जीवन को उसके हर रंग के साथ स्वीकार करना सीखें: हर ख्वाहिश पूरी हो जाए, तो फिर ख्वाब किसलिए?
नरेश सोनी, प्रधान संपादक
हजारीबाग (न्यूज़ प्रहरी):
जीवन को समझने की सबसे बड़ी भूल अक्सर यही होती है कि हम अपनी खुशियों को उन चीजों से जोड़ देते हैं, जो अभी हमारे पास मौजूद नहीं हैं। मन में यह भ्रम बना रहता है कि कोई एक खास इच्छा पूरी हो जाए, कोई बड़ी मंजिल हासिल हो जाए या परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो जाएं, तभी जीवन सुखी होगा। जबकि जीवन का यथार्थ अनुभव यह सिखाता है कि सुख बाहरी परिस्थितियों से कम और हमारी आंतरिक दृष्टि से अधिक तय होता है।
Inspirational life quotes by MP media representative Ranjan Choudhary on positive living and contentmentअधूरे सपनों और संघर्षों में छिपा है सफर का सौंदर्य
सच्चाई यही है कि यदि सब कुछ मनमुताबिक ही मिल जाए, तो फिर किसी चीज की चाहत और आगे बढ़ने के सफर का अर्थ ही समाप्त हो जाएगा। कुछ अधूरे सपने, अनकही इच्छाएं, थोड़ा इंतजार और कुछ चुनौतियां ही तो जीवन को जीवंत बनाती हैं। खुशियां किसी आने वाले कल की मोहताज नहीं होतीं, बल्कि वे हमारे वर्तमान दृष्टिकोण से जन्म लेती हैं।
व्यवहार, विनम्रता और कर्म ही इंसान की असली पहचान
- ईमानदारी व वफादारी: जहां भी रहिए, पूरी निष्ठा और वफादारी के साथ रहिए।
- सद्भाव व सम्मान: बुजुर्गों का आदर, हमउम्रों के साथ आत्मीयता और छोटों के प्रति स्नेह बनाए रखिए।
- कर्म की शुचिता: अंततः व्यक्ति की पहचान पद, प्रतिष्ठा या धन-दौलत से नहीं, बल्कि उसके आचरण, विनम्रता और नेक कर्मों से होती है।
- पूर्ण समर्पण: जो भी कार्य जिम्मेदारी बनकर सामने आए, उसे बोझ न मानकर अवसर समझें और पूरे मन से निभाएं, क्योंकि आधे मन से किया काम कभी आत्मसंतोष नहीं दे सकता।
नकारात्मकता से मन की शुद्धि और संतोष का सच्चा अर्थ
तन की स्वच्छता जितनी आवश्यक है, उससे कहीं अधिक जरूरी है मन को ईर्ष्या, द्वेष और नकारात्मक विचारों से मुक्त रखना। सकारात्मक मन विपरीत परिस्थितियों में भी राह खोज निकालता है, जबकि नकारात्मकता सुविधाओं के बीच भी अशांति पैदा करती है। संतोष का अर्थ कर्म छोड़ना नहीं, बल्कि निरंतर श्रेष्ठ प्रयास करते हुए वर्तमान पलों के सुख को महसूस करना है।
कमियों के बीच मुस्कुराना ही जीवन की पूंजी
जीवन में हर दिन एक जैसा उत्सव नहीं होता। धूप-छांव, प्रशंसा-आलोचना और अनुकूलता-प्रतिकूलता के दौर आते रहते हैं। असली खुशी परिस्थितियों के अभाव में नहीं, बल्कि कमियों के बावजूद मन में संतोष, संघर्षों के बीच उम्मीद और चेहरे पर मुस्कान बनाए रखने में है। जो मिला उसे प्रेम से जीना, जो छूट गया उसे सहजता से स्वीकारना और आने वाले कल पर अटूट विश्वास रखना ही सार्थक जीवन का मूल मंत्र है।
(विचार: रंजन चौधरी, सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र)

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