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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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गैस किल्लत पर अंबा प्रसाद का बड़ा हमला: कहा- ईरान-इजरायल युद्ध के नाम पर देश में मची है लूट, छात्र छोड़ रहे हॉस्टल

 गैस किल्लत पर अंबा प्रसाद का बड़ा हमला: कहा- ईरान-इजरायल युद्ध के नाम पर देश में मची है लूट, छात्र छोड़ रहे हॉस्टल

नरेश सोनी विशेष संवाददाता।

"अम्बा प्रसाद "
हजारीबाग/रांची: देश में गहराते गैस संकट और घरेलू ईंधन की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। इस ज्वलंत मुद्दे पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव और हजारीबाग की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सरकार की नीतियों को 'दोहरा' करार देते हुए कहा कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध की आग में भारत के आम आदमी के चूल्हे की आग बुझ गई है।

सरकार की 'दोहरी नीति' पर सवाल

फेसबुक लाइव के माध्यम से जनता से मुखातिब होते हुए अंबा प्रसाद ने केंद्र सरकार के दावों की पोल खोली। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार के पास पर्याप्त तेल और गैस का भंडार मौजूद है, तो देश के विभिन्न हिस्सों में गैस की इतनी भीषण किल्लत क्यों है? उन्होंने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' (Essential Commodities Act) लागू करने पर भी आपत्ति जताई। अंबा के अनुसार, यह अधिनियम कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए होता है, लेकिन गैस जैसे ईंधन की जमाखोरी करना आम आदमी के बस की बात नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार इस संकट की आड़ में अपनी विफलताओं को छिपा रही है?

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हजारीबाग के छात्रों का पलायन: एक गंभीर संकट

अंबा प्रसाद ने अपनी रिपोर्ट में एक बेहद भावुक और चिंताजनक पहलू को उजागर किया। उन्होंने बताया कि संत कोलंबस महाविद्यालय, हजारीबाग के छात्रावासों में रहने वाले छात्र अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर घर लौटने को मजबूर हैं। गैस की ऊंची कीमतों और किल्लत के कारण छात्र लकड़ी चुनकर खाना बनाने को विवश थे। यह स्थिति केवल एक कॉलेज की नहीं, बल्कि पूरे शहर के लॉज और हॉस्टलों की है, जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा अब कतारों में लगने के बजाय घर वापसी कर रहे हैं।

महंगाई की चौतरफा मार

पूर्व विधायक ने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में जो तेल 35-40 रुपये प्रति लीटर था, वह आज भाजपा के 20 साल के राज में 100 रुपये के पार पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेल के परिवहन और आयात का पूरा ठेका अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को दे दिया गया है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।

व्यवसाय और आस्था पर संकट

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर न मिलने के कारण छोटे होटल, रेस्टोरेंट और लॉज बंद होने की कगार पर हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि बड़े मंदिरों में चलने वाले 'भंडारे' भी बंद हो सकते हैं। सीएनजी की कमी ने परिवहन लागत बढ़ा दी है, जिससे ऑटो और बसों का किराया तेजी से बढ़ा है, और इसका सीधा असर दैनिक मजदूरी करने वालों पर पड़ा है।

सुशासन या अराजकता?

अंबा प्रसाद ने भाजपा शासित राज्यों में मकानों को ध्वस्त करने (Bulldozer Action) की कार्रवाई पर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे 'सुशासन' के नाम पर 'अराजकता' बताया। उन्होंने प्रसिद्ध कहानी 'Frankenstein' का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि धर्म और जाति के नाम पर भड़काई जा रही नफरत की राजनीति का अंजाम बहुत बुरा होगा।

ईरान-इजरायल युद्ध का भारत पर असर: अंबा प्रसाद ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठाए गंभीर सवाल, सर्वदलीय बैठक की मांग

ईरान-इजरायल युद्ध का भारत पर असर: अंबा प्रसाद ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठाए गंभीर सवाल, सर्वदलीय बैठक की मांग

नई दिल्ली/रांची: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध को पूरी मानवता के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने इस युद्ध के कारण भारत में कच्चे तेल के संकट और बेलगाम होती महंगाई को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।

ईरान-इजरायल युद्ध और बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर फेसबुक लाइव के जरिए देश की जनता को संबोधित करतीं कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद।

कच्चे तेल के संकट से बढ़ रही महंगाई

फेसबुक लाइव के माध्यम से आम जनमानस को संबोधित करते हुए अंबा प्रसाद ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल ईरान से आयात करता है। युद्ध की वर्तमान स्थिति के कारण कच्चे तेल का आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। रसोई गैस (LPG), सीएनजी (CNG) और रोजमर्रा की जरूरत की सभी वस्तुओं के दाम आसमान छूने के आसार बन गए हैं।

'विश्व गुरु' की विदेश नीति पर खड़े किए सवाल

ईरान द्वारा भारत को तेल न देने की कथित धमकी के मुद्दे पर अंबा प्रसाद ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, "हमारे देश के प्रधानमंत्री जो खुद को 'विश्व गुरु' समझते हैं, उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली है।"

अंबा प्रसाद ने पूछा कि प्रधानमंत्री लगातार विदेशी दौरे करते रहे हैं ताकि वैश्विक रिश्ते मजबूत हों, लेकिन संकट के इस समय में उनकी विदेश नीति क्या है, यह समझ से परे है। उन्होंने दावा किया कि देश में अब 40 दिनों से भी कम का तेल भंडार बचा है, फिर भी सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।

'संसद में चर्चा से भाग रही है सरकार'

वर्तमान लोकसभा सत्र का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस ज्वलंत मुद्दे पर चर्चा करने से बच रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लगातार बढ़ रही महंगाई और युद्ध के हालातों पर चर्चा की मांग की थी, लेकिन भाजपा ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

अंबा प्रसाद ने कहा, "देश के रक्षा मंत्री सिर्फ भाषणबाजी में व्यस्त हैं, जबकि शेयर मार्केट ध्वस्त हो रहे हैं और सोना-चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।"

सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

एक जिम्मेदार विपक्षी नेता के तौर पर अंबा प्रसाद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस युद्ध को हल्के में न लिया जाए। उन्होंने चालू लोकसभा सत्र में इस मुद्दे पर खुली चर्चा करने, सर्वदलीय बैठक बुलाने और एक स्पष्ट नीति निर्धारित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत आवश्यक सुरक्षा और आर्थिक कदम उठाने चाहिए ताकि देश की जनता को इस संकट से बचाया जा सके और विश्व शांति की दिशा में भारत अपनी सार्थक भूमिका निभा सके।

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