे। सुजीत वर्तमान में रिम्स में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। जयराम महतो ने सुजीत के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और हर संभव आर्थिक व चिकित्सकीय सहयोग का भरोसा दिया। विधायक ने कहा कि "क्षेत्र की जनता मेरा परिवार है और उनके दुःख-दर्द में साथ खड़ा रहना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।"

टुंडी विधानसभा के मरीजों से भी की मुलाकात

अपनी विधानसभा के साथ-साथ जयराम महतो ने टुंडी विधानसभा क्षेत्र से आए अन्य मरीजों से भी मुलाकात की। उन्होंने वार्डों में जाकर मरीजों का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति से ऊपर उठकर मानवता की सेवा करना ही उनका मुख्य संकल्प है।

HOD को सख्त निर्देश: इलाज में न हो कोताही

मरीजों की शिकायतों और अस्पताल की व्यवस्थाओं को देखते हुए विधायक जयराम महतो ने संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अस्पताल में भर्ती हर जरूरतमंद को उच्च स्तरीय उपचार मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि "मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रिम्स राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल है, यहाँ गरीब जनता बड़े भरोसे के साथ आती है, उनके विश्वास को बनाए रखना प्रबंधन की जिम्मेदारी है।"

सोशल मीडिया पर साझा किया अपना संकल्प

विधायक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए लिखा कि उनका संकल्प हर जरूरतमंद तक मदद पहुँचाना है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और मरीजों को सम्मानजनक उपचार दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

निष्कर्ष

झारखंड के युवाओं के बीच लोकप्रिय जयराम महतो का यह दौरा न केवल प्रशासनिक कसावट लाने की कोशिश है, बल्कि उन गरीब परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण भी है जो महंगे इलाज के अभाव में बेबस महसूस करते हैं। अब देखना यह है कि विधायक के निर्देशों के बाद रिम्स प्रबंधन सुजीत कुमार और अन्य मरीजों के उपचार में कितनी तेजी लाता है।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक झारखंड, भारत।

और पढ़ें: झारखंड विधानसभा में गूँजी 'जल-जंगल-जमीन' की हुंकार: विधायक जयराम महतो ने भूमि अधिग्रहण और आरक्षण पर सरकार को घेरा

हजारीबाग: मिशन अस्पताल पर लापरवाही और अवैध वसूली का आरोप, स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत

हजारीबाग: मिशन अस्पताल पर लापरवाही और अवैध वसूली का आरोप, स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत
हजारीबाग स्थित मिशन अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन करते पीड़ित परिजन और स्थानीय ग्रामीण।

हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में स्थित मिशन अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इलाज में घोर लापरवाही, मरीजों के परिजनों से अवैध वसूली और दवाइयों के सिंडिकेट को लेकर पीड़ित परिवार ने मोर्चा खोल दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह और सिविल सर्जन से लिखित शिकायत कर अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की मांग की गई है।

नॉर्मल डिलीवरी के नाम पर 'सिजेरियन' का खेल

पीड़ित महिला नैना कुमारी के परिजनों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल द्वारा गुमराह किया गया। परिजनों के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने पहले नॉर्मल डिलीवरी का भरोसा दिया, लेकिन बाद में जबरन बड़ा ऑपरेशन (सिजेरियन) कर दिया गया। आरोप है कि अस्पताल ने सिर्फ बिल बढ़ाने के उद्देश्य से मुसीबत की झूठी कहानी गढ़ी और प्रसूता को अनावश्यक रूप से आईसीयू (ICU) में भर्ती कर दिया।

दवाइयों का 'रिटर्न सिंडिकेट' और अवैध वसूली

परिजनों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यहाँ इलाज के नाम पर सिर्फ लूट मची है।

भारी भरकम बिल: ऑपरेशन और आईसीयू के नाम पर पीड़ित परिवार से 60,000 रुपये वसूले गए। डिस्चार्ज के समय भी अतिरिक्त 5,200 रुपये लिए गए।

दवाइयों का फर्जीवाड़ा: आरोप है कि डॉक्टर द्वारा दवाइयों की एक लंबी लिस्ट थमा दी जाती है। परिजनों द्वारा खरीदी गई महंगी दवाइयों को अस्पताल कर्मी चुपके से वापस मेडिकल स्टोर भेज देते हैं और उसका पैसा अस्पताल की जेब में जाता है।

हालत बिगड़ने पर डॉक्टर और स्टाफ हुए फरार

पीड़ित परिवार का कहना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के मात्र दो दिन बाद ही नैना कुमारी के पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया। जब परिजन दोबारा शिकायत लेकर अस्पताल पहुँचे, तो प्रबंधन ने उपचार के नाम पर फिर से 50,000 रुपये जमा करने की मांग की। जब परिजनों ने विरोध किया और मामला तूल पकड़ने लगा, तो अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ मौके से फरार हो गए।

आंदोलन की चेतावनी: युवा नेता गौतम कुमार ने संभाला मोर्चा

इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता और युवा नेता गौतम कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि मिशन अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और दोषी डॉक्टरों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्यवाही नहीं की, तो हजारों की संख्या में महिला-पुरुष सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक झारखंड भारत

हजारीबाग: मिशन हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप, प्रसूता की स्थिति गंभीर; परिजनों का भारी हंगामा

झारखंड सरकार की बड़ी पहल: जमशेदपुर में खुलेगा राज्य का पहला अत्याधुनिक IDTR, टाटा मोटर्स

झारखंड सरकार की बड़ी पहल: जमशेदपुर में खुलेगा राज्य का पहला अत्याधुनिक IDTR, टाटा मोटर्स संभालेगी कमान

विशेष संवाददाता, न्यूज प्रहरी

IDTR Jamshedpur Jharkhand Transport Department")

रांची/जमशेदपुर: झारखंड में सड़क सुरक्षा को एक नई दिशा देने और कुशल चालकों की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में जमशेदपुर के मौजा मनपिठा में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च (IDTR) की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है। यह संस्थान न केवल झारखंड बल्कि पूर्वी भारत के लिए ड्राइविंग प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।

11.88 एकड़ में फैलेगा आधुनिक प्रशिक्षण का केंद्र

जमशेदपुर के मौजा मनपिठा (थाना नं. 1202) में प्रस्तावित इस संस्थान के लिए सरकार ने 11.88 एकड़ भूमि आवंटित की है। इस परियोजना की कुल लागत 22.03 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप' (PPP) मॉडल है। इसमें भारत सरकार, झारखंड सरकार और देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स एक साथ मिलकर काम करेंगे।

वित्तीय संरचना पर एक नजर

केंद्र सरकार (सड़क परिवहन मंत्रालय): 17 करोड़ रुपये (कुल लागत का 77%)

राज्य सरकार: 3.21 करोड़ रुपये

टाटा मोटर्स (CSR फंड): 1.82 करोड़ रुपये

टाटा मोटर्स की विशेषज्ञता से निखरेगा कौशल

IDTR के संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी टाटा मोटर्स को सौंपी गई है। कंपनी अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत आधुनिक वाहनों, विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और विश्वस्तरीय सिम्युलेटर उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। यहाँ केवल स्टेयरिंग थामना ही नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग की बुनियादी समझ और सड़क मनोविज्ञान का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आम नागरिक और युवाओं को क्या होगा लाभ?

अक्सर देखा जाता है कि ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी होती है। IDTR की स्थापना से इस व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आएगा:

वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षण: यहाँ पारंपरिक तरीके के बजाय वैज्ञानिक और तकनीकी उपकरणों (जैसे ड्राइविंग सिम्युलेटर) से ट्रेनिंग दी जाएगी।

पारदर्शी लाइसेंस प्रक्रिया: संस्थान में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को ही लाइसेंस के लिए पात्र माना जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

रोजगार के अवसर: स्थानीय युवाओं को न केवल यहाँ प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि संस्थान के संचालन में भी विभिन्न पदों पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भारी वाहन चालकों के लिए विशेष कोर्स: बस और ट्रक जैसे वाणिज्यिक वाहनों के चालकों को विशेष रक्षात्मक ड्राइविंग (Defensive Driving) का पाठ पढ़ाया जाएगा।

सड़क सुरक्षा: 'दंड' नहीं 'दक्षता' पर जोर

झारखंड सरकार का यह कदम 'सड़क सुरक्षा सुदृढ़ीकरण' की दिशा में एक बड़ा निवेश है। संस्थान का मूल मंत्र 'दंड के स्थान पर दक्षता' विकसित करना है। जब सड़क पर अनुशासित और प्रशिक्षित चालक उतरेंगे, तो सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में निश्चित रूप से गिरावट आएगी। यह पहल राज्य की प्रगति और मानवीय सुरक्षा के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगी।

गुमला: किसानों की समृद्धि के लिए 24 FPO और कोऑपरेटिव का होगा कायाकल्प, सशक्तिकरण कार्यशाला में बनी बड़ी रणनीति

गुमला: किसानों की समृद्धि के लिए 24 FPO और कोऑपरेटिव का होगा कायाकल्प, सशक्तिकरण कार्यशाला में बनी बड़ी रणनीति
"गुमला में आयोजित कार्यशाला के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले FPO को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करते उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो व अन्य अधिकारी।"

गुमला: झारखंड के गुमला जिले में कृषि और किसानों के आर्थिक उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन, जेएसएलपीएस (JSLPS), नाबार्ड (NABARD) और प्रदान (PRADAN) के संयुक्त तत्वावधान में 24 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) एवं कोऑपरेटिव के लिए एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत इन संगठनों को न केवल सशक्त बनाना है, बल्कि उन्हें एक सफल व्यावसायिक मॉडल के रूप में स्थापित करना भी है।

सशक्तिकरण और विस्तार पर केंद्रित चर्चा

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि FPO केवल नाम के संगठन न रहें, बल्कि वे किसानों के लिए लाभ का जरिया बनें। इसके लिए निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई:

शेयरधारकों की वृद्धि: संगठनों में अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने की रणनीति साझा की गई ताकि सामूहिक शक्ति का लाभ मिल सके।

व्यावसायिक योजना (Business Plan): कार्यशाला में प्रभावी व्यावसायिक योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रबंधन के गुर सिखाए गए।

वित्तीय सुदृढ़ीकरण: FPO के संचालन, ऋण प्राप्ति की प्रक्रियाओं और इक्विटी ग्रांट (Equity Grant) के तकनीकी पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।

प्रशासनिक अधिकारियों का मिला मार्गदर्शन

कार्यक्रम में उपस्थित उप विकास आयुक्त (DDC) दिलेश्वर महतो ने संगठनों की संस्थागत मजबूती पर विशेष बल दिया। नाबार्ड के डीडीएम (DDM) रवि शंकर ने बैंकिंग सहयोग और वित्तीय सहायता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। अधिकारियों ने बताया कि कैसे सहकारी अधिनियम और सरकारी योजनाओं से जुड़कर ये संगठन स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकते हैं।

प्रतिभागियों ने भी अपने जमीनी अनुभवों को साझा किया। चर्चा का मुख्य केंद्र बाजार से सीधा जुड़ाव (Market Linkage) और आपसी सहयोग रहा, ताकि बिचौलियों की भूमिका कम हो और किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले FPO हुए सम्मानित

कार्यशाला के अंत में उत्साहवर्धन के लिए जिले के 9 उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को उनके सराहनीय कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान अन्य संगठनों के लिए प्रेरणा का कार्य करेगा।

प्रमुख उपस्थित अधिकारी:

कार्यशाला में DCO माधुरी, पशुपालन विभाग के डॉ. मयूर, JTDS के DPM प्रमुदित दुंगदुंग, JSLPS के DPM शैलेन्द्र जारिका तथा PRADAN के मेराज सहित कई अन्य गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे।

नरेश सोनी (Naresh Soni)

Editor-in-Chief, News Prahari

असम विधानसभा चुनाव 2026: हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM ने झोंकी ताकत, 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी

असम विधानसभा चुनाव 2026: हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM ने झोंकी ताकत, 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी

नरेश सोनी विशेष संवाददाता 
JMM महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय द्वारा चुनाव आयोग को भेजा गया पत्र, जिसमें असम चुनाव 2026 के लिए स्टार प्रचारकों के नामों की घोषणा की गई है।

गुवाहाटी/रांची: असम विधानसभा चुनाव 2026 की रणभेरी बजते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पूर्वोत्तर के इस महत्वपूर्ण राज्य में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए बड़ा दांव खेला है। पार्टी के केंद्रीय समिति ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अपने 20 स्टार प्रचारकों की आधिकारिक सूची सौंप दी है।

हेमंत सोरेन करेंगे चुनाव अभियान का नेतृत्व

पार्टी के महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, असम में चुनाव प्रचार की कमान खुद पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष श्री हेमंत सोरेन संभालेंगे। उनके साथ पार्टी के दिग्गज नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त है, जो असम के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर मतदाताओं को साधने का प्रयास करेगी।

JMM के 20 स्टार प्रचारकों की पूरी सूची

पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों के चयन में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा है। सूची में शामिल प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:

 हेमंत सोरेन (पार्टी अध्यक्ष), डॉ. सरफराज अहमद, विनोद कुमार पाण्डेय, जोबा माझी, अभिषेक प्रसाद, पंकज मिश्रा, दीपक बिरुवा, चमरा लिण्डा, योगेन्द्र प्रसाद, विजय हांसदा, कल्पना मुर्मू सोरेन,डॉ. महुआ माजी, हफीजुल हसन, सुखराम उरांव, भूषण तिर्की, जिगा सुशरण होरो, विकास मुण्डा, एम.टी. राजा, आलोक सोरेन, डॉ. लुईस मरांडी

चुनाव आयोग से विशेष अनुमति की मांग

JMM ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 77(i) के तहत इन नेताओं को स्टार प्रचारक के रूप में अनुमति देने का अनुरोध किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ये नेता असम के दुर्गम और विभिन्न क्षेत्रों में वायु मार्ग, सड़क मार्ग और रेल मार्ग के जरिए सघन दौरा करेंगे। पार्टी ने चुनाव आयोग से इन प्रचारकों के वाहनों के लिए विशेष पास निर्गत करने का भी आग्रह किया है ताकि सीमा के भीतर आवाजाही में कोई तकनीकी बाधा न आए।

असम में JMM की रणनीति: क्यों है यह चुनाव खास?

झारखंड से सटे राज्यों के बाद अब JMM पूर्वोत्तर भारत में अपनी जड़ें मजबूत करना चाहती है। असम में एक बड़ी आबादी 'चाय बागान' श्रमिकों और झारखंडी मूल के लोगों की है। JMM की नजर इन्हीं वोट बैंक पर है। कल्पना मुर्मू सोरेन और डॉ. महुआ माजी जैसे चेहरों को शामिल कर पार्टी ने महिला मतदाताओं और बौद्धिक वर्ग को भी साधने का संकेत दिया है।

निष्कर्ष

असम की चुनावी बिसात पर JMM की यह सक्रियता विपक्षी दलों के समीकरण बिगाड़ सकती है। अब देखना यह होगा कि हेमंत सोरेन का जादू असम के मतदाताओं पर कितना चलता है।

झारखंड विधानसभा में गूँजी 'जल-जंगल-जमीन' की हुंकार: विधायक जयराम महतो ने भूमि अधिग्रहण और आरक्षण पर सरकार को घेरा

झारखंड विधानसभा में गूँजी 'जल-जंगल-जमीन' की हुंकार: विधायक जयराम महतो ने भूमि अधिग्रहण और आरक्षण पर सरकार को घेरा

सम्पादकीय 
Dumri Vidhayak Jairam Kumar Mahto 

Ranchi: झारखंड विधानसभा का बजट सत्र आज उस समय गरमा गया जब डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने सदन में राज्य के मूल निवासियों के अस्तित्व, जमीन की लूट और समुदायों के आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। जयराम महतो ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में ऐतिहासिक संदर्भों के साथ वर्तमान सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल दागे।

जमीन नहीं, आत्मा बसती है खेतों में: जयराम महतो

विधायक महतो ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड के लोगों की आत्मा उनकी जमीन और खेतों में बसती है। उन्होंने 1769 के चुहाड़ आंदोलन और रघुनाथ महतो के बलिदान का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ के पूर्वजों ने अंग्रेजों से अपनी माटी बचाने के लिए सैकड़ों लड़ाइयाँ लड़ीं। उन्होंने 1837 के विल्किन्सन कानून, 1908 के CNT एक्ट और 1949 के SPT एक्ट की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि ये कानून झारखंडियों की सुरक्षा के कवच थे, लेकिन आज आज़ाद भारत में इनका उल्लंघन चिंताजनक है।

भूमि अधिग्रहण और मुआवजे पर उठाए गंभीर सवाल

सदन में चर्चा के दौरान जयराम महतो ने देवघर एयरपोर्ट और अन्य परियोजनाओं के लिए हुए भूमि अधिग्रहण का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून (धारा 26) के बावजूद, किसानों को बाजार मूल्य (Market Rate) के बजाय पुराने उत्पादन आधारित फॉर्मूले से मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने दुमका और देवघर के उदाहरण देते हुए कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकारी किसानों का हक मार रहे हैं।

कुड़मी और केवट समाज के आरक्षण की पुरजोर वकालत

जयराम महतो ने ऐतिहासिक तथ्यों के साथ कुड़मी (महतो) और केवट (मल्लाह, निषाद) समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि 1872 से 1931 तक की जनगणना में कुड़मी समाज को 'एबोरिजिनल' (Aborigines) माना गया था, लेकिन 1950 में बिना किसी सूचना के उन्हें इस सूची से बाहर कर दिया गया। उन्होंने सरकार से मांग की कि टीआरआई (TRI) से दोबारा एथनोग्राफिक रिपोर्ट तैयार कराकर केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी जाए।

1932 खतियान और स्थानीय नीति पर स्पष्ट रुख

विधायक ने 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति को लेकर सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि 25 सालों के बाद भी राज्य की अपनी कोई ठोस स्थानीय नीति नहीं है, जिसके कारण बाहरी राज्यों के लोग यहाँ के हक-अधिकारों पर अतिक्रमण कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि "स्थानीयता का मतलब किसी को राज्य से बाहर निकालना नहीं, बल्कि सरकारी सुविधाओं और नौकरियों में राज्य के मूल निवासियों को प्राथमिकता देना है।"

सचिवालय की कार्यशैली और तकनीक पर प्रहार

महतो ने सूचना प्रौद्योगिकी के युग में सरकारी अधिकारियों की उदासीनता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहाँ मुख्यमंत्री सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, वहीं राज्य के अधिकांश सचिव और प्रधान सचिव जनता की शिकायतों के प्रति असंवेदनशील हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकारियों को भी सोशल मीडिया और तकनीक के माध्यम से जनता से सीधे जुड़ना चाहिए।

हजारीबाग रामनवमी 2026: शांति और सौहार्द के लिए जिला प्रशासन का 'मास्टर प्लान', जानें बैठकों का पूरा शेड्यूल

हजारीबाग रामनवमी 2026: शांति और सौहार्द के लिए जिला प्रशासन का 'मास्टर प्लान', जानें बैठकों का पूरा शेड्यूल

नरेश सोनी विशेष संवाददाता 

हजारीबाग समाहरणालय में रामनवमी की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की समीक्षा बैठक।

हजारीबाग, न्यूज़ प्रहरी: झारखंड के हजारीबाग की विश्वप्रसिद्ध रामनवमी को लेकर इस वर्ष भी उत्साह चरम पर है। पर्व के सफल, शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए हजारीबाग जिला प्रशासन पूरी तरह से 'एक्शन मोड' में आ गया है। सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (संख्या: 151/15.03.2026) के अनुसार, प्रशासन ने विभिन्न पूजा समितियों, अखाड़ा अध्यक्षों और शांति समिति के सदस्यों के साथ चरणबद्ध तरीके से महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया है।

प्रशासनिक सतर्कता और माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश

इस वर्ष का रामनवमी आयोजन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बैठकों का मुख्य एजेंडा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जारी आवश्यक दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराना है। इन बैठकों में सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन (Crowd Management), और यातायात व्यवस्था पर विशेष फोकस रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि भक्तों की आस्था भी सुरक्षित रहे और शहर की विधि-व्यवस्था भी सुदृढ़ बनी रहे।

बैठकों का विस्तृत शेड्यूल: नोट कर लें तारीखें

जिला प्रशासन ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग तिथियां निर्धारित की हैं ताकि सूक्ष्म स्तर पर चर्चा की जा सके:

हजारीबाग शहर क्षेत्र: 16 मार्च 2026 को पैराडाइज रिजॉर्ट में हजारीबाग क्षेत्र की पूजा समितियों और आयोजकों के साथ संवाद होगा।

बड़कागांव एवं केरेडारी क्षेत्र: 18 मार्च 2026 को बड़कागांव प्रखंड परिसर में क्षेत्रीय अखाड़ों और समितियों की बैठक बुलाई गई है।

बरही अनुमंडल: 20 मार्च 2026 को सुबह 11:00 बजे नगर भवन सभागार, बरही में अनुमंडल के सभी अखाड़ों और समितियों के साथ चर्चा की जाएगी।

इन मुख्य बिंदुओं पर रहेगी पैनी नजर

बैठकों के दौरान प्रशासन केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े इन 5 बिंदुओं पर कड़ाई से चर्चा करेगा:

ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण: जुलूस के दौरान डीजे और साउंड सिस्टम के लिए निर्धारित डेसिबल मानकों का पालन।

यातायात प्रबंधन: शहर में रूट डायवर्जन और नो-एंट्री जोन की जानकारी ताकि आम जनता को असुविधा न हो।

स्वच्छता व्यवस्था: जुलूस मार्ग और अखाड़ा स्थलों पर सफाई के विशेष इंतजाम।

ड्रोन और सीसीटीवी निगरानी: संवेदनशील इलाकों में तकनीक के जरिए निगरानी की योजना।

सोशल मीडिया मॉनिटरिंग: अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई का प्रावधान।

सद्भावना समिति की भूमिका

हजारीबाग की रामनवमी अपनी गंगा-जमुनी तहजीब के लिए भी जानी जाती है। प्रशासन इस बार सद्भावना समिति और शांति समिति के सदस्यों को सक्रिय कर रहा है। प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी के बिना इतने बड़े आयोजन को सफल बनाना संभव नहीं है। सभी अखाड़ा अध्यक्षों और सचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में वॉलंटियर्स की सूची तैयार रखें।

निष्कर्ष: सहयोग ही सफलता की कुंजी

हजारीबाग जिला प्रशासन ने सभी पूजा समितियों और आयोजकों से अपील की है कि वे निर्धारित बैठकों में ससमय उपस्थित हों। यह केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित और भव्य रामनवमी की नींव है। न्यूज़ प्रहरी भी सभी नागरिकों से अपील करता है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के साथ सहयोग करें। हजारीबाग: राजस्व वसूली में लापरवाही पर कमिश्नर सख्त, अवैध बालू खनन और ओवरलोडिंग पर नकेल कसने का आदेश

हजारीबाग वार्ड नंबर 7 में बजेगी बदलाव की घंटी? प्रत्याशी नीरज गुप्ता ने खोला चुनावी कार्यालय, गिनाईं क्षेत्र की समस्याएं और अपना विजन

हजारीबाग वार्ड नंबर 7 में बजेगी बदलाव की घंटी? प्रत्याशी नीरज गुप्ता ने खोला चुनावी कार्यालय, गिनाईं क्षेत्र की समस्याएं और अपना विजन

हजारीबाग

नगर निगम चुनाव की सरगर्मियों के बीच हजारीबाग के वार्ड नंबर 7 में चुनावी पारा चढ़ने लगा है। वार्ड नंबर 7 से पार्षद पद के प्रबल दावेदार और समाजसेवा में लंबा अनुभव रखने वाले नीरज कुमार गुप्ता ने विधिवत अपने चुनावी कार्यालय का उद्घाटन किया। बाबूगांव मल्टी के पास स्थित इस कार्यालय का उद्देश्य वार्ड वासियों के लिए एक सुलभ संपर्क केंद्र बनना है, जहां वे अपनी समस्याएं सीधे साझा कर सकें।

कार्यालय उद्घाटन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए नीरज गुप्ता ने वर्तमान व्यवस्था और पिछले दस सालों के कार्यकाल पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वार्ड नंबर 7 में बदलाव की लहर दौड़ रही है क्योंकि जनता पिछले एक दशक की निष्क्रियता से त्रस्त हो चुकी है। निवर्तमान पार्षद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दस साल मौका मिलने के बावजूद वार्ड में एक भी ढंग का काम नहीं हुआ। उन्होंने अपने कार्यालय के सामने की जर्जर सड़क की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब मुख्य रास्ते का यह हाल है, जहां धूल के गुबार से लोग परेशान हैं, तो गलियों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

नीरज गुप्ता ने वार्ड की मूलभूत समस्याओं जैसे नाली, गली, सड़क, बिजली और पानी की बदहाली को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि उनकी पहली प्राथमिकता बाबूगांव शिव मंदिर से लेकर मटवारी तालाब तक एक सुव्यवस्थित नाली का निर्माण कराना है, जिससे जलजमाव की समस्या खत्म हो सके। साथ ही, भु


ईया टोली और इमली चौक से नूरी मस्जिद तक बहते गंदे पानी और टूटे चेम्बरों की मरम्मत उनका मुख्य एजेंडा होगा।

जल संकट को भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने कृष्णापुरी तालाब और मटवारी तालाब के जीर्णोद्धार का विजन रखा। उनका मानना है कि तालाबों का गहरीकरण और सुंदरीकरण न केवल जलस्तर को बढ़ाएगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को पानी की किल्लत से भी बचाएगा।

भ्रष्टाचार मुक्त वार्ड बनाने का संकल्प लेते हुए नीरज गुप्ता ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर जनता उन्हें मौका देती है, तो आवास योजना, राशन कार्ड या किसी भी सरकारी लाभ में एक रुपये का भी भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वार्ड के दस वरिष्ठ और प्रबुद्ध नागरिकों की एक निगरानी समिति बनाएंगे और जो भी फंड आएगा, वह इसी समिति की देखरेख में पारदर्शी तरीके से खर्च होगा।

अपनी 16 वर्षों की समाजसेवा का हवाला देते हुए उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस बार बदलाव के लिए वोट करें। उनका कहना था कि वे जीतने के बाद कुर्सी पर नहीं बैठेंगे बल्कि हर नागरिक के घर जाकर सेवा देंगे। जनता से एक मौका मांगते हुए उन्होंने विश्वास दिलाया कि वार्ड नंबर 7 की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने के लिए वे तत्पर हैं।

सड़क सुरक्षा माह-हजारीबाग में नशेड़ी चालकों पर नकेल, नगवां टोल पर चला सघन जांच अभियान, दफ्तरों में गूंजी सुरक्षा की शपथ

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नरेश सोनी विशेष संवाददाता 

हजारीबाग: सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत हजारीबाग प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया


है। अभियान के छठे दिन आज शहर से लेकर नेशनल हाईवे तक सुरक्षा और सतर्कता का अनूठा संगम देखने को मिला। जिला परिवहन कार्यालय और मोटर यान निरीक्षक की संयुक्त टीम ने नगवां टोल प्लाजा के समीप एक आकस्मिक और विशेष जांच अभियान चलाया जिससे वाहन चालकों में हड़कंप मच गया। इस अभियान की कमान खुद जिला परिवहन पदाधिकारी बैद्यनाथ कामती और मोटर यान निरीक्षक विजय गौतम ने संभाल रखी थी। जांच के दौरान टीम ने विशेष रूप से नशे की हालत में वाहन चलाने वाले चालकों पर शिकंजा कसा। खास बात यह रही कि अधिकारियों ने पकड़े गए चालकों के खिलाफ न केवल सख्त कानूनी कार्रवाई की बल्कि मौके पर ही उनकी काउंसलिंग भी की। उन्हें समझाया गया कि उनकी एक लापरवाही कैसे न केवल उनकी जान ले सकती है बल्कि किसी हंसे-खेलते परिवार को भी उजाड़ सकती है।

वहीं दूसरी ओर जागरूकता की मुहिम के तहत जिले के सभी सरकारी और निजी कार्यालयों में आज एक अलग ही नजारा देखने को मिला। सड़क सुरक्षा माह के छठे दिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से यातायात नियमों के पालन की शपथ ली। जिला परिवहन कार्यालय में आयोजित मुख्य समारोह में एक सुखद तस्वीर तब उभरी जब कार्यालय कर्मियों के साथ-साथ वहां लर्निंग लाइसेंस बनवाने आए युवाओं और आवेदकों ने भी जीवन रक्षा का संकल्प लिया। प्रशासन की इस दोहरी रणनीति यानी हाईवे पर सख्ती और दफ्तरों में जागरूकता का एकमात्र उद्देश्य जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ को नीचे लाना और आम जनता को एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है ताकि सड़कों पर सफर सुरक्षित हो सके।

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