गैस किल्लत पर अंबा प्रसाद का बड़ा हमला: कहा- ईरान-इजरायल युद्ध के नाम पर देश में मची है लूट, छात्र छोड़ रहे हॉस्टल
नरेश सोनी विशेष संवाददाता।
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| "अम्बा प्रसाद " |
सरकार की 'दोहरी नीति' पर सवाल
फेसबुक लाइव के माध्यम से जनता से मुखातिब होते हुए अंबा प्रसाद ने केंद्र सरकार के दावों की पोल खोली। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार के पास पर्याप्त तेल और गैस का भंडार मौजूद है, तो देश के विभिन्न हिस्सों में गैस की इतनी भीषण किल्लत क्यों है? उन्होंने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' (Essential Commodities Act) लागू करने पर भी आपत्ति जताई। अंबा के अनुसार, यह अधिनियम कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए होता है, लेकिन गैस जैसे ईंधन की जमाखोरी करना आम आदमी के बस की बात नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार इस संकट की आड़ में अपनी विफलताओं को छिपा रही है?
हजारीबाग के छात्रों का पलायन: एक गंभीर संकट
अंबा प्रसाद ने अपनी रिपोर्ट में एक बेहद भावुक और चिंताजनक पहलू को उजागर किया। उन्होंने बताया कि संत कोलंबस महाविद्यालय, हजारीबाग के छात्रावासों में रहने वाले छात्र अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर घर लौटने को मजबूर हैं। गैस की ऊंची कीमतों और किल्लत के कारण छात्र लकड़ी चुनकर खाना बनाने को विवश थे। यह स्थिति केवल एक कॉलेज की नहीं, बल्कि पूरे शहर के लॉज और हॉस्टलों की है, जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा अब कतारों में लगने के बजाय घर वापसी कर रहे हैं।
महंगाई की चौतरफा मार
पूर्व विधायक ने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में जो तेल 35-40 रुपये प्रति लीटर था, वह आज भाजपा के 20 साल के राज में 100 रुपये के पार पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेल के परिवहन और आयात का पूरा ठेका अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को दे दिया गया है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।
व्यवसाय और आस्था पर संकट
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर न मिलने के कारण छोटे होटल, रेस्टोरेंट और लॉज बंद होने की कगार पर हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि बड़े मंदिरों में चलने वाले 'भंडारे' भी बंद हो सकते हैं। सीएनजी की कमी ने परिवहन लागत बढ़ा दी है, जिससे ऑटो और बसों का किराया तेजी से बढ़ा है, और इसका सीधा असर दैनिक मजदूरी करने वालों पर पड़ा है।
सुशासन या अराजकता?
अंबा प्रसाद ने भाजपा शासित राज्यों में मकानों को ध्वस्त करने (Bulldozer Action) की कार्रवाई पर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे 'सुशासन' के नाम पर 'अराजकता' बताया। उन्होंने प्रसिद्ध कहानी 'Frankenstein' का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि धर्म और जाति के नाम पर भड़काई जा रही नफरत की राजनीति का अंजाम बहुत बुरा होगा।

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