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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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मां छिन्नमस्तिका इस्पात ब्लास्ट: पूर्व विधायक अंबा प्रसाद पहुंचीं हेहल, मुआवजे को लेकर BJP-प्रबंधन पर लगाया मिलीभगत का आरोप ⚖️

हेहल फैक्ट्री ब्लास्ट हादसे में अंबा प्रसाद का दावा: ₹51 लाख तय कराया था मुआवजा, BJP व प्रबंधन पर कम राशि में निपटाने और राजनीति करने का आरोप!

पतरातू/रामगढ़ (न्यूज़ प्रहरी विशेष ब्यूरो):

बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के पतरातू प्रखंड अंतर्गत हेहल स्थित मांà छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड (स्पंज आयरन फैक्ट्री) के टरबाइन/कंट्रोल रूम क्षेत्र में हुए भीषण ब्लास्ट हादसे में तीन युवा इंजीनियरों की मौत और एक कर्मचारी के गंभीर रूप से घायल होने की घटना के बाद पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। अंबा प्रसाद ने घटनास्थल का दौरा कर शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और जिला प्रशासन व कंपनी प्रबंधन के साथ वार्ता की।

Former MLA Amba Prasad meeting victims families at Hehal factory blast site in Patratu

​पूर्व विधायक ने दावा किया कि उनके कड़े रुख और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मृतकों के आश्रितों के लिए ₹51-51 लाख और घायल के लिए ₹30 लाख की मुआवजा राशि तय कराई गई थी। हालांकि, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और स्थानीय विधायक पर पीड़ित परिवारों को गुमराह कर कम राशि में मामला निपटाने का गंभीर आरोप लगाया है।

घटनाक्रम एवं अंबा प्रसाद के मुख्य आरोप:

  • 51 लाख तय कराने का दावा: अंबा प्रसाद ने कहा कि हादसे के बाद उन्होंने कंपनी प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों पर लगातार दबाव बनाकर प्रत्येक मृतक के परिजन के लिए ₹51 लाख तथा घायल के लिए ₹30 लाख मुआवजा तय कराया था। रामगढ़ जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट किया था कि मुआवजा राशि का उचित समाधान होने तक फैक्ट्री के संचालन पर रोक रहेगी।
  • भाजपा पर पीड़ित परिवारों को गुमराह करने का आरोप: पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि पूरी वार्ता तय होने के बाद भाजपा नेताओं ने अधिक राशि दिलाने का झांसा देकर पीड़ित परिवारों को बुलाया और बाद में उन्हें केवल ₹30 लाख की राशि पर सहमत करा दिया, जबकि कंपनी पहले से ही इतनी राशि देने को तैयार थी।
  • मानवीय संवेदनशीलता पर सवाल: अंबा प्रसाद ने कहा कि दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ राजनीति करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और कंपनी प्रबंधन की मिलीभगत से पीड़ितों के साथ अन्याय हुआ है।

मौके पर उपस्थिति:

घटनास्थल पर पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष शहजाद अनवर सहित कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।


West Bengal Congress Meeting: नई दिल्ली में कांग्रेस की उच्चस्तरीय बैठक, शामिल हुईं अंबा प्रसाद

 

पश्चिम बंगाल कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने को लेकर नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक, अंबा प्रसाद हुईं शामिल

हजारीबाग/रामगढ़ (न्यूज़ प्रहरी डेस्क): पूर्व विधायक एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में पश्चिम बंगाल कांग्रेस संगठन को लेकर आयोजित महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में भाग लिया।

Former MLA and AICC Secretary Amba Prasad attending West Bengal Congress organizational meeting at Indira Bhawan New Delhi

​बैठक की अध्यक्षता AICC के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने की। इस दौरान पश्चिम बंगाल के प्रभारी प्रकाश जोशी, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (WBPCC) के अध्यक्ष शुभंकर सरकार तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालातों और कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक अधिक सशक्त एवं सक्रिय बनाने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।

संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं की भागीदारी पर जोर

​बैठक में पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने अपने विचार रखते हुए संगठन को जन-जन तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों का मजबूती से सामना करने पर जोर दिया।

​अंबा प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस हमेशा जनता की आवाज को बुलंद करने और पश्चिम बंगाल के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। संगठन की मजबूती ही जनता के विश्वास को और सशक्त बनाएगी तथा पार्टी को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

बैठक में मौजूद रहे कई वरिष्ठ नेता

​इस अवसर पर संगठन विभाग के प्रभारी चल्ला वंशी चंद रेड्डी, संगठन सचिव नेट्टा डिसूजा, संगठन सचिव नवीन शर्मा, कर्नाटक के सांसद सशिकांत सेंथिल सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

और पढ़ें: Kolkata News: AICC संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल का भव्य स्वागत, कांग्रेस ने बनाई बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की रणनीति!


Hazaribagh Congress Maun Satyagraha: हजारीबाग में कांग्रेस का विजय मार्च, राजीव रंजन बोले— धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवाओं की जीत

 

Hazaribagh Congress Maun Satyagraha: हजारीबाग में कांग्रेस का मौन सत्याग्रह व विजय मार्च, राजीव रंजन बोले— "धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के Gen Z की जीत"

हजारीबाग:

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के निर्देशानुसार, हजारीबाग जिला कांग्रेस कमिटी द्वारा नीट (NEET) एवं सीबीएसई (CBSE) परीक्षा संबंधी अनियमितताओं तथा छात्रों पर हुए दमन के विरोध में राज्यव्यापी मौन सत्याग्रह एवं विजय मार्च का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरीय उपाध्यक्ष शारदा रंजन दुबे ने की।

Hazaribagh Congress leaders conducting Maun Satyagraha and Vijay March at Jhanda Chowk

​जिला कांग्रेस कार्यालय कृष्ण बल्लभ आश्रम से शुरू हुआ यह विजय मार्च कांग्रेस रोड और मालवीय मार्ग होते हुए झंडा चौक पर समाप्त हुआ। कांग्रेस नेताओं ने इसे देश के लाखों युवाओं के संघर्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दृढ़ नेतृत्व को समर्पित बताया।

"युवाओं के सत्य के सामने नरेंद्र मोदी का घमंड टूटा": राजीव रंजन प्रसाद

​मौन सत्याग्रह के उपरांत हजारीबाग जिला कांग्रेस के प्रभारी सह झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव राजीव रंजन प्रसाद ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला।

  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया: राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के करोड़ों युवाओं और 'Gen Z' की जीत है, जिन्होंने भ्रष्ट एवं अयोग्य शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।
  • राहुल गांधी का मिला साथ: उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक के पहले ही दिन से राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर संसद तक छात्रों को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं।
  • आंदोलन जारी रहने का ऐलान: उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ और पारदर्शी नहीं हो जाती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

कांग्रेस ने रखीं तीन प्रमुख माँगें

​कांग्रेस पार्टी ने छात्रों के हित में केंद्र सरकार के समक्ष तीन मुख्य मांगें रखी हैं:

कांग्रेस की प्रमुख मांगें:

  1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: अयोग्य शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल त्यागपत्र (जो अब हो चुका है)।
  2. संसद में विशेष चर्चा: पेपर लीक और परीक्षा धांधली के इस पूरे प्रकरण पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।
  3. मुकदमे वापस हों: आंदोलन के दौरान छात्रों और युवाओं पर दर्ज किए गए सभी आपराधिक मामलों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

कार्यक्रम में प्रमुख नेताओं की रही मौजूदगी

​इस राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और विजय मार्च में कांग्रेस के कई वरीय नेता एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।

  • प्रमुख उपस्थिति: कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद, सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह, प्रदेश कोऑर्डिनेटर बिनोद कुशवाहा, प्रदेश सचिव शैलेंद्र कुमार यादव, नवीन कुमार, अशोक देव, डॉ. प्रकाश कुमार, विजय यादव, आबिद अंसारी, बिनोद सिंह, शशि मोहन सिंह, वीरेंद्र कुमार सिंह, निसार खान, साजिद अली खान और परवेज अहमद सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

​कार्यक्रम के समापन पर “युवाओं के सम्मान में, कांग्रेस है मैदान में” के गगनभेदी नारे लगाए गए।

District Congress Committee, Hazaribagh (Official Press Release)

और पढ़ें: Hazaribagh Congress Protest Against NEET Paper Leak: Memorandum Submitted to DC

Hazaribagh Home Guard Recruitment: हजारीबाग होमगार्ड बहाली का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन 3 अगस्त से, अभ्यर्थियों ने अंबा प्रसाद को दिया धन्यवाद

 

Hazaribagh Home Guard Recruitment: हजारीबाग होमगार्ड बहाली का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन 3 अगस्त से, अभ्यर्थियों ने पूर्व विधायक अंबा प्रसाद का जताया आभार

हजारीबाग:

हजारीबाग जिले में लंबे समय से लंबित होमगार्ड अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है। जिला प्रशासन द्वारा सफल अभ्यर्थियों के लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (दस्तावेज सत्यापन) का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। आगामी 3 अगस्त से सत्यापन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आदेश जारी होते ही अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

​इस सफलता पर सफल अभ्यर्थियों ने पूर्व विधायक अंबा प्रसाद का विशेष आभार व्यक्त किया है और सोशल मीडिया पर बधाईयों का तांता लगा हुआ है।

सदन से सड़क तक संघर्ष लाया रंग: अभ्यर्थियों ने कहा- अंबा प्रसाद का योगदान अहम

​अभ्यर्थियों के अनुसार, तत्कालीन उपायुक्त द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से पूरी बहाली प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया, मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री, विधानसभा समितियों और जिला प्रशासन के समक्ष लगातार पैरवी की।

  • लगातार दबाव और पैरवी: विधानसभा से लेकर सड़क तक इस मामले पर आवाज उठाने का ही परिणाम है कि आज बहाली प्रक्रिया पुनः शुरू हो सकी है।
  • अभ्यर्थियों की जीत: पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने भी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का आदेश जारी होने पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे अभ्यर्थियों के अटूट संघर्ष और धैर्य की जीत बताया है तथा सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

3 अगस्त से शुरू होगा दस्तावेज सत्यापन, इन कागजातों की होगी आवश्यकता

​जिला समादेष्टा (Home Guard Commandant) कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार:

  • प्रखंडवार तिथियाँ: 3 अगस्त से शुरू होने वाले डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए विभिन्न प्रखंडों के अभ्यर्थियों को अलग-अलग तिथियों में बुलाया गया है।
  • आवश्यक दस्तावेज: प्रशासन ने सभी सफल अभ्यर्थियों को निम्नलिखित मूल (Original) प्रमाण पत्र और पासपोर्ट साइज फोटो तैयार रखने का निर्देश दिया है:
    • ​मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र (Educational Certificates)
    • ​जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate)
    • ​निवास प्रमाण पत्र (Residential Certificate)
    • ​पहचान पत्र (Identity Proof)
    • ​पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ

मेरिट लिस्ट के आधार पर मिलेंगे नियुक्ति पत्र

​दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद मेधा सूची (Merit List) के आधार पर अंतिम रूप से चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। इससे जिले के सैकड़ों युवाओं को स्थायी रोजगार का अवसर प्राप्त होगा.

Press Release - Hazaribagh Home Guard Recruitment Candidate Briefing


और पढ़ें:काल बनी कोल माइंस की हाईवा, 1 माह के भीतर अनाथ हुए बच्चे; अंबा प्रसाद की पहल पर 8 लाख मुआवजे और नौकरी पर बनी सहमति

काल बनी कोल माइंस की हाईवा, 1 माह के भीतर अनाथ हुए बच्चे; अंबा प्रसाद की पहल पर 8 लाख मुआवजे और नौकरी पर बनी सहमति

काल बनी कोल माइंस की हाईवा, 1 माह के भीतर अनाथ हुए बच्चे; अंबा प्रसाद की पहल पर 8 लाख मुआवजे और नौकरी पर बनी सहमति

केरेडारी में दर्दनाक हादसा: चट्टी बरियातू के सुनील सोनी की हाईवा की चपेट में आने से मौत, पत्नी की भी सड़क हादसे में पहले ही जा चुकी है जान।

केरेडारी (हजारीबाग):

झारखंड के हजारीबाग जिले अंतर्गत केरेडारी कोल माइंस क्षेत्र में बेलगाम दौड़ते भारी वाहनों ने एक और हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। चट्टी बरियातू निवासी सुनील सोनी की मौत नकाश कंपनी की 16 चक्का हाईवा की चपेट में आने से घटनास्थल पर ही हो गई। यह त्रासदी इसलिए भी अधिक हृदयविदारक है क्योंकि महज एक माह के भीतर ही इन मासूम बच्चों के सिर से माता और पिता दोनों का साया उठ गया है।

हजारीबाग केरेडारी सड़क हादसा हाईवा दुर्घटना अंबा प्रसाद मुआवजा वार्ता

एक माह में उजड़ गया पूरा परिवार

मृतक सुनील सोनी ने अभी 26 मार्च को ही अपनी पत्नी का श्राद्ध कर्म संपन्न किया था। उनकी पत्नी की मौत भी कुछ दिन पहले ओदरणा घाटी में एक सड़क हादसे में हुई थी। बुधवार को हुई इस घटना ने स्थानीय ग्रामीणों को आक्रोशित कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी केरेडारी कोल माइंस से पिछले तीन वर्षों से ट्रांसपोर्टिंग जारी है, लेकिन वैकल्पिक मार्ग न होने के कारण आम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

Mritak ke pariwar ko santawna dete Amba Prasad 

पूर्व विधायक अंबा प्रसाद और योगेंद्र साव ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक सह एआईसीसी राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद मौके पर पहुंचे। अंबा प्रसाद ने घटनास्थल से ही हजारीबाग उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह से वार्ता कर कंपनी प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने बच्चों के भविष्य और शिक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।

मुआवजे और नौकरी पर बनी सहमति

देर शाम कंपनी प्रबंधन, प्रशासन और जन प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता के बाद निम्नलिखित समझौतों पर सहमति बनी:

नकद मुआवजा: कंपनी द्वारा 7 लाख रुपये का मुआवजा (जिसमें से 3 लाख रुपये तत्काल प्रभाव से दिए गए)।

सरकारी सहायता: अंचल कार्यालय की ओर से 1 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता।

रोजगार: मृतक के आश्रित को तत्काल एक नौकरी और सुनील सोनी के पुत्र के 18 वर्ष का होने पर उसे भी नियोजित करने का आश्वासन।

नियमों की अनदेखी का आरोप

स्थानीय लोगों में नकाश कंपनी के खिलाफ भारी रोष है। आरोप है कि ट्रांसपोर्टिंग के दौरान सुरक्षा मानकों और यातायात नियमों की लगातार अनदेखी की जा रही है। वैकल्पिक मार्ग का निर्माण न होना प्रशासन और कंपनी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Naresh Soni Editor in Chief.  www.newsprahari.in .

पुलिस की 'बलि' वाली थ्योरी पर भड़कीं अंबा प्रसाद, DGP पर साधा तीखा निशाना

पुलिस की 'बलि' वाली थ्योरी पर भड़कीं अंबा प्रसाद, DGP पर साधा तीखा निशाना

हजारीबाग: विष्णुगढ़ के कुसुंभा गांव में मासूम बच्ची की निर्मम हत्या और दुष्कर्म के मामले में हजारीबाग पुलिस की एसआईटी (SIT) रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद राज्य की राजनीति गर्मा गई है। पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट साझा करते हुए पुलिस की जांच रिपोर्ट को 'चंदा मामा की कहानी' करार दिया है और सीधे तौर पर डीजीपी तदाशा मिश्र की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं।

Amba Prasad dwara social media per post Kiya Gaya post,

पुलिस का दावा: 'अंधविश्वास और नरबलि' है वजह

​हजारीबाग पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 24/25 मार्च की रात हुई इस घटना का खुलासा करते हुए पुलिस ने इसे 'नरबलि' का मामला बताया है। पुलिस का दावा है कि मृतका की मां ने अपने बेटे की मानसिक बीमारी को ठीक करने के लिए एक तांत्रिक (भगतनी) के कहने पर अपनी ही 13 वर्षीय बेटी की बलि दे दी। पुलिस ने इस मामले में मां रेशमी देवी, तांत्रिक शांति देवी और एक अन्य सहयोगी भीम राम को गिरफ्तार किया है।

HAZARIBAGH POLICE DWARA JAARI PRESS VIGYAPTI,

अंबा प्रसाद के गंभीर आरोप: "कहानी कच्ची है"

​इस जांच रिपोर्ट के सामने आते ही पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:

"विष्णुगढ़ पर कहानी लिखी भी तो इतनी कच्ची! पुलिस सेवा से रिटायर हो चुके DGP से कुछ बेहतर कहानी की आशा थी। आपने तो कांड का मकसद (Motive) ही बदल दिया।"


​अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने असली दोषियों को बचाने के लिए मामले को अंधविश्वास का रूप दे दिया है। उन्होंने डीजीपी पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या यह जांच रिपोर्ट किसी खास राजनीतिक दल के चैम्बर में तैयार की गई थी?

​प्रेस कॉन्फ्रेंस से डीजीपी की दूरी पर सवाल

​अंबा प्रसाद ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि इस महत्वपूर्ण खुलासे के लिए खुद डीजीपी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी थी, लेकिन उनकी जगह डीआईजी और एसपी ने मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने इसे 'तख्ता पलट' और मामले को गुमराह करने की कोशिश बताया है!

Naresh Soni Editor in Chief. www.newsprahari.in

हजारीबाग 'सीता' हत्याकांड: पूर्व विधायक अंबा प्रसाद का तीखा आंदोलन, डीसी-एसपी का पुतला दहन कर की CBI जांच की मांग

हजारीबाग 'सीता' हत्याकांड: पूर्व विधायक अंबा प्रसाद का तीखा आंदोलन, डीसी-एसपी का पुतला दहन कर की CBI जांच की मांग

हजारीबाग में न्याय की पुकार: प्रशासन की चुप्पी पर भड़का आक्रोश


हजारीबाग/बिष्णुगढ़: झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ में हुई एक मासूम बच्ची (जिसे अंबा प्रसाद ने 'सीता' का नाम दिया है) के साथ बलात्कार और जघन्य हत्या के मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली होने पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को हजारीबाग के जिला चौक पर अंबा प्रसाद के नेतृत्व में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
हजारीबाग जिला चौक पर डीसी और एसपी का पुतला दहन करतीं पूर्व विधायक अंबा प्रसाद एवं अन्य कार्यकर्ता।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बांह पर काला बिल्ला लगाकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। आक्रोशित भीड़ ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए हजारीबाग के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) का पुतला दहन किया। कैंडल मार्च निकालते हुए न्याय की मांग की गई और अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई।

निर्भया कांड से भी दर्दनाक है यह घटना: अंबा प्रसाद


प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अंबा प्रसाद ने कहा कि विष्णुगढ़ की यह घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। उन्होंने इसकी तुलना दिल्ली के चर्चित निर्भया कांड से करते हुए कहा कि यह उससे भी अधिक घृणित और हृदयविदारक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंगला जुलूस के दौरान हुई इस घटना के बाद से पुलिस अनुसंधान की गति अत्यंत धीमी है, जो प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्यकुशलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

अंबा प्रसाद ने घोषणा की कि वे एक अधिवक्ता होने के नाते पीड़ित परिवार को हर संभव न्यायिक सहायता प्रदान करेंगी और स्वयं अदालत में उनका केस लड़ेंगी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब तक 'सीता' को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों को फांसी के फंदे तक नहीं पहुँचाया जाता, तब तक उनका संघर्ष थमेगा नहीं।

मुख्यमंत्री को लिखा पत्र: एसपी और डीएसपी पर कार्रवाई की मांग
इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप के लिए अंबा प्रसाद ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। पत्र में उन्होंने हजारीबाग पुलिस की विफलताओं का विस्तार से उल्लेख किया है।

 उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि


CBI जांच: स्थानीय पुलिस की विफलता को देखते हुए इस कांड का अनुसंधान तत्काल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा जाए।

प्रशासनिक फेरबदल: कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले हजारीबाग एसपी का स्थानांतरण किया जाए और संबंधित डीएसपी व विष्णुगढ़ थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित किया जाए।

मुआवजा और पुनर्वास: पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता और उनके पुनर्वासन की व्यवस्था सरकार द्वारा सुनिश्चित की जाए।

महिला आयोग का गठन: राज्य में लंबित महिला आयोग का जल्द से जल्द गठन किया जाए ताकि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर त्वरित निगरानी हो सके।

लोकतंत्र और सुरक्षा पर उठते सवाल 


हजारीबाग पुलिस की वर्तमान कार्यशैली से आम जनता का भरोसा डगमगा रहा है। अंबा प्रसाद ने पत्र में आशंका जताई है कि या तो पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है या फिर साक्ष्यों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि महिला सम्मान का वादा करने वाली सरकार में अगर एक मासूम को न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह व्यवस्था की हार है।

इस विरोध प्रदर्शन में भारी संख्या में स्थानीय लोग और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने एक स्वर में अपराधियों को फांसी देने की मांग की। क्षेत्र में तनाव और आक्रोश को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक (न्यूज़ प्रहरी)

झारखंड: महिला आयोग की अनुपस्थिति पर अंबा प्रसाद का तीखा प्रहार, जल्द गठन की मांग

झारखंड: महिला आयोग की अनुपस्थिति पर अंबा प्रसाद का तीखा प्रहार, जल्द गठन की मांग

सम्पादकीय 
Amba Prasad 

रांची: झारखंड की राजनीति में महिलाओं के अधिकारों की आवाज बुलंद करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव व पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने राज्य सरकार से जल्द से जल्द राज्य महिला आयोग के गठन की मांग की है। उन्होंने कहा कि आयोग के अस्तित्व में न होने के कारण राज्य की आधी आबादी को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

न्याय की आस में भटक रही हैं महिलाएं

अंबा प्रसाद ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आयोग केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि पीड़ित महिलाओं के लिए न्याय का एक सुलभ द्वार है। इसकी अनुपस्थिति में घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और अन्य अपराधों की शिकायतों का निपटारा समय पर नहीं हो पा रहा है।

"जब जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं, तो आम महिला का क्या?"

अंबा प्रसाद ने अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए एक बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा, "मैं खुद एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हूँ। जब एक विधायक स्तर की महिला को न्याय पाने में इतनी कठिनाई हो रही है, तो दूर-दराज के गांवों में रहने वाली आम महिलाओं की स्थिति की कल्पना करना भी डरावना है।"

आयोग न होने के गंभीर दुष्परिणाम

विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि महिला आयोग के न होने से निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं:

सुनवाई में देरी: पुलिस थानों के चक्कर लगाने के बाद भी महिलाओं को उचित परामर्श और कानूनी सहायता नहीं मिल पाती।

असुरक्षा का माहौल: अपराधियों के मन में डर कम होता है क्योंकि उन्हें पता है कि त्वरित निगरानी करने वाली कोई संस्था सक्रिय नहीं है। 

सरकारी योजनाओं का लाभ: महिलाओं के कल्याण के लिए बनी योजनाओं की मॉनिटरिंग प्रभावित होती है।

झारखंड सहित देश के कई राज्यों में महिला आयोगों के खाली पड़े पद एक राष्ट्रीय चर्चा का विषय हैं। अंबा प्रसाद की यह मांग न केवल राजनीतिक है, बल्कि मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार को चाहिए कि वह राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए इस संवैधानिक संस्था को अविलंब पुनर्जीवित करे।

क्या आपको लगता है कि महिला आयोग के बिना न्याय मिलना कठिन है?

गैस किल्लत पर अंबा प्रसाद का बड़ा हमला: कहा- ईरान-इजरायल युद्ध के नाम पर देश में मची है लूट, छात्र छोड़ रहे हॉस्टल

 गैस किल्लत पर अंबा प्रसाद का बड़ा हमला: कहा- ईरान-इजरायल युद्ध के नाम पर देश में मची है लूट, छात्र छोड़ रहे हॉस्टल

नरेश सोनी विशेष संवाददाता।

"अम्बा प्रसाद "
हजारीबाग/रांची: देश में गहराते गैस संकट और घरेलू ईंधन की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। इस ज्वलंत मुद्दे पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव और हजारीबाग की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सरकार की नीतियों को 'दोहरा' करार देते हुए कहा कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध की आग में भारत के आम आदमी के चूल्हे की आग बुझ गई है।

सरकार की 'दोहरी नीति' पर सवाल

फेसबुक लाइव के माध्यम से जनता से मुखातिब होते हुए अंबा प्रसाद ने केंद्र सरकार के दावों की पोल खोली। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार के पास पर्याप्त तेल और गैस का भंडार मौजूद है, तो देश के विभिन्न हिस्सों में गैस की इतनी भीषण किल्लत क्यों है? उन्होंने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' (Essential Commodities Act) लागू करने पर भी आपत्ति जताई। अंबा के अनुसार, यह अधिनियम कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए होता है, लेकिन गैस जैसे ईंधन की जमाखोरी करना आम आदमी के बस की बात नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार इस संकट की आड़ में अपनी विफलताओं को छिपा रही है?

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हजारीबाग के छात्रों का पलायन: एक गंभीर संकट

अंबा प्रसाद ने अपनी रिपोर्ट में एक बेहद भावुक और चिंताजनक पहलू को उजागर किया। उन्होंने बताया कि संत कोलंबस महाविद्यालय, हजारीबाग के छात्रावासों में रहने वाले छात्र अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर घर लौटने को मजबूर हैं। गैस की ऊंची कीमतों और किल्लत के कारण छात्र लकड़ी चुनकर खाना बनाने को विवश थे। यह स्थिति केवल एक कॉलेज की नहीं, बल्कि पूरे शहर के लॉज और हॉस्टलों की है, जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा अब कतारों में लगने के बजाय घर वापसी कर रहे हैं।

महंगाई की चौतरफा मार

पूर्व विधायक ने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में जो तेल 35-40 रुपये प्रति लीटर था, वह आज भाजपा के 20 साल के राज में 100 रुपये के पार पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेल के परिवहन और आयात का पूरा ठेका अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को दे दिया गया है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।

व्यवसाय और आस्था पर संकट

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर न मिलने के कारण छोटे होटल, रेस्टोरेंट और लॉज बंद होने की कगार पर हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि बड़े मंदिरों में चलने वाले 'भंडारे' भी बंद हो सकते हैं। सीएनजी की कमी ने परिवहन लागत बढ़ा दी है, जिससे ऑटो और बसों का किराया तेजी से बढ़ा है, और इसका सीधा असर दैनिक मजदूरी करने वालों पर पड़ा है।

सुशासन या अराजकता?

अंबा प्रसाद ने भाजपा शासित राज्यों में मकानों को ध्वस्त करने (Bulldozer Action) की कार्रवाई पर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे 'सुशासन' के नाम पर 'अराजकता' बताया। उन्होंने प्रसिद्ध कहानी 'Frankenstein' का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि धर्म और जाति के नाम पर भड़काई जा रही नफरत की राजनीति का अंजाम बहुत बुरा होगा।

ईरान-इजरायल युद्ध का भारत पर असर: अंबा प्रसाद ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठाए गंभीर सवाल, सर्वदलीय बैठक की मांग

ईरान-इजरायल युद्ध का भारत पर असर: अंबा प्रसाद ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठाए गंभीर सवाल, सर्वदलीय बैठक की मांग

नई दिल्ली/रांची: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध को पूरी मानवता के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने इस युद्ध के कारण भारत में कच्चे तेल के संकट और बेलगाम होती महंगाई को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।

ईरान-इजरायल युद्ध और बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर फेसबुक लाइव के जरिए देश की जनता को संबोधित करतीं कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद।

कच्चे तेल के संकट से बढ़ रही महंगाई

फेसबुक लाइव के माध्यम से आम जनमानस को संबोधित करते हुए अंबा प्रसाद ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल ईरान से आयात करता है। युद्ध की वर्तमान स्थिति के कारण कच्चे तेल का आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। रसोई गैस (LPG), सीएनजी (CNG) और रोजमर्रा की जरूरत की सभी वस्तुओं के दाम आसमान छूने के आसार बन गए हैं।

'विश्व गुरु' की विदेश नीति पर खड़े किए सवाल

ईरान द्वारा भारत को तेल न देने की कथित धमकी के मुद्दे पर अंबा प्रसाद ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, "हमारे देश के प्रधानमंत्री जो खुद को 'विश्व गुरु' समझते हैं, उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली है।"

अंबा प्रसाद ने पूछा कि प्रधानमंत्री लगातार विदेशी दौरे करते रहे हैं ताकि वैश्विक रिश्ते मजबूत हों, लेकिन संकट के इस समय में उनकी विदेश नीति क्या है, यह समझ से परे है। उन्होंने दावा किया कि देश में अब 40 दिनों से भी कम का तेल भंडार बचा है, फिर भी सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।

'संसद में चर्चा से भाग रही है सरकार'

वर्तमान लोकसभा सत्र का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस ज्वलंत मुद्दे पर चर्चा करने से बच रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लगातार बढ़ रही महंगाई और युद्ध के हालातों पर चर्चा की मांग की थी, लेकिन भाजपा ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

अंबा प्रसाद ने कहा, "देश के रक्षा मंत्री सिर्फ भाषणबाजी में व्यस्त हैं, जबकि शेयर मार्केट ध्वस्त हो रहे हैं और सोना-चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।"

सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

एक जिम्मेदार विपक्षी नेता के तौर पर अंबा प्रसाद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस युद्ध को हल्के में न लिया जाए। उन्होंने चालू लोकसभा सत्र में इस मुद्दे पर खुली चर्चा करने, सर्वदलीय बैठक बुलाने और एक स्पष्ट नीति निर्धारित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत आवश्यक सुरक्षा और आर्थिक कदम उठाने चाहिए ताकि देश की जनता को इस संकट से बचाया जा सके और विश्व शांति की दिशा में भारत अपनी सार्थक भूमिका निभा सके।

बड़कागांव: नापो घटना पर गरमाई राजनीति, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने स्थानीय विधायक और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप; ग्रामीणों का धरना

बड़कागांव: नापो घटना पर गरमाई राजनीति, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने स्थानीय विधायक और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप; ग्रामीणों का धरना

हजारीबाग/बड़कागांव

बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के नापो गांव में बीते दिनों हुई हिंसक घटना के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। घटना के विरोध में आक्रोशित ग्रामीणों ने बड़कागांव मुख्य चौक को पूरी तरह से जाम कर दिया और धरने पर बैठ गए। इस धरने में बड़कागांव की पूर्व विधायक सुश्री अंबा प्रसाद भी शामिल हुईं और उन्होंने वर्तमान विधायक एवं स्थानीय प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
बड़कागांव मुख्य चौक पर सड़क जाम कर धरने पर बैठे आक्रोशित ग्रामीण और उन्हें संबोधित करते हुए पूर्व विधायक सुश्री अंबा प्रसाद।


वर्तमान विधायक पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप
पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़कागांव के वर्तमान भाजपा विधायक ने कथित तौर पर स्थानीय अपराधियों, गुंडों, रंगदारों और नशा (अफीम, ब्राउन शुगर) का कारोबार करने वाले गिरोहों को शरण दे रखी है। उन्होंने इसे बड़कागांव के शांत माहौल के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बताया। आरोप है कि क्षेत्र में रंगदारी, अवैध वसूली, जुआ और नकली शराब का धंधा तेजी से पनप रहा है।

नापो गांव की घटना: हथियारों से हमला और कुचलने का आरोप

ग्रामीणों और पूर्व विधायक के अनुसार, बीते रात नापो गांव में कथित तौर पर गंगा साहू (जिन्हें वर्तमान विधायक का करीबी बताया जा रहा है) और उनके गुर्गों द्वारा कुछ लोगों पर जानलेवा हमला किया गया। आरोप है कि हमलावरों ने हथियारों का इस्तेमाल किया और उसके बाद वाहन से लोगों को कुचल दिया। इस दर्दनाक घटना में दो लोगों की मौत की खबर है, जबकि छह लोग गंभीर रूप से घायल हैं। विनोद साव सहित कई घायल अभी आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

धरने पर बैठे ग्रामीणों ने स्थानीय बड़कागांव पुलिस पर भी लापरवाही और मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं:

शिकायत की अनदेखी: ग्रामीणों का कहना है कि घटना से कुछ दिन पूर्व जब पीड़ित पक्ष थाना प्रभारी को आवेदन देने गया था, तो उन्हें कथित तौर पर डांट-फटकार कर भगा दिया गया था।
पुलिस का बोर्ड लगी गाड़ी: आरोप है कि जिस गाड़ी से लोगों को कुचला गया, उस पर 'पुलिस' का बोर्ड लगा था। घटना के बाद गाड़ी से बोर्ड हटाए जाने को लेकर भी ग्रामीण आक्रोशित हैं।

आरोपियों का खुला घूमना: ग्रामीणों में इस बात का भारी रोष है कि इतने गंभीर मामले के बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और कथित तौर पर सोशल मीडिया पर रील बनाकर प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं।

डीजीपी से की बात, एसपी और डीसी को बुलाने की मांग
सड़क जाम कर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि हजारीबाग के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) खुद घटनास्थल पर आएं और अधिकारियों की जवाबदेही तय करें। धरने पर मौजूद पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने मौके से ही झारखंड के डीजीपी (DGP) से दूरभाष पर बात की और उन्हें पूरे मामले से अवगत कराते हुए त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।

चट्टी बारियातू आंदोलन: जेल से छूटे विस्थापित रैयत, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद से मिलकर जताया आभार

चट्टी बारियातू आंदोलन: जेल से छूटे विस्थापित रैयत, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद से मिलकर जताया आभार

हजारीबाग: केरेडारी थाना क्षेत्र के अंतर्गत चट्टी बारियातू कोयला खनन परियोजना के जिन विस्थापित रैयतों को पिछले दिनों पुलिस प्रशासन द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था उन्हें न्यायालय से जमानत मिल गई है। रिहाई के बाद शनिवार को इन सभी ग्रामीणों ने सीधे पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और इस न्यायिक लड़ाई में उनके निरंतर सहयोग के लिए गहरा आभार व्यक्त किया।
"जेल से रिहाई के बाद पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के आवास पर पहुंचकर उन्हें धन्यवाद ज्ञापित करते चट्टी बारियातू के विस्थापित रैयत।"


जेल से बाहर आए विस्थापित ग्रामीणों ने बताया कि इस संघर्षपूर्ण लड़ाई में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव हर कदम पर उनके साथ मजबूती से खड़े रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इसी सहयोग और उचित कानूनी मार्गदर्शन का परिणाम है कि वे सभी होली के त्योहार से पहले ही सुरक्षित जेल से बाहर आ सके हैं।
इस अवसर पर पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने वर्तमान भाजपा विधायक पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान विधायक ने मीडिया में भ्रामक बयानबाजी करते हुए कहा था कि पुलिस प्रशासन ने योगेंद्र साव और निर्मला देवी को छोड़कर बाकी सभी को जेल भेज दिया है जबकि यह वास्तविकता से कोसों दूर है। अंबा प्रसाद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए रैयतों को जमानत दिलवाई है।

अंबा प्रसाद ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गिरफ्तारी के दिन पुलिस ने एक साजिश के तहत बाकी ग्रामीणों को दूसरी जगह छिपा कर रखा और गुपचुप तरीके से जेल भेज दिया अन्यथा उनकी गिरफ्तारी नहीं होने दी जाती। पूर्व विधायक ने नसीहत देते हुए कहा कि वर्तमान विधायक को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए केवल बयानबाजी करने से बचना चाहिए और इसके बजाय रैयतों के हक और अधिकार की जमीनी लड़ाई में उनका साथ देना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीणों को इतने कम समय के भीतर न्यायालय से जमानत मिलना इस बात को प्रमाणित करता है कि ग्रामीण अपने जायज हक के लिए आंदोलन कर रहे थे और प्रशासन ने उन्हें बलपूर्वक झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे और उनका पूरा परिवार विस्थापितों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह से समर्पित है और किसी भी ग्रामीण के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब प्रशासन कॉर्पोरेट के दबाव में आकर काम करने लगता है तब न्यायपालिका ही एकमात्र उम्मीद बचती है। उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि वह निडर होकर विस्थापित ग्रामीणों को उनका वास्तविक अधिकार दिलाएगी। अंत में अंबा प्रसाद ने कहा कि संविधान सर्वोपरि है और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि यही संविधान ग्रामीणों को उनका छीना हुआ हक वापस दिलाएगा।


दहेज को परंपरा बताना अपराध का समर्थन': अंबा प्रसाद का सांसद मनीष जायसवाल पर तीखा हमला


'दहेज को परंपरा बताना अपराध का समर्थन': अंबा प्रसाद का सांसद मनीष जायसवाल पर तीखा हमला

हजारीबाग: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल के हालिया बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। अंबा प्रसाद ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा दहेज जैसी कुप्रथा को 'परंपरा' का नाम देकर समर्थन देना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि कानूनी रूप से भी गंभीर मामला है।

"एक प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व विधायक अंबा प्रसाद। उन्होंने सांसद मनीष जायसवाल के दहेज संबंधी बयान को सामाजिक पतन का परिचायक बताया।"

उपहार और दहेज के अंतर को समझें माननीय: अंबा

पूर्व विधायक ने स्पष्ट किया कि सांसद को 'उपहार' (Gift) और 'दहेज' (Dowry) के बीच का बुनियादी अंतर समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा, "स्वेच्छा से उपहार देना अपराध नहीं है, लेकिन मांग के आधार पर लेनदेन करना दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 के तहत संज्ञेय अपराध है। सांसद जी इन दोनों को एक बताकर समाज में भ्रम फैला रहे हैं और कानून का मजाक उड़ा रहे हैं।"

कानूनी प्रावधानों का दिया हवाला

अंबा प्रसाद ने कानून की याद दिलाते हुए कहा कि दहेज लेने और देने पर न्यूनतम 5 साल की सजा और 15,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, धारा 8A के तहत इस कुप्रथा को प्रोत्साहित करने वालों पर भी उतनी ही कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने आश्चर्य जताया कि खुलेआम कानून उल्लंघन की बात करने के बावजूद प्रशासन या संबंधित मंत्रालय ने अब तक इस पर संज्ञान क्यों नहीं लिया।

महिलाओं और समाज के लिए असुरक्षित सोच

एक महिला जनप्रतिनिधि के तौर पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए अंबा ने कहा, "विकास की बात करने वाले दल के सांसद जब सामाजिक विकास को कुचलने वाली बात करते हैं, तो असुरक्षा महसूस होती है। यह 'मिसरी लगी छुरी' जैसी सोच है जो भविष्य में सामाजिक पतन का कारण बनेगी।" उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वे ऐसी कुरीतियों के खिलाफ बिना डरे मुहिम छेड़ें ताकि शासन-प्रशासन तक कड़ा संदेश जाए।

आम बजट को अंबा प्रसाद ने बताया 'कॉरिडोर बजट', कहा- वित्त मंत्री की साड़ी के रंग से तय हो रही राज्यों की किस्मत

आम बजट को अंबा प्रसाद ने बताया 'कॉरिडोर बजट', कहा- वित्त मंत्री की साड़ी के रंग से तय हो रही राज्यों की किस्मत

रांची/हजारीबाग। कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने केंद्रीय बजट पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए इसे 'कॉरिडोर बजट' करार दिया है। उन्होंने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि वित्त मंत्री का यह वित्तीय दस्तावेज केवल कॉरिडोर्स की घोषणाओं तक सीमित है, जबकि इसमें देश के ज्वलंत मुद्दों जैसे बेरोजगारी और औद्योगिकीकरण के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है। अंबा प्रसाद ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर तंज कसते हुए कहा कि बजट आवंटन का पैमाना अब आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि वित्त मंत्री की 'साड़ी' बन गई है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि वित्त मंत्री जिस राज्य की वेशभूषा या साड़ी धारण कर सदन में आती हैं, बजट की झोली उसी प्रांत के लिए खुलती है, जबकि अन्य राज्यों के हिस्से केवल निराशा आती है।

​अंबा प्रसाद ने पूर्वी भारत की उपेक्षा पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे खनिज संपदा से परिपूर्ण राज्यों के लिए बजट में कुछ भी नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर भी सरकार को घेरा और कहा कि तीन नए एम्स खोलने का प्रस्ताव महज कागजी है, क्योंकि दिल्ली को छोड़कर देश के बाकी एम्स की स्थिति आज किसी साधारण जिला अस्पताल से बेहतर नहीं है। आर्थिक मोर्चे पर सरकार की विफलताओं को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत गिरकर 91 रुपये हो गई है, जो अर्थव्यवस्था की नाजुक स्थिति को बयां करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास बैंकिंग और औद्योगिक क्षेत्र में जान फूंकने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए कोई नीति नहीं है।

​पूर्व विधायक ने केंद्र सरकार पर संघीय ढांचे की धज्जियां उड़ाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बजट में झारखंड के जीएसटी रिफंड के तौर पर बकाये 1.5 लाख करोड़ रुपये की वापसी का कोई जिक्र न होना राज्य के साथ घोर अन्याय है। अंबा प्रसाद ने कहा कि कैग की वार्षिक रिपोर्ट और बजट के आंकड़ों में भारी विरोधाभास है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने आम आदमी को महंगाई से राहत देने के बजाय टैक्स चोरों के लिए सजा को जुर्माने में बदलकर उन्हें अभयदान दिया है। उनके अनुसार, यह बजट केवल भाजपा शासित राज्यों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

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